कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: अध्याय 3 नियोजित विकास की राजनीति के NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की पुस्तक 'स्वतंत्र भारत में राजनीति - II' के अध्याय 3, 'नियोजित विकास की राजनीति' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें भारत की स्वतंत्रता के बाद अपनाई गई विकास की नीतियों, पंचवर्षीय योजनाओं के उद्देश्यों और कार्यान्वयन, बॉम्बे प्लान, हरित क्रांति के प्रभाव और नियोजन के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की गई है। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को स्पष्ट रूप से समझाया गया है, जिसमें विकास की प्राथमिकताओं, आर्थिक मॉडल और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं, जिससे वे नियोजन और विकास से संबंधित जटिल अवधारणाओं को आसानी से समझ सकें।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectस्वतंत्र भारत में राजनीति - II
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter3. नियोजित विकास की राजनीति

Chapter summary

अध्याय 3 'नियोजित विकास की राजनीति' कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है। यह समाधान भारत की स्वतंत्रता के बाद अपनाई गई आर्थिक विकास की रणनीतियों पर केंद्रित है। इसमें बॉम्बे प्लान, पंचवर्षीय योजनाओं (विशेषकर पहली और दूसरी), और हरित क्रांति के सकारात्मक व नकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण शामिल है। समाधान छात्रों को नियोजन की आवश्यकता, विभिन्न आर्थिक मॉडलों के बीच चयन, और विकास के सामाजिक न्याय के साथ संतुलन जैसे मुद्दों को समझने में मदद करते हैं।

Learning outcomes

  • विकास की प्रारंभिक भारतीय नीतियों को समझना।
  • पंचवर्षीय योजनाओं के उद्देश्यों और प्राथमिकताओं का विश्लेषण करना।
  • बॉम्बे प्लान के महत्व को पहचानना।
  • हरित क्रांति के कारणों, परिणामों और प्रभावों का मूल्यांकन करना।
  • आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन की जटिलताओं को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • नियोजित विकास की राजनीति
  • बॉम्बे प्लान
  • पंचवर्षीय योजनाएं
  • पहली पंचवर्षीय योजना
  • दूसरी पंचवर्षीय योजना
  • विकास की नीतियां
  • हरित क्रांति
  • कृषि रणनीति
  • खाद्य सुरक्षा
  • आर्थिक समृद्धि और सामाजिक न्याय
  • राज्य की भूमिका
  • उदारीकरण और वैश्वीकरण

Important topics

  • नियोजित विकास की आवश्यकता और उद्देश्य
  • पंचवर्षीय योजनाओं का तुलनात्मक अध्ययन (पहली और दूसरी)
  • हरित क्रांति: कारण, प्रभाव और परिणाम
  • विकास की नीतियों में राज्य और निजी क्षेत्र की भूमिका
  • आर्थिक विकास बनाम सामाजिक न्याय

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

'बॉम्बे प्लान' के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा बयान सही नहीं है?
  • (क) यह भारत के आर्थिक भविष्य का एक ब्लू-प्रिंट था।
  • (ख) इसमें उद्योगों के ऊपर राज्य के स्वामित्व का समर्थन किया गया था।
  • (ग) इसकी रचना कुछ अग्रणी उद्योगपतियों ने की थी।
  • (घ) इसमें नियोजन के विचार का पुरज़ोर समर्थन किया गया था।
Solution:

सही उत्तर विकल्प (ख) है। 'बॉम्बे प्लान' (1944) भारत के कुछ प्रमुख उद्योगपतियों द्वारा तैयार किया गया एक प्रस्ताव था, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता के बाद भारत के आर्थिक विकास के लिए एक खाका प्रस्तुत करना था। इसमें औद्योगीकरण और नियोजन के विचार का पुरजोर समर्थन किया गया था। हालाँकि, इसमें उद्योगों पर राज्य के स्वामित्व के बजाय निजी क्षेत्र की भूमिका पर अधिक जोर दिया गया था। इसलिए, यह कहना कि इसमें उद्योगों के ऊपर राज्य के स्वामित्व का समर्थन किया गया था, सही नहीं है।

प्रश्न 2

भारत ने शुरुआती दौर में विकास की जो नीति अपनाई उसमें निम्नलिखित में से कौन-सा विचार शामिल नहीं था?
  • (क) नियोजन
  • (ख) उदारीकरण
  • (ग) सहकारी खेती
  • (घ) आत्मनिर्भरता
Solution:

सही उत्तर विकल्प (ख) उदारीकरण है। स्वतंत्रता के बाद भारत ने विकास के लिए नियोजन, सहकारी खेती और आत्मनिर्भरता जैसी नीतियों को अपनाया था। उदारीकरण की नीति, जिसमें अर्थव्यवस्था को बाहरी प्रतिस्पर्धा के लिए खोलना शामिल है, भारत में मुख्य रूप से 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद अपनाई गई थी।

प्रश्न 3

भारत में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का विचार किस स्रोत से ग्रहण किया गया था?
  • (क) बॉम्बे प्लान से
  • (ख) सोवियत खेमे के देशों के अनुभवों से
  • (ग) समाज के बारे में गाँधीवादी विचार से
  • (घ) किसान संगठनों की माँगों से

विकल्प:

  • (i) सिर्फ ख और घ
  • (ii) सिर्फ़ क और ख
  • (iii) सिर्फ घ और ग
  • (iv) उपर्युक्त सभी
Solution:

सही उत्तर विकल्प (iv) उपर्युक्त सभी है। भारत में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का विचार विभिन्न स्रोतों से प्रभावित था। बॉम्बे प्लान ने आर्थिक नियोजन के लिए एक खाका प्रस्तुत किया। सोवियत संघ जैसे समाजवादी देशों के अनुभवों ने भी नियोजन की अवधारणा को प्रभावित किया। महात्मा गांधी के विचारों में भी समाज के कल्याण और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया था, जो नियोजन के लक्ष्यों से मेल खाते थे। इसके अतिरिक्त, किसान संगठनों की अपनी माँगें थीं जो भूमि सुधार और कृषि विकास से जुड़ी थीं, जिन्हें नियोजन प्रक्रिया में शामिल किया गया। इसलिए, ये सभी स्रोत भारत में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने के विचार के निर्माण में सहायक थे।

प्रश्न 4

निम्नलिखित का मेल करें:
  • (क) चरण सिंह
  • (ख) पी.सी. महालनोबिस
  • (ग) बिहार का अकाल
  • (घ) वर्गीज कुरियन

मिलान के लिए:

  • (i) किसान
  • (ii) औद्योगीकरण
  • (iii) खाद्य संकट
  • (iv) सहकारी डेयरी
Solution:

सही मिलान इस प्रकार है:

  • (क) चरण सिंह - (i) किसान: चरण सिंह किसानों के अधिकारों और कृषि विकास के प्रबल समर्थक थे।
  • (ख) पी.सी. महालनोबिस - (ii) औद्योगीकरण: पी.सी. महालनोबिस एक प्रमुख सांख्यिकीविद् थे जिन्होंने दूसरी पंचवर्षीय योजना के मॉडल को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें भारी उद्योगों के विकास पर जोर दिया गया था।
  • (ग) बिहार का अकाल - (iii) खाद्य संकट: 1960 के दशक के मध्य में बिहार में आए भयंकर अकाल ने देश में खाद्य सुरक्षा की गंभीर समस्या को उजागर किया।
  • (घ) वर्गीज कुरियन - (iv) सहकारी डेयरी: वर्गीज कुरियन को भारत के श्वेत क्रांति का जनक माना जाता है, जिन्होंने सहकारी डेयरी आंदोलन को बढ़ावा दिया।

प्रश्न 5

आज़ादी के समय विकास के सवाल पर प्रमुख मतभेद क्या थे? क्या इन मतभेदों को सुलझा लिया गया?
Solution:

आज़ादी के समय, विकास के प्रश्न पर प्रमुख मतभेद इस बात को लेकर थे कि देश के लिए विकास का सबसे उपयुक्त मॉडल क्या होना चाहिए। मुख्य मतभेद निम्नलिखित थे:

  1. विकास का लक्ष्य: क्या विकास का मुख्य लक्ष्य केवल आर्थिक समृद्धि प्राप्त करना होना चाहिए, या इसमें सामाजिक न्याय और समानता को भी शामिल किया जाना चाहिए? इस पर अलग-अलग विचार थे।
  2. सरकार की भूमिका: विकास प्रक्रिया में सरकार की क्या भूमिका होनी चाहिए? क्या सरकार को कुछ महत्वपूर्ण उद्योगों का स्वयं संचालन करना चाहिए, या अर्थव्यवस्था को निजी क्षेत्र पर छोड़ देना चाहिए? इस पर भी मतभेद थे।
  3. नियोजन की आवश्यकता: क्या पूरे देश के लिए एक केंद्रीय योजना बनाना आवश्यक है, या स्थानीय स्तर पर निर्णय लिए जाने चाहिए?
  4. आर्थिक समृद्धि बनाम सामाजिक न्याय: यदि आर्थिक समृद्धि और सामाजिक न्याय के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है, तो किसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए?

मतभेदों का समाधान:

इनमें से कुछ मतभेदों को आंशिक रूप से सुलझा लिया गया है, जबकि कुछ अभी भी बहस का विषय बने हुए हैं।

  1. सभी विचारधाराओं के नेता और राजनीतिक दल आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ सामाजिक न्याय की आवश्यकता को स्वीकार करते हैं।
  2. यह आम सहमति बनी कि देश के व्यापार, उद्योगों और कृषि को पूरी तरह से व्यापारियों, उद्योगपतियों और किसानों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार की एक महत्वपूर्ण भूमिका आवश्यक मानी गई।
  3. सरकार ने 1947 से 1990 के दशक की शुरुआत तक आर्थिक विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई, जिसमें नियोजन पर जोर दिया गया। हालाँकि, 1990 के दशक के बाद नई आर्थिक नीति अपनाई गई, जिसमें उदारीकरण और वैश्वीकरण को महत्व दिया गया। फिर भी, नियोजन की नीति को पूरी तरह से नहीं छोड़ा गया है, और रेलवे जैसे कई महत्वपूर्ण उद्योगों पर अभी भी सरकार का नियंत्रण है। धीरे-धीरे निजी और विदेशी निवेश को बढ़ाया जा रहा है।

कुछ प्रश्न, जैसे कि आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के बीच सटीक संतुलन कैसे बनाया जाए, आज भी प्रासंगिक हैं और उन पर निरंतर विचार-विमर्श जारी है।

प्रश्न 6

पहली पंचवर्षीय योजना का किस चीज पर सबसे ज्यादा जोर था? दूसरी पंचवर्षीय योजना पहली से किन अर्थों में अलग थी?
Solution:

पहली पंचवर्षीय योजना का जोर:

पहली पंचवर्षीय योजना (1 अप्रैल 1951 से 31 मार्च 1956) का मुख्य लक्ष्य गरीबी के चक्र को तोड़ना और देश को विकास के पथ पर अग्रसर करना था। इस योजना में सर्वाधिक जोर **कृषि क्षेत्र** पर दिया गया था। भूमि सुधारों को देश के विकास की नींव माना गया और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया गया। कई महत्वपूर्ण बाँध परियोजनाओं की शुरुआत भी इसी योजना के अंतर्गत हुई।

दूसरी पंचवर्षीय योजना का पहली से अंतर:

दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-1961) पहली योजना से कई महत्वपूर्ण अर्थों में भिन्न थी:

  1. औद्योगीकरण पर जोर: पहली योजना के कृषि-केंद्रित दृष्टिकोण के विपरीत, दूसरी योजना में **भारी उद्योगों के विकास** पर अत्यधिक जोर दिया गया। सरकार ने देसी उद्योगों को संरक्षण देने के लिए आयात पर भारी शुल्क लगाए, जिससे निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के उद्योगों को बढ़ावा मिला।
  2. विकास की गति: पहली योजना में विकास की गति को अपेक्षाकृत धीमा रखा गया था ताकि अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक दबाव न पड़े। वहीं, दूसरी योजना में **विकास की गति को तेज** करने का प्रयास किया गया और संरचनात्मक बदलावों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  3. निवेश का स्तर: पहली योजना के लिए कुल 2378 करोड़ रुपये के व्यय का प्रावधान था, जबकि दूसरी योजना के लिए यह राशि बढ़कर 4500 करोड़ रुपये हो गई, जो विकास के प्रति बढ़ी हुई महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
  4. राष्ट्रीयकरण: पहली योजना में राष्ट्रीयकरण की प्रक्रिया धीमी थी, लेकिन दूसरी पंचवर्षीय योजना में बिजली, रेलवे, इस्पात, संचार जैसे महत्वपूर्ण उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया गया, जिससे अर्थव्यवस्था में राज्य का नियंत्रण और भूमिका बढ़ी।

प्रश्न 7

हरित क्रांति क्या थी? हरित क्रांति के दो सकारात्मक और दो नकारात्मक परिणामों का उल्लेख करें।
Solution:

हरित क्रांति:

हरित क्रांति कृषि उत्पादन में वृद्धि लाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा अपनाई गई एक नई कृषि रणनीति थी। इस रणनीति के तहत, सरकार ने उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जहाँ सिंचाई की सुविधाएँ उपलब्ध थीं और जहाँ पहले से ही अच्छी उपज होती थी। इन क्षेत्रों में उन्नत बीजों, रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और आधुनिक कृषि उपकरणों (जैसे ट्रैक्टर) के उपयोग को बढ़ावा दिया गया। किसानों को रियायती दरों पर ऋण और बिजली उपलब्ध कराई गई। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करके और खाद्यान्नों की सरकारी खरीद बढ़ाकर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने का भी आश्वासन दिया। इन उपायों ने किसानों को अधिक उत्पादन के लिए प्रेरित किया, जिससे खाद्यान्नों की पैदावार में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। इसी को 'हरित क्रांति' कहा गया।

हरित क्रांति के सकारात्मक परिणाम:

  1. खाद्यान्न आत्मनिर्भरता: हरित क्रांति के कारण भारत खाद्यान्नों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया और आयात पर निर्भरता समाप्त हो गई। कुछ फसलों, विशेषकर गेहूं और चावल के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई, जिससे भारत निर्यात करने की स्थिति में भी आ गया।
  2. ग्रामीण समृद्धि: कृषि उत्पादन में वृद्धि से ग्रामीण क्षेत्रों में खुशहाली आई और किसानों की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिला।

हरित क्रांति के नकारात्मक परिणाम:

  1. क्षेत्रीय असमानता: हरित क्रांति का लाभ मुख्य रूप से उन क्षेत्रों को मिला जहाँ सिंचाई की सुविधाएँ उपलब्ध थीं, जैसे पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश। इससे देश के अन्य क्षेत्रों और इन क्षेत्रों के बीच कृषि उत्पादन और आर्थिक समृद्धि में असमानता बढ़ी।
  2. छोटे किसानों पर दबाव: यद्यपि रियायतें सभी किसानों को दी गईं, लेकिन उन्नत बीज, उर्वरक और मशीनरी खरीदने की क्षमता बड़े किसानों के पास अधिक थी। छोटे किसानों को इन तकनीकों को अपनाने में कठिनाई हुई और वे कर्ज के बोझ तले दब सकते थे, जिससे आर्थिक असमानता बढ़ी।

Common mistakes

  • बॉम्बे प्लान के मुख्य बिंदुओं को गलत समझना।
  • पहली और दूसरी पंचवर्षीय योजनाओं के बीच अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
  • हरित क्रांति के केवल सकारात्मक या केवल नकारात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना।
  • विकास की नीतियों में उदारीकरण की भूमिका को गलत समझना।

Revision tips

  • प्रत्येक पंचवर्षीय योजना के मुख्य फोकस को याद करें।
  • हरित क्रांति के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों परिणामों की सूची बनाएं।
  • विकास की नीतियों पर विभिन्न विचार-विमर्शों को समझें।
  • बॉम्बे प्लान और इसके प्रस्तावों को संक्षेप में लिखें।

Practice MCQs

Q1. 'बॉम्बे प्लान' के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?

Q2. भारत ने अपने शुरुआती दौर में विकास की जिस नीति को अपनाया, उसमें निम्नलिखित में से कौन-सा विचार शामिल नहीं था?

Q3. भारत में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का विचार किस स्रोत से ग्रहण किया गया था?

Q4. पहली पंचवर्षीय योजना का मुख्य जोर किस क्षेत्र पर था?

Q5. हरित क्रांति का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Frequently asked questions

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 3 'नियोजित विकास की राजनीति' में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में भारत की स्वतंत्रता के बाद अपनाई गई विकास की नीतियों, पंचवर्षीय योजनाओं (विशेषकर पहली और दूसरी), बॉम्बे प्लान, और हरित क्रांति के सकारात्मक व नकारात्मक प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।

बॉम्बे प्लान क्या था और इसका क्या महत्व था?

बॉम्बे प्लान 1944 में कुछ प्रमुख भारतीय उद्योगपतियों द्वारा तैयार किया गया एक प्रस्ताव था। इसमें भारत के आर्थिक भविष्य के लिए एक खाका प्रस्तुत किया गया था, जिसमें औद्योगीकरण और नियोजन पर जोर दिया गया था, हालांकि इसमें राज्य के स्वामित्व के बजाय निजी क्षेत्र की भूमिका पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया था।

पहली और दूसरी पंचवर्षीय योजनाओं में मुख्य अंतर क्या थे?

पहली पंचवर्षीय योजना (1951-56) का मुख्य जोर कृषि, भूमि सुधार और सिंचाई पर था, जबकि दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61) में भारी उद्योगों के विकास, औद्योगीकरण और राष्ट्रीयकरण पर अधिक बल दिया गया। दूसरी योजना में व्यय की राशि भी पहली से काफी अधिक थी।

हरित क्रांति के सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम क्या थे?

सकारात्मक परिणामों में खाद्यान्नों के उत्पादन में वृद्धि, देश की खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता, ग्रामीण आय में वृद्धि शामिल हैं। नकारात्मक परिणामों में क्षेत्रीय असमानताओं में वृद्धि, छोटे किसानों पर दबाव और पर्यावरण संबंधी चिंताएं शामिल हो सकती हैं।

क्या भारत ने आज भी नियोजन की नीति का पालन किया है?

हाँ, भारत ने नियोजन की नीति को पूरी तरह से नहीं छोड़ा है, हालांकि 1991 के बाद उदारीकरण और वैश्वीकरण को अपनाया गया है। अभी भी कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सरकार की भूमिका है और योजना आयोग (अब नीति आयोग) जैसी संस्थाएं विकास की रणनीतियों पर काम कर रही हैं।

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