CBSE Class 10 Manika Chapter 3 NCERT Solutions
This resource provides detailed NCERT Solutions for Chapter 3 of CBSE Class 10 Manika, focusing on Sanskrit verses that impart moral and ethical guidance. The solutions explain key concepts such as identifying what is worthy of acceptance (उपादेयम्) and what should be rejected (हेयम्), defining the ideal qualities of a guru (गुरु), and understanding the nature of true wisdom and virtue. It covers the meaning of words like 'सततम्' (continuous) and 'उद्यतः' (ready), and analyzes grammatical aspects like compounds (समास) and sandhi. The solutions also delve into identifying the most beneficial path (पथ्यतर), the definition of purity (शुचि), the characteristics of an intelligent person (पण्डित), and what constitutes poison (विष), specifically the insult of teachers (गुरुषु अवधीरणा). These solutions are designed to help students grasp the nuances of the Sanskrit text and prepare effectively for their exams.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | Manika |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 3 |
Chapter summary
Chapter 3 of CBSE Class 10 Manika NCERT Solutions focuses on ethical teachings presented through Sanskrit verses. It clarifies what is acceptable and what is to be avoided, defines the role and qualities of a true guru, and explores concepts of righteousness, purity, wisdom, and the dangers of disrespecting teachers. The solutions break down the verses, providing word meanings, prose order, compound analysis, and sandhi explanations, aiding students in understanding the text's deeper meaning and grammatical structure.
Learning outcomes
- Understand the meaning of 'उपादेयम्' (acceptable) and 'हेयम्' (avoidable).
- Identify the qualities of an ideal guru.
- Define righteousness ('धर्म') as the most beneficial path.
- Understand the concept of purity ('शुचि') and wisdom ('पण्डित').
- Recognize disrespect towards teachers ('गुरुषु अवधीरणा') as a form of poison.
- Analyze Sanskrit grammar, including compounds and sandhi.
Topics covered
Paper topics
- Acceptable and Avoidable Actions
- Qualities of a Guru
- Definition of Righteousness
- Concept of Purity
- Characteristics of a Wise Person
- The Danger of Disrespecting Teachers
- Sanskrit Grammar: Compounds (Samas)
- Sanskrit Grammar: Sandhi
- Word Meanings (Sanskrit-Hindi-English)
- Verse Translation and Prose Order
- Ethical Teachings
- Moral Values
Important topics
- Qualities of a Guru
- What is Acceptable (Upaadeyam) and Avoidable (Heyam)
- Righteousness (Dharma) as the Best Path
- Disrespecting Teachers (Guru Avadheerna) as Poison
- Grammatical Analysis (Samas and Sandhi)
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- हेयम् किम्? (त्यागने योग्य क्या है?)
- अत्र किम् सम्बोधनपदम्? (यहाँ कौन सा सम्बोधन पद है?)
यहाँ पहले श्लोक पर आधारित एक-शब्द उत्तर वाले प्रश्न दिए गए हैं:
- हेयम् अकार्यम्। (त्यागने योग्य बुरा कार्य है।)
स्पष्टीकरण: श्लोक में पूछा गया है, "हेयमपि च किम्?" (त्यागने योग्य क्या है?) और उत्तर दिया गया है "अकार्यम्" (बुरा कार्य)।
- अत्र सम्बोधनपदम् 'भगवन्'। (यहाँ सम्बोधन पद 'भगवन्' है।)
स्पष्टीकरण: श्लोक की शुरुआत "भगवन् किमुपादेयम्?" से होती है, जहाँ 'भगवन्' ईश्वर को सम्बोधित करने के लिए प्रयुक्त हुआ है।
प्रश्न 2
- उपादेयम् किम् भवति? (ग्रहण करने योग्य क्या होता है?)
- गुरु: क: कथ्यते? (गुरु किसे कहा जाता है?)
यहाँ पहले श्लोक पर आधारित पूर्ण वाक्य में उत्तर देने वाले प्रश्न दिए गए हैं:
- उपादेयम् गुरुवचनं भवति। (ग्रहण करने योग्य गुरु के वचन होते हैं।)
स्पष्टीकरण: श्लोक के अनुसार, गुरु के वचन ही उपादेय (ग्रहण करने योग्य) होते हैं।
- सः गुरुः कथ्यते यः अधिगततत्त्वः शिष्यहितायोद्यतः सततम् अस्ति। (गुरु उसे कहा जाता है जो तत्त्वों को जानने वाला है और निरंतर शिष्य के हित के लिए उद्यत (तैयार) रहता है।)
स्पष्टीकरण: श्लोक में गुरु की परिभाषा दी गई है: "अधिगततत्त्वः शिष्यहितायोद्यतः सततम्"।
प्रश्न 3
- 'निरन्तरम्' इत्यस्य शब्दस्य अर्थे श्लोके कि पदं प्रयुक्तम्? ('निरन्तरम्' इस शब्द के अर्थ में श्लोक में कौन सा पद प्रयुक्त हुआ है?)
- (क) सततम् (ख) अकार्यम् (ग) उद्यत: (घ) हेयम्
- 'तत्पर:' इति पदस्य अत्र पर्याय प्रयुक्तम्? ('तत्पर:' इस पद का यहाँ पर्यायवाची प्रयुक्त हुआ है?)
- (क) अधिगततत्त्व: (ख) अधिगत: (ग) हेयम् (घ) उद्यत:
- 'उपादेयम्' इति पदस्य विलोमपद अत्र किम्? ('उपादेयम्' इस पद का विलोम पद यहाँ क्या है?)
- (क) सततम् (ख) हेयम् (ग) अकार्यम् (घ) तत्त्व:
- 'शिष्यहितायोद्यतः' इति पदस्य सन्धिविच्छेदं कृत्वा लिखत। ('शिष्यहितायोद्यतः' इस पद का संधि-विच्छेद करके लिखें।)
- (क) शिष्यहिता + ओद्यत: (ख) शिष्यहितायो + द्यत:
- (ग) शिष्यहिताय + उद्यत: (घ) शिष्यहिताय + ओद्यत:
यहाँ श्लोक से संबंधित भाषाई कार्य के प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं:
- (क) सततम्
स्पष्टीकरण: श्लोक में 'सततम्' शब्द का प्रयोग 'निरन्तरम्' (लगातार) के अर्थ में हुआ है।
- (घ) उद्यत:
स्पष्टीकरण: 'तत्पर:' का अर्थ है तैयार रहना, और श्लोक में गुरु के लिए 'उद्यतः' (उद्यत रहने वाला, तैयार रहने वाला) पद का प्रयोग किया गया है, जो 'तत्पर:' का पर्यायवाची है।
- (ख) हेयम्
स्पष्टीकरण: 'उपादेयम्' का अर्थ है ग्रहण करने योग्य, जबकि 'हेयम्' का अर्थ है त्यागने योग्य। ये दोनों एक दूसरे के विलोम (Antonyms) हैं।
- (ग) शिष्यहिताय + उद्यतः
स्पष्टीकरण: 'शिष्यहितायोद्यतः' का संधि-विच्छेद 'शिष्यहिताय + उद्यतः' होगा। यहाँ 'अ' (हिताय का 'अ') और 'उ' (उद्यतः का 'उ') मिलकर 'ओ' (गुण संधि) बनाते हैं, जो कि 'हितायो' में दिखाई देता है। यह गुण संधि का उदाहरण है।
प्रश्न 4
- गुरुवचनम् उपादेयं भवति। (गुरु के वचन ग्रहण करने योग्य होते हैं।)
- अकार्यं हेयम् अस्ति। (बुरा कार्य त्यागने योग्य है।)
- गुरु: शिष्याणां हिताय तत्पर: भवति। (गुरु शिष्यों के हित के लिए तत्पर रहता है।)
- य: तत्त्वान् जानाति स: गुरु: अस्ति। (जो तत्त्वों को जानता है, वह गुरु है।)
दिए गए वाक्यों के आधार पर प्रश्न निर्माण इस प्रकार है:
- किम् उपादेयं भवति? (क्या ग्रहण करने योग्य होता है?)
स्पष्टीकरण: 'गुरुवचनम्' (कर्ता) के स्थान पर 'किम्' (क्या) रखकर प्रश्न बनाया गया है।
- किं हेयम् अस्ति? (क्या त्यागने योग्य है?)
स्पष्टीकरण: 'अकार्यम्' (कर्ता) के स्थान पर 'किम्' (क्या) रखकर प्रश्न बनाया गया है।
- गुरु: केषाम् हिताय तत्पर: भवति? (गुरु किनके हित के लिए तत्पर रहता है?)
स्पष्टीकरण: 'शिष्याणाम्' (संबंध कारक) के स्थान पर 'केषाम्' (किनका) रखकर प्रश्न बनाया गया है।
- कः गुरुः अस्ति? (कौन गुरु है?)
स्पष्टीकरण: 'यः तत्त्वान् जानाति सः' (जो तत्त्वों को जानता है वह) के स्थान पर 'कः' (कौन) रखकर प्रश्न बनाया गया है।
प्रश्न 5
हिंदी अनुवाद (Hindi Translation): अधिक कल्याणकारी क्या है? धर्म। इस संसार में पवित्र कौन है? जिसका मन शुद्ध है। पण्डित कौन है? विवेकवान्। विष क्या है? गुरुओं की अवहेलना।
यह प्रश्न दूसरे श्लोक पर आधारित है, जिसमें जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रश्न और उत्तर दिए गए हैं।
श्लोक का भावार्थ:
- पथ्यतरः कः? (सबसे अधिक कल्याणकारी क्या है?) उत्तर: धर्मः (धर्म)।
- इह शुचिः कः? (इस संसार में पवित्र कौन है?) उत्तर: यस्य मानसं शुद्धम् (जिसका मन शुद्ध है)।
- पण्डितः कः? (पण्डित कौन है?) उत्तर: विवेकी (विवेकवान्)।
- विषम् किम्? (विष क्या है?) उत्तर: गुरुषु अवधीरणा (गुरुओं की अवहेलना)।
व्याकरणिक बिंदु:
- समास:
- 'शिष्यहिताय' - शिष्याणाम् हिताय (षष्ठी तत्पुरुष समास)।
- 'गुरुवचनम्' - गुरो: वचनम् (षष्ठी तत्पुरुष समास)।
- 'अकार्यम्' - न कार्यम् (नञ् तत्पुरुष समास)।
- 'अधिगततत्त्वः' - अधिगतम् तत्त्वं येन सः (बहुव्रीहि समास)।
- सन्धि-विच्छेदः:
- 'हितायोद्यतः' - हिताय + उद्यतः (गुण सन्धि)।
- 'को गुरुः' - कः + गुरुः (उत्व विसर्ग सन्धि)।
- प्रत्यय:
- 'भगवन्' - भग + मतुप्।
- 'हेयम्' - हा + यत्।
यह श्लोक हमें धर्म के मार्ग पर चलने, मन को शुद्ध रखने, विवेक का प्रयोग करने और गुरुओं का सम्मान करने का महत्व सिखाता है।
Common mistakes
- Confusing synonyms or antonyms of key Sanskrit terms.
- Incorrectly identifying compound words or sandhi in Sanskrit.
- Misinterpreting the deeper ethical meaning of the verses.
- Difficulty in reconstructing the prose order from the verse.
Revision tips
- Focus on understanding the core ethical message of each verse.
- Memorize the meanings of key Sanskrit terms like उपादेयम्, हेयम्, and अवधीरणा.
- Practice identifying compound words and sandhi as explained in the solutions.
- Review the prose order (अन्वय) to grasp the sentence structure.
- Use the Hindi translations to reinforce your understanding of the Sanskrit text.
Practice MCQs
Q1. श्लोक के अनुसार, त्यागने योग्य क्या है?
Explanation: श्लोक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 'हेयम् अपि च किम्? अकार्यम्', जिसका अर्थ है कि बुरा कार्य त्यागने योग्य है।
Q2. एक आदर्श गुरु की क्या विशेषता बताई गई है?
Explanation: श्लोक के अनुसार, गुरु वह है जिसने तत्त्वों को जान लिया है और जो निरंतर शिष्य के कल्याण के लिए उद्यत (तत्पर) रहता है।
Q3. दूसरे श्लोक के अनुसार, सबसे अधिक कल्याणकारी (पथ्यतर) क्या है?
Explanation: दूसरे श्लोक में पूछा गया है 'कः पथ्यतरः?' और उत्तर दिया गया है 'धर्मः', जिसका अर्थ है कि धर्म सबसे अधिक कल्याणकारी है।
Q4. दूसरे श्लोक में 'विष' किसे कहा गया है?
Explanation: श्लोक में प्रश्न 'किं विषम्?' का उत्तर 'अवधीरणा गुरुषु' दिया गया है, जिसका अर्थ है गुरुओं का अपमान विष के समान है।
Q5. 'निरन्तरम्' शब्द के अर्थ में श्लोक में कौन सा पद प्रयुक्त हुआ है?
Explanation: पहले श्लोक के अनुवाद और अन्वय में 'सततम्' शब्द का प्रयोग 'निरन्तरम्' के अर्थ में किया गया है।
Frequently asked questions
यह संसाधन किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह संसाधन CBSE कक्षा 10 की 'मनिका' (संस्कृत) पुस्तक के अध्याय 3 के लिए है।
अध्याय 3 में मुख्य रूप से किन नैतिक मूल्यों पर जोर दिया गया है?
अध्याय 3 मुख्य रूप से यह सिखाता है कि क्या स्वीकार करना चाहिए (उपादेयम्) और क्या त्यागना चाहिए (हेयम्), एक आदर्श गुरु के गुण, धर्म का महत्व, पवित्रता, विवेक और गुरुओं का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
क्या इन समाधानों में व्याकरणिक विश्लेषण शामिल है?
हाँ, इन समाधानों में 'समास' (Compounds) और 'सन्धि-विच्छेदः' (Sandhi Disjunction) जैसे व्याकरणिक पहलुओं का विश्लेषण शामिल है।
श्लोक में 'विष' किसे कहा गया है?
श्लोक में गुरुओं का अपमान या अवहेलना ('अवधीरणा गुरुषु') को विष के समान बताया गया है।
यह समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?
यह समाधान श्लोकों के अर्थ, शब्दार्थ, अन्वय और व्याकरणिक विश्लेषण को स्पष्ट करके छात्रों को पाठ को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देने में मदद करेगा।
क्या समाधानों में मूल श्लोक के प्रश्न शामिल हैं?
हाँ, सभी मूल प्रश्न ज्यों के त्यों रखे गए हैं, और उनके समाधानों को स्पष्ट और विस्तृत तरीके से फिर से लिखा गया है।
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