कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: एक दल की प्रधानता का युग - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 के लिए राजनीति विज्ञान के अध्याय 2, 'एक दल की प्रधानता का युग' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह खंड भारत में स्वतंत्रता के बाद शुरुआती दौर में कांग्रेस पार्टी के प्रभुत्व की पड़ताल करता है, जिसमें पहले तीन आम चुनावों में इसकी प्रमुख भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। समाधानों में एकल-दलीय प्रभुत्व के कारणों, जैसे कि एक मजबूत विपक्ष की कमी और जनता की राजनीतिक जागरूकता का निम्न स्तर, का विश्लेषण किया गया है। इसमें भारतीय जनसंघ और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जैसी विपक्षी पार्टियों की विचारधाराओं और नीतियों पर भी चर्चा की गई है, और यह बताया गया है कि यदि वे सत्ता में होते तो उनकी नीतियां कैसे भिन्न हो सकती थीं। इसके अतिरिक्त, यह कांग्रेस को एक वैचारिक गठबंधन के रूप में देखती है, जिसमें विभिन्न विचारधाराओं के समूह शामिल थे। यह खंड इन समाधानों के माध्यम से छात्रों को भारत की प्रारंभिक राजनीतिक प्रणाली की जटिलताओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने में मदद करता है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | स्वतंत्र भारत में राजनीति - II |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 2. एक दल की प्रधानता का युग |
Chapter summary
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 2 'एक दल की प्रधानता का युग' के लिए ये NCERT समाधान भारत की प्रारंभिक राजनीतिक परिदृश्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं। ये समाधान पहले तीन आम चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी के प्रभुत्व के कारणों और परिणामों की पड़ताल करते हैं। इसमें विपक्षी दलों की भूमिका, उनकी विचारधाराओं में अंतर, और कांग्रेस को एक वैचारिक गठबंधन के रूप में समझने पर जोर दिया गया है। यह खंड छात्रों को भारत की शुरुआती लोकतांत्रिक राजनीति की गतिशीलता को समझने में मदद करता है।
Learning outcomes
- एक दल की प्रधानता के युग में भारत के पहले आम चुनावों की प्रक्रिया को समझना।
- कांग्रेस पार्टी के प्रभुत्व के कारणों और इसके प्रभाव का विश्लेषण करना।
- विभिन्न विपक्षी दलों की विचारधाराओं और नीतियों के बीच अंतर की पहचान करना।
- कांग्रेस को एक वैचारिक गठबंधन के रूप में समझने की क्षमता विकसित करना।
- एकल-दलीय प्रभुत्व के भारतीय राजनीति के लोकतांत्रिक चरित्र पर पड़ने वाले प्रभावों का मूल्यांकन करना।
Topics covered
Paper topics
- एक दल की प्रधानता का युग
- पहले आम चुनाव (1952)
- कांग्रेस पार्टी का प्रभुत्व
- विपक्षी दल (भारतीय जनसंघ, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, स्वतंत्र पार्टी)
- विचारधारात्मक गठबंधन
- लोकतांत्रिक चरित्र पर प्रभाव
- चुनाव प्रक्रिया
- राष्ट्रीय आंदोलन के वायदे
- मार्क्सवाद और समाजवाद
- अखंड भारत की अवधारणा
- राज्य नियंत्रित अर्थव्यवस्था
- भारतीय संस्कृति और परंपरा
Important topics
- कांग्रेस पार्टी का प्रभुत्व और इसके कारण
- विपक्षी दलों की विचारधाराओं और नीतियों में अंतर
- कांग्रेस को एक वैचारिक गठबंधन के रूप में समझना
- एकल-दलीय प्रभुत्व का भारतीय लोकतंत्र पर प्रभाव
- पहले आम चुनाव की प्रक्रिया और परिणाम
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Questions and Solutions
प्रश्न 1: सही विकल्प को चुनकर खाली जगह को भरें:
(क) 1952 के पहले आम चुनाव में लोकसभा के साथ-साथ ______ के लिए भी चुनाव कराए गए थे। (भारत के राष्ट्रपति पद/राज्य विधानसभा/राज्यसभा/प्रधानमंत्री)
(ख) ______ लोकसभा के पहले आम चुनाव में 16 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही। (प्रजा सोशलिस्ट पार्टी/भारतीय जनसंघ/भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी/भारतीय जनता पार्टी)
(ग) ______ स्वतंत्र पार्टी का एक निर्देशक सिद्धांत था। (कामगार तबके का हित/रियासतों का बचाव/राज्य के नियंत्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था/संघ के भीतर राज्यों की स्वायत्तता)
(क) 1952 में हुए पहले आम चुनाव केवल लोकसभा के लिए ही नहीं, बल्कि देश भर की राज्य विधानसभाओं के लिए भी आयोजित किए गए थे। यह एक साथ दो स्तरों पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण कदम था।
(ख) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने पहले आम चुनाव में 16 सीटें जीतकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद दूसरा स्थान प्राप्त किया था। यह उस समय एक महत्वपूर्ण विपक्षी दल के रूप में उभरी।
(ग) स्वतंत्र पार्टी का एक प्रमुख निर्देशक सिद्धांत 'राज्य के नियंत्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था' था। यह पार्टी आर्थिक उदारीकरण और निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने की पक्षधर थी।
प्रश्न 2: यहाँ दो सूचियाँ दी गई हैं। पहले में नेताओं के नाम दर्ज़ हैं और दूसरे में दलों के। दोनों सूचियों में मेल बैठाएँ:
सूची I (नेता)
- (क) एस.ए. डांगे
- (ख) श्यामा प्रसाद मुखर्जी
- (ग) मीनू मसानी
- (घ) अशोक मेहता
सूची II (दल)
- (i) भारतीय जनसंघ
- (ii) स्वतंत्र पार्टी
- (iii) प्रजा सोशलिस्ट पार्टी
- (iv) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
दोनों सूचियों का सही मेल इस प्रकार है:
- (क) एस.ए. डांगे का संबंध (iv) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से था। वे पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक थे।
- (ख) श्यामा प्रसाद मुखर्जी (i) भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रमुख नेता थे।
- (ग) मीनू मसानी (ii) स्वतंत्र पार्टी के एक प्रमुख विचारक और नेता थे, जो आर्थिक उदारीकरण के समर्थक थे।
- (घ) अशोक मेहता (iii) प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के एक महत्वपूर्ण नेता थे, जो कांग्रेस से अलग होकर बने समाजवादी गुट का प्रतिनिधित्व करते थे।
प्रश्न 3: एकल पार्टी के प्रभुत्व के बारे में यहाँ चार बयान लिखे गए हैं। प्रत्येक के आगे सही या गलत का चिह्न लगाएँ:
(क) विकल्प के रूप में किसी मजबूत राजनीतिक दल का अभाव एकल पार्टी-प्रभुत्व का कारण था।
(ख) जनमत की कमजोरी के कारण एक पार्टी का प्रभुत्व कायम हुआ।
(ग) एकल पार्टी-प्रभुत्व का संबंध राष्ट्र के औपनिवेशिक अतीत से है।
(घ) एकल पार्टी-प्रभुत्व से देश में लोकतांत्रिक आदर्शों के अभाव की झलक मिलती है।
(क) सही। पहले आम चुनावों के समय, भारत में कोई भी विपक्षी दल इतना मजबूत नहीं था कि वह कांग्रेस को प्रभावी चुनौती दे सके।
(ख) सही। उस समय मतदाताओं में राजनीतिक जागरूकता का स्तर अपेक्षाकृत कम था, और कई मतदाता कांग्रेस को ही राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत के कारण स्वाभाविक पसंद मानते थे।
(ग) सही। भारत का औपनिवेशिक अतीत, जिसमें एक केंद्रीकृत शासन का अनुभव था, और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कांग्रेस की व्यापक भूमिका ने एकल पार्टी प्रभुत्व के लिए जमीन तैयार की।
(घ) गलत। यद्यपि एकल पार्टी प्रभुत्व की प्रणाली में कुछ चुनौतियाँ होती हैं, भारत के संदर्भ में, इसने शुरुआती दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं को स्थापित करने और स्थिरता प्रदान करने में मदद की, न कि लोकतांत्रिक आदर्शों के अभाव को दर्शाया।
प्रश्न 4: अगर पहले आम चुनाव के बाद भारतीय जनसंघ अथवा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बनी होती तो किन मामलों में इस सरकार ने अलग नीति अपनाई होती? इन दोनों दलों द्वारा अपनाई गई नीतियों के बीच तीन अंतरों का उल्लेख करें।
अगर पहले आम चुनाव के बाद भारतीय जनसंघ अथवा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बनी होती तो किन मामलों में इस सरकार ने अलग नीति अपनाई होती? इन दोनों दलों द्वारा अपनाई गई नीतियों के बीच तीन अंतरों का उल्लेख करें।
यदि पहले आम चुनाव के बाद भारतीय जनसंघ या भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बनती, तो उनकी नीतियां कांग्रेस से काफी भिन्न होतीं। दोनों दलों की अपनी विशिष्ट विचारधाराएं थीं, जिनके आधार पर वे देश की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते थे।
भारतीय जनसंघ 'एक देश, एक संस्कृति तथा एक राष्ट्र' के विचार पर बल देता था और इसका मानना था कि देश को भारतीय संस्कृति तथा परंपरा के आधार पर आधुनिक, प्रगतिशील और ताकतवर बनाया जा सकता है। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी देश की समस्याओं का समाधान साम्यवाद के माध्यम से करने की वकालत करती थी और रूस की बोल्शेविक क्रांति तथा मार्क्सवाद से प्रेरित थी।
भारतीय जनसंघ और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों के बीच तीन मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
- सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टिकोण: भारतीय जनसंघ पूरे भारत में एक देश, एक भाषा, एक राष्ट्र और एक संस्कृति के विचार का समर्थक था। इसके विपरीत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी देश की समस्याओं का समाधान मार्क्सवाद पर आधारित समाजवाद के माध्यम से करना चाहती थी और यह दल रूस की बोल्शेविक क्रांति से प्रेरित था।
- आर्थिक नीति: भारतीय जनसंघ ने भारतीय संस्कृति और परंपरा के आधार पर विकास योजनाओं और अर्थव्यवस्था को अपनाने पर जोर दिया। दूसरी ओर, कम्युनिस्ट पार्टी पूर्ण रूप से राज्य द्वारा नियंत्रित अर्थव्यवस्था, उत्पादन और वितरण पर सरकार के पूर्ण स्वामित्व की समर्थक थी।
- विदेश नीति और राष्ट्रीय एकता: भारतीय जनसंघ ने भारत और पाकिस्तान को मिलाकर 'अखंड भारत' बनाने के विचार रखे थे। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दोनों देशों को अलग-अलग राष्ट्र के रूप में मान्यता देती थी।
प्रश्न 5: कांग्रेस किन अर्थों में एक विचारधारात्मक गठबंधन थी? कांग्रेस में मौजूद विभिन्न विचारधारात्मक उपस्थितियों का उल्लेख करें।
कांग्रेस किन अर्थों में एक विचारधारात्मक गठबंधन थी? कांग्रेस में मौजूद विभिन्न विचारधारात्मक उपस्थितियों का उल्लेख करें।
कांग्रेस को एक विचारधारात्मक गठबंधन कई अर्थों में कहा जा सकता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय तक, कांग्रेस एक व्यापक मंच बन चुकी थी जिसमें विभिन्न विचारधाराओं और समूहों के लोग शामिल थे। यह केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक ऐसा 'सतरंगी गठबंधन' था जिसने राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान विभिन्न वर्गों को एक साथ जोड़ा था।
कांग्रेस में मौजूद विभिन्न विचारधारात्मक उपस्थितियाँ निम्नलिखित थीं:
- शांतिवादी और क्रांतिकारी: कांग्रेस में ऐसे सदस्य थे जो अहिंसक साधनों में विश्वास रखते थे, जबकि कुछ क्रांतिकारी तरीकों से भी स्वतंत्रता प्राप्त करने के पक्षधर थे।
- रूढ़िवादी और प्रगतिवादी: दल के भीतर रूढ़िवादी सोच रखने वाले लोग भी थे जो पारंपरिक मूल्यों को बनाए रखना चाहते थे, वहीं प्रगतिवादी सदस्य सामाजिक और आर्थिक सुधारों के पक्ष में थे।
- गरमपंथी और नरमपंथी: ऐतिहासिक रूप से, कांग्रेस में गरमपंथी (जो तीव्र आंदोलन चाहते थे) और नरमपंथी (जो संवैधानिक तरीकों में विश्वास रखते थे) दोनों धाराएँ मौजूद रहीं।
- दक्षिणपंथी और वामपंथी: कांग्रेस में दक्षिणपंथी झुकाव वाले नेता भी थे जो राष्ट्रीयता और परंपरा पर जोर देते थे, और वामपंथी झुकाव वाले नेता भी थे जो समाजवादी विचारों का समर्थन करते थे।
- समाजवादी गुट: कांग्रेस के भीतर कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी जैसे गुट भी सक्रिय थे, जो समाजवादी समाज की स्थापना को अपना लक्ष्य मानते थे। हालाँकि वे कांग्रेस के मंच पर ही काम करते थे।
इस प्रकार, कांग्रेस एक ऐसा मंच थी जहाँ विभिन्न हित, समूह और राजनीतिक विचार एक साथ आ जुटते थे। स्वतंत्रता के बाद भी, कांग्रेस ने समाजवादी समाज की स्थापना को अपना लक्ष्य बनाया, जिसके कारण कई समाजवादी पार्टियाँ बनीं लेकिन वे कांग्रेस के प्रभुत्व को चुनौती नहीं दे सकीं क्योंकि कांग्रेस स्वयं ही विभिन्न विचारधाराओं का एक विशाल गठबंधन थी।
प्रश्न 6: क्या एकल पार्टी प्रभुत्व की प्रणाली का भारतीय राजनीति के लोकतांत्रिक चरित्र पर खराब असर हुआ?
क्या एकल पार्टी प्रभुत्व की प्रणाली का भारतीय राजनीति के लोकतांत्रिक चरित्र पर खराब असर हुआ?
नहीं, एकल पार्टी प्रभुत्व की प्रणाली का भारतीय राजनीति के लोकतांत्रिक चरित्र पर खराब असर नहीं हुआ। यद्यपि यह सच है कि एकल-दलीय प्रभुत्व प्रणाली कभी-कभी तानाशाही की ओर ले जा सकती है, भारत के शुरुआती लोकतांत्रिक दौर में, कांग्रेस के प्रभुत्व ने कई मायनों में भारतीय लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एकल-दलीय प्रभुत्व के सकारात्मक परिणाम निम्नलिखित थे:
- जनता का विश्वास और स्थिरता: कांग्रेस राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत के कारण जनता के बीच सर्वाधिक लोकप्रिय और विश्वसनीय दल थी। मतदाताओं ने उसे आँख बंद करके मत दिया, जिससे कांग्रेस को मनोबल मिला और वह राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान किए गए वादों को पूरा करने में सफल रही।
- राजनीतिक जागरूकता का निम्न स्तर: उस समय भारत का मतदाता राजनीतिक विचारधाराओं के बारे में पूरी तरह से सूचित नहीं था (केवल 18% साक्षरता दर थी)। ऐसे में, कांग्रेस में आस्था रखना आम आदमी के लिए स्वाभाविक था, और यह दल कल्याण की आशा का केंद्र था।
- संसदीय प्रणाली का शैशवकाल: भारत में लोकतंत्र और संसदीय शासन प्रणाली अपने शुरुआती दौर में थी। यदि उस समय सत्ता के लिए तीव्र खींचतान होती, गठबंधन बनते-बिगड़ते और बार-बार चुनाव होते, तो आम आदमी का विश्वास लोकतंत्र से उठ सकता था। कांग्रेस के प्रभुत्व ने इस अस्थिरता को रोका।
- प्रगतिशील कदम उठाने में आसानी: प्रभुत्व की स्थिति के कारण कांग्रेस के लिए प्रगतिशील कदम उठाना और विकास योजनाओं को लागू करना संभव हुआ, जिससे भारत में सैनिक शासन की संभावना को रोका जा सका।
- राजनीतिक स्थायित्व और संस्थागत मजबूती: प्रभुत्व की स्थिति ने राजनीति में स्थायित्व प्रदान किया। विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना की, लेकिन सरकार अपना काम भी करती रही। इसने भारतीय लोकतंत्र, संसदीय शासन प्रणाली और लोकतांत्रिक प्रकृति को मजबूत बनाने में योगदान दिया।
इस प्रकार, भारत में कांग्रेस के प्रभुत्व ने शुरुआती दौर में लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्थापित करने और मजबूत करने में एक सकारात्मक भूमिका निभाई।
प्रश्न 7: समाजवादी दलों और कम्युनिस्ट पार्टी के बीच के तीन अंतर बताएँ। इसी तरह भारतीय जनसंघ और स्वतंत्र पार्टी के बीच के तीन अंतरों का उल्लेख करें।
समाजवादी दलों और कम्युनिस्ट पार्टी के बीच के तीन अंतर बताएँ। इसी तरह भारतीय जनसंघ और स्वतंत्र पार्टी के बीच के तीन अंतरों का उल्लेख करें।
समाजवादी दलों और कम्युनिस्ट पार्टी के बीच तीन मुख्य अंतर निम्नलिखित थे:
- समाजवाद का स्वरूप: समाजवादी दल 'लोकतांत्रिक समाजवाद' में विश्वास रखते थे, जिसका अर्थ था कि समाजवाद को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं के माध्यम से प्राप्त किया जाना चाहिए। इसके विपरीत, कम्युनिस्ट पार्टी 'मार्क्सवाद पर आधारित समाजवाद' का समर्थन करती थी, जो अक्सर क्रांति और सर्वहारा वर्ग की तानाशाही के माध्यम से सत्ता प्राप्त करने पर जोर देता था।
- पूंजीवाद के प्रति दृष्टिकोण: समाजवादी दल पूंजीवाद को धीरे-धीरे सुधारों के माध्यम से समाप्त करने या नियंत्रित करने के पक्षधर थे, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी पूंजीवाद को पूरी तरह से उखाड़ फेंकने की वकालत करती थी।
- अंतर्राष्ट्रीय संबंध: समाजवादी दल अक्सर राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते थे, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी अंतर्राष्ट्रीय साम्यवादी आंदोलन और सोवियत संघ जैसे देशों के साथ घनिष्ठ संबंधों पर अधिक जोर देती थी।
इसी प्रकार, भारतीय जनसंघ और स्वतंत्र पार्टी के बीच तीन मुख्य अंतर इस प्रकार थे:
- आर्थिक दर्शन: भारतीय जनसंघ भारतीय संस्कृति और परंपरा पर आधारित विकास का समर्थक था, लेकिन यह राज्य की भूमिका को पूरी तरह से नकारता नहीं था। वहीं, स्वतंत्र पार्टी 'राज्य के नियंत्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था' की प्रबल समर्थक थी और निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना चाहती थी।
- राष्ट्रीयता की अवधारणा: भारतीय जनसंघ 'अखंड भारत' की अवधारणा में विश्वास रखता था और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर जोर देता था। स्वतंत्र पार्टी का मुख्य ध्यान आर्थिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों पर था, न कि सांस्कृतिक या भौगोलिक राष्ट्रवाद पर।
- सामाजिक दृष्टिकोण: भारतीय जनसंघ पारंपरिक भारतीय मूल्यों और संस्कृति को बनाए रखने पर अधिक जोर देता था। स्वतंत्र पार्टी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सीमित सरकार के विचारों पर केंद्रित थी, जो पश्चिमी उदारवादी विचारों से प्रभावित थे।
Common mistakes
- एकल-दलीय प्रभुत्व के कारणों को केवल विपक्ष की कमजोरी तक सीमित समझना।
- विभिन्न दलों की विचारधाराओं के बीच सूक्ष्म अंतरों को अनदेखा करना।
- कांग्रेस को केवल एक पार्टी के रूप में देखना, न कि एक वैचारिक गठबंधन के रूप में।
- एकल-दलीय प्रभुत्व के सकारात्मक पहलुओं को पूरी तरह से नजरअंदाज करना।
Revision tips
- पहले तीन आम चुनावों में कांग्रेस की जीत के कारणों को सूचीबद्ध करें।
- विभिन्न विपक्षी दलों की मुख्य विचारधाराओं और मांगों की तुलना करें।
- कांग्रेस को एक वैचारिक गठबंधन के रूप में समझाने वाले बिंदुओं को रेखांकित करें।
- एकल-दलीय प्रभुत्व के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों पर विचार करें।
Practice MCQs
Q1. 1952 के पहले आम चुनाव में लोकसभा के साथ-साथ किसके लिए भी चुनाव कराए गए थे?
Explanation: पहले आम चुनाव 1952 में लोकसभा के साथ-साथ राज्यों की विधानसभाओं के लिए भी चुनाव हुए थे।
Q2. पहले लोकसभा के आम चुनाव में 16 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर कौन सी पार्टी रही?
Explanation: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने पहले आम चुनाव में 16 सीटें जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया था।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा स्वतंत्र पार्टी का एक निर्देशक सिद्धांत था?
Explanation: स्वतंत्र पार्टी राज्य के नियंत्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था की समर्थक थी।
Q4. एस.ए. डांगे का संबंध किस राजनीतिक दल से था?
Explanation: एस.ए. डांगे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख नेता थे।
Q5. किस पार्टी का मानना था कि देश को भारतीय संस्कृति तथा परंपरा के आधार पर आधुनिक बनाया जा सकता है?
Explanation: भारतीय जनसंघ 'एक देश, एक संस्कृति तथा एक राष्ट्र' के विचार पर बल देता था और भारतीय संस्कृति के आधार पर विकास चाहता था।
Frequently asked questions
एक दल की प्रधानता का युग क्या था?
एक दल की प्रधानता का युग वह अवधि थी जब भारत में स्वतंत्रता के बाद पहले तीन आम चुनावों (1952, 1957, 1962) में कांग्रेस पार्टी का लगातार प्रभुत्व रहा।
पहले आम चुनाव में कांग्रेस के प्रभुत्व के मुख्य कारण क्या थे?
मुख्य कारणों में राष्ट्रीय आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका, एक मजबूत विपक्ष की कमी, और मतदाताओं का कांग्रेस पर विश्वास शामिल थे।
भारतीय जनसंघ और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधाराओं में क्या अंतर था?
भारतीय जनसंघ 'एक देश, एक संस्कृति, एक राष्ट्र' का समर्थक था और भारतीय परंपरा पर आधारित विकास चाहता था, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवाद-लेनिनवाद से प्रेरित थी और राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था की पक्षधर थी।
कांग्रेस को एक वैचारिक गठबंधन क्यों कहा जाता है?
कांग्रेस में स्वतंत्रता से पहले और बाद में विभिन्न विचारधाराओं, जैसे उदारवादी, कट्टरपंथी, समाजवादी, रूढ़िवादी आदि के समूह शामिल थे, जो इसे एक वैचारिक गठबंधन बनाते थे।
क्या एकल पार्टी प्रभुत्व का भारतीय राजनीति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा?
हालांकि एकल पार्टी प्रभुत्व से तानाशाही का खतरा हो सकता है, भारत में इसने शुरुआती दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में मदद की।
ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?
ये समाधान महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, प्रमुख दलों की विचारधाराओं के बीच अंतर बताते हैं, और परीक्षा में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्नों के उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिलती है।
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