कक्षा 10 समकालीन भारत - 2: जल संसाधन NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 के लिए 'समकालीन भारत - 2' पुस्तक के अध्याय 3 'जल संसाधन' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें जल की कमी के कारणों, बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लाभ और हानियों, और वर्षा जल संचयन की पारंपरिक और आधुनिक विधियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों को स्पष्टता और सरलता से समझाया गया है, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद मिलेगी। यह संसाधन छात्रों को जल के नवीकरणीय स्वरूप, जल दुर्लभता के मुद्दे और जल संरक्षण के महत्व को समझने में सहायता करता है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectसमकालीन भारत - 2
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter3. जल संसाधन

Chapter summary

कक्षा 10 के 'समकालीन भारत - 2' के अध्याय 3 'जल संसाधन' के ये NCERT समाधान जल के महत्व, जल दुर्लभता के कारणों और बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के प्रभावों पर केंद्रित हैं। इसमें राजस्थान जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन की पारंपरिक विधियों और आधुनिक तकनीकों का भी विस्तृत विवरण दिया गया है। ये समाधान छात्रों को जल संरक्षण की आवश्यकता और विभिन्न विधियों को समझने में मदद करते हैं।

Learning outcomes

  • जल को एक नवीकरण योग्य संसाधन के रूप में समझना।
  • जल दुर्लभता के कारणों और प्रभावों की पहचान करना।
  • बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के लाभों और हानियों का विश्लेषण करना।
  • राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन की विधियों की व्याख्या करना।
  • परंपरागत और आधुनिक जल संरक्षण तकनीकों की तुलना करना।

Topics covered

Paper topics

  • जल संसाधन का परिचय
  • जल की नवीकरणीय प्रकृति
  • जल दुर्लभता: कारण और प्रभाव
  • बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ: लाभ और हानियाँ
  • वर्षा जल संग्रहण की पारंपरिक विधियाँ
  • आधुनिक वर्षा जल संग्रहण तकनीकें
  • जल संरक्षण का महत्व
  • राजस्थान में जल प्रबंधन

Important topics

  • जल दुर्लभता के कारण
  • बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लाभ और हानियाँ
  • वर्षा जल संग्रहण की विधियाँ (पारंपरिक और आधुनिक)
  • जल को नवीकरण योग्य संसाधन के रूप में समझना

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Questions and Solutions

प्रश्न 1 (i)

नीचे दी गई सूचना के आधार पर स्थितियों को जल की कमी से प्रभावित या जल की कमी से अप्रभावित में वर्गीकृत कीजिए: (क) अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र, (ख) अधिक वर्षा और अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र, (ग) अधिक वर्षा वाले परंतु अत्यधिक प्रदूषित जल क्षेत्र, (घ) कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र।
Solution:

जल की कमी से प्रभावित या अप्रभावित क्षेत्रों का वर्गीकरण इस प्रकार है:

  • (क) अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र: जल की कमी से अप्रभावित। इन क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा होने के कारण जल की उपलब्धता सामान्यतः अच्छी होती है।
  • (ख) अधिक वर्षा और अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र: जल की कमी से प्रभावित। अधिक जनसंख्या के कारण जल की मांग बढ़ जाती है, जो अधिक वर्षा के बावजूद जल की कमी पैदा कर सकती है।
  • (ग) अधिक वर्षा वाले परंतु अत्यधिक प्रदूषित जल क्षेत्र: जल की कमी से प्रभावित। जल की अधिकता होने पर भी, अत्यधिक प्रदूषण के कारण उपलब्ध जल पीने योग्य या उपयोग योग्य नहीं रहता, जिससे जल की कमी की स्थिति उत्पन्न होती है।
  • (घ) कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र: जल की कमी से प्रभावित। कम वर्षा के कारण जल की उपलब्धता स्वाभाविक रूप से कम होती है, जो जनसंख्या के लिए अपर्याप्त हो सकती है।

प्रश्न 1 (ii)

नीचे दी गई सूचना के आधार पर स्थितियों को जल की कमी से प्रभावित या जल की कमी से अप्रभावित में वर्गीकृत कीजिए: (क) अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र, (ख) अधिक वर्षा और अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र, (ग) अधिक वर्षा वाले परंतु अत्यधिक प्रदूषित जल क्षेत्र, (घ) कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र।
Solution:

यह प्रश्न पिछले प्रश्न का ही भाग है, जिसमें बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के पक्ष में दिए गए तर्कों का मूल्यांकन करना है। दिए गए विकल्पों में से, वह विकल्प जो परियोजना के पक्ष में तर्क नहीं है, उसकी पहचान करनी है।

विकल्प (ग) "बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत् स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है" यह परियोजना के विपक्ष में एक महत्वपूर्ण तर्क है, न कि पक्ष में। अन्य विकल्प (क, ख, घ) परियोजना के लाभों को दर्शाते हैं।

उत्तर: (ग) बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत् स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है।

प्रश्न 1 (iii)

यहां कुछ गलत वक्तव्य दिए गए हैं। इसमें गलती पहचानें और दोबारा लिखें: (क) शहरों की बढ़ती संख्या उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों के सही उपयोग में मदद की है। (ख) नदियों पर बांध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित नहीं होता। (ग) गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान शहरी क्षेत्रों में अधिक जलापूर्ति करने पर भी किसान नहीं भड़के। (घ) आज राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध पेयजल के बावजूद छत वर्षा जल संग्रहण लोकप्रिय हो रहा है।
Solution:

दिए गए कथनों में गलतियों को पहचानकर उन्हें सही रूप में इस प्रकार लिखा गया है:

  • (क) गलत कथन: शहरों की बढ़ती संख्या उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों के सही उपयोग में मदद की है। सही कथन: शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता, सघन जनसंख्या और शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों के अति-दोहन को बढ़ावा दिया है, न कि सही उपयोग में मदद की है।
  • (ख) गलत कथन: नदियों पर बांध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित नहीं होता। सही कथन: नदियों पर बांध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव निश्चित रूप से प्रभावित होता है। बांध जल के प्रवाह को रोकते हैं और तलछट को जमा कर देते हैं।
  • (ग) गलत कथन: गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान शहरी क्षेत्रों में अधिक जलापूर्ति करने पर भी किसान नहीं भड़के। सही कथन: गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान, जब शहरी क्षेत्रों में अधिक जलापूर्ति की गई, तो किसानों में असंतोष फैल गया था क्योंकि उन्हें पानी की कमी का सामना करना पड़ा।
  • (घ) गलत कथन: आज राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध पेयजल के बावजूद छत वर्षा जल संग्रहण लोकप्रिय हो रहा है। सही कथन: आज राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध पेयजल के कारण, छत वर्षा जल संग्रहण की लोकप्रियता कम हो रही है, क्योंकि लोग बाहरी स्रोतों पर अधिक निर्भर हो गए हैं।

प्रश्न 2 (i)

व्याख्या करें कि जल किस प्रकार नवीकरण योग्य संसाधन है? (लगभग 30 शब्दों में)
Solution:

जल एक नवीकरण योग्य संसाधन है क्योंकि यह हाइड्रोलॉजिकल चक्र (जल चक्र) के माध्यम से लगातार नवीनीकृत होता रहता है। समुद्र से वाष्पीकरण, वर्षा और फिर नदियों व अन्य स्रोतों में वापसी की यह प्रक्रिया जल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करती है।

प्रश्न 2 (ii)

जल दुर्लभता क्या है और इसके मुख्य कारण क्या हैं? (लगभग 30 शब्दों में)
Solution:

जल दुर्लभता तब होती है जब किसी क्षेत्र में पानी की उपलब्धता, उसकी मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त हो जाती है। इसके मुख्य कारण जनसंख्या वृद्धि, पानी की बढ़ती मांग, और जल संसाधनों का असमान वितरण हैं।

प्रश्न 2 (iii)

बहुउद्देशीय परियोजनाओं से होने वाले लाभ और हानि की तुलना करें। (लगभग 30 शब्दों में)
Solution:

बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लाभों में सिंचाई, बिजली उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण और नौकायन शामिल हैं। हानियों में बड़े पैमाने पर विस्थापन, स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का विनाश और आजीविका का नुकसान शामिल है।

प्रश्न 3 (i)

राजस्थान के अर्ध शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है? व्याख्या कीजिए। (लगभग 120 शब्दों में)
Solution:

राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में, पीने के पानी के भंडारण के लिए पारंपरिक रूप से 'टांका' नामक बड़े टैंक बनाए जाते हैं। ये घर के मुख्य भाग या आंगन में बनाए जाते हैं और ढलान वाली छतों से पाइपों द्वारा जुड़े होते हैं। वर्षा का पहला पानी छतों और पाइपों को साफ करने के लिए बहा दिया जाता है, और बाद का पानी इन टांकों में जमा किया जाता है। इस संग्रहीत जल का उपयोग अगली वर्षा ऋतु तक किया जाता है, जो अन्य स्रोतों के सूख जाने पर भी एक विश्वसनीय स्रोत बना रहता है। ये टांके अपने आसपास के कमरों को ठंडा रखने में भी मदद करते हैं, जिससे ऊर्जा की बचत होती है।

प्रश्न 3 (ii)

परंपरागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक काल में अपनाकर जल संरक्षण एवं भंडारण किस प्रकार किया जा रहा है? (लगभग 120 शब्दों में)
Solution:

प्राचीन काल से ही लोगों को वर्षा के पैटर्न और मिट्टी के गुणों का गहरा ज्ञान था, जिसके आधार पर उन्होंने जल संग्रहण के कई तरीके विकसित किए थे। मेघालय की राजधानी शिलांग में, लगभग हर घर में छत वर्षा जल संग्रहण प्रणाली प्रचलित है। भारत के विभिन्न हिस्सों में, छत जल संरक्षण जैसी पारंपरिक विधियाँ आज भी लोकप्रिय हो रही हैं। मैसूर के गेंदाथुर गाँव में कई परिवारों ने छत पर वर्षा जल संचयन को अपनाया है, जिससे गाँव जल-समृद्ध हुआ है। तमिलनाडु राज्य ने तो सभी घरों में छत पर वर्षा जल संचयन संरचनाओं को अनिवार्य कर दिया है, और इसका पालन न करने वालों पर जुर्माना लगाया जाता है। ये विधियाँ आधुनिक समय में भी जल संरक्षण और भंडारण के प्रभावी साधन बनी हुई हैं।

Common mistakes

  • जल को केवल एक सीमित संसाधन मानना, जबकि यह नवीकरण योग्य है।
  • बहुउद्देशीय परियोजनाओं के नकारात्मक प्रभावों को अनदेखा करना।
  • वर्षा जल संचयन के महत्व को कम आंकना।
  • जल दुर्लभता के कारणों को केवल प्राकृतिक कारकों तक सीमित रखना।

Revision tips

  • जल दुर्लभता के विभिन्न कारणों को सूचीबद्ध करें और प्रत्येक के प्रभाव को समझें।
  • बहुउद्देशीय परियोजनाओं के पक्ष और विपक्ष में तर्कों की एक तालिका बनाएं।
  • राजस्थान में वर्षा जल संचयन की प्रक्रिया को चित्र बनाकर समझें।
  • जल संरक्षण के लिए पारंपरिक और आधुनिक विधियों के बीच अंतर स्पष्ट करें।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से कौन सा क्षेत्र जल की कमी से अप्रभावित माना जा सकता है?

Q2. बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के पक्ष में कौन सा तर्क नहीं दिया गया है?

Q3. शहरी जीवन शैली जल संसाधनों के किस पहलू को प्रभावित करती है?

Q4. जल को नवीकरण योग्य संसाधन क्यों माना जाता है?

Q5. निम्नलिखित में से कौन सा जल दुर्लभता का कारण नहीं है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 के लिए 'जल संसाधन' अध्याय के NCERT समाधान क्या कवर करते हैं?

ये समाधान जल को एक नवीकरण योग्य संसाधन के रूप में समझाते हैं, जल दुर्लभता के कारणों और प्रभावों पर चर्चा करते हैं, बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के लाभ-हानि की तुलना करते हैं, और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण की पारंपरिक और आधुनिक विधियों की व्याख्या करते हैं।

जल दुर्लभता के मुख्य कारण क्या हैं?

जल दुर्लभता के मुख्य कारणों में जनसंख्या में वृद्धि, पानी की बढ़ती मांग, पानी का असमान वितरण, और कुछ क्षेत्रों में कम वर्षा शामिल हैं।

बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के क्या लाभ हैं?

इन परियोजनाओं से सिंचाई, बिजली उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, अंतर्देशीय नौकायन और मछली पालन जैसे कई लाभ मिलते हैं।

राजस्थान में वर्षा जल संग्रहण क्यों महत्वपूर्ण है?

राजस्थान जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में, जहाँ वर्षा कम होती है और जल स्रोत सीमित होते हैं, वर्षा जल संग्रहण पीने के पानी का एक विश्वसनीय स्रोत प्रदान करता है और जल की कमी को दूर करने में मदद करता है।

क्या जल वास्तव में एक नवीकरण योग्य संसाधन है?

हाँ, जल एक नवीकरण योग्य संसाधन है क्योंकि यह हाइड्रोलॉजिकल चक्र के माध्यम से लगातार नवीनीकृत होता रहता है। हालाँकि, इसका अत्यधिक उपयोग और प्रदूषण इसके नवीकरण की दर को प्रभावित कर सकता है।

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