सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास: किसान, जमींदार और राज्य - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 8, "किसान, जमींदार और राज्य: कृषि समाज और मुगल साम्राज्य" के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें 16वीं सदी के राज्य अधिकारियों के कार्यों, 'आइन-ए-अकबरी' के महत्व, रैयतों के प्रकार, और 'जिन्स-ए-कामिल' जैसी महत्वपूर्ण कृषि शब्दावली की व्याख्या की गई है। समाधान पंचायत के कार्यों, कृषि उत्पादन में महिलाओं की भूमिका, और भू-राजस्व निर्धारण की प्रक्रियाओं पर भी प्रकाश डालते हैं। ये समाधान छात्रों को मुगल साम्राज्य के कृषि समाज की गहरी समझ प्रदान करते हैं और परीक्षा की तैयारी में सहायक होते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectइतिहास
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter8. किसान, जमींदार और राज्य कृषि समाज और मुगल साम्राज्य

Chapter summary

यह अध्याय मुगल साम्राज्य के कृषि समाज पर केंद्रित है, जिसमें किसानों (रैयतों), जमींदारों और राज्य के बीच संबंधों का विश्लेषण किया गया है। इसमें 'आइन-ए-अकबरी' जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों की भूमिका, कृषि उत्पादन के तरीके, विभिन्न प्रकार की फसलें, और भू-राजस्व निर्धारण की प्रक्रिया को समझाया गया है। साथ ही, पंचायत के कार्यों और कृषि में महिलाओं के योगदान पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को उस काल की कृषि व्यवस्था और सामाजिक संरचना को समझने में मदद करते हैं।

Learning outcomes

  • 16वीं सदी के मुगल राज्य के अधिकारियों के विभिन्न कार्यों को समझना।
  • 'आइन-ए-अकबरी' के लेखक और उसके महत्व को पहचानना।
  • रैयतों के विभिन्न प्रकारों (खुद काश्त और पाहि काश्त) को स्पष्ट करना।
  • 'जिन्स-ए-कामिल' जैसी कृषि शब्दावली का अर्थ समझना।
  • ग्रामीण पंचायतों के कार्यों और शक्तियों का वर्णन करना।
  • कृषि उत्पादन में महिलाओं की बहुआयामी भूमिका का विश्लेषण करना।
  • भू-राजस्व निर्धारण की प्रक्रिया और उसके चरणों को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • मुगल साम्राज्य का कृषि समाज
  • किसान (रैयत)
  • जमींदार
  • राज्य की भूमिका
  • भू-राजस्व निर्धारण
  • 'आइन-ए-अकबरी'
  • अबुल फजल
  • फसलें (खरीफ, रबी, जिन्स-ए-कामिल)
  • पंचायत के कार्य
  • कृषि में महिलाओं की भूमिका
  • भूमि की पैमाइश
  • जमा और हासिल

Important topics

  • मुगल कृषि समाज की संरचना
  • भू-राजस्व निर्धारण की प्रक्रिया
  • 'आइन-ए-अकबरी' का महत्व
  • किसानों के प्रकार (खुद काश्त, पाहि काश्त)
  • कृषि उत्पादन में महिलाओं का योगदान
  • पंचायत की भूमिका और कार्य

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

16वीं सदी के राज्य अफसरों द्वारा किए जाने वाले विभिन्न कार्यों का वर्णन करें?
Solution: 16वीं सदी में मुगल साम्राज्य के राज्य अफसरों के कई महत्वपूर्ण कार्य थे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
  1. भू-राजस्व संग्रहण: किसानों से निर्धारित करों को वसूलना राज्य की आय का मुख्य स्रोत था, और अफसर इस प्रक्रिया की देखरेख करते थे।
  2. भूमि मापन और रिकॉर्ड रखना: कृषि योग्य भूमि का सर्वेक्षण और मापन करवाना, तथा भूमि के स्वामित्व और उपज से संबंधित विस्तृत रिकॉर्ड बनाए रखना भी उनका कार्य था।
  3. प्रशासनिक व्यवस्था: साम्राज्य के विभिन्न प्रशासनिक विभागों और प्रांतीय इकाइयों का प्रबंधन करना।
  4. न्याय व्यवस्था: स्थानीय स्तर पर न्याय प्रदान करना और व्यवस्था बनाए रखना।
  5. सैन्य संगठन: सैन्य टुकड़ियों का प्रबंधन और आवश्यकतानुसार अभियानों का आयोजन करना।
ये कार्य साम्राज्य के सुचारू संचालन और राजस्व सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक थे।

प्रश्न 2

'आइन-ए-अकबरी' के लेखक कौन थे?
Solution: 'आइन-ए-अकबरी' के लेखक अबुल फजल थे। वह मुगल सम्राट अकबर के दरबार के नौ रत्नों में से एक प्रमुख विद्वान और दरबारी इतिहासकार थे। उन्होंने अकबर के शासनकाल की विस्तृत जानकारी 'आइन-ए-अकबरी' और 'अकबरनामा' में संकलित की है, जो उस युग के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन को समझने के लिए एक अमूल्य स्रोत है।

प्रश्न 3

रैयत कौन थे, ये कितने प्रकार के थे?
Solution: 'रैयत' शब्द का प्रयोग उन किसानों के लिए किया जाता था जो भूमि पर खेती करते थे। मुगल काल में किसानों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया था:
  1. खुद काश्त: ये वे किसान थे जो उसी गाँव के निवासी थे जहाँ उनकी जमीन स्थित थी। वे अपनी पैतृक भूमि पर खेती करते थे और वहीं निवास करते थे।
  2. पाहि काश्त: ये वे खेतिहर मजदूर या किसान थे जो किसी दूसरे गाँव से आकर ठेके पर या किराए पर जमीन लेकर खेती करते थे। वे मौसमी या अल्पकालिक आधार पर खेती के लिए प्रवास करते थे।
यह वर्गीकरण उनकी भूमि पर स्वामित्व और निवास के आधार पर किया गया था।

प्रश्न 4

'आइन' के मुताबिक कितने प्रकार की फसल ऋतुएँ थी?
Solution: 'आइन-ए-अकबरी' के अनुसार, मुगल साम्राज्य में मुख्य रूप से दो प्रमुख कृषि ऋतुएँ थीं:
  1. खरीफ: यह वर्षा ऋतु की फसल होती थी, जिसमें चावल, ज्वार, बाजरा जैसी फसलें शामिल थीं। इसकी बुवाई मानसून के आगमन के साथ होती थी और कटाई शरद ऋतु में होती थी।
  2. रबी: यह शीत ऋतु की फसल होती थी, जिसमें गेहूँ, चना, जौ जैसी फसलें शामिल थीं। इसकी बुवाई शरद ऋतु में होती थी और कटाई वसंत ऋतु में होती थी।
इन दो मुख्य ऋतुओं के अलावा, कुछ क्षेत्रों में जायद (गर्मी) की फसलें भी उगाई जाती थीं, लेकिन खरीफ और रबी को प्रमुख माना जाता था।

प्रश्न 5

'जिन्स-ए-कामिल' से क्या अभिप्राय है?
Solution: 'जिन्स-ए-कामिल' एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ है 'उत्कृष्ट फसलें' या 'सर्वोत्तम फसलें'। यह उन फसलों को संदर्भित करता था जिनकी खेती उच्च आर्थिक लाभ के लिए की जाती थी और जिनकी बाजार में अच्छी मांग थी। मुगल काल में, कपास और गन्ना जैसी फसलें 'जिन्स-ए-कामिल' का प्रमुख उदाहरण थीं। इनके अलावा, तिलहन और कुछ नकदी फसलें भी इस श्रेणी में आती थीं, जो किसानों के लिए अधिक लाभदायक सिद्ध होती थीं।

प्रश्न 6

पंचायत के कार्यों का वर्णन कीजिए।
Solution: मुगल काल में ग्रामीण समुदाय में पंचायत एक महत्वपूर्ण संस्था थी, जिसके कई महत्वपूर्ण कार्य थे:
  1. सामुदायिक विकास: पंचायतें गाँव के सामूहिक विकास के लिए कार्य करती थीं, जैसे कि छोटे बांधों का निर्माण, नहरों की खुदाई, या तालाबों की मरम्मत।
  2. आपदा प्रबंधन: प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा या अकाल की स्थिति में राहत और पुनर्वास की व्यवस्था करना।
  3. नियम निर्माण: ग्रामीण समाज के सदस्यों के लिए नियम और कायदे बनाना तथा उनका पालन सुनिश्चित करना।
  4. सामाजिक व्यवस्था: जातिगत नियमों का पालन करवाना और समुदाय के भीतर व्यवस्था बनाए रखना।
  5. दंड का प्रावधान: नियमों का उल्लंघन करने वाले सदस्यों को दंडित करना, जिसमें जुर्माना लगाना या समुदाय से अस्थायी या स्थायी निष्कासित करना शामिल हो सकता था।
पंचायतें ग्रामीण जीवन के विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करती थीं और समुदाय के हितों की रक्षा करती थीं।

प्रश्न 7

'आइन-ए-अकबरी' का वर्णन कीजिए।
Solution: 'आइन-ए-अकबरी', जिसे अबुल फजल ने लिखा था, मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल का एक विस्तृत विवरण है। यह ग्रंथ कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
  1. साम्राज्य का अवलोकन: यह अकबर के विशाल साम्राज्य की संरचना, उसके विभिन्न प्रांतों (सूबों), और प्रशासनिक इकाइयों का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है।
  2. सैन्य संगठन: इसमें मुगल सेना की संरचना, घुड़सवारों, पैदल सैनिकों, तोपखाने और नौसेना के बारे में जानकारी दी गई है।
  3. सरकारी विभाग: यह शाही दरबार के विभिन्न विभागों, उनके कार्यों और अधिकारियों के बारे में विस्तार से बताता है।
  4. राजस्व प्रणाली: ग्रंथ में भू-राजस्व के स्रोतों, कर निर्धारण की विधियों और आय-व्यय के हिसाब-किताब का उल्लेख है।
  5. सामाजिक और आर्थिक जीवन: इसमें खेतिहर समाज, विभिन्न जातियों, रीति-रिवाजों, और उस समय के आर्थिक जीवन का भी वर्णन मिलता है।
'आइन-ए-अकबरी' मुगल काल के इतिहास, प्रशासन, अर्थव्यवस्था और समाज को समझने के लिए एक प्राथमिक स्रोत के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 8

कृषि उत्पादन में महिलाओं की भूमिका का विवरण कीजिए।
Solution: मुगल काल के कृषि उत्पादन में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुआयामी थी। वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेतों में काम करती थीं, जिसमें बुवाई, निराई (खरपतवार निकालना), और कटाई जैसे कार्य शामिल थे। इसके अतिरिक्त, वे पकी हुई फसलों से अनाज निकालने (दाने निकालने) का कार्य भी करती थीं। कृषि के अलावा, महिलाएँ विभिन्न दस्तकारी के कामों में भी सक्रिय थीं, जैसे:
  • सूत कातना, जो वस्त्र उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
  • बर्तन बनाने के लिए मिट्टी को साफ करना और गूँथना।
  • कपड़ों पर कढ़ाई करना और अन्य सिलाई-कढ़ाई के कार्य।
महिलाओं की भूमिका केवल उत्पादन तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि वे बच्चे पैदा करने और उनका पालन-पोषण करने जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों में भी संलग्न थीं। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में उन पर प्रतिबंध भी थे; उदाहरण के लिए, पश्चिमी भारत में महिलाओं को हल चलाने या कुम्हार के चाक को छूने की अनुमति नहीं थी, और बंगाल में उन्हें पान के बागानों में प्रवेश करने से रोका जाता था। इन प्रतिबंधों के बावजूद, कृषि और घरेलू अर्थव्यवस्था में उनका योगदान अनिवार्य था।

प्रश्न 9

भू-राजस्व कैसे निर्धारित किया जाता था?
Solution: मुगल साम्राज्य में भू-राजस्व का निर्धारण एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत किया जाता था, जिसकी देखरेख मुख्य रूप से 'दीवान' नामक अधिकारी करता था। भू-राजस्व निर्धारण के मुख्य बिंदु इस प्रकार थे:
  1. जमा और हासिल: भू-राजस्व के निर्धारण में दो महत्वपूर्ण शब्द थे - 'जमा' और 'हासिल'। 'जमा' वह निर्धारित या अनुमानित राशि थी जो किसी विशेष क्षेत्र या फसल से वसूल की जानी थी। 'हासिल' वह वास्तविक राशि थी जो वास्तव में किसानों से वसूल की गई थी। इन दोनों के बीच का अंतर साम्राज्य की वित्तीय स्थिति का सूचक होता था।
  2. भूमि मापन: राजस्व निर्धारण के लिए भूमि का मापन आवश्यक था। इसमें न केवल जुती हुई (खेती की जा रही) जमीन, बल्कि जोतने योग्य (परती या खाली पड़ी) जमीन का भी सर्वेक्षण किया जाता था ताकि भविष्य में उत्पादन बढ़ाया जा सके। भूमि की पैमाइश के लिए विभिन्न पैमानों का उपयोग किया जाता था।
  3. फसल की उपज: भूमि की गुणवत्ता और उस पर उगाई जाने वाली फसल के प्रकार के आधार पर भी राजस्व की दरें तय की जाती थीं। सर्वोत्तम फसलों ('जिन्स-ए-कामिल') पर अधिक राजस्व लगाया जा सकता था।
  4. ऐतिहासिक दरें और वर्तमान स्थिति: राजस्व निर्धारण में पिछले वर्षों की दरों और वर्तमान कृषि उत्पादन की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाता था।
यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती थी कि राज्य को पर्याप्त राजस्व मिले और किसानों पर अत्यधिक बोझ भी न पड़े, हालांकि व्यवहार में यह हमेशा संभव नहीं हो पाता था।

Common mistakes

  • कृषि शब्दावली जैसे 'जिन्स-ए-कामिल' का गलत अर्थ समझना।
  • पंचायत के कार्यों को केवल प्रशासनिक या न्यायिक तक सीमित मानना।
  • महिलाओं की भूमिका को केवल घरेलू कार्यों तक सीमित समझना, जबकि वे उत्पादन में भी सक्रिय थीं।
  • भू-राजस्व निर्धारण की प्रक्रिया के चरणों (जमा और हासिल) को भ्रमित करना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दी गई मुख्य शब्दावली को विशेष रूप से याद करें।
  • पंचायत के कार्यों और कृषि में महिलाओं की भूमिका से संबंधित बिंदुओं को सूचीबद्ध करें।
  • 'आइन-ए-अकबरी' के महत्व और उसमें वर्णित विभिन्न पहलुओं को समझें।
  • भू-राजस्व निर्धारण की प्रक्रिया को चरणों में विभाजित करके याद करें।

Practice MCQs

Q1. 16वीं सदी में राज्य के अधिकारियों का एक प्रमुख कार्य क्या था?

Q2. 'आइन-ए-अकबरी' के लेखक कौन थे?

Q3. खुद काश्त और पाहि काश्त से आप क्या समझते हैं?

Q4. 'जिन्स-ए-कामिल' का क्या अर्थ है?

Q5. ग्रामीण पंचायत का एक प्रमुख कार्य क्या था?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान सीबीएसई कक्षा 12 के इतिहास विषय के लिए हैं, जो विशेष रूप से "किसान, जमींदार और राज्य: कृषि समाज और मुगल साम्राज्य" अध्याय पर केंद्रित हैं।

इन समाधानों में किन मुख्य विषयों को कवर किया गया है?

इन समाधानों में मुगल साम्राज्य के कृषि समाज, किसानों के प्रकार, जमींदारों की भूमिका, भू-राजस्व निर्धारण की प्रक्रिया, 'आइन-ए-अकबरी' का महत्व, पंचायत के कार्य और कृषि में महिलाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।

'जिन्स-ए-कामिल' का क्या अर्थ है?

'जिन्स-ए-कामिल' का अर्थ है सर्वोत्तम या सबसे कीमती फसलें, जैसे कि कपास और गन्ना, जिनकी खेती किसानों द्वारा आर्थिक लाभ के लिए की जाती थी।

भू-राजस्व निर्धारण की प्रक्रिया के मुख्य चरण क्या थे?

भू-राजस्व निर्धारण के दो मुख्य चरण थे: 'जमा', जो निर्धारित की गई कुल राशि थी, और 'हासिल', जो वास्तव में वसूली गई राशि थी। इसमें जुती हुई और जोतने लायक दोनों तरह की जमीन की पैमाइश शामिल थी।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने में मदद मिलेगी।

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