कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: कांग्रेस प्रणाली - चुनौतियां और पुनर्स्थापना NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 के छात्रों के लिए स्वतंत्र भारत में राजनीति (भाग II) के अध्याय 5, 'कांग्रेस प्रणाली - चुनौतियां और पुनर्स्थापना' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें 1967 और 1971 के चुनावों के परिणामों, कांग्रेस पार्टी के भीतर सिंडिकेट की भूमिका, दल-बदल, गैर-कांग्रेसवाद जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों में इंदिरा गांधी की सरकार की लोकप्रियता के कारणों, जैसे कि 20 सूत्री कार्यक्रम, बैंकों का राष्ट्रीयकरण और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है। यह खंड छात्रों को राजनीतिक दलों के आंतरिक कामकाज, चुनावी रणनीतियों और राष्ट्रीय राजनीति के विकास को समझने में मदद करता है, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | स्वतंत्र भारत में राजनीति - II |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 5. कांग्रेस प्रणाली - चुनौतियां और पुनर्स्थापना |
Chapter summary
यह अध्याय 5, 'कांग्रेस प्रणाली - चुनौतियां और पुनर्स्थापना', कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें 1967 के चुनावों के बाद कांग्रेस की स्थिति, सिंडिकेट की भूमिका, दल-बदल और गैर-कांग्रेसवाद जैसी प्रमुख राजनीतिक घटनाओं और अवधारणाओं का विश्लेषण किया गया है। समाधान 1971 के चुनावों, इंदिरा गांधी की सरकार की लोकप्रियता के कारणों और राजनीतिक दलों के आंतरिक लोकतंत्र से संबंधित प्रश्नों पर विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं।
Learning outcomes
- 1967 और 1971 के चुनावों के परिणामों और उनके महत्व को समझना।
- कांग्रेस प्रणाली में सिंडिकेट, दल-बदल और गैर-कांग्रेसवाद जैसी अवधारणाओं का विश्लेषण करना।
- इंदिरा गांधी की सरकार की लोकप्रियता के कारणों और उनकी नीतियों का मूल्यांकन करना।
- राजनीतिक दलों के आंतरिक कामकाज और लोकतंत्र की चुनौतियों को समझना।
- चुनावों में क्षेत्रीय, जातीय और सांप्रदायिक समूहों की भूमिका का अध्ययन करना।
Topics covered
Paper topics
- 1967 के चुनाव और कांग्रेस की हार
- सिंडिकेट की भूमिका
- दल-बदल
- गैर-कांग्रेसवाद
- नारे और उनका महत्व
- 1971 के चुनाव और ग्रैंड अलायंस
- राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र
- इंदिरा गांधी की सरकार की लोकप्रियता
- 20 सूत्री कार्यक्रम
- बैंकों का राष्ट्रीयकरण
- प्रिवीपर्स की समाप्ति
- 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध
Important topics
- 1967 के चुनाव और कांग्रेस की हार के कारण
- सिंडिकेट और कांग्रेस पार्टी में इसकी भूमिका
- गैर-कांग्रेसवाद की अवधारणा
- इंदिरा गांधी की सरकार की लोकप्रियता के कारण
- 1971 के चुनाव और ग्रैंड अलायंस
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- (क) कांग्रेस लोकसभा के चुनाव में विजयी रही, लेकिन कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव वह हार गई।
- (ख) कांग्रेस लोकसभा के चुनाव भी हारी और विधानसभा के भी।
- (ग) कांग्रेस को लोकसभा में बहुमत नहीं मिला, लेकिन उसने दूसरी पार्टियों के समर्थन से एक गठबंधन सरकार बनाई।
- (घ) कांग्रेस केंद्र में सत्तासीन रही और उसका बहुमत भी बढ़ा।
1967 के चुनावों के संबंध में सही कथन (ग) है। यद्यपि कांग्रेस लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और सरकार बनाने में सफल रही, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं हुआ। इसके विपरीत, कई राज्यों में कांग्रेस को विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा, जिससे केंद्र और राज्यों में उसकी राजनीतिक शक्ति कमजोर हुई। इस स्थिति ने गठबंधन सरकारों के युग की शुरुआत को चिह्नित किया।
प्रश्न 2
- (क) सिंडिकेट
- (ख) दल-बदल
- (ग) नारा
- (घ) गैर-कांग्रेसवाद
और उनके अर्थ:
- कोई निर्वाचित जन-प्रतिनिधि जिस पार्टी के टिकट से जीता हो, उस पार्टी को छोड़कर अगर दूसरे दल में चला जाए।
- लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाला एक मनभावन मुहावरा।
- कांग्रेस और इसकी नीतियों के खिलाफ अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टियों का एकजुट होना।
- कांग्रेस के भीतर ताकतवर और प्रभावशाली नेताओं का एक समूह।
निम्नलिखित का सही मेल इस प्रकार है:
- (क) सिंडिकेट - (iv) कांग्रेस के भीतर ताकतवर और प्रभावशाली नेताओं का एक समूह।
- (ख) दल-बदल - (i) कोई निर्वाचित जन-प्रतिनिधि जिस पार्टी के टिकट से जीता हो, उस पार्टी को छोड़कर अगर दूसरे दल में चला जाए।
- (ग) नारा - (ii) लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाला एक मनभावन मुहावरा।
- (घ) गैर-कांग्रेसवाद - (iii) कांग्रेस और इसकी नीतियों के खिलाफ अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टियों का एकजुट होना।
स्पष्टीकरण:
- सिंडिकेट: यह कांग्रेस पार्टी के भीतर वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं का एक अनौपचारिक समूह था, जो पार्टी के निर्णयों पर महत्वपूर्ण प्रभाव रखता था।
- दल-बदल: इसका अर्थ है किसी निर्वाचित प्रतिनिधि का अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हो जाना, जिससे अक्सर राजनीतिक अस्थिरता पैदा होती है।
- नारा: यह एक संक्षिप्त और आकर्षक वाक्य होता है जिसका उपयोग राजनीतिक दल अपने संदेश को फैलाने और जनता का ध्यान आकर्षित करने के लिए करते हैं।
- गैर-कांग्रेसवाद: यह एक राजनीतिक रणनीति थी जिसमें विभिन्न गैर-कांग्रेसी दलों ने कांग्रेस के प्रभुत्व को समाप्त करने के उद्देश्य से एकजुट होकर चुनाव लड़ने का प्रयास किया।
प्रश्न 3
- (क) जय जवान, जय किसान
- (ख) इंदिरा हटाओ!
- (ग) गरीबी हटाओ!
इन नारों का संबंध निम्नलिखित नेताओं या समूहों से है:
- (क) जय जवान, जय किसान: यह नारा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से जुड़ा है, जिन्होंने इस नारे के माध्यम से सैनिकों और किसानों के महत्व पर जोर दिया था।
- (ख) इंदिरा हटाओ!: यह नारा 1971 के आम चुनावों के दौरान कांग्रेस विरोधी दलों द्वारा इंदिरा गांधी के नेतृत्व को चुनौती देने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
- (ग) गरीबी हटाओ!: यह नारा 1971 के आम चुनावों में इंदिरा गांधी द्वारा प्रस्तुत किया गया था और यह उनकी सरकार की प्रमुख चुनावी रणनीति का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताना था।
प्रश्न 4
- (क) इसका गठन गैर-कम्युनिस्ट और गैर-कांग्रेसी दलों ने किया था।
- (ख) इसके पास एक स्पष्ट राजनीतिक तथा विचारधारात्मक कार्यक्रम था।
- (ग) इसका गठन सभी गैर-कांग्रेसी दलों ने एकजुट होकर किया था।
1971 के 'ग्रैंड अलायंस' के बारे में सही कथन (क) है। इस गठबंधन का गठन मुख्य रूप से गैर-कम्युनिस्ट और गैर-कांग्रेसी दलों द्वारा किया गया था, जिनका उद्देश्य इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को चुनौती देना था। हालांकि, इस गठबंधन में विभिन्न विचारधाराओं के दल शामिल थे, जिसके कारण इसका एक स्पष्ट और एकीकृत राजनीतिक या विचारधारात्मक कार्यक्रम विकसित नहीं हो पाया, और न ही इसमें सभी गैर-कांग्रेसी दल शामिल थे।
प्रश्न 5
- (क) पार्टी के अध्यक्ष द्वारा बताए गए मार्ग पर चलना।
- (ख) पार्टी के भीतर बहुमत की राय पर अमल करना।
- (ग) हरेक मामले पर गुप्त मतदान कराना।
- (घ) पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं से सलाह करना।
किसी राजनीतिक दल के आंतरिक मतभेदों के समाधान के विभिन्न तरीकों के फायदे और नुकसान इस प्रकार हैं:
- (क) पार्टी के अध्यक्ष द्वारा बताए गए मार्ग पर चलना:
- फायदा: इससे पार्टी में अनुशासन बना रहता है और निर्णय प्रक्रिया तेज होती है। अध्यक्ष के नेतृत्व में पार्टी एक दिशा में आगे बढ़ सकती है।
- घाटा: यह पार्टी के भीतर तानाशाही को बढ़ावा दे सकता है, जहाँ अध्यक्ष या वरिष्ठ नेताओं की इच्छा ही अंतिम मानी जाती है। इससे आंतरिक लोकतंत्र कमजोर होता है और अन्य सदस्यों की आवाज दब सकती है।
- (ख) पार्टी के भीतर बहुमत की राय पर अमल करना:
- फायदा: यह तरीका पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को बढ़ावा देता है। अधिकांश सदस्यों की राय को महत्व मिलने से कार्यकर्ताओं में प्रसन्नता और जुड़ाव बढ़ता है।
- घाटा: इससे पार्टी में गुटबाजी को बढ़ावा मिल सकता है, जहाँ बहुमत और अल्पसंख्यक खेमे स्पष्ट रूप से सामने आ सकते हैं। बार-बार बहुमत के आधार पर निर्णय लेने से अल्पसंख्यकों की आवाज अनसुनी हो सकती है।
- (ग) हरेक मामले पर गुप्त मतदान कराना:
- फायदा: गुप्त मतदान एक लोकतांत्रिक और निष्पक्ष प्रक्रिया है, जो सदस्यों को बिना किसी दबाव के अपनी राय व्यक्त करने की स्वतंत्रता देती है।
- घाटा: हालांकि यह लोकतांत्रिक है, लेकिन पार्टी के व्हिप (निर्देश) के बावजूद परिणाम हमेशा पार्टी की अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो सकते हैं। इससे पार्टी के अनुशासन में कमी आ सकती है।
- (घ) पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं से सलाह करना:
- फायदा: युवा और कम अनुभवी नेताओं को वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और मार्गदर्शन का लाभ मिलता है, जिससे वे बेहतर निर्णय ले पाते हैं।
- घाटा: यदि केवल वरिष्ठ नेताओं की सलाह को ही महत्व दिया जाता है, तो इससे पार्टी में उनकी मनमानी चल सकती है और नई पीढ़ी के विचारों को दबाया जा सकता है।
प्रश्न 6
- (क) कांग्रेस पार्टी में करिश्माई नेता का अभाव।
- (ख) कांग्रेस पार्टी के भीतर टूट।
- (ग) क्षेत्रीय, जातीय और सांप्रदायिक समूहों की लामबंदी को बढ़ाना।
- (घ) गैर-कांग्रेसी दलों के बीच एकजुटता।
- (ङ) कांग्रेस पार्टी के अंदर मतभेद।
1967 के चुनावों में कांग्रेस की हार के कई कारण थे, जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं:
- (क) कांग्रेस पार्टी में करिश्माई नेता का अभाव: यह कांग्रेस की हार का मुख्य कारण नहीं माना जा सकता। उस समय भी कांग्रेस में जवाहरलाल नेहरू के बाद इंदिरा गांधी जैसी नेता के साथ-साथ कई वरिष्ठ और अनुभवी नेता मौजूद थे। हालांकि, नेहरू जैसे करिश्माई नेता की कमी महसूस की गई होगी।
- (ख) कांग्रेस पार्टी के भीतर टूट: यह कांग्रेस की हार का एक महत्वपूर्ण कारण था। पार्टी दो गुटों में बंट रही थी - एक तरफ सिंडिकेट का संगठनात्मक नियंत्रण था, तो दूसरी तरफ इंदिरा गांधी के समर्थक थे। इन गुटों के बीच वैचारिक और व्यक्तिगत मतभेद बढ़ते जा रहे थे।
- (ग) क्षेत्रीय, जातीय और सांप्रदायिक समूहों की लामबंदी को बढ़ाना: 1967 के चुनावों में विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दलों (जैसे पंजाब में अकाली दल, तमिलनाडु में डीएमके) के उदय ने क्षेत्रीय, जातीय और सांप्रदायिक आधार पर लामबंदी को बढ़ावा दिया। इसने कांग्रेस को भारी झटका दिया और कई राज्यों में उसे सत्ता गंवानी पड़ी।
- (घ) गैर-कांग्रेसी दलों के बीच एकजुटता: हालांकि गैर-कांग्रेसी दलों के बीच पूर्ण एकजुटता नहीं थी, लेकिन जिन क्षेत्रों में उन्होंने मिलकर चुनाव लड़ा, वहां उन्हें सफलता मिली। इसने कांग्रेस के वोट बैंक को विभाजित करने में मदद की।
- (ङ) कांग्रेस पार्टी के अंदर मतभेद: पार्टी के भीतर चल रहे मतभेद और गुटबाजी ने कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाया और मतदाताओं का विश्वास कम किया। ये मतभेद अंततः पार्टी के विभाजन का कारण बने।
निष्कर्ष: उपरोक्त सभी कारक, विशेष रूप से (ख), (ग), (घ), और (ङ), 1967 के चुनावों में कांग्रेस की हार के लिए जिम्मेदार थे। (क) को एक प्रमुख कारण नहीं माना जा सकता, हालांकि करिश्माई नेतृत्व की कमी ने भूमिका निभाई हो सकती है।
प्रश्न 7
1970 के दशक में इंदिरा गांधी की सरकार कई कारणों से अत्यधिक लोकप्रिय हुई थी:
- साहसिक और प्रगतिशील नीतियां: इंदिरा गांधी सरकार ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण (1969), प्रिवीपर्स की समाप्ति (1971), और कोयला खदानों के राष्ट्रीयकरण जैसे साहसिक कदम उठाए। इन नीतियों का उद्देश्य सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता को बढ़ावा देना था।
- 'गरीबी हटाओ' का नारा: 1971 के आम चुनावों में 'गरीबी हटाओ' का नारा एक शक्तिशाली चुनावी हथियार साबित हुआ। इस नारे ने लाखों गरीबों और वंचितों को आकर्षित किया, जिन्होंने इंदिरा गांधी को गरीबी उन्मूलन के प्रतीक के रूप में देखा।
- 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध: 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की निर्णायक जीत, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ, ने इंदिरा गांधी की छवि को एक मजबूत और सक्षम नेता के रूप में स्थापित किया। इस जीत ने राष्ट्रीय गौरव को बढ़ाया और उनकी लोकप्रियता को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाया।
- महिला मतदाताओं में लोकप्रियता: देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री होने के नाते, इंदिरा गांधी ने महिला मतदाताओं के बीच विशेष अपील की।
- 20 सूत्री कार्यक्रम: 1975 में घोषित 20 सूत्री कार्यक्रम ने आर्थिक विकास और सामाजिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे सरकार की लोकप्रियता को और बल मिला।
इन सभी कारकों ने मिलकर इंदिरा गांधी और उनकी सरकार को 1970 के दशक में भारतीय राजनीति में एक अत्यंत लोकप्रिय शक्ति बना दिया।
प्रश्न 8
1960 के दशक में कांग्रेस पार्टी के संदर्भ में, 'सिंडिकेट' कांग्रेस के भीतर प्रभावशाली और शक्तिशाली नेताओं के एक अनौपचारिक समूह को संदर्भित करता था। ये नेता विभिन्न राज्यों के प्रमुख कांग्रेसी थे और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर उनका गहरा नियंत्रण था। सिंडिकेट के प्रमुख सदस्यों में के. कामराज (मद्रास), एस.के. पाटिल (बम्बई), एस. निजलिंगप्पा (मैसूर), अतुल्य घोष (पश्चिम बंगाल), और के.एन. संजीवा रेड्डी (आंध्र प्रदेश) शामिल थे।
सिंडिकेट की भूमिका:
- निर्णय प्रक्रिया पर नियंत्रण: सिंडिकेट कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नीतिगत निर्णयों और संगठनात्मक नियुक्तियों को नियंत्रित करता था। वे पार्टी के भीतर 'किंगमेकर' की भूमिका निभाते थे, यानी वे तय करते थे कि कौन प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बनेगा।
- नेतृत्व का चुनाव: लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान सिंडिकेट की भूमिका महत्वपूर्ण थी। उन्होंने शास्त्री के उत्तराधिकारी के रूप में इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
- आंतरिक शक्ति संतुलन: सिंडिकेट ने पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया, लेकिन धीरे-धीरे उनका प्रभाव इंदिरा गांधी के बढ़ते कद के कारण कम होने लगा।
- संघर्ष और विभाजन: अंततः, सिंडिकेट और इंदिरा गांधी के बीच सत्ता और नीतियों को लेकर मतभेद बढ़े, जो 1969 में कांग्रेस के विभाजन का एक प्रमुख कारण बने। सिंडिकेट ने इंदिरा गांधी के प्रगतिशील और समाजवादी नीतियों का विरोध किया, जबकि इंदिरा गांधी ने सिंडिकेट के पुराने नेतृत्व को चुनौती दी।
संक्षेप में, सिंडिकेट 1960 के दशक में कांग्रेस पार्टी की संगठनात्मक शक्ति का केंद्र था, जिसने पार्टी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन अंततः यह आंतरिक संघर्ष का कारण भी बना।
Common mistakes
- चुनाव परिणामों के कारणों को ठीक से न समझना।
- राजनीतिक शब्दावली (जैसे सिंडिकेट, दल-बदल) के अर्थ में भ्रमित होना।
- इंदिरा गांधी की नीतियों और उनकी लोकप्रियता के बीच संबंध को स्पष्ट न कर पाना।
- कांग्रेस पार्टी के आंतरिक मतभेदों के प्रभाव को कम आंकना।
Revision tips
- 1967 और 1971 के चुनावों के मुख्य परिणामों को सारणीबद्ध करें।
- सिंडिकेट, दल-बदल और गैर-कांग्रेसवाद जैसी प्रमुख अवधारणाओं की परिभाषाएँ याद करें।
- इंदिरा गांधी की सरकार की प्रमुख नीतियों और उपलब्धियों की सूची बनाएं।
- विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करें।
Practice MCQs
Q1. 1967 के चुनावों के संबंध में कौन सा कथन सही है?
Explanation: 1967 के चुनावों में कांग्रेस को लोकसभा में बहुमत तो मिला, लेकिन उसका बहुमत काफी कम हो गया और कई राज्यों में उसे हार का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उसे गठबंधन सरकार बनानी पड़ी।
Q2. कांग्रेस के भीतर ताकतवर और प्रभावशाली नेताओं के समूह को क्या कहा जाता था?
Explanation: 1960 के दशक में कांग्रेस पार्टी के भीतर प्रभावशाली नेताओं के एक अनौपचारिक समूह को 'सिंडिकेट' के नाम से जाना जाता था, जो पार्टी के निर्णयों पर महत्वपूर्ण प्रभाव रखता था।
Q3. 'गरीबी हटाओ!' का नारा किस नेता से जुड़ा है?
Explanation: 'गरीबी हटाओ!' का नारा 1971 के आम चुनावों में इंदिरा गांधी द्वारा प्रस्तुत किया गया था और यह उनकी चुनावी सफलता का एक प्रमुख कारण बना।
Q4. 1971 के 'ग्रैंड अलायंस' के गठन के बारे में कौन-सा कथन सही है?
Explanation: 1971 के 'ग्रैंड अलायंस' का गठन मुख्य रूप से गैर-कम्युनिस्ट और गैर-कांग्रेसी दलों द्वारा इंदिरा गांधी के विरोध में किया गया था।
Q5. किसी राजनीतिक दल में आंतरिक लोकतंत्र को कमजोर करने वाला समाधान कौन सा हो सकता है?
Explanation: यदि पार्टी का अध्यक्ष ही अंतिम निर्णय लेता है और सभी को उसी का अनुसरण करना होता है, तो इससे पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र कमजोर होता है और तानाशाही बढ़ सकती है।
Frequently asked questions
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 5 का मुख्य विषय क्या है?
अध्याय 5, 'कांग्रेस प्रणाली - चुनौतियां और पुनर्स्थापना', 1960 और 1970 के दशक में भारतीय राजनीति पर केंद्रित है, जिसमें 1967 और 1971 के चुनावों, कांग्रेस पार्टी के भीतर की राजनीति, सिंडिकेट की भूमिका, और इंदिरा गांधी के नेतृत्व के उदय का विश्लेषण किया गया है।
1967 के चुनावों में कांग्रेस की हार के क्या कारण थे?
1967 के चुनावों में कांग्रेस की हार के कई कारण थे, जिनमें पार्टी के भीतर विभाजन, क्षेत्रीय दलों का उदय, गैर-कांग्रेसी दलों की एकजुटता का प्रयास और इंदिरा गांधी के नेतृत्व को चुनौती मिलना शामिल था।
राजनीति में 'सिंडिकेट' का क्या अर्थ है?
कांग्रेस पार्टी के संदर्भ में, 'सिंडिकेट' 1960 के दशक में पार्टी के भीतर प्रभावशाली नेताओं का एक अनौपचारिक समूह था, जो पार्टी के निर्णयों पर महत्वपूर्ण नियंत्रण रखता था।
इंदिरा गांधी की सरकार 1970 के दशक में लोकप्रिय क्यों हुई?
इंदिरा गांधी की सरकार बैंकों के राष्ट्रीयकरण, प्रिवीपर्स की समाप्ति, 20 सूत्री कार्यक्रम की घोषणा और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में जीत जैसे साहसिक कदमों के कारण लोकप्रिय हुई।
ये NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?
ये समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट करने, महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर समझने और परीक्षा की तैयारी के लिए एक संरचित दृष्टिकोण प्रदान करने में मदद करते हैं।
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