Class 12 Hindi Antra Chapter 12: प्रेमघन की छाया स्मृति NCERT Solutions

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This section provides detailed NCERT Solutions for Chapter 12 of Class 12 Hindi Antra, titled 'प्रेमघन की छाया स्मृति' (Premghan Ki Chhaya Smriti). The chapter delves into the author's personal experiences and reflections, particularly focusing on his childhood memories and his interactions with prominent literary figures. The solutions cover questions related to the author's father's characteristics, the author's early perceptions of Bharatendu Harishchandra, his first glimpse of Padhyay Badri Narayan Chaudhary 'Premghan', the development of his inclination towards Hindi literature, and a specific anecdote involving the word 'नि:संदेह' (nissandeh). These solutions are designed to help students understand the nuances of the chapter, analyze the author's narrative style, and prepare effectively for their examinations by offering clear and concise explanations.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
SubjectHindi Antra
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 12

Chapter summary

Chapter 12, 'प्रेमघन की छाया स्मृति', offers a nostalgic look into the author's formative years and his literary journey. The NCERT Solutions for this chapter focus on understanding the author's father's literary tastes, the author's childhood admiration for Bharatendu Harishchandra, and the memorable first encounter with Padhyay Badri Narayan Chaudhary 'Premghan'. It also explores the gradual growth of the author's interest in Hindi literature and a unique incident related to the word 'नि:संदेह'. These solutions aim to provide clarity on the chapter's content and its underlying themes.

Learning outcomes

  • Understand the author's father's literary preferences and their influence.
  • Analyze the author's childhood perception of literary figures like Bharatendu Harishchandra.
  • Describe the author's first encounter with Padhyay Badri Narayan Chaudhary 'Premghan'.
  • Trace the development of the author's interest in Hindi literature.
  • Explain the significance of the anecdote involving the word 'नि:संदेह'.

Topics covered

Paper topics

  • लेखक के पिताजी की विशेषताएँ
  • भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रति लेखक की बचपन की भावना
  • उपाध्याय बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' से पहली मुलाकात
  • हिंदी साहित्य के प्रति लेखक का बढ़ता झुकाव
  • 'नि:संदेह' शब्द से जुड़ा प्रसंग
  • लेखक का साहित्यिक परिवेश
  • स्मृति और अनुभव

Important topics

  • लेखक के पिताजी की साहित्यिक रुचि का प्रभाव
  • भारतेंदु हरिश्चंद्र और राजा हरिश्चंद्र का भ्रम
  • प्रेमघन की पहली झलक का वर्णन
  • हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव के कारण
  • 'नि:संदेह' प्रसंग का महत्व

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Questions and Solutions

प्रश्न 1. लेखक ने पिताजी की किन-किन विशेषताओं का वर्णन किया है?

लेखक ने पिताजी की किन-किन विशेषताओं का वर्णन किया है?
Solution: लेखक ने अपने पिताजी की कई साहित्यिक और व्यक्तिगत विशेषताओं का वर्णन किया है। वे फ़ारसी भाषा के अच्छे ज्ञाता थे और प्राचीन भाषाओं को बहुत महत्व देते थे। उन्हें हिंदी में लिखे वाक्यों को फ़ारसी में अनुवाद करने का शौक था, जो उनकी भाषा पर पकड़ को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, वे हर रात अपने परिवार को रामचरितमानस की कथा चित्रात्मक ढंग से सुनाते थे, जिससे परिवार में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल बना रहता था। वे भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटकों के भी बड़े प्रशंसक थे, जो साहित्य के प्रति उनके प्रेम को उजागर करता है।

प्रश्न 2. बचपन में लेखक के मन में भारतेंदु जी के संबंध में कैसी भावना जगी रहती थी?

बचपन में लेखक के मन में भारतेंदु जी के संबंध में कैसी भावना जगी रहती थी?
Solution: बचपन में लेखक के मन में भारतेंदु हरिश्चंद्र जी के प्रति एक विशेष और गहरी भावना थी। वे भारतेंदु हरिश्चंद्र और पौराणिक पात्र राजा हरिश्चंद्र के बीच कोई अंतर नहीं समझते थे। लेखक के लिए, ये दोनों ही महान व्यक्तित्व एक समान थे। इस प्रकार की मिश्रित भावना के कारण, उनके मन में भारतेंदु जी के प्रति एक अपूर्व और मधुर श्रद्धा का भाव संचारित होता रहता था, जो उनकी बालसुलभ कल्पना और आदर्शों के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

प्रश्न 3. उपाध्याय बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' की पहली झलक लेखक ने किस प्रकार देखी?

उपाध्याय बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' की पहली झलक लेखक ने किस प्रकार देखी?
Solution: लेखक ने उपाध्याय बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' की पहली झलक मिर्जापुर आने के बाद देखी। उन्हें पता चला कि प्रेमघन जी भारतेंदु जी के मित्र हैं और यहीं रहते हैं। लेखक बालकों की एक मंडली के साथ डेढ़ मील पैदल चलकर एक मकान के सामने पहुँचे। उन्होंने देखा कि मकान का निचला बरामदा खाली था, जबकि ऊपरी बरामदा सघन लताओं से ढका हुआ था। खम्भों के बीच कुछ खाली जगह थी। कुछ देर प्रतीक्षा करने के बाद, लेखक को एक मूर्ति जैसी आकृति दिखाई पड़ी। उस व्यक्ति के दोनों कंधों पर बाल गिरे हुए थे और एक हाथ खम्भे पर टिका हुआ था। देखते ही देखते वह आकृति ओझल हो गई। इस प्रकार, लेखक ने प्रेमघन जी की पहली झलक पाई।

प्रश्न 4. लेखक का हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव किस प्रकार बढ़ता गया?

लेखक का हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव किस प्रकार बढ़ता गया?
Solution: लेखक का हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव कई कारणों से धीरे-धीरे बढ़ता गया। सबसे पहला कारण उनके पिताजी की स्वयं हिंदी साहित्य में रुचि थी। पिताजी के प्रभाव के कारण, लेखक ने बचपन से ही हिंदी अनुवाद, रामचरितमानस और रामचंद्रिका जैसे ग्रंथों का वाचन सुना। इसके अलावा, उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटकों में भी रुचि दिखाई। कॉलेज में पढ़ते समय भी उन्होंने हिंदी की पुस्तकें पढ़ीं। मात्र 16 वर्ष की आयु में ही उन्होंने हिंदी प्रेमियों की मंडली में जाना शुरू कर दिया था, जहाँ वे साहित्यिक चर्चाओं में भाग लेते थे। इन सभी अनुभवों ने मिलकर हिंदी साहित्य के प्रति उनके लगाव को और गहरा किया।

प्रश्न 5. 'नि:संदेह' शब्द को लेकर लेखक ने किस प्रसंग का जिक्र किया है?

'नि:संदेह' शब्द को लेकर लेखक ने किस प्रसंग का जिक्र किया है?
Solution: लेखक ने 'नि:संदेह' शब्द को लेकर एक विशेष प्रसंग का जिक्र किया है जो उनके हिंदी साहित्य की मंडली में शामिल होने के समय का है। उस समय तक लेखक स्वयं को एक लेखक मानने लगे थे और मंडली में नए-पुराने लेखकों की चर्चा होती थी। इन चर्चाओं में अक्सर साहित्यिक भाषा का प्रयोग होता था, जिसमें 'नि:संदेह' जैसे शब्दों का समावेश था। लेखक बताते हैं कि वे जहाँ रहते थे, वहाँ वकीलों और कचहरी के अफसरों की बस्ती थी, जिनकी उर्दू मिश्रित बोली थोड़ी अलग थी। संभवतः इसी भिन्नता या उनकी विशेष बातचीत की शैली के कारण, मंडली के लोगों ने उनका नाम 'नि:संदेह' रख दिया था। लेखक इसी प्रसंग को याद करते हुए इस शब्द का जिक्र करते हैं।

Common mistakes

  • Confusing literary figures mentioned in the text.
  • Misinterpreting the author's childhood sentiments.
  • Overlooking the details of the first meeting with 'Premghan'.
  • Failing to connect the father's influence to the author's literary inclination.

Revision tips

  • Reread the chapter focusing on the author's personal anecdotes.
  • Pay close attention to the descriptions of literary personalities.
  • Summarize the key events and their significance in your own words.
  • Practice answering the questions by recalling the details from the solutions.

Practice MCQs

Q1. लेखक के पिताजी की मुख्य विशेषता क्या थी?

Q2. बचपन में लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र को किससे अभिन्न मानते थे?

Q3. लेखक ने उपाध्याय बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' की पहली झलक कहाँ देखी?

Q4. लेखक का हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव किस कारण बढ़ा?

Q5. लेखक को 'नि:संदेह' नाम किस प्रसंग में मिला?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान कक्षा 12 के हिंदी अंतरा भाग के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 12 'प्रेमघन की छाया स्मृति' पर केंद्रित हैं।

अध्याय 12 'प्रेमघन की छाया स्मृति' में मुख्य रूप से क्या वर्णित है?

इस अध्याय में लेखक अपनी बचपन की स्मृतियों, अपने पिताजी की साहित्यिक रुचियों, भारतेंदु हरिश्चंद्र और उपाध्याय बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' के साथ अपने अनुभवों का वर्णन करते हैं।

लेखक के पिताजी की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?

लेखक के पिताजी फ़ारसी भाषा के ज्ञाता थे, प्राचीन भाषाओं के प्रशंसक थे, हिंदी वाक्यों का फ़ारसी में अनुवाद करते थे, परिवार को रामचरितमानस सुनाते थे और भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटकों के प्रशंसक थे।

लेखक ने 'प्रेमघन' की पहली झलक कैसे देखी?

लेखक ने मिर्जापुर में एक मकान के ऊपरी बरामदे में, जो सघन लताओं से ढका था, कुछ देर इंतजार करने के बाद 'प्रेमघन' की एक झलक देखी, जिसमें वे खम्भे पर एक हाथ रखे हुए थे।

लेखक का हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव कैसे बढ़ा?

पिताजी की साहित्यिक रुचि, बचपन में रामचरितमानस और नाटकों का वाचन सुनने तथा कॉलेज में हिंदी की पुस्तकें पढ़ने से लेखक का हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव बढ़ा।

'नि:संदेह' शब्द से जुड़ा प्रसंग क्या है?

लेखक को हिंदी साहित्य की मंडली में उनकी बातचीत की भाषा के कारण 'नि:संदेह' नाम मिला था, जो उस समय के साहित्यिक माहौल और भाषा के प्रयोग को दर्शाता है।

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