CBSE Class 10 Manika Chapter 4: नास्ति त्यागसमम् सुखम् NCERT Solutions

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This chapter, 'नास्ति त्यागसमम् सुखम्' (There is no happiness like renunciation), from CBSE Class 10 Manika in Hindi, delves into the virtues of a benevolent king, Bodhisattva. The solutions explain the king's immense generosity, his compassion for his subjects, and his deep understanding of true happiness through giving. It highlights how the king established charitable institutions and provided for the needy. The text also explores the king's introspection on the nature of true charity, leading to a divine test by Indra. These NCERT Solutions offer clear explanations, word meanings, grammar exercises, and question-answer formats to help students grasp the moral and linguistic aspects of the chapter, aiding in their exam preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
SubjectManika
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 4

Chapter summary

Chapter 4 of CBSE Class 10 Manika, titled 'नास्ति त्यागसमम् सुखम्', focuses on the story of King Bodhisattva. The NCERT Solutions provided here cover the translation, word meanings, grammar (sandhi, samas, pratyay), and question-answer sections based on the text. It emphasizes the king's charitable nature, his philosophical reflections on giving, and a divine test of his generosity. These solutions aim to enhance students' comprehension of Sanskrit prose and its underlying moral values.

Learning outcomes

  • Understand the story of King Bodhisattva and his charitable deeds.
  • Identify and understand Sanskrit vocabulary and word meanings.
  • Analyze Sanskrit grammar, including sandhi, samas, and pratyay.
  • Answer questions based on the provided Sanskrit passage.
  • Appreciate the concept of renunciation and true happiness through giving.

Topics covered

Paper topics

  • King Bodhisattva's generosity
  • Charitable institutions (Danashalas)
  • Concept of renunciation (Nirāsakti)
  • Divine test of charity
  • Sanskrit grammar: Sandhi
  • Sanskrit grammar: Samas
  • Sanskrit grammar: Pratyay
  • Hindi translation of Sanskrit text
  • Vocabulary building
  • Moral values in literature

Important topics

  • King Bodhisattva's charitable nature
  • Understanding the concept of true happiness through giving
  • Sanskrit grammar exercises (Sandhi, Samas, Pratyay)
  • Hindi translation and comprehension
  • The divine test by Indra

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Questions and Solutions

प्रश्न 1: एकपदेन उत्तरत-

1. क: शिवीनां राजा बभूव? (ii) राजा पुत्रवत् काः पालयति स्म?
Solution:

(i) शिवियों के राजा भगवान बोधिसत्व थे।

(ii) राजा अपनी प्रजाओं का पालन पुत्र की भांति करते थे।

प्रश्न 2: पूर्णवाक्येन उत्तरत-

(i) राजा नगरस्य समन्ततः किम् अकारयत्? (ii) शास्त्रेषु पारंगतः कः आसीत्?
Solution:

(i) राजा ने नगर के चारों ओर धन-धान्य से परिपूर्ण दानशालाएँ बनवाई थीं।

(ii) भगवान बोधिसत्व (या राजा शिवि) शास्त्रों में पारंगत थे।

प्रश्न 3: भाषिककार्यम् -

(i) 'श्रुत्वा' इत्यर्थे अत्र किम् पदम् प्रयुक्तम्?
  • (क) रत: (घ) कारुण्य
(ii) 'आयान्ति स्म' इति क्रियाया: कर्तृपदं किम्?
  • (क) राज्ञ:(ख) देशम्(ग) तम् (घ) जना:
(iii) 'असौ' इति सर्वनामपदस्य प्रयोग: अनुच्छेदे कस्मै अभवत्?
  • (क) प्रजायै (ख) जनेभ्य: (घ) भिक्षुकाय
(iv) 'अभीष्टानि वस्तूनि' इति अनयो: पदयो: विशेष्यपदम् किम्?
  • (क) वस्तु (ख) वस्तूनि (ग) अभीष्टानि (घ) अभीष्टम्
(v) 'भगवान्' इति पदे क: प्रत्यय:?
  • (क) इन् (ख) ठक् (घ) क्तवतु
(vi) 'रत:' इति पदे क: प्रत्यय:?
  • (क) क्त (ख) क्तवतु (ग) क्त्वा (घ) तुमुन्
Solution:

(i) 'श्रुत्वा' के अर्थ में यहाँ 'आकर्ण्य' पद का प्रयोग किया गया है।

(ii) 'आयान्ति स्म' क्रिया का कर्ता पद 'जना:' (लोग) है।

(iii) 'असौ' (वह) सर्वनाम पद का प्रयोग अनुच्छेद में 'राज्ञे' (राजा के लिए) हुआ है।

(iv) 'अभीष्टानि वस्तूनि' में 'वस्तूनि' (वस्तुएँ) विशेष्य पद है, और 'अभीष्टानि' (चाही हुई) विशेषण है।

(v) 'भगवान्' पद में 'मतुप्' प्रत्यय है (भग + मतुप्)।

(vi) 'रत:' पद में 'क्त' प्रत्यय है।

प्रश्न 4: प्रश्निर्माणम्

(i) भगवान् बोधिसत्त्व: शिवीनां राजा बभूव। (ii) सः धन-धान्यसमृद्धाः दानशालाः अकारयत्। (iii) जना: नृपस्य दानशीलतां श्रुत्वा तत्र आगच्छन्। (iv) राजा पुत्रवत् प्रजाः पालयति स्म। (v) दानशालाभ्य: जना: आवश्यकानि वस्तूनि लभन्ते स्म।
Solution:

(i) प्रश्न बनेगा: के शिवीनां राजा बभूव? (कौन शिवियों का राजा हुआ?)

(ii) प्रश्न बनेगा: सः कीदृशाः दानशालाः अकारयत्? (उसने कैसी दानशालाएँ बनवाईं?)

(iii) प्रश्न बनेगा: के नृपस्य दानशीलतां श्रुत्वा तत्र आगच्छन्? (किसने राजा की दानशीलता सुनकर वहाँ आना शुरू किया?)

(iv) प्रश्न बनेगा: राजा काः पुत्रवत् पालयति स्म? (राजा ने किनका पुत्रवत् पालन किया?)

(v) प्रश्न बनेगा: दानशालाभ्यः जनाः कानि लभन्ते स्म? (दानशालाओं से लोग क्या प्राप्त करते थे?)

प्रश्न 5: एकपदेन उत्तरत-

(i) दानशालासु क: विचरति स्म? (ii) के सन्तोषं भजन्ते स्म?
Solution:

(i) दानशालाओं में राजा (बोधिसत्व) विचरते थे।

(ii) धन लाभ मात्र से अर्थी (याचक) संतोष प्राप्त करते थे।

प्रश्न 6: पूर्णवाक्येन उत्तरत-

(i) के सौभाग्यशालिनः? (ii) कथं सकलं ब्रह्माण्डं व्याकुलं सञ्जातम्?
Solution:

(i) वे दानवीर सौभाग्यशाली हैं जिनसे याचक शरीर के अंगों की भी याचना करते हैं।

(ii) राजा को अपने शरीर के अंगों के प्रति भी निरासक्ति (उदासीनता) को जानकर सारा ब्रह्मांड व्याकुल हो गया था।

प्रश्न 7: भाषिककार्यम् –

(i) गद्यांशात् एकम् अव्ययपदं चित्वा वदत।
  • (क) अथ (ख) ते (ग) स (घ) विलोक्य
(ii) 'भजन्ते' अस्य क्रियापदस्य कर्तृपदम् किम्?
  • (क) मम (ख) तु (ग) सन्तोषं (घ) अर्थिन:
(iii) 'समस्तम्' इत्यर्थे अत्र किम् पदम् प्रयुक्तम्?
  • (क) विज्ञाय (ख) सकलं (ग) ब्रह्माण्ड (घ) व्याकुलम्
(iv) 'अर्थिन:' इति पदस्य पर्यायपदम् अनुच्छेदात् एव चित्वा लिखत।
  • (क) याचकाः (ख) राज्ञ: (ग) अर्थिनां (घ) संख्याम्
(v) 'व्याकुलम्' इति कस्य पदस्य विशेषणम्?
  • (क) सञ्जातम् (ख) सकलम् (ग) ब्रह्माण्ड इति पदस्य (घ) निरासक्तिम् इति पदस्य
(vi) 'अर्थिन:' पदे क: प्रत्यय:?
  • (क) मतुप (ख) ठक् (घ) त्व
Solution:

(i) गद्यांश से अव्यय पद 'अथ' है।

(ii) 'भजन्ते' क्रिया का कर्ता पद 'अर्थिन:' (याचक) है।

(iii) 'समस्तम्' के अर्थ में यहाँ 'सकलं' पद का प्रयोग किया गया है।

(iv) 'अर्थिन:' का पर्याय पद अनुच्छेद से 'याचकाः' है।

(v) 'व्याकुलम्' विशेषण पद 'ब्रह्माण्ड' (ब्रह्मांड) के लिए प्रयुक्त हुआ है।

(vi) 'अर्थिन:' पद में 'इन्' प्रत्यय है (अर्थ + इन्)।

प्रश्न 8: राजा के इस प्रकार विचार करने पर उसकी दानशीलता की परीक्षा लेने के लिए देवों का स्वामी इन्द्र एक अंधे याचक का रूप धारण कर उसके सामने बोला–हे राजन्! आपकी दानवीरता को सुनकर आशावान होकर मैं आपके समीप आया हूँ। हे महाराज! मैं आँखों से अंधा सूर्य, चाँद, तारों से सजे हुए इस संसार को कैसे देखूँ?

राजा के इस प्रकार विचार करने पर उसकी दानशीलता की परीक्षा लेने के लिए देवों का स्वामी इन्द्र एक अंधे याचक का रूप धारण कर उसके सामने बोला–हे राजन्! आपकी दानवीरता को सुनकर आशावान होकर मैं आपके समीप आया हूँ। हे महाराज! मैं आँखों से अंधा सूर्य, चाँद, तारों से सजे हुए इस संसार को कैसे देखूँ?
Solution:

यह प्रश्न राजा के विचारों और इन्द्र द्वारा उसकी परीक्षा लेने के प्रसंग का वर्णन करता है। राजा जब अपनी दानशीलता पर विचार कर रहा था, तब देवराज इन्द्र ने उसकी परीक्षा लेने का निश्चय किया। इन्द्र ने एक नेत्रहीन याचक का वेश धारण किया और राजा के समक्ष उपस्थित होकर अपनी विवशता व्यक्त की। उसने कहा कि आपकी दानवीरता की ख्याति सुनकर मैं यहाँ आया हूँ, परन्तु आँखों से अंधा होने के कारण मैं सूर्य, चंद्रमा और तारों से सुशोभित इस संसार को कैसे देख पाऊंगा। इस प्रकार इन्द्र ने राजा से सहायता की याचना की।

Common mistakes

  • Incorrectly identifying grammatical components like sandhi or samas.
  • Misinterpreting the meaning of Sanskrit words in context.
  • Struggling to form grammatically correct answers in Sanskrit.
  • Confusing the roles of different characters in the narrative.

Revision tips

  • Read the Hindi translation carefully to grasp the story's essence.
  • Memorize the Sanskrit-to-Hindi word meanings for better comprehension.
  • Practice identifying sandhi, samas, and pratyay in the given text.
  • Attempt all questions, focusing on constructing answers from the passage.
  • Discuss the moral lessons of the chapter with classmates.

Practice MCQs

Q1. भगवान बोधिसत्व किस वंश के राजा हुए?

Q2. राजा ने नगर के चारों ओर क्या बनवाया था?

Q3. राजा को अपने शरीर के अंगों के प्रति क्या विज्ञाय ब्रह्मांड व्याकुल हो गया?

Q4. इन्द्र ने किस रूप में राजा की दानशीलता की परीक्षा ली?

Q5. पाठ के अनुसार, 'समस्तम्' का पर्यायवाची पद क्या है?

Frequently asked questions

यह पाठ किस बारे में है?

यह पाठ 'नास्ति त्यागसमम् सुखम्' शिवियों के राजा बोधिसत्व की दानशीलता, करुणा और त्याग के महत्व के बारे में है। इसमें उनकी प्रजा-पालन और एक दैवीय परीक्षा का वर्णन है।

इस पाठ में कौन से व्याकरणिक बिंदु शामिल हैं?

इस पाठ में संधि-विच्छेद (जैसे गुण संधि, यण संधि), समास (जैसे तत्पुरुष, बहुब्रीहि) और प्रत्यय (जैसे मतुप्, क्त, ल्यप्) जैसे व्याकरणिक विषयों को शामिल किया गया है।

क्या इस पाठ में संस्कृत से हिंदी अनुवाद दिया गया है?

हाँ, पाठ के प्रत्येक गद्यांश का विस्तृत हिंदी अनुवाद प्रदान किया गया है ताकि छात्र आसानी से विषय वस्तु को समझ सकें।

यह NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करेंगे?

ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ, शब्दावली, व्याकरण और प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करेंगे, जिससे वे परीक्षा की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकेंगे।

पाठ का मुख्य संदेश क्या है?

पाठ का मुख्य संदेश यह है कि सच्ची खुशी त्याग और दान में निहित है, न कि केवल धन संचय में। यह राजा की निस्वार्थता और करुणा पर भी प्रकाश डालता है।

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