Class 12 Hindi Antra Chapter 4: (क) बनारस (ख) दिशा - NCERT Solutions

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CBSE Class 12 Hindi Antra Chapter 4 NCERT Solutions explore the poems (क) बनारस and (ख) दिशा. The solutions offer a deep dive into the unique depiction of Banaras, examining the arrival of spring, the profound concept of 'emptiness in empty bowls,' and the city's intrinsic duality of completeness and emptiness. It further analyzes the significance of Banaras's characteristic 'slowly, slowly' pace of life, illustrating how this rhythm acts as a guardian of its ancient culture and traditions against the backdrop of rapid global transformations. These solutions are designed to assist students in comprehending the nuanced meanings, poetic devices, and thematic layers within these poems, thereby enhancing their exam preparation and fostering a stronger analytical grasp of Hindi literature.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
SubjectHindi Antra
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 4

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Antra Chapter 4 offers an in-depth analysis of the poems 'Banaras' and 'Disha'. It focuses on understanding the poet's unique perspective on the city of Banaras, its distinct spring season, and the symbolic meaning of 'emptiness in empty bowls.' The solutions also explore the concept of Banaras's enduring completeness and emptiness, and the significance of its slow-paced life in maintaining its cultural identity. This chapter's solutions are designed to enhance students' comprehension of poetic imagery and thematic depth.

Learning outcomes

  • Understand the unique depiction of spring in Banaras.
  • Analyze the symbolic meaning of 'emptiness in empty bowls'.
  • Explain the contrast between Banaras's completeness and emptiness.
  • Interpret the significance of the 'slowly, slowly' rhythm in Banaras.
  • Appreciate the preservation of culture and tradition in Banaras.
  • Identify poetic devices used to describe Banaras.

Topics covered

Paper topics

  • बनारस शहर का वर्णन
  • वसंत का आगमन
  • धूल और आँधी का प्रभाव
  • खाली कटोरों का प्रतीकात्मक अर्थ
  • बनारस की पूर्णता
  • बनारस की रिक्तता
  • जीवन और मृत्यु का चक्र
  • धीरे-धीरे होने की लय
  • परंपरा और संस्कृति का संरक्षण
  • आधुनिकता का प्रभाव
  • दिशा (कविता का संक्षिप्त उल्लेख)
  • केदारनाथ सिंह की कविताएँ

Important topics

  • बनारस में वसंत का अनूठा चित्रण
  • खाली कटोरों में वसंत का प्रतीकात्मक अर्थ
  • बनारस की पूर्णता और रिक्तता का द्वंद्व
  • धीरे-धीरे होने की लय और सांस्कृतिक संरक्षण
  • जीवन-मृत्यु के चक्र का चित्रण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

बनारस में वसंत का आगमन कैसे होता हैं और उसका क्या प्रभाव इस शहर पर पड़ता हैं?
Solution: सामान्यतः वसंत ऋतु के आगमन पर चारों ओर हरियाली छा जाती है, पक्षी चहचहाने लगते हैं और सरसों के पीले खेत मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करते हैं। लोग बेसब्री से वसंत का इंतज़ार करते हैं।

परंतु, कवि केदारनाथ सिंह के अनुसार, बनारस का वसंत इन सामान्यताओं से भिन्न है। बनारस में वसंत अपने साथ एक विशेष प्रकार की आँधी और धूल लेकर आता है। इस कारण पूरे शहर में धूल ही धूल दिखाई देती है, जो लोगों के मुँह में किरकिरी का अनुभव कराती है। इस प्रकार, बनारस का वसंत एक अलग और कुछ हद तक अप्रिय अनुभव प्रस्तुत करता है, जो शहर की अपनी विशिष्ट पहचान को दर्शाता है।

प्रश्न 2

'ख़ाली कटोरों में वसंत का उतरना' से क्या आशय है?
Solution: कवि केदारनाथ सिंह द्वारा प्रयुक्त यह पंक्ति 'ख़ाली कटोरों में वसंत का उतरना' एक गहरा प्रतीकात्मक अर्थ रखती है। इसका आशय बनारस की गरीबी, लाचारी और निराशा से है, विशेषकर भिखारियों के संदर्भ में।

दशाश्वमेध घाट जैसे स्थानों पर जहाँ भीड़ होती है, भिखारी अपने खाली कटोरे लेकर भीख माँगते हैं। वे गंगा किनारे चट्टानों के पास भी पहुँच जाते हैं। जब कोई उन्हें दान देता है और उनके कटोरे में कुछ पैसे आ जाते हैं, तो उन्हें लगता है कि उनके जीवन में भी कुछ सकारात्मकता या 'वसंत' आ गया है। यह पंक्ति उनकी उस उम्मीद को दर्शाती है जो उन्हें खाली कटोरों को भरने की आशा देती है, भले ही वह क्षणिक ही क्यों न हो। यह उनकी दयनीय स्थिति और छोटी सी आशा पर निर्भरता को उजागर करती है।

प्रश्न 3

बनारस की पूर्णता और रिक्तता को कवि ने किस प्रकार दिखाया है ?
Solution: कवि केदारनाथ सिंह ने बनारस शहर की पूर्णता और रिक्तता को विरोधाभासी रूप में प्रस्तुत किया है:

पूर्णता: कवि बनारस की पूर्णता को उसकी हर परिस्थिति में, चाहे वह सुख हो या दुख, उल्लास और जीवंतता बनाए रखने की क्षमता के रूप में दर्शाते हैं। बनारस हमेशा अपने उत्सवधर्मी स्वभाव और जीवन के प्रति उत्साह को बनाए रखता है। यह शहर कभी भी अपनी जीवंतता नहीं खोता, जो इसकी पूर्णता का प्रतीक है।

रिक्तता: दूसरी ओर, कवि बनारस की रिक्तता को जीवन की नश्वरता और मृत्यु के चक्र से जोड़ते हैं। वे बताते हैं कि प्रतिदिन अनगिनत शव गंगा के घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए लाए जाते हैं। यह दृश्य जीवन की क्षणभंगुरता और अंततः सभी के अंत की ओर इशारा करता है, जो शहर की एक गहरी रिक्तता को दर्शाता है। इस प्रकार, कवि बनारस को जीवन और मृत्यु के निरंतर प्रवाह के बीच एक अनूठा शहर बताते हैं।

प्रश्न 4

बनारस में धीरे-धीरे क्या होता है ? 'धीरे-धीरे' से कवि इस शहर के बारे में क्या कहना चाहता है ?
Solution: कवि केदारनाथ सिंह के अनुसार, बनारस शहर की एक अनूठी विशेषता है कि वहाँ लगभग सभी कार्य 'धीरे-धीरे' होते हैं। इसमें धूल का धीरे-धीरे उड़ना, लोगों का धीरे-धीरे चलना, मंदिरों में घंटियों का धीरे-धीरे बजना और शाम का भी धीरे-धीरे ढलना शामिल है।

कवि इस 'धीरे-धीरे' शब्द के प्रयोग से यह कहना चाहते हैं कि बनारस परिवर्तन की तीव्र गति से अछूता है। जहाँ विश्व तेज़ी से बदल रहा है और पुरानी सभ्यताएँ लुप्त हो रही हैं, वहीं बनारस अपनी धीमी गति के कारण अपनी प्राचीन संस्कृति, परंपराओं और जीवन शैली को बनाए रखने में सफल रहा है। यह धीमी गति शहर को एक विशेष लय प्रदान करती है और इसे आधुनिकता के शोर-शराबे से अलग एक विशिष्ट पहचान देती है। कवि इस गति के माध्यम से बनारस की स्थिरता और सांस्कृतिक निरंतरता को उजागर करते हैं।

प्रश्न 5

धीरे-धीरे होने की सामूहिक लय में क्या-क्या बँधा है?
Solution: बनारस शहर की 'धीरे-धीरे' होने की सामूहिक लय उसे अपनी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति से मजबूती से बांधे रखती है। इस लय के कारण शहर में सदियों से चली आ रही परंपराएँ और मान्यताएँ आज भी जीवित हैं।

उदाहरण के लिए, गंगा नदी को आज भी 'माता' कहकर संबोधित किया जाता है और उसके तट पर बंधी नावें उसी स्थान पर बंधी हुई हैं जहाँ वे सदियों से बंधी आ रही हैं। इसी प्रकार, संत कवि तुलसीदास जी की खड़ाऊँ भी अपने पूर्ववत स्थान पर सुसज्जित हैं। यह सब दर्शाता है कि परिवर्तन की तीव्र गति के बावजूद, बनारस ने अपनी जड़ों को मजबूती से थामे रखा है। यह धीमी गति ही वह अदृश्य धागा है जो शहर को उसकी ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक निरंतरता से जोड़े रखता है, जिससे वह बाहरी परिवर्तनों से अप्रभावित सा प्रतीत होता है।

Common mistakes

  • Confusing the general description of spring with Banaras's specific spring.
  • Misinterpreting the symbolic meaning of 'emptiness'.
  • Overlooking the significance of the 'slowly, slowly' pace.
  • Failing to connect the city's emptiness with the cycle of life and death.

Revision tips

  • Focus on the poet's specific imagery for Banaras's spring.
  • Understand the dual nature of Banaras: completeness and emptiness.
  • Pay attention to the phrase 'धीरे-धीरे' and its implications.
  • Relate the descriptions of Banaras to its cultural and historical context.
  • Practice explaining the symbolic meanings of key phrases.

Practice MCQs

Q1. बनारस में वसंत का आगमन कवि के अनुसार कैसा होता है?

Q2. 'ख़ाली कटोरों में वसंत का उतरना' से कवि का क्या आशय है?

Q3. बनारस की पूर्णता को कवि कैसे दर्शाते हैं?

Q4. बनारस की रिक्तता का प्रतीक क्या है?

Q5. बनारस में 'धीरे-धीरे' होने वाली क्रियाओं में क्या शामिल है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान कक्षा 12 के हिंदी अंतरा विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 4 पर केंद्रित हैं।

अध्याय 4 में कौन सी कविताएँ शामिल हैं?

अध्याय 4 में दो कविताएँ शामिल हैं: (क) बनारस और (ख) दिशा।

बनारस में वसंत का वर्णन सामान्य वसंत से कैसे भिन्न है?

सामान्य वसंत के विपरीत, बनारस में वसंत कवि के अनुसार आँधी और धूल लेकर आता है, जो शहर के यथार्थवादी चित्रण का हिस्सा है।

'खाली कटोरों में वसंत का उतरना' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है भिखारियों की गरीबी और निराशा। जब उन्हें भीख में कुछ मिलता है, तो वह उनके लिए वसंत के समान होता है।

बनारस की पूर्णता और रिक्तता से कवि क्या कहना चाहते हैं?

पूर्णता से कवि का आशय शहर की हर परिस्थिति में खुश रहने की क्षमता से है, जबकि रिक्तता मृत शरीरों के अंतिम संस्कार से जुड़ी है, जो जीवन की नश्वरता को दर्शाती है।

बनारस में 'धीरे-धीरे' होने वाली क्रियाओं का क्या महत्व है?

यह 'धीरे-धीरे' होने की लय शहर की प्राचीन संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखने में मदद करती है और इसे तीव्र वैश्विक परिवर्तनों से बचाती है।

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