कक्षा 10 विज्ञान NCERT समाधान: अध्याय 5 - खनिज तथा ऊर्जा संसाधन
यह पृष्ठ कक्षा 10 के लिए 'समकालीन भारत - 2' पुस्तक के अध्याय 5, 'खनिज तथा ऊर्जा संसाधन' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें बहुविकल्पीय प्रश्न, लघु उत्तरीय प्रश्न और विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं। समाधान खनिजों के वर्गीकरण, जैसे लौह और अलौह खनिज, तथा ऊर्जा के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोतों के बीच अंतर स्पष्ट करते हैं। यह खनिजों के निर्माण की प्रक्रियाओं, विशेष रूप से आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में, और भारत में कोयले के वितरण पर भी प्रकाश डालता है। इसके अतिरिक्त, यह सौर ऊर्जा के बढ़ते महत्व और खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी संबोधित करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए विषय की गहरी समझ विकसित करने और महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने में सहायता करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | समकालीन भारत - 2 |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 5. खनिज तथा ऊर्जा संसाधन |
Chapter summary
यह खंड कक्षा 10 के लिए 'खनिज तथा ऊर्जा संसाधन' अध्याय के NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें खनिजों के प्रकार, उनके निर्माण की प्रक्रियाएं (जैसे आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में), और भारत में कोयले के वितरण जैसे विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही, ऊर्जा के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोतों के बीच अंतर, सौर ऊर्जा का महत्व और खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई है। यह छात्रों को परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने में मदद करता है।
Learning outcomes
- खनिजों के प्रकारों और उनके वर्गीकरण को समझना।
- आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में खनिजों के निर्माण की प्रक्रिया का वर्णन करना।
- भारत में कोयले के वितरण को समझना।
- ऊर्जा के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोतों के बीच अंतर स्पष्ट करना।
- सौर ऊर्जा के महत्व और भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण करना।
- खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता को समझना और उसके उपाय बताना।
Topics covered
Paper topics
- खनिज क्या हैं
- खनिजों का वर्गीकरण (लौह और अलौह)
- चट्टानों में खनिजों का निर्माण (आग्नेय, कायांतरित, तलछटी)
- भारत में कोयले का वितरण
- ऊर्जा के पारंपरिक स्रोत
- ऊर्जा के गैर-पारंपरिक स्रोत
- सौर ऊर्जा का महत्व
- खनिजों का संरक्षण
Important topics
- खनिजों का वर्गीकरण और निर्माण
- भारत में कोयले का वितरण
- ऊर्जा के पारंपरिक बनाम गैर-पारंपरिक स्रोत
- खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता
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Questions and Solutions
प्रश्न 1 (बहुविकल्पीय प्रश्न)
निम्नलिखित प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनिए:
- निम्नलिखित में से कौन सा खनिज अपक्षयित पदार्थ के अवशिष्ठ भार को त्यागता हुआ चट्टानों के अपघटन से बनता है ?
- (क) कोयला
- (ख) बॉक्साइट
- (ग) सोना
- (घ) जस्ता
- झारखंड में स्थित कोडरमा निम्नलिखित में से किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है ?
- (क) बॉक्साइट
- (ख) अभ्रक
- (ग) लौह अयस्क
- (घ) तांबा
- निम्नलिखित चट्टानों में से किस चट्टान के स्तरों में खनिजों का निक्षेपण और संचयन होता है?
- (क) तलछटी चट्टाने
- (ख) कायांतरित चट्टान
- (ग) आग्नेय चट्टान
- (घ) इनमें से कोई नहीं
- मोनाजाइट रेत में निम्नलिखित में से कौन सा खनिज पाया जाता है ?
- (क) खनिज तेल
- (ख) यूरेनियम
- (ग) थोरियम
- (घ) कोयला
यहाँ बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर दिए गए हैं:
- (i) (ख) बॉक्साइट: बॉक्साइट एक अवशिष्ट खनिज है जो चट्टानों के अपक्षय और विघटन से बनता है। यह एल्यूमीनियम का अयस्क है।
- (ii) (ख) अभ्रक: झारखंड का कोडरमा क्षेत्र अभ्रक (माइका) के उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध है और इसे 'अभ्रक की राजधानी' भी कहा जाता है।
- (iii) (क) तलछटी चट्टाने: खनिजों का निक्षेपण और संचयन मुख्य रूप से तलछटी चट्टानों की परतों में होता है, जैसे कोयला, लौह अयस्क आदि।
- (iv) (ग) थोरियम: मोनाजाइट रेत थोरियम का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो एक दुर्लभ पृथ्वी तत्व है और इसका उपयोग परमाणु ऊर्जा उत्पादन में किया जाता है।
प्रश्न 2 (लघु उत्तरीय प्रश्न)
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:
- लौह और अलौह खनिज में क्या अंतर है?
- परंपरागत तथा गैर-परंपरागत ऊर्जा साधनों में क्या अंतर है?
- खनिज क्या है?
- आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता है?
- हमें खनिजों के संरक्षण की क्यों आवश्यकता है?
(i) लौह और अलौह खनिज में अंतर:
लौह खनिज वे होते हैं जिनमें लोहे का अंश पाया जाता है, जैसे लौह अयस्क, मैंगनीज आदि। अलौह खनिज वे होते हैं जिनमें लोहे का अंश नहीं होता, जैसे बॉक्साइट, सीसा, सोना, चांदी आदि।
(ii) परंपरागत तथा गैर-परंपरागत ऊर्जा साधनों में अंतर:
ऊर्जा के परंपरागत स्रोत वे हैं जिनका उपयोग लंबे समय से हो रहा है और जो सीमित हैं, जैसे कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जलाऊ लकड़ी। ये अक्सर प्रदूषणकारी होते हैं। गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत वे हैं जिनका उपयोग हाल ही में बढ़ा है, ये नवीकरणीय और कम प्रदूषणकारी होते हैं, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा।
(iii) खनिज क्या है?
खनिज एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला, सजातीय (homogeneous) पदार्थ है जिसकी एक निश्चित रासायनिक संरचना और आंतरिक आणविक संरचना होती है। इनका खनन करके विभिन्न उद्योगों में उपयोग किया जाता है।
(iv) आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण:
आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में, पिघला हुआ मैग्मा या तरल और गैसीय पदार्थ दरारों के माध्यम से पृथ्वी की सतह की ओर बढ़ते हैं। ठंडा होने पर, ये पदार्थ जम जाते हैं और शिराओं (veins) या गांठों (lumps) के रूप में खनिजों का निर्माण करते हैं।
(v) खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता:
खनिज सीमित प्राकृतिक संसाधन हैं जिन्हें बनने में लाखों वर्ष लगते हैं। इनका अंधाधुंध उपयोग इनके भंडार को समाप्त कर सकता है। साथ ही, निष्कर्षण की बढ़ती लागत और गुणवत्ता में कमी भी संरक्षण की आवश्यकता को बढ़ाती है, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए ये उपलब्ध रहें।
प्रश्न 3 (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए:
- भारत में कोयले के वितरण का वर्णन कीजिए।
- भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल है। क्यों?
(i) भारत में कोयले का वितरण:
भारत में कोयले का वितरण मुख्य रूप से देश के पूर्वी भागों में केंद्रित है। कोयला मुख्य रूप से दो भूवैज्ञानिक कालों की चट्टानों में पाया जाता है: गोंडवाना काल (लगभग 200 मिलियन वर्ष पूर्व) और टर्शियरी काल (लगभग 55 मिलियन वर्ष पूर्व)।
गोंडवाना कोयला, जो उच्च गुणवत्ता वाला होता है, दामोदर घाटी (पश्चिम बंगाल, झारखंड), झरिया, रानीगंज और बोकारो जैसे प्रमुख कोयला क्षेत्रों में पाया जाता है। गोदावरी, महानदी, सोन और वर्धा घाटियों में भी गोंडवाना कोयले के महत्वपूर्ण भंडार हैं।
टर्शियरी कोयला उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में पाया जाता है, हालांकि इसके भंडार गोंडवाना कोयले की तुलना में कम महत्वपूर्ण हैं। भारत का अधिकांश कोयला उत्पादन इन्हीं क्षेत्रों से होता है।
(ii) भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल क्यों है?
भारत एक उष्णकटिबंधीय देश होने के कारण, यहाँ वर्ष भर सूर्य के प्रकाश की प्रचुरता रहती है। यह सौर ऊर्जा के उत्पादन के लिए एक आदर्श स्थिति प्रदान करता है। सौर ऊर्जा एक नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है, जो ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देता है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करता है।
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, जहाँ पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की पहुँच सीमित है, सौर ऊर्जा (जैसे सौर लालटेन, सौर कुकर) एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहा है। यह जलाऊ लकड़ी और गोबर के उपलों पर निर्भरता कम करता है, जिससे वनों के संरक्षण और कृषि में खाद की उपलब्धता में वृद्धि होती है। प्रौद्योगिकी के विकास और लागत में कमी के साथ, भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य निश्चित रूप से उज्जवल है।
Common mistakes
- लौह और अलौह खनिजों के बीच अंतर को ठीक से न समझना।
- ऊर्जा के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोतों को गलत वर्गीकृत करना।
- खनिजों के निर्माण की प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से न बता पाना।
- खनिजों के संरक्षण के महत्व को कम आंकना।
Revision tips
- प्रत्येक खनिज के प्रकार और उसके मुख्य उपयोगों की सूची बनाएं।
- ऊर्जा के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोतों की तुलनात्मक तालिका बनाएं।
- भारत के मानचित्र पर कोयला और अन्य प्रमुख खनिजों के वितरण क्षेत्रों को चिह्नित करें।
- खनिजों के संरक्षण के कारणों और उपायों को याद करें।
Practice MCQs
Q1. निम्नलिखित में से कौन सा खनिज अपक्षयित पदार्थ के अवशिष्ठ भार को त्यागता हुआ चट्टानों के अपघटन से बनता है?
Explanation: बॉक्साइट एक अवशिष्ट खनिज है जो चट्टानों के अपक्षय और विघटन से बनता है, जिसमें एल्यूमीनियम ऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है।
Q2. झारखंड में स्थित कोडरमा निम्नलिखित में से किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है?
Explanation: कोडरमा, झारखंड, भारत में अभ्रक (माइका) के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है और इसे 'अभ्रक की राजधानी' भी कहा जाता है।
Q3. निम्नलिखित चट्टानों में से किस चट्टान के स्तरों में खनिजों का निक्षेपण और संचयन होता है?
Explanation: तलछटी चट्टानों (Sedimentary rocks) में खनिजों का निक्षेपण और संचयन परतों के रूप में होता है, जैसे कोयला और लौह अयस्क।
Q4. मोनाजाइट रेत में निम्नलिखित में से कौन सा खनिज पाया जाता है?
Explanation: मोनाजाइट रेत थोरियम का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो एक दुर्लभ पृथ्वी तत्व है और परमाणु ऊर्जा उत्पादन में उपयोग किया जाता है।
Q5. ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों का एक उदाहरण कौन सा है?
Explanation: कोयला एक पारंपरिक ऊर्जा स्रोत है जो सीमित है और प्रदूषणकारी है, जबकि सौर और पवन ऊर्जा गैर-पारंपरिक और नवीकरणीय स्रोत हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 10 के लिए 'खनिज तथा ऊर्जा संसाधन' अध्याय में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में खनिजों के प्रकार, उनके निर्माण की प्रक्रियाएं, भारत में कोयले का वितरण, ऊर्जा के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोत, सौर ऊर्जा का महत्व और खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
लौह खनिज और अलौह खनिज में क्या अंतर है?
लौह खनिज वे होते हैं जिनमें लौह अंश होता है, जैसे लौह अयस्क और मैंगनीज। अलौह खनिज वे होते हैं जिनमें लौह अंश नहीं होता, जैसे बॉक्साइट, सीसा, सोना और चांदी।
ऊर्जा के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोतों के बीच मुख्य अंतर क्या है?
पारंपरिक ऊर्जा स्रोत सीमित और अक्सर प्रदूषणकारी होते हैं (जैसे कोयला, पेट्रोलियम), जबकि गैर-पारंपरिक स्रोत आमतौर पर असीमित, नवीकरणीय और कम प्रदूषणकारी होते हैं (जैसे सौर, पवन, ज्वारीय ऊर्जा)।
भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल क्यों माना जाता है?
भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है जहाँ सूर्य के प्रकाश की प्रचुरता है, जिससे सौर ऊर्जा के दोहन की अपार संभावनाएं हैं। यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत बन रहा है।
हमें खनिजों का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
खनिज सीमित संसाधन हैं जिन्हें बनने में लाखों वर्ष लगते हैं। उनके निरंतर निष्कर्षण से लागत बढ़ती है, गुणवत्ता घटती है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए उनकी उपलब्धता कम हो जाती है, इसलिए उनका संरक्षण आवश्यक है।
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