कक्षा 9 हिंदी NCERT समाधान: अध्याय 2 मेरे संग की औरतें

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यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की पुस्तक 'क्षितिज भाग 1' के अध्याय 2 'मेरे संग की औरतें' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय लेखिका के परिवार की महिलाओं के जीवन और उनके व्यक्तित्व पर केंद्रित है, जिसमें नानी, दादी और माँ के अनूठे चरित्रों का वर्णन है। समाधानों में लेखिका की नानी की स्वतंत्रता सेनानियों से प्रभावित सोच, उनकी माँ के स्वतंत्र विचार और दादी के घर के उदार वातावरण पर प्रकाश डाला गया है। यह छात्रों को पात्रों के व्यक्तित्व की विशेषताओं, उनके निर्णयों के पीछे के कारणों और उस समय के सामाजिक संदर्भ को समझने में मदद करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने और उत्तर लिखने के कौशल को बेहतर बनाने में सहायक होंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2 मेरे संग की औरतें

Chapter summary

अध्याय 'मेरे संग की औरतें' लेखिका के परिवार की चार पीढ़ियों की महिलाओं के जीवन और उनके व्यक्तित्व पर केंद्रित है। इसमें लेखिका की नानी, माँ और परदादी के विचारों और कार्यों का वर्णन है। समाधान इन महिलाओं के स्वतंत्र विचारों, सामाजिक बंधनों से मुक्ति और देश के प्रति उनके योगदान को समझने में मदद करते हैं। यह अध्याय परंपराओं के निर्वाह के साथ-साथ व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मूल्यों के महत्व को भी दर्शाता है।

Learning outcomes

  • लेखिका की नानी के व्यक्तित्व और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी अप्रत्यक्ष भूमिका को समझना।
  • लेखिका की माँ के स्वतंत्र विचारों और उनके व्यक्तित्व की विशेषताओं का विश्लेषण करना।
  • दादी के घर के माहौल और उसमें व्याप्त उदारता का वर्णन करना।
  • परदादी द्वारा लड़की के जन्म की मन्नत मांगने के कारणों की कल्पना करना।
  • सहज व्यवहार और दृढ़ विश्वास से किसी को सही राह पर लाने के तरीके को समझना।
  • बच्चों के शिक्षा के अधिकार के प्रति लेखिका के प्रयासों का उल्लेख करना।
  • समाज में श्रद्धा के पात्र बनने वाले इंसानों के गुणों को पहचानना।
  • लेखिका और उनकी बहन के एकांतप्रिय और जिद्दी स्वभाव के सकारात्मक पहलुओं को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • लेखिका की नानी का व्यक्तित्व
  • स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका
  • लेखिका की माँ का चरित्र-चित्रण
  • पारिवारिक माहौल और मूल्य
  • लड़की के जन्म की कामना
  • सहज व्यवहार का प्रभाव
  • बच्चों का शिक्षा का अधिकार
  • ईमानदारी और सच्चाई का महत्व
  • एकांतप्रियता और जिद्द का सकारात्मक पक्ष
  • व्यक्तित्व की विशेषताएँ

Important topics

  • लेखिका की नानी का स्वतंत्रता प्रेम और निर्णय।
  • लेखिका की माँ के स्वतंत्र विचार और व्यवहार।
  • सहजता और दृढ़ विश्वास से समस्या समाधान।
  • बच्चों के शिक्षा के अधिकार हेतु लेखिका के प्रयास।
  • पाठ में वर्णित विभिन्न महिलाओं के व्यक्तित्व की तुलना।

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं था, फिर भी वे उनके व्यक्तित्व से क्यों प्रभावित थीं?
Solution: लेखिका ने अपनी नानी को प्रत्यक्ष रूप से कभी नहीं देखा था, लेकिन उन्होंने अपनी नानी के बारे में बहुत कुछ सुना था। उन्होंने सुना था कि उनकी नानी ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में प्रसिद्ध क्रांतिकारी प्यारेलाल शर्मा से मुलाकात की थी। उस मुलाकात में, उन्होंने अपनी बेटी की शादी किसी ऐसे व्यक्ति से करवाने की तीव्र इच्छा व्यक्त की थी जो देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित हो, न कि अंग्रेजों का चाटुकार हो। उनकी यह इच्छा देश की स्वतंत्रता के प्रति गहरी निष्ठा, साहस और एक मजबूत भावना को दर्शाती थी। जीवन भर पर्दा करने के बावजूद, उन्होंने एक गैर-पुरुष से मिलने का साहस दिखाया, जो उनके साहसी व्यक्तित्व और स्वतंत्रता की भावना को प्रकट करता है। इन्हीं गुणों के कारण लेखिका अपनी नानी के व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित थीं और उनका गहरा सम्मान करती थीं।

प्रश्न 2

लेखिका की नानी की आज़ादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही?
Solution: यद्यपि लेखिका की नानी ने आज़ादी के आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लिया, परन्तु उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से इस लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि उन्होंने अपनी पुत्री के विवाह की ज़िम्मेदारी अपने पति के एक स्वतंत्रता सेनानी मित्र को सौंपी थी। वह अपनी बेटी के लिए एक आज़ादी के सिपाही को दामाद के रूप में चाहती थीं, न कि किसी ऐसे व्यक्ति को जो अंग्रेजों की चाटुकारिता करे। उन्हें अंग्रेजों और उनकी जीवनशैली से स्वाभाविक चिढ़ थी, और उनके मन में देश की आज़ादी के लिए एक प्रबल जुनून था।

प्रश्न 3

लेखिका की माँ परंपरा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में-- (क) लेखिका के माँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखिए। (ख) लेखिका की दादी के घर के माहौल का शब्द-चित्र अंकित कीजिए।
Solution:
  • (क) लेखिका की माँ अत्यंत नाजुक, सुंदर और स्वतंत्र विचारों वाली महिला थीं। उनमें ईमानदारी, निष्पक्षता और सच्चाई कूट-कूट कर भरी थी। वे अन्य माताओं की तरह अपनी बेटी को अच्छे-बुरे की सीख देने या खाना पकाकर खिलाने में विश्वास नहीं रखती थीं। उनका अधिकांश समय अध्ययन और संगीत को समर्पित था। वे कभी झूठ नहीं बोलती थीं और न ही किसी की बात को इधर-उधर करती थीं। शायद इसी कारण हर महत्वपूर्ण काम में उनकी राय ली जाती थी और सभी उसे सहर्ष स्वीकार करते थे।
  • (ख) लेखिका की दादी का घर एक ऐसा स्थान था जहाँ कुछ लोग अंग्रेज़ी जीवनशैली के प्रशंसक थे, तो वहीं कुछ भारतीय नेताओं के समर्थक भी थे। घर में बहुमत किसी एक पक्ष का न होने के बावजूद, एकता का माहौल बना रहता था। घर में किसी प्रकार की संकीर्णता नहीं थी और सभी सदस्य अपनी स्वतंत्रता और निजता बनाए रख सकते थे। बच्चों के पालन-पोषण में घर के सभी सदस्य योगदान देते थे। कोई भी सदस्य अपने विचारों को दूसरों पर थोपता नहीं था। इस प्रकार, घर का माहौल शांतिपूर्ण, सुखद और सामंजस्यपूर्ण था।

प्रश्न 4

आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों माँगी?
Solution: दादीजी एक सामान्य महिला थीं और उनके मन में लड़का-लड़की का कोई भेद नहीं था। संभवतः उनके परिवार में पीढ़ियों से कोई कन्या का जन्म नहीं हुआ था, और समाज में प्रायः लोग लड़के की ही कामना करते थे। दादीजी को यह लैंगिक भेदभाव शायद खटकता होगा और परिवार में कन्या के अभाव से वे बेचैन रहती होंगी। इन्हीं कारणों से, उन्होंने अपनी पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की के जन्म की मन्नत माँगी होगी, ताकि परिवार में एक बेटी की कमी पूरी हो सके और लैंगिक समानता का संदेश जाए।

प्रश्न 5

डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है - पाठ के आधार पर तर्क-सहित उत्तर दीजिये।
Solution: यह बात बिल्कुल सत्य है कि मनुष्य के पास सबसे प्रभावी हथियार उसका दृढ़ विश्वास और सहज व्यवहार है। यदि कोई अपना या संबंधी गलत रास्ते पर हो, तो उसे डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने के बजाय, उसके साथ सहजता से व्यवहार करना चाहिए। लेखिका की नानी ने भी यही किया। उन्होंने अपने पति की अंग्रेज़-भक्ति का न तो खुलकर विरोध किया और न ही समर्थन, बल्कि वे जीवन भर अपने आदर्शों पर अडिग रहीं। परिणामस्वरूप, जब अवसर आया, तो वे अपना मनचाहा कार्य करने में सफल रहीं। लेखिका की माँ ने चोर के साथ जो व्यवहार किया, वह सहजता का एक अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने न तो चोर को पकड़ा, न पिटवाया, बल्कि उससे सेवा ली और उसे अपना बना लिया। पकड़े जाने पर भी उन्होंने उसे उपदेश नहीं दिया, बल्कि केवल इतना कहा, "अब तुम्हारी मर्जी - चाहे चोरी करो या खेती।" उनकी इस सहज भावना और विश्वास ने चोर का हृदय परिवर्तन कर दिया। उसने सदा के लिए चोरी छोड़ दी और खेती को अपना लिया। यह दर्शाता है कि प्रेम और सहजता से किसी भी व्यक्ति को सही राह पर लाया जा सकता है।

प्रश्न 6

'शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है'-इस दिशा में लेखिका के प्रयासों का उल्लेख कीजिए।
Solution: लेखिका का मानना था कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार है। यह विचार तब और प्रबल हो गया जब उनके अपने दो बच्चे स्कूल जाने की उम्र के हो गए। लेखिका कर्नाटक के एक छोटे से कस्बे में रहती थीं। उन्होंने वहाँ के कैथोलिक चर्च के विशप से एक स्कूल खोलने का अनुरोध किया। विशप ने यह कहकर मना कर दिया कि उनके ईसाई बच्चों की संख्या कम है। लेखिका ने तर्क दिया कि गैर-ईसाई बच्चों को भी शिक्षा प्राप्त करने का समान अधिकार है, लेकिन विशप सहमत नहीं हुए। ऐसी स्थिति में, लेखिका ने हार नहीं मानी और स्वयं ही एक ऐसा स्कूल खोलने का दृढ़ निश्चय किया जहाँ अंग्रेज़ी, कन्नड़ और हिन्दी - तीनों भाषाएँ पढ़ाई जाएँगी। लोगों ने भी लेखिका के इस प्रयास का समर्थन किया और वे बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने में सफल रहीं।

प्रश्न 7

पाठ के आधार पर लिखिए कि जीवन में कैसे इंसानों को अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है?
Solution: प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि जिन इंसानों में कुछ विशेष गुण होते हैं, उन्हें समाज में अत्यधिक श्रद्धा की दृष्टि से देखा जाता है। ऐसे लोग जो कभी झूठ नहीं बोलते और हमेशा सच का पक्ष लेते हैं। जो किसी की बात को इधर-उधर करके चुगलखोरी नहीं करते। जिनके इरादे नेक और मजबूत होते हैं, जो किसी भी प्रकार की हीन भावना से ग्रसित नहीं होते, और जिनका व्यक्तित्व सरल, सहज एवं पारदर्शी होता है, ऐसे लोगों का समाज में बहुत सम्मान होता है और उन्हें श्रद्धा भाव से देखा जाता है।

प्रश्न 8

'सच, अकेलेपन का मज़ा ही कुछ और है'-इस कथन के आधार पर लेखिका की बहन एवं लेखिका के व्यक्तित्व के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए।
Solution: लेखिका और उनकी बहन दोनों ही एकांतप्रिय स्वभाव की थीं। उनके व्यक्तित्व का सबसे आकर्षक पहलू यह था कि वे दोनों जिद्दी स्वभाव की थीं, लेकिन उनकी यह जिद्द हमेशा सही कार्यों को पूरा करने के लिए होती थी। उदाहरण के लिए, लेखिका की जिद्द ने ही उन्हें कर्नाटक में स्कूल खोलने के लिए प्रेरित किया था। वे दोनों स्वतंत्र विचारों वाली थीं और इसी कारण जीवन में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में हमेशा सफल रहीं। उनका अकेलेपन का आनंद लेने का स्वभाव उनकी आत्मनिर्भरता और अपने विचारों पर दृढ़ रहने की क्षमता को दर्शाता है।

Common mistakes

  • नानी के चरित्र को केवल बाहरी जानकारी के आधार पर आंकना।
  • माँ के स्वतंत्र विचारों को गलत समझना।
  • दादी के घर के माहौल की जटिलताओं को न समझ पाना।
  • सहज व्यवहार के प्रभाव को कम आंकना।
  • बच्चों के शिक्षा के अधिकार के प्रति लेखिका के संघर्ष को सतही तौर पर लेना।

Revision tips

  • प्रत्येक महिला पात्र के व्यक्तित्व की मुख्य विशेषताओं को सूचीबद्ध करें।
  • नानी और माँ के निर्णयों के पीछे के कारणों पर विचार करें।
  • पाठ में वर्णित 'सहजता' और 'दृढ़ विश्वास' के उदाहरणों को याद करें।
  • बच्चों के शिक्षा के अधिकार से संबंधित लेखिका के प्रयासों को समझें।
  • पाठ के मुख्य संदेशों को अपने शब्दों में लिखें।

Practice MCQs

Q1. लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा नहीं था, फिर भी वे उनसे क्यों प्रभावित थीं?

Q2. लेखिका की माँ के व्यक्तित्व की मुख्य विशेषता क्या थी?

Q3. दादी के घर का माहौल कैसा था?

Q4. लेखिका की माँ ने चोर के साथ कैसा व्यवहार किया?

Q5. लेखिका ने कर्नाटक में स्कूल खोलने का आग्रह किससे किया था?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी के अध्याय 'मेरे संग की औरतें' में किन मुख्य पात्रों का वर्णन है?

इस अध्याय में मुख्य रूप से लेखिका की नानी, माँ और परदादी के व्यक्तित्व और जीवन के प्रसंगों का वर्णन है, जो लेखिका के जीवन और विचारों को प्रभावित करते हैं।

लेखिका की नानी ने अपनी बेटी की शादी के लिए क्या इच्छा व्यक्त की थी?

लेखिका की नानी ने अपनी मृत्यु से पहले प्रसिद्ध क्रांतिकारी प्यारेलाल शर्मा से मिलकर यह इच्छा व्यक्त की थी कि वे अपनी बेटी की शादी किसी क्रांतिकारी से करवाना चाहती हैं, न कि अंग्रेजों के किसी भक्त से।

लेखिका की माँ को 'परंपरा का निर्वाह न करने वाली' क्यों कहा गया है?

लेखिका की माँ पारंपरिक माताओं की तरह अपनी बेटी को खाना पकाकर खिलाना या उपदेश देना पसंद नहीं करती थीं। वे स्वतंत्र विचारों वाली थीं और उनका अधिकांश समय अध्ययन व संगीत में व्यतीत होता था।

पाठ के अनुसार, डराने-धमकाने की बजाय सहजता से किसी को सही राह पर कैसे लाया जा सकता है?

पाठ में लेखिका की माँ के उदाहरण से स्पष्ट होता है कि प्रेम, सहज व्यवहार और विश्वास से व्यक्ति का हृदय परिवर्तन किया जा सकता है। चोर को डांटने या सजा देने की बजाय, माँ के सहज व्यवहार ने उसे सदा के लिए चोरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

लेखिका ने बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिए क्या प्रयास किया?

लेखिका ने कर्नाटक के एक छोटे कस्बे में स्कूल खोलने के लिए चर्च के विशप से आग्रह किया। जब वे मना कर दिए, तो लेखिका ने स्वयं ही तीन भाषाओं (अंग्रेज़ी, कन्नड़, हिन्दी) का स्कूल खोलने का निर्णय लिया और लोगों के सहयोग से इसे सफल बनाया।

किन इंसानों को समाज में अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है?

पाठ के अनुसार, जो लोग ईमानदार होते हैं, सच का साथ देते हैं, चुगलखोरी नहीं करते, जिनके इरादे मजबूत होते हैं, हीन भावना से ग्रसित नहीं होते और जिनका व्यक्तित्व सरल व पारदर्शी होता है, उन्हें समाज में श्रद्धा मिलती है।

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