कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: अध्याय 6 - लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट NCERT समाधान
यह खंड कक्षा 12 के छात्रों के लिए 'स्वतंत्र भारत में राजनीति - II' पुस्तक के अध्याय 6, 'लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें 1975 के आपातकाल से संबंधित महत्वपूर्ण घटनाओं, जैसे कि इसकी घोषणा के कारण, मौलिक अधिकारों पर इसका प्रभाव, और विभिन्न राजनीतिक आंदोलनों और न्यायिक निर्णयों की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण शामिल है। समाधानों में आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार द्वारा शाह आयोग की नियुक्ति और उसके निष्कर्षों पर भी प्रकाश डाला गया है। यह सामग्री छात्रों को उस जटिल दौर की गहरी समझ प्रदान करती है, जिसमें राजनीतिक उथल-पुथल, नागरिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध और न्यायपालिका तथा सरकार के बीच तनाव शामिल था। ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए एक मूल्यवान संसाधन हैं, जो छात्रों को मुख्य अवधारणाओं और ऐतिहासिक संदर्भों को स्पष्ट करने में मदद करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | स्वतंत्र भारत में राजनीति - II |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 6. लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट |
Chapter summary
अध्याय 6, 'लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट' के ये NCERT समाधान 1975 के राष्ट्रीय आपातकाल के कारणों, प्रभावों और संबंधित घटनाओं का गहन विश्लेषण प्रदान करते हैं। इसमें छात्र आंदोलनों, रेल हड़ताल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले और न्यायपालिका-सरकार के टकराव जैसे प्रमुख मुद्दों को शामिल किया गया है। समाधानों में शाह आयोग की नियुक्ति और उसके निष्कर्षों पर भी चर्चा की गई है, जो आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों की जांच के लिए गठित किया गया था। यह खंड छात्रों को उस अवधि की राजनीतिक जटिलताओं को समझने में मदद करता है।
Learning outcomes
- आपातकाल की घोषणा के कारणों और सरकारी तर्कों को समझना।
- आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों पर पड़े प्रभाव का विश्लेषण करना।
- 1974-75 के प्रमुख आंदोलनों (जैसे छात्र आंदोलन, रेल हड़ताल) और उनके महत्व को पहचानना।
- न्यायपालिका और सरकार के बीच टकराव के मुद्दों को समझना।
- शाह आयोग की नियुक्ति के उद्देश्य और उसके निष्कर्षों का वर्णन करना।
- आपातकाल से संबंधित विभिन्न कथनों की सत्यता का मूल्यांकन करना।
Topics covered
Paper topics
- आपातकाल की घोषणा
- आपातकाल के कारण
- मौलिक अधिकारों पर प्रभाव
- छात्र आंदोलन (1974)
- बिहार आंदोलन
- जयप्रकाश नारायण और संपूर्ण क्रांति
- रेल हड़ताल (1974)
- सरकार और न्यायपालिका के बीच संघर्ष
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला
- शाह आयोग की नियुक्ति और निष्कर्ष
- जनता पार्टी की सरकार
- 1980 के मध्यावधि चुनाव
Important topics
- आपातकाल की घोषणा के कारण
- आपातकाल का मौलिक अधिकारों पर प्रभाव
- संपूर्ण क्रांति का आह्वान
- सरकार और न्यायपालिका के बीच टकराव
- शाह आयोग की रिपोर्ट
- आपातकाल से संबंधित प्रमुख घटनाएँ
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- (क) आपातकाल की घोषणा 1975 में इंदिरा गाँधी ने की।
- (ख) आपातकाल में सभी मौलिक अधिकार निष्क्रिय हो गए।
- (ग) बिगड़ती हुई आर्थिक स्थिति के मद्देनज़र आपातकाल की घोषणा की गई थी।
- (घ) आपातकाल के दौरान विपक्ष के अनेक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
- (ङ) सी.पी.आई. ने आपातकाल की घोषणा का समर्थन किया।
आपातकाल से संबंधित दिए गए कथनों का मूल्यांकन इस प्रकार है:
- (क) आपातकाल की घोषणा 1975 में इंदिरा गाँधी ने की। गलत। यद्यपि घोषणा इंदिरा गांधी के कार्यकाल में हुई थी, लेकिन इसे 25 जून, 1975 को 'आंतरिक गड़बड़ी' के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा घोषित किया गया था।
- (ख) आपातकाल में सभी मौलिक अधिकार निष्क्रिय हो गए। सही। अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा होने पर, अनुच्छेद 19 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, और राष्ट्रपति अन्य मौलिक अधिकारों को भी निलंबित कर सकते हैं।
- (ग) बिगड़ती हुई आर्थिक स्थिति के मद्देनज़र आपातकाल की घोषणा की गई थी। गलत। आपातकाल की घोषणा का मुख्य कारण 'आंतरिक गड़बड़ी' बताया गया था, न कि केवल आर्थिक स्थिति। हालाँकि, आर्थिक मुद्दे जैसे बढ़ती कीमतें और बेरोजगारी भी असंतोष के कारण थे।
- (घ) आपातकाल के दौरान विपक्ष के अनेक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। सही। आपातकाल के दौरान, सरकार ने राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए कई विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और असंतुष्टों को गिरफ्तार किया था।
- (ङ) सी.पी.आई. ने आपातकाल की घोषणा का समर्थन किया। सही। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सी.पी.आई.) ने उस समय की सरकार के साथ अपने गठबंधन के कारण आपातकाल की घोषणा का समर्थन किया था।
प्रश्न 2
- (क) 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान
- (ख) 1974 की रेल-हड़ताल
- (ग) नक्सलवादी आंदोलन
- (घ) इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला
- (ङ) शाह आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्ष
आपातकाल की घोषणा के संदर्भ से मेल न खाने वाला विकल्प है:
(ग) नक्सलवादी आंदोलन।
स्पष्टीकरण:
'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान (जयप्रकाश नारायण द्वारा), 1974 की रेल-हड़ताल (जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में), और इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला (जिसमें इंदिरा गांधी के चुनाव को अमान्य कर दिया गया था) ये सभी आपातकाल की घोषणा के प्रमुख कारण या संदर्भ थे। शाह आयोग की रिपोर्ट आपातकाल के बाद की जांच से संबंधित है, लेकिन इसके निष्कर्षों ने भी आपातकाल के दौरान की स्थितियों पर प्रकाश डाला। नक्सलवादी आंदोलन एक महत्वपूर्ण सामाजिक-राजनीतिक घटना थी, लेकिन यह सीधे तौर पर 1975 के आपातकाल की घोषणा के तात्कालिक कारणों में से एक के रूप में उल्लिखित नहीं है, जैसा कि अन्य विकल्प हैं।
प्रश्न 3
- (क) संपूर्ण क्रांति (i) इंदिरा गाँधी
- (ख) गरीबी हटाओ (ii) जयप्रकाश नारायण
- (ग) छात्र आंदोलन (iii) बिहार आंदोलन
- (घ) रेल हड़ताल (iv) जॉर्ज फर्नांडिस
दिए गए कथनों का सही मेल इस प्रकार है:
- (क) संपूर्ण क्रांति - (ii) जयप्रकाश नारायण
- (ख) गरीबी हटाओ - (i) इंदिरा गाँधी
- (ग) छात्र आंदोलन - (iii) बिहार आंदोलन
- (घ) रेल हड़ताल - (iv) जॉर्ज फर्नांडिस
स्पष्टीकरण:
जयप्रकाश नारायण ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन के लिए 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया था। 'गरीबी हटाओ' इंदिरा गांधी का एक प्रमुख चुनावी नारा था। छात्र आंदोलन, विशेष रूप से बिहार में, 1974 में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। जॉर्ज फर्नांडिस ने 1974 की राष्ट्रव्यापी रेल हड़ताल का नेतृत्व किया था।
प्रश्न 4
1980 में लोकसभा के लिए मध्यावधि चुनाव करवाने के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
- जनता पार्टी का विघटन: 1977 में कांग्रेस को हराकर सत्ता में आई जनता पार्टी, विभिन्न विचारधाराओं वाले दलों का एक गठबंधन थी। यह गठबंधन शीघ्र ही आंतरिक कलह और नेतृत्व के मुद्दों के कारण बिखर गया।
- मोरारजी देसाई सरकार का पतन: जनता पार्टी के नेतृत्व वाली मोरारजी देसाई की सरकार लगभग 18 महीनों तक चली, लेकिन बहुमत खोने के कारण गिर गई।
- चरण सिंह सरकार का अल्पकालिक होना: कांग्रेस के समर्थन से चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में एक नई सरकार बनी, लेकिन कांग्रेस ने जल्द ही अपना समर्थन वापस ले लिया, जिससे यह सरकार मात्र चार महीने तक ही सत्ता में रह सकी।
- राजनीतिक अस्थिरता: उपरोक्त कारणों से उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता और सरकार चलाने में असमर्थता के कारण, 1980 में लोकसभा को भंग कर नए सिरे से चुनाव कराने का निर्णय लिया गया।
प्रश्न 5
जनता पार्टी की सरकार द्वारा 1977 में शाह आयोग की नियुक्ति और उसके निष्कर्ष इस प्रकार थे:
आयोग की नियुक्ति का कारण:
- आपातकाल की जांच: 1977 के आम चुनावों में जनता पार्टी को बहुमत मिला और उसने केंद्र में सरकार बनाई। इस नई सरकार का एक प्रमुख चुनावी वादा आपातकाल के दौरान हुई कथित ज्यादतियों, कानूनों के उल्लंघन और शक्तियों के दुरुपयोग की जांच करना था।
- जांच का उद्देश्य: इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश श्री न्यायमूर्ति जे. सी. शाह की अध्यक्षता में एक जाँच आयोग का गठन किया। आयोग का कार्य आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच करना और रिपोर्ट देना था।
- कार्यप्रणाली: आयोग ने विभिन्न आरोपों की जांच के लिए बड़ी मात्रा में कागजात, साक्ष्य की समीक्षा की और हजारों गवाहों के बयान दर्ज किए। श्रीमती इंदिरा गांधी को भी गवाही के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने आयोग के किसी भी प्रश्न का उत्तर देने या अपना पक्ष रखने से इनकार कर दिया।
शाह आयोग के निष्कर्ष:
- सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग: आयोग ने अपनी रिपोर्ट के तीन भागों में यह निष्कर्ष निकाला कि आपातकाल के दौरान सरकारी मशीनरी का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया था।
- मौखिक आदेश और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन: आयोग ने पाया कि अधिकांश सरकारी आदेश मौखिक रूप से दिए जाते थे, जिससे जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता था। इसके अलावा, नागरिक अधिकारों का भी उल्लंघन हुआ था।
- नौकरशाही का दुरुपयोग: आयोग ने यह भी कहा कि नौकरशाही ने अपनी शक्तियों का नियमों के विरुद्ध प्रयोग और दुरुपयोग किया। पुलिस संगठन ने आम नागरिकों पर अत्याचार किए और अपनी स्वतंत्र व नियमों के अनुसार कार्य करने की शैली को त्याग दिया था।
प्रश्न 6
25 जून, 1975 को सरकार द्वारा 'आंतरिक गड़बड़ी' के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करने के पीछे कई कारण बताए गए थे, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं:
- गुजरात और बिहार में छात्र आंदोलन: जनवरी 1974 में गुजरात में शुरू हुआ छात्र आंदोलन पूरे देश में फैल गया, जिससे राष्ट्रीय राजनीति प्रभावित हुई। आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ यह आंदोलन था। गुजरात में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया, और बाद में हुए चुनावों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, जिससे केंद्र सरकार की छवि धूमिल हुई। इसी तरह, मार्च 1974 में बिहार में भी छात्रों ने बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और शासन की उपेक्षा के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन ने जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में 'संपूर्ण क्रांति' का रूप ले लिया और राष्ट्रव्यापी हो गया।
- 1974 की रेल-हड़ताल: मई 1974 में जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में रेलवे कर्मचारियों ने बोनस और सेवा संबंधी मांगों को लेकर एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल की। इस हड़ताल ने पूरे देश के जनजीवन को ठप्प कर दिया और सरकार के विरुद्ध असंतोष को बढ़ाया। सरकार ने इसे असंवैधानिक घोषित किया और मांगों को स्वीकार नहीं किया, जिससे यह बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई, लेकिन इसने मजदूरों और आम आदमी में सरकार के प्रति असंतोष पैदा किया।
- सरकार और न्यायपालिका के बीच संघर्ष: संविधान लागू होने के बाद से ही न्यायपालिका और सरकार के बीच मौलिक अधिकारों और संसद की सर्वोच्चता को लेकर मतभेद थे। इंदिरा गांधी के कार्यकाल में यह टकराव और तीखा हो गया। संसद को संविधान में संशोधन का अधिकार है या नहीं, इस पर बहस थी। 1973 के केशवानंद भारती मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि संसद संविधान के मूल ढांचे को बदले बिना संशोधन कर सकती है। इंदिरा गांधी ने न्यायपालिका पर सरकार की समाजवादी नीतियों के पक्ष में निर्णय देने का दबाव बनाने का प्रयास किया। 1973 में वरिष्ठतम न्यायाधीशों को दरकिनार कर ए.एन. रे को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने के निर्णय की व्यापक निंदा हुई और इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला माना गया। तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों ने इस्तीफा दे दिया। सरकार 'प्रतिबद्ध नौकरशाही' की आवश्यकता पर भी जोर दे रही थी।
इन सभी कारकों ने मिलकर एक ऐसी राजनीतिक और सामाजिक अशांति का माहौल बनाया, जिसे सरकार ने 'आंतरिक गड़बड़ी' के रूप में प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा का आधार बनाया।
Common mistakes
- आपातकाल की घोषणा के कारणों को गलत समझना या केवल एक कारण पर ध्यान केंद्रित करना।
- आपातकाल के दौरान सभी मौलिक अधिकारों के निष्क्रिय होने की गलत धारणा रखना।
- विभिन्न आंदोलनों और घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करने में कठिनाई।
- शाह आयोग के निष्कर्षों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना।
Revision tips
- आपातकाल की घोषणा के पीछे के सभी कारणों को सूचीबद्ध करें और उन्हें प्राथमिकता दें।
- आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों पर हुए प्रभाव को विस्तार से समझें।
- प्रमुख घटनाओं जैसे छात्र आंदोलन, रेल हड़ताल और इलाहाबाद फैसले के बीच कालानुक्रमिक संबंध बनाएं।
- शाह आयोग की नियुक्ति के उद्देश्य और उसके निष्कर्षों को संक्षेप में लिखें।
- अभ्यास प्रश्नों के उत्तर देने के बाद, समाधानों से अपने उत्तरों की तुलना करें और सुधार करें।
Practice MCQs
Q1. आपातकाल की घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
Explanation: आपातकाल की घोषणा मुख्य रूप से 'आंतरिक गड़बड़ी' के आधार पर की गई थी, न कि केवल बिगड़ती आर्थिक स्थिति के कारण। हालांकि आर्थिक मुद्दे मौजूद थे, वे घोषणा के प्राथमिक कारण नहीं थे।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा आपातकाल की घोषणा के संदर्भ से मेल नहीं खाता है?
Explanation: नक्सलवादी आंदोलन आपातकाल की घोषणा के समय एक महत्वपूर्ण मुद्दा था, लेकिन यह सीधे तौर पर आपातकाल की घोषणा के तात्कालिक कारणों या संदर्भों में से एक के रूप में उल्लिखित नहीं है, जैसे कि 'संपूर्ण क्रांति', रेल हड़ताल या इलाहाबाद का फैसला।
Q3. जयप्रकाश नारायण द्वारा आह्वान की गई क्रांति का क्या नाम था?
Explanation: जयप्रकाश नारायण ने बिहार आंदोलन के संदर्भ में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन लाने के लिए 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया था।
Q4. शाह आयोग की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या था?
Explanation: जनता पार्टी की सरकार ने 1977 में शाह आयोग की नियुक्ति आपातकाल के दौरान की गई ज्यादतियों, कानूनों के उल्लंघन और शक्तियों के दुरुपयोग की जांच के लिए की थी।
Q5. 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा का एक कारण क्या बताया गया था?
Explanation: सरकार ने 25 जून, 1975 को 'आंतरिक गड़बड़ी' के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी।
Frequently asked questions
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 6 का मुख्य विषय क्या है?
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 6 का मुख्य विषय 1975 में भारत में घोषित राष्ट्रीय आपातकाल और उस दौरान उत्पन्न हुई 'लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट' है। इसमें आपातकाल के कारण, प्रभाव और संबंधित प्रमुख घटनाएँ शामिल हैं।
आपातकाल की घोषणा के लिए सरकार द्वारा क्या कारण बताए गए थे?
सरकार ने 25 जून, 1975 को 'आंतरिक गड़बड़ी' के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी। इसके अतिरिक्त, गुजरात और बिहार में छात्र आंदोलन, 1974 की रेल हड़ताल और सरकार व न्यायपालिका के बीच बढ़ते टकराव जैसे कारक भी पृष्ठभूमि में थे।
आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का क्या हुआ?
आपातकाल के दौरान, राष्ट्रपति के आदेश द्वारा, भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत दिए गए सभी मौलिक अधिकार स्वतः ही निलंबित हो गए थे। इसके अतिरिक्त, अन्य मौलिक अधिकारों को भी निलंबित या प्रतिबंधित किया जा सकता था।
शाह आयोग की नियुक्ति क्यों की गई थी और इसके क्या निष्कर्ष थे?
जनता पार्टी की सरकार ने 1977 में शाह आयोग की नियुक्ति आपातकाल के दौरान की गई ज्यादतियों, कानूनों के उल्लंघन और शक्तियों के दुरुपयोग की जांच के लिए की थी। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आपातकाल के दौरान सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग हुआ, नागरिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ और पुलिस ने जुल्म ढाए।
क्या आपातकाल की घोषणा का समर्थन सी.पी.आई. ने किया था?
हाँ, दिए गए कथनों के अनुसार, सी.पी.आई. (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी) ने आपातकाल की घोषणा का समर्थन किया था।
ये NCERT समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?
ये समाधान अध्याय की मुख्य अवधारणाओं, घटनाओं और विश्लेषणों को स्पष्ट करते हैं। प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत उत्तर छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार करने में मदद करता है।
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