कक्षा 9 हिंदी NCERT समाधान: अध्याय 3 रीढ़ की हड्डी

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यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की पाठ्यपुस्तक 'स्पर्श भाग 1' के अध्याय 3 'रीढ़ की हड्डी' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह एकांकी समाज में महिलाओं की स्थिति, शिक्षा के महत्व और विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों पर प्रकाश डालती है। समाधानों में पात्रों के चरित्र चित्रण, शीर्षक की सार्थकता, एकांकी के उद्देश्य और समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने के प्रयासों पर गहन चर्चा शामिल है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने में मदद करेंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter3 रीढ़ की हड्डी

Chapter summary

कक्षा 9 हिंदी के अध्याय 3 'रीढ़ की हड्डी' के ये NCERT समाधान एकांकी के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित हैं। इसमें पात्रों के द्वंद्व, रूढ़िवादी सोच पर प्रहार और स्त्री शिक्षा के महत्व को समझाया गया है। समाधानों में शीर्षक की सार्थकता, मुख्य पात्र का विश्लेषण और एकांकी के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की गई है, जो छात्रों को परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

Learning outcomes

  • समाज में व्याप्त रूढ़िवादी सोच और पाखंड को पहचानना।
  • स्त्री शिक्षा के महत्व और उसके सामाजिक प्रभाव को समझना।
  • पात्रों के चरित्र की विशेषताओं का विश्लेषण करना।
  • एकांकी के शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' की सार्थकता को स्पष्ट करना।
  • समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता के महत्व को समझना।
  • सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाने की प्रेरणा प्राप्त करना।

Topics covered

Paper topics

  • रीढ़ की हड्डी एकांकी का सारांश
  • पात्र परिचय (रामस्वरूप, गोपाल प्रसाद, उमा, शंकर)
  • शीर्षक की सार्थकता
  • सामाजिक कुरीतियाँ (दहेज, स्त्री शिक्षा का विरोध)
  • रूढ़िवादी सोच बनाम आधुनिक विचार
  • विवाह की संस्था पर व्यंग्य
  • स्त्री शिक्षा का महत्व
  • चरित्रहीनता और आत्मविश्वास की कमी
  • एकांकी का उद्देश्य
  • महिलाओं का समाज में स्थान
  • संवादों का महत्व
  • भाषा शैली का विश्लेषण

Important topics

  • शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' की सार्थकता
  • उमा का चरित्र और उसका महत्व
  • रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ
  • एकांकी का सामाजिक उद्देश्य
  • शंकर के चरित्र का विश्लेषण
  • स्त्री शिक्षा और समाज में महिलाओं की स्थिति

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

रामस्वरूप और रामगोपाल प्रसाद बात-बात पर "एक हमारा जमाना था .... " कहकर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं। इस प्रकार की तुलना कहाँ तक तर्क संगत है ?
Solution:

रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद द्वारा अपने समय की तुलना वर्तमान से करते हुए "एक हमारा जमाना था .... " कहना पूरी तरह से तर्कसंगत नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि समय के साथ समाज, संस्कृति, जीवनशैली, खान-पान और तकनीकी विकास में निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं। हर युग की अपनी परिस्थितियाँ, अपनी चुनौतियाँ और अपनी उपलब्धियाँ होती हैं। पुरानी पीढ़ियों के अनुभव महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन हर स्थिति में पुराने समय को वर्तमान से बेहतर या बदतर बताना उचित नहीं है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है और हर दौर के अपने फायदे और नुकसान होते हैं। इसलिए, ऐसी तुलनाएँ अक्सर व्यक्तिपरक होती हैं और पूरी तरह से वस्तुनिष्ठ नहीं मानी जा सकतीं।

प्रश्न 2

रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के लिए छिपाना, यह विरोधाभास उनकी किस विवशता को उजागर करता है?
Solution:

रामस्वरूप का अपनी बेटी उमा को उच्च शिक्षा दिलवाना और फिर विवाह के लिए उसकी शिक्षा को छिपाने का प्रयास करना, यह विरोधाभास उनकी गहरी सामाजिक विवशता को उजागर करता है। वे एक तरफ़ आधुनिक विचारों वाले व्यक्ति हैं जो स्त्री शिक्षा के महत्व को समझते हैं और अपनी बेटी को पढ़ाना चाहते हैं। दूसरी ओर, वे समाज की रूढ़िवादी सोच और विवाह योग्य वर की अपेक्षाओं से भी अवगत हैं। समाज में आज भी कई लोग पढ़ी-लिखी लड़कियों को बहू के रूप में स्वीकार करने में हिचकिचाते हैं या उन्हें अपने से कमतर मानते हैं। इसी सामाजिक दबाव और अपनी बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने की चिंता के कारण रामस्वरूप को अपनी आधुनिक सोच और बेटी की शिक्षा के बीच समझौता करना पड़ता है, जो उनकी लाचारी को दर्शाता है।

प्रश्न 3

अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, वह उचित क्यों नहीं है ?
Solution:

अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप का उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा करना उचित नहीं है। वे चाहते हैं कि उमा कम पढ़ी-लिखी दिखे, अपनी सुंदरता बढ़ाने के लिए नकली प्रसाधन सामग्री का उपयोग करे और लड़के वालों के सामने वैसा ही व्यवहार करे जैसा वे चाहते हैं। यह अपेक्षाएँ कई कारणों से अनुचित हैं: पहला, यह उमा की शिक्षा और उसकी वास्तविक पहचान का अपमान है। दूसरा, यह दिखावे और झूठ पर आधारित रिश्ता बनाने का प्रयास है। तीसरा, यह लड़कियों की पसंद-नापसंद और आत्मसम्मान को नज़रअंदाज़ करता है। आज के समाज में जहाँ लड़का-लड़की को समान माना जाता है, वहाँ किसी भी व्यक्ति से उसकी वास्तविक पहचान छिपाने या उसे किसी और की अपेक्षाओं के अनुसार ढालने की अपेक्षा करना गलत है।

प्रश्न 4

गोपाल प्रसाद विवाह को 'बिजनेस' मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छिपाते हैं। क्या आप मानते हैं कि दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं ? अपने विचार लिखिए।
Solution:

हाँ, मेरे विचार से गोपाल प्रसाद और रामस्वरूप दोनों ही अपनी-अपनी तरह से समान रूप से अपराधी हैं। गोपाल प्रसाद विवाह जैसे पवित्र और मानवीय रिश्ते को केवल एक 'बिजनेस' या सौदा मानते हैं, जिसमें वे केवल अपने फायदे और बेटे की सुविधा देखते हैं। वे रिश्ते की गरिमा, भावनाओं और मानवीय मूल्यों को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ करते हैं। दूसरी ओर, रामस्वरूप आधुनिक विचारों के होते हुए भी कायरता का परिचय देते हैं। वे अपनी बेटी के भविष्य के लिए समाज के दबाव के आगे झुक जाते हैं और उसकी शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण बात को छिपाते हैं। वे एक स्वाभिमानी और समान अवसर वाले रिश्ते की तलाश करने के बजाय परिस्थिति से समझौता कर रहे हैं। दोनों ही अपने कार्यों से विवाह संस्था की पवित्रता और मानवीय गरिमा को ठेस पहुँचाते हैं।

प्रश्न 5

"....आपके लाड़ले बेटे के की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं ...." उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करना चाहती है?
Solution:

उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की कई गंभीर कमियों की ओर संकेत करना चाहती है। पहला, वह शंकर के चरित्रहीन होने की ओर इशारा करती है, जो लड़कियों का पीछा करता हुआ पकड़ा गया था और इस कारण उसे शर्मिंदा भी होना पड़ा था। दूसरा, वह शंकर के शारीरिक स्वास्थ्य की ओर संकेत करती है, क्योंकि उसकी पीठ की तरफ़ इशारा करके वह बताती है कि वह ठीक से बैठ भी नहीं पाता, शायद इसी कारण वह बीमार रहता है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण, उमा यह कहना चाहती है कि शंकर में आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान और अपनी कोई स्वतंत्र इच्छाशक्ति नहीं है। वह पूरी तरह अपने पिता गोपाल प्रसाद पर आश्रित है, यानी उसकी अपनी कोई 'रीढ़ की हड्डी' नहीं है जो उसे सीधा खड़ा रख सके या निर्णय लेने में मदद कर सके।

प्रश्न 6

शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़की - समाज को कैसे व्यक्तित्व की जरूरत है ? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
Solution:

समाज को निश्चित रूप से उमा जैसे व्यक्तित्व की आवश्यकता है, न कि शंकर जैसे लड़कों की। उमा स्पष्टवादी, आत्मविश्वासी, शिक्षित और अपने आत्म-सम्मान की रक्षा करने वाली लड़की है। वह समाज की दोहरी मानसिकता और पाखंड के खिलाफ आवाज उठाने का साहस रखती है। ऐसे व्यक्तित्व समाज को प्रगति की ओर ले जाते हैं, जहाँ समानता, न्याय और मानवीय मूल्यों का सम्मान होता है। उमा जैसी लड़कियाँ ही गोपाल प्रसाद जैसे लोगों को उनकी गलत सोच के लिए आईना दिखा सकती हैं। इसके विपरीत, शंकर जैसे लड़के समाज के लिए निरुपयोगी हैं। उनमें आत्मविश्वास की कमी है, वे चरित्रहीन हैं और पूरी तरह दूसरों पर आश्रित हैं। वे समाज को कोई सकारात्मक दिशा नहीं दे सकते और न ही किसी समस्या का समाधान कर सकते हैं। इसलिए, समाज को उमा जैसे मजबूत और आदर्शवादी व्यक्तित्व की सख्त जरूरत है।

प्रश्न 7

'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
Solution:

एकांकी का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' अत्यंत सार्थक है और इसके कई गहरे अर्थ हैं। शारीरिक रूप से, रीढ़ की हड्डी शरीर को सीधा रखने और विभिन्न गतिविधियों को संभव बनाने के लिए आवश्यक है। जिस प्रकार रीढ़ की हड्डी के बिना शरीर कमजोर और लाचार हो जाता है, उसी प्रकार नैतिक और चारित्रिक रूप से कमजोर व्यक्ति समाज में अपना महत्व खो देता है। एकांकी में शंकर जैसे पात्र, जिनकी अपनी कोई इच्छाशक्ति या चरित्र नहीं है, उन्हें 'बिना रीढ़ की हड्डी वाला' कहा गया है। वे केवल अपने पिता के इशारों पर चलते हैं। दूसरी ओर, यह शीर्षक समाज की सड़ी-गली, पुरानी और अनम्य मानसिकता पर भी कटाक्ष करता है। जिस प्रकार समय के साथ शरीर को लचीला और स्वस्थ रखने के लिए रीढ़ की हड्डी का ध्यान रखना पड़ता है, उसी प्रकार समाज को भी समय के अनुसार अपनी सोच और परंपराओं में बदलाव लाना चाहिए। जो परंपराएँ मनुष्य के हित के बजाय अहित करती हैं, वे विकार बन जाती हैं। इस प्रकार, शीर्षक एकांकी के केंद्रीय भाव - चरित्र, आत्मविश्वास और सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता - को प्रभावी ढंग से व्यक्त करता है।

प्रश्न 8

कथा वस्तु के आधार पर आप किसे एकांकी का मुख्य पात्र मानते हैं और क्यों ?
Solution:

कथा वस्तु के आधार पर उमा को एकांकी का मुख्य पात्र माना जा सकता है। यद्यपि मंच पर उसकी उपस्थिति सीमित समय के लिए ही है, परंतु पूरी एकांकी का कथानक उसी के इर्द-गिर्द घूमता है। उसके विवाह के प्रस्ताव के कारण ही सभी पात्र एकत्रित होते हैं और उनके बीच संवाद होते हैं। उमा के विचार, उसकी शिक्षा, उसका आत्म-सम्मान और अंत में उसका विरोध ही एकांकी के केंद्रीय संघर्ष और संदेश को स्थापित करते हैं। उसके चरित्र के माध्यम से ही लेखक समाज की रूढ़िवादी सोच पर प्रहार करता है और नारी सशक्तिकरण का संदेश देता है। उमा के बोलने से पहले तक की चुप्पी और फिर उसका मुखर होना, एकांकी के चरमोत्कर्ष को दर्शाता है। इसलिए, भले ही वह कम समय के लिए उपस्थित हो, लेकिन उसके प्रभाव और केंद्रीय भूमिका के कारण उमा ही मुख्य पात्र है।

प्रश्न 9

एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
Solution:

एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

रामस्वरूप:

  • आधुनिक एवं प्रगतिशील विचारधारा: वे स्त्री शिक्षा के महत्व को समझते हैं और अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाते हैं।
  • विवशता और कायरता: बेटी के विवाह के लिए वे समाज के दबाव में आकर उसकी शिक्षा छिपाने का प्रयास करते हैं, जो उनकी विवशता और कायरता को दर्शाता है।
  • समझौतावादी: वे अपनी बेटी के भविष्य के लिए रूढ़िवादी समाज से समझौता करने को तैयार हो जाते हैं।
  • पिता का स्नेह: वे अपनी बेटी से प्रेम करते हैं और उसके अच्छे भविष्य की कामना करते हैं, भले ही इसके लिए उन्हें कुछ कड़वी सच्चाईयों से मुँह मोड़ना पड़े।

गोपाल प्रसाद:

  • व्यावसायिक सोच: वे विवाह को एक 'बिजनेस' मानते हैं और इसमें लाभ-हानि का हिसाब लगाते हैं।
  • चालक और बड़बोले: वे अपनी बातों से दूसरों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं और अपनी अपेक्षाएँ स्पष्ट रूप से रखते हैं।
  • रूढ़िवादी और संकीर्ण सोच: पढ़े-लिखे होने के बावजूद, वे स्त्री-पुरुष समानता में विश्वास नहीं रखते और चाहते हैं कि बहू कम पढ़ी-लिखी हो।
  • लालची: वे विवाह में भी अपने बेटे के लिए अच्छी 'डील' तलाशते हैं, जिससे उनका लालची स्वभाव झलकता है।
  • अहंकारी: वे अपनी बातों को सही मानते हैं और दूसरों की भावनाओं की परवाह नहीं करते।

प्रश्न 10

इस एकांकी का क्या उद्देश्य है ? लिखिए।
Solution:

इस एकांकी का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त रूढ़िवादी सोच, पाखंड और महिलाओं की दयनीय स्थिति पर प्रहार करना है। यह एकांकी निम्नलिखित उद्देश्यों को पूरा करती है:

  • स्त्री शिक्षा का महत्व: यह दर्शाना कि महिलाओं की शिक्षा केवल उनके व्यक्तिगत विकास के लिए ही नहीं, बल्कि समाज की प्रगति के लिए भी आवश्यक है।
  • सामाजिक पाखंड पर व्यंग्य: यह उन लोगों पर व्यंग्य करती है जो आधुनिकता का दिखावा करते हैं लेकिन विवाह जैसी संस्थाओं में पुरानी रूढ़ियों और संकीर्ण सोच को बनाए रखते हैं।
  • महिलाओं का सम्मान: यह एकांकी महिलाओं को वस्तु या सजावट की वस्तु समझने की बजाय उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाने की वकालत करती है।
  • आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान: यह उमा जैसे पात्रों के माध्यम से महिलाओं को अपने आत्म-सम्मान और अधिकारों के लिए खड़े होने के लिए प्रेरित करती है।
  • चरित्रहीनता पर प्रहार: यह शंकर जैसे चरित्रहीन और आत्मविश्वासहीन युवकों की मानसिकता पर भी चोट करती है, जो समाज के लिए अनुपयोगी हैं।

संक्षेप में, एकांकी समाज को स्त्री शिक्षा, समानता और मानवीय मूल्यों के प्रति अधिक जागरूक और संवेदनशील बनाने का प्रयास करती है।

प्रश्न 11

समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु आप कौन-कौन से प्रयास कर सकते हैं ?
Solution:

समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर कई प्रयास किए जा सकते हैं:

  1. शिक्षा को बढ़ावा देना: महिलाओं की शिक्षा के लिए हर संभव प्रयास करना, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में अपना स्थान बना सकें।
  2. समान अवसर प्रदान करना: शिक्षा, रोजगार और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर सुनिश्चित करना।
  3. जागरूकता फैलाना: महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा के महत्व और लैंगिक समानता के बारे में समाज में जागरूकता फैलाना।
  4. रूढ़ियों का विरोध: दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और अन्य ऐसी सामाजिक कुरीतियों का पुरजोर विरोध करना जो महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुँचाती हैं।
  5. सम्मानजनक व्यवहार: घर, कार्यस्थल और समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना और उनकी बातों को सुनना।
  6. आत्मविश्वास बढ़ाना: महिलाओं को प्रोत्साहित करना कि वे अपनी क्षमता पर विश्वास रखें और किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने से हिचकिचाएँ नहीं।
  7. कानूनी सहायता: यदि आवश्यक हो तो महिलाओं को उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में मदद करना।
  8. प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करना: इतिहास और वर्तमान की सफल महिलाओं के उदाहरण समाज के सामने रखकर दूसरों को प्रेरित करना।

Common mistakes

  • पात्रों के चरित्र की जटिलताओं को समझने में चूक।
  • शीर्षक के गहरे अर्थ को सतही तौर पर लेना।
  • एकांकी के सामाजिक संदेश को पूरी तरह न समझ पाना।
  • महिलाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता की कमी।

Revision tips

  • एकांकी के सभी पात्रों के संवादों पर ध्यान दें।
  • शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' के विभिन्न अर्थों पर विचार करें।
  • महिलाओं की शिक्षा और समाज में उनकी भूमिका से संबंधित तर्कों को समझें।
  • एकांकी के उद्देश्य और लेखक के संदेश को अपने शब्दों में लिखें।

Practice MCQs

Q1. रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद अपने समय की तुलना वर्तमान से करते हुए क्या कहते हैं?

Q2. रामस्वरूप अपनी बेटी उमा की किस बात को छिपाने का प्रयास करते हैं?

Q3. गोपाल प्रसाद विवाह को क्या मानते हैं?

Q4. उमा शंकर की रीढ़ की हड्डी न होने की बात कहकर किस ओर संकेत करती है?

Q5. एकांकी में किस प्रकार के व्यक्तित्व की आवश्यकता पर बल दिया गया है?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी के अध्याय 3 'रीढ़ की हड्डी' में मुख्य रूप से किन सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की गई है?

इस अध्याय में मुख्य रूप से समाज में व्याप्त रूढ़िवादी सोच, विवाह के प्रति व्यावसायिक दृष्टिकोण, स्त्री शिक्षा को लेकर पाखंड और महिलाओं के प्रति दोहरी मानसिकता जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई है।

'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक एकांकी के लिए क्यों उपयुक्त है?

यह शीर्षक समाज की रीढ़ की हड्डी यानी नैतिक मूल्यों के कमजोर होने और शंकर जैसे चरित्रहीन व आत्मविश्वासहीन व्यक्तियों का प्रतीक है, जो समाज को सीधा रखने में असमर्थ हैं।

एकांकी में उमा के चरित्र का क्या महत्व है?

उमा एकांकी की मुख्य पात्र है जो अपनी शिक्षा, स्पष्टवादिता और आत्मसम्मान के माध्यम से समाज की रूढ़िवादी सोच को चुनौती देती है और महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक बनती है।

रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की सोच में क्या अंतर है?

रामस्वरूप आधुनिक सोच रखते हुए भी अपनी बेटी के विवाह के लिए शिक्षा छिपाते हैं, जो उनकी विवशता दर्शाती है। वहीं, गोपाल प्रसाद विवाह को बिजनेस मानते हैं और बेटे की कम पढ़ी-लिखी बहू चाहते हैं, जो उनकी संकीर्ण सोच को दर्शाता है।

इस एकांकी से हमें क्या सीख मिलती है?

इस एकांकी से हमें स्त्री शिक्षा के महत्व, महिलाओं के प्रति सम्मान, दहेज प्रथा के विरोध और समाज में व्याप्त पाखंड के विरुद्ध आवाज उठाने की सीख मिलती है।

क्या शंकर जैसे लड़के समाज के लिए उपयोगी हैं?

नहीं, एकांकी के अनुसार शंकर जैसे लड़के समाज के लिए निरुपयोगी हैं क्योंकि उनका अपना कोई व्यक्तित्व या चरित्र नहीं होता और वे दूसरों पर आश्रित रहते हैं।

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