कक्षा 9 संस्कृत: भ्रान्तो बालः NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 के संस्कृत विषय के पाठ 'भ्रान्तो बालः' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें पाठ के सभी अभ्यासों के प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में दिए गए हैं, जो छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने में मदद करते हैं। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से समझाया गया है, जिससे छात्रों को कठिन अवधारणाओं को समझने में आसानी होती है। यह संसाधन परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि यह छात्रों को अभ्यास करने और अपने ज्ञान का मूल्यांकन करने का अवसर प्रदान करता है। समाधानों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि वे छात्रों को न केवल सही उत्तर प्रदान करें, बल्कि उत्तर लिखने की प्रक्रिया को भी सुगम बनाएं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 6. भ्रान्तो बालः |
Chapter summary
कक्षा 9 के संस्कृत पाठ 'भ्रान्तो बालः' के ये NCERT समाधान छात्रों को पाठ की मुख्य अवधारणाओं को समझने में सहायता करते हैं। समाधानों में अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दिए गए हैं, जिनमें व्याकरण, शब्दार्थ और कथा के सारांश पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह छात्रों को पाठ के संदेश को आत्मसात करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करता है।
Learning outcomes
- पाठ 'भ्रान्तो बालः' के प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में लिखने का अभ्यास करना।
- संस्कृत व्याकरण के नियमों, विशेष रूप से चतुर्थी विभक्ति के प्रयोग को समझना।
- समस्त पदों और उनके विग्रहों को पहचानना और उनका सही मिलान करना।
- श्लोक का भावार्थ और कथा का सारांश हिंदी या अंग्रेजी में व्यक्त करना।
- प्रश्न निर्माण के कौशल को विकसित करना।
- पाठ के नैतिक संदेश को समझना और उसे अपने जीवन में लागू करने का प्रयास करना।
Topics covered
Paper topics
- भ्रान्तो बालः पाठ का सारांश
- संस्कृत में प्रश्नों के उत्तर लिखना
- श्लोक का भावार्थ
- चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग
- समस्त पद और विग्रह
- प्रश्न निर्माण
- संस्कृत व्याकरण
- नैतिक शिक्षा
Important topics
- पाठ का सारांश और मुख्य संदेश
- चतुर्थी विभक्ति के प्रयोग वाले वाक्य
- समस्त पदों का विग्रह
- प्रश्न निर्माण का अभ्यास
- श्लोक का भावार्थ
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- बालः कदा क्रीडित् निर्जगाम?
- बालस्य मित्राणि किमर्थं त्वरमाणा बभूवु:?
- मधुकरः बालकस्य आह्वानं केन कारणेन न अमन्यत?
- बालकः कीदृशं चटकम् अपश्यत्?
- बालकः चटकाय क्रीडनार्थं कीदृशं लोभं दत्तवान्?
- खिन्नः बालकः श्वानं किम् अकथयत्?
- विघ्नितमनोरथः बालः किम् अचिन्तयत्?
- बालः पाठशालागमनवेलायां क्रीडितुं निर्जगाम। (बालक पाठशाला जाने के समय खेलने के लिए घर से निकला।)
- बालस्य मित्राणि विद्यालयगमनाय त्वरमाणा बभूवुः। (बालक के मित्र विद्यालय जाने के लिए जल्दी में थे।)
- मधुकरः मधुसंग्रहव्यग्रः आसीत्। अतः सः बालकस्य आह्वानं न अमन्यत। (मधुमक्खी शहद इकट्ठा करने में व्यस्त थी। इसलिए उसने बालक के बुलावे को स्वीकार नहीं किया।)
- बालकः तृणशलाकादिकम् आददानं चटकम् अपश्यत्। (बालक ने तिनके आदि ले जाते हुए चिड़िया को देखा।)
- बालकः चटकाय क्रीडनार्थं स्वादुभक्ष्यकवलानां लोभं दत्तवान्। (बालक ने चिड़िया को खेलने के लिए स्वादिष्ट भोजन के टुकड़ों का लालच दिया।)
- खिन्नः बालकः श्वानं क्रीडासहायकम् भवितुम् अकथयत्। (दुखी बालक ने कुत्ते से कहा कि वह उसके साथ खेलने में सहायक बने।)
- विघ्नितमनोरथः बालः अचिन्तयत् - अस्मिन् संसारे अहम् इव कोऽपि कालं न यापयति। अतः अहम् अपि स्वोचितं कार्यं करोमि। (मनोरथ बाधित होने पर बालक ने सोचा - इस संसार में मेरे जैसा कोई भी समय व्यर्थ नहीं बिता रहा है। इसलिए मैं भी अपना उचित कार्य करूँगा।)
प्रश्न 2
यो मां पुत्रप्रीत्या पोषयति स्वामिनो गृहे तस्य।
रक्षानियोगकरणाञ्च मया भ्रष्टव्यमीषदपि।।
भावार्थ (हिन्दी): स्वामी जिस कुत्ते को पुत्र के समान प्रेम से पालता है, वह कुत्ता भी अपने स्वामी के घर की रक्षा के कर्तव्य से एक पल के लिए भी विचलित नहीं होता है। इस श्लोक का आशय यह है कि हमें भी अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव सजग और निष्ठावान रहना चाहिए।
Meaning (English): The dog, whom the master lovingly raises like a son, never deviates even for a moment from the duty of protecting his master's house. The essence of this verse is that we too should always be vigilant and dedicated towards our duties.
प्रश्न 3
सारांश (हिन्दी): 'भ्रान्तो बालः' कथा 'संस्कृत प्रौढ़पाठावलिः' नामक ग्रन्थ से ली गई है। यह कथा एक ऐसे बालक के बारे में है जिसका मन पढ़ाई में नहीं लगता और वह खेलने के लिए उत्सुक रहता है। वह खेलने के लिए तितली, भँवरे और कौवे जैसे साथियों को बुलाता है, परन्तु सभी अपने-अपने कार्यों में व्यस्त होने के कारण उसके साथ खेलने से मना कर देते हैं। इससे बालक बहुत निराश हो जाता है। अंत में, उसे यह बोध होता है कि संसार में सभी अपने-अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं, केवल वही व्यर्थ में समय नष्ट कर रहा है। इस बोध के पश्चात् वह निश्चय करता है कि वह भी अपना उचित कार्य करेगा और समय व्यर्थ नहीं गँवाएगा।
Summary (English): The story 'Bhrahnto Balah' is an excerpt from the book 'Sanskrit Praudhpathavali'. It depicts a child who is more interested in playing than studying. He tries to invite various creatures like butterflies, bees, and crows to play with him, but they all refuse as they are busy with their respective tasks. This leaves the child feeling dejected. Eventually, he realizes that everyone in the world is engaged in their own duties, and only he is wasting his time. This realization prompts him to decide to focus on his own responsibilities and not waste time.
प्रश्न 4
- स्वा<u>द्नि</u> भक्ष्यकवलानि ते दास्यामि।
- चटकः <u>स्वकर्मणि</u> व्यग्रः आसीत्।
- कुक्कुरः <u>मानुषाणां</u> मित्रम् अस्ति।
- स <u>महतीं वैदुषीं</u> लब्धवान्।
- रक्षानियोगकरणात् मया न भ्रष्टव्यम् इति।
- कीदृशानि भक्ष्यकवलानि ते दास्यामि? (किस प्रकार के भोजन के कौर तुम्हें दूँगा?)
- चटकः कस्मिन् व्यग्रः आसीत्? (चिड़िया किसमें व्यस्त थी?)
- कुक्कुरः केषाम् मित्रम् अस्ति? (कुत्ता किसका मित्र है?)
- स किम् लब्धवान्? (उसने क्या प्राप्त किया?)
- कस्मात् मया न भ्रष्टव्यम् इति? (किससे विचलित नहीं होना चाहिए?)
प्रश्न 5
'नमः' शब्द के योग में चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है। यहाँ 'नमः' के साथ चतुर्थी विभक्ति के प्रयोग वाले पाँच वाक्य दिए गए हैं:
- देवाय नमः। (देवता को नमस्कार है।)
- गुरवे नमः। (गुरु को नमस्कार है।)
- अध्यापकाय नमः। (अध्यापक को नमस्कार है।)
- वासुदेवाय नमः। (वासुदेव को नमस्कार है।)
- देवेभ्यः नमः। (देवताओं को नमस्कार है।)
प्रश्न 6
'क' स्तम्भ | 'ख' स्तम्भ
दृष्टिपथम् | पुष्पाणाम् उद्यानम्
विद्यायाः व्यसनी | पुस्तकदासाः
विद्याव्यसनी | दृष्टेः पन्थाः
पुष्पोद्यानम् | पुस्तकानां दासाः
नीचे 'क' स्तम्भ के समस्त पदों का 'ख' स्तम्भ के उनके सही विग्रहों के साथ मिलान किया गया है:
'क' स्तम्भ | 'ख' स्तम्भ
दृष्टेः पन्थाः | दृष्टिपथम्
पुस्तकानां दासाः | पुस्तकदासाः
विद्यायाः व्यसनी | विद्याव्यसनी
पुष्पाणाम् उद्यानम् | पुष्पोद्यानम्
Common mistakes
- समस्त पदों और उनके विग्रहों के मिलान में त्रुटियाँ करना।
- चतुर्थी विभक्ति के प्रयोग में गलतियाँ करना।
- प्रश्न निर्माण करते समय सही प्रश्नवाचक शब्दों का चयन न कर पाना।
- श्लोक के भावार्थ या कथा के सारांश को स्पष्ट रूप से न लिख पाना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को ध्यान से पढ़ें और समझें।
- व्याकरण के नियमों, विशेषकर चतुर्थी विभक्ति और समस्त पदों पर विशेष ध्यान दें।
- श्लोक के भावार्थ और कथा के सारांश को अपनी भाषा में लिखने का अभ्यास करें।
- प्रश्न निर्माण वाले अभ्यास को हल करते समय स्थूल पदों के स्थान पर उपयुक्त प्रश्नवाचक शब्द का प्रयोग करें।
- सभी उत्तरों को संस्कृत में लिखने का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. बालः खेलने के लिए कब घर से निकला?
Explanation: पाठ के अनुसार, बालक पाठशाला जाने के समय खेलने के लिए घर से निकला था।
Q2. बालक के मित्र किस लिए जल्दी में थे?
Explanation: बालक के मित्र विद्यालय जाने के लिए जल्दी में थे, इसलिए वे उसके साथ खेलने नहीं रुके।
Q3. मधुमक्खी बालक के बुलावे पर क्यों नहीं आई?
Explanation: मधुमक्खी शहद इकट्ठा करने के अपने कार्य में व्यस्त थी, इसलिए उसने बालक के खेलने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
Q4. कुत्ता अपने स्वामी के प्रति कैसा व्यवहार करता है?
Explanation: श्लोक के अनुसार, कुत्ता स्वामी के घर की रक्षा के कर्तव्य से एक पल के लिए भी विचलित नहीं होता।
Q5. निम्नलिखित में से कौन सा समस्त पद 'पुष्पोद्यानम्' का विग्रह है?
Explanation: समस्त पद 'पुष्पोद्यानम्' का सही विग्रह 'पुष्पाणाम् उद्यानम्' है, जिसका अर्थ है फूलों का बगीचा।
Frequently asked questions
कक्षा 9 संस्कृत के 'भ्रान्तो बालः' पाठ में कौन-कौन से मुख्य विषय शामिल हैं?
इस पाठ में मुख्य रूप से एक ऐसे बालक की कहानी है जो खेलने में रुचि रखता है और अपने कार्यों में व्यस्त सभी को देखकर अंततः स्वयं भी अपने कार्य को करने का निश्चय करता है। समाधानों में व्याकरण के अभ्यास जैसे चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग, समस्त पद और विग्रह, तथा प्रश्न निर्माण भी शामिल हैं।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी हैं?
हाँ, ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। ये न केवल प्रश्नों के सही उत्तर प्रदान करते हैं, बल्कि उत्तर लिखने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट करते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने में मदद मिलती है।
इन समाधानों का उपयोग कैसे करें?
छात्र इन समाधानों का उपयोग पाठ को समझने, अभ्यास प्रश्नों के उत्तर लिखने का तरीका सीखने और व्याकरण के नियमों को समझने के लिए कर सकते हैं। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को ध्यान से पढ़ें और समझें, और फिर स्वयं उत्तर लिखने का प्रयास करें।
क्या समाधानों में व्याकरण के नियमों की व्याख्या की गई है?
समाधानों में व्याकरण के नियमों का प्रयोग किया गया है, जैसे चतुर्थी विभक्ति और समस्त पदों का विग्रह। छात्रों को इन नियमों को समझने के लिए समाधानों का अध्ययन करना चाहिए और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सहायता लेनी चाहिए।
श्लोक का भावार्थ और कथा का सारांश कैसे समझें?
समाधानों में श्लोक का भावार्थ और कथा का सारांश हिंदी या अंग्रेजी में दिया गया है। इसे ध्यान से पढ़ें और पाठ के मुख्य संदेश को समझने का प्रयास करें।
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