कक्षा 9 संस्कृत पाठ 4 कल्पतरुः NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 के संस्कृत पाठ 'कल्पतरुः' के लिए विस्तृत एनसीईआरटी समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ एक पौराणिक कल्पवृक्ष की कहानी पर आधारित है, जो इच्छाएं पूरी करने वाला वृक्ष है। समाधान छात्रों को पाठ के मुख्य पात्रों, जैसे जीमूतवाहन और जीमूतकेतु, उनके विचारों और कार्यों को समझने में मदद करते हैं। इसमें पाठ के अभ्यासों को हल किया गया है, जिसमें प्रश्नों के उत्तर लिखना, स्थूल पदों का अर्थ समझना, पर्यायवाची शब्द खोजना और विशेषण-विशेष्य का मिलान करना शामिल है। ये समाधान छात्रों को संस्कृत भाषा की बारीकियों को समझने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 4. कल्पतरुः |
Chapter summary
कक्षा 9 के संस्कृत पाठ 'कल्पतरुः' के ये एनसीईआरटी समाधान छात्रों को एक पौराणिक वृक्ष की कहानी के माध्यम से परोपकार और नश्वरता के महत्व को समझने में मदद करते हैं। समाधानों में पाठ के अभ्यास शामिल हैं, जो छात्रों को प्रश्नों के उत्तर देने, शब्दों के अर्थ स्पष्ट करने, पर्यायवाची शब्द पहचानने और विशेषण-विशेष्य को सही ढंग से जोड़ने का अभ्यास कराते हैं। यह छात्रों को संस्कृत शब्दावली और व्याकरण को मजबूत करने में सहायता करता है।
Learning outcomes
- पाठ 'कल्पतरुः' के मुख्य पात्रों और कथानक को समझना।
- संस्कृत में दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखने का अभ्यास करना।
- पाठ में प्रयुक्त स्थूल पदों के अर्थ और उनके प्रयोग को समझना।
- दिए गए शब्दों के संस्कृत पर्यायवाची शब्दों को पहचानना और लिखना।
- विशेषण और विशेष्य पदों का सही मिलान करना सीखना।
- परोपकार और धन की नश्वरता जैसे नैतिक मूल्यों को समझना।
Topics covered
Paper topics
- कल्पतरु की कथा
- जीमूतवाहन का चरित्र
- परोपकार का महत्व
- धन की नश्वरता
- संस्कृत प्रश्नोत्तर
- स्थूल पदों का अर्थ
- पर्यायवाची शब्द
- विशेषण और विशेष्य
- संस्कृत व्याकरण अभ्यास
- नैतिक मूल्य
Important topics
- कल्पतरु की कथा और उसका संदेश
- जीमूतवाहन का परोपकारी चरित्र
- धन की तुलना लहरों से क्यों की गई है
- विशेषण-विशेष्य का सही मिलान
- पाठ के मुख्य पात्रों के विचार
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
i. कञ्चनपुरं नाम नगरं कुत्र विभाति स्म?
ii. जीमूतवाहनः किं विचार्य जीमूतवाहनं यौवराज्ये अभिषिक्तवान्?
iii. कल्पतरोः वैशिष्ट्यमाकर्ण्य जीमूतवाहनः किम् अचिन्तयत्?
iv. पाठानुसारं संसारेऽस्मिन् किं किं नश्वरम् किञ्च अनश्वरम्?
v. जीमूतवाहनस्य यशः सर्वत्र कथं प्रथितम्?
i. कञ्चनपुरं नाम नगरं हिमवतः (अर्थात् हिमालयस्य) सानोः उपरि (अर्थात् शिखरस्य उपरि) सुशोभित था।
ii. जीमूतवाहनः गुणवान है और उसने यौवन प्राप्त कर लिया है, ऐसा विचार करके उसके पिता जीमूतकेतु ने उसे यौवराज्य पर अभिषिक्त किया।
iii. कल्पवृक्ष की विशेषता सुनकर जीमूतवाहन ने यह सोचा - "अहो! मेरे पूर्वजों ने इस प्रकार के अमर वृक्ष को प्राप्त करके भी धन के अतिरिक्त कुछ विशेष प्राप्त नहीं किया। मैं अपनी मनचाही इच्छा पूरी करूँगा।"
iv. पाठ के अनुसार, इस संसार में धन और शरीर नश्वर हैं, जबकि परोपकार अनश्वर है।
v. जीमूतवाहन का यश सभी जीवों के प्रति उसकी करुणा के कारण सर्वत्र फैल गया।
प्रश्न 2
i. तस्य सानोरुपरि विभाति कञ्चनपुरं नाम नगरम्।
ii. राजा सम्प्राप्तयौवनं तं यौवराज्ये अभिषिक्तवान्?
iii. अयं तव सदा पूज्यः।
iv. तात ! त्वं तु जानासि यत् धनं वीचिवच्चञ्चलम्।
i. 'हिमवतः' (हिमालय का) यह पद नगर के स्थान (कञ्चनपुर) के लिए प्रयुक्त हुआ है।
ii. 'जीमूतवाहनम्' (जीमूतवाहन को) यह पद राजा द्वारा यौवराज्य पर अभिषिक्त किए जाने वाले व्यक्ति के लिए प्रयुक्त हुआ है।
iii. 'कल्पतरुः' (कल्पवृक्ष) यह पद 'यह तुम्हारा सदा पूज्य है' इस कथन के संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है।
iv. 'जीमूतकेतुः' (जीमूतकेतु) यह पद 'तात! तुम तो जानते हो कि धन लहरों की तरह चंचल है' इस कथन के संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है।
प्रश्न 3
i. पर्वत: - .....
ii. भूपतिः - .....
iii. इन्द्र: - .....
iv. धनम् - .....
v. इच्छितम् - .....
vi. समीपम् - .....
vii. धरित्रीम् - .....
viii. कल्याणम् - .....
ix. वाणी - .....
x. वृक्षः - .....
पाठ से चुने गए पर्यायवाची शब्द इस प्रकार हैं:
i. पर्वत: - नगेन्द्रः
ii. भूपतिः - राजा
iii. इन्द्र: - शक्रः
iv. धनम् - अर्थः
v. इच्छितम् - अभीष्टम्
vi. समीपम् - अन्तिकम्
vii. धरित्रीम् - पृथ्वीम्
viii. कल्याणम् - परोपकारः, हितम्
ix. वाणी - वाक्
x. वृक्षः - तरुः, पादपः
प्रश्न 4
'क' स्तम्भ
परोपकारः
कुलक्रमागतः
मन्त्रिभिः
दानवीरः
हितैषिभिः
जीमूतवाहनः
वीचिवच्चञ्चलम्
कल्पतरुः
धनम्
अनश्वरः
'ख' स्तम्भ
कुलक्रमागतः
कल्पतरुः
दानवीरः
जीमूतवाहनः
वीचिवच्चञ्चलम्
धनम्
अनश्वरः
विशेषणों और विशेष्यों का उचित मिलान इस प्रकार है:
'क' स्तम्भ (विशेषण)
कुलक्रमागतः (वंशानुगत)
दानवीरः (दानवीर)
वीचिवच्चञ्चलम् (लहरों की तरह चंचल)
अनश्वरः (अनश्वर)
'ख' स्तम्भ (विशेष्य)
कल्पतरुः (कल्पवृक्ष)
जीमूतवाहनः (जीमूतवाहन)
धनम् (धन)
परोपकारः (परोपकार)
इस प्रकार, सही जोड़े हैं:
- कुलक्रमागतः कल्पतरुः
- दानवीरः जीमूतवाहनः
- वीचिवच्चञ्चलम् धनम्
- अनश्वरः परोपकारः
Common mistakes
- स्थूल पदों के स्थान पर सही सर्वनाम या संज्ञा का प्रयोग न कर पाना।
- पर्यायवाची शब्दों को पाठ के संदर्भ से अलग पहचानना।
- विशेषण और विशेष्य के लिंग, वचन और कारक के अनुसार सही मिलान न कर पाना।
- प्रश्नों के उत्तर लिखते समय व्याकरणिक अशुद्धियाँ करना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को पाठ के संदर्भ में समझने का प्रयास करें।
- पर्यायवाची शब्दों की सूची बनाएं और उनके अर्थों को याद करें।
- विशेषण-विशेष्य मिलान वाले प्रश्न का अभ्यास करते समय, विशेषण और विशेष्य के बीच संबंध पर ध्यान दें।
- स्थूल पदों के स्थान पर मूल शब्दों को रखकर वाक्य का अर्थ समझने का प्रयास करें।
Practice MCQs
Q1. कल्पतरुः पाठ के अनुसार, कञ्चनपुर नामक नगर कहाँ स्थित था?
Explanation: पाठ के अनुसार, कञ्चनपुर नामक नगर हिमालय पर्वत की चोटी पर स्थित था।
Q2. जीमूतवाहन को यौवराज्य पर किसने अभिषिक्त किया?
Explanation: जीमूतकेतु ने अपने पुत्र जीमूतवाहन को उसके गुणवान और यौवन प्राप्त होने के कारण यौवराज्य पर अभिषिक्त किया।
Q3. जीमूतवाहन ने कल्पतरु के बारे में क्या सोचा?
Explanation: जीमूतवाहन ने सोचा कि वह (कल्पतरु) अभीष्ट मनोरथों को सिद्ध करेगा, क्योंकि उसके पूर्वजों ने केवल धन प्राप्त किया था।
Q4. पाठ के अनुसार, संसार में क्या नश्वर है?
Explanation: पाठ के अनुसार, धन और शरीर नश्वर हैं, जबकि परोपकार अनश्वर है।
Q5. जीमूतवाहन का यश सर्वत्र क्यों फैला?
Explanation: जीमूतवाहन का यश सभी जीवों के प्रति उसकी करुणा (अनुकम्पा) के कारण सर्वत्र फैल गया।
Q6. अभ्यास 2 के अनुसार, 'धनं वीचिवच्चञ्चलम्' यह वाक्य किसने कहा?
Explanation: यह वाक्य जीमूतकेतु ने अपने पुत्र जीमूतवाहन से कहा था, जिसमें धन की चंचलता का वर्णन है।
Frequently asked questions
कक्षा 9 संस्कृत के पाठ 4 'कल्पतरुः' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?
इस पाठ में मुख्य रूप से कल्पवृक्ष की कहानी के माध्यम से परोपकार के महत्व और धन की नश्वरता के बारे में सिखाया गया है। यह बताता है कि सच्चा सुख दूसरों की भलाई करने में है।
इन एनसीईआरटी समाधानों का उपयोग कैसे करें?
इन समाधानों का उपयोग पाठ को समझने, अभ्यासों को हल करने, संस्कृत शब्दावली और व्याकरण का अभ्यास करने और परीक्षा की तैयारी के लिए किया जा सकता है।
क्या ये समाधान कक्षा 9 की संस्कृत परीक्षा के लिए उपयोगी हैं?
हाँ, ये समाधान विशेष रूप से कक्षा 9 की सीबीएसई संस्कृत परीक्षा के लिए डिज़ाइन किए गए हैं और पाठ के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर करते हैं।
पाठ 4 'कल्पतरुः' में 'स्थूल पद' का क्या अर्थ है?
पाठ में 'स्थूल पद' का अर्थ है वे शब्द जो मोटे (बोल्ड) अक्षरों में लिखे गए हैं। इन समाधानों में इन स्थूल पदों के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले अन्य शब्दों (जैसे सर्वनाम या संज्ञा) को पहचानने का अभ्यास कराया गया है।
पर्यायवाची शब्द खोजने का अभ्यास क्यों महत्वपूर्ण है?
पर्यायवाची शब्द खोजने का अभ्यास संस्कृत शब्दावली को बढ़ाता है और पाठ को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है, साथ ही परीक्षा में भी उपयोगी होता है।
विशेषण और विशेष्य का मिलान करने से क्या लाभ है?
विशेषण और विशेष्य का सही मिलान करने से वाक्य की संरचना और अर्थ स्पष्ट होता है। यह संस्कृत व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और परीक्षा में इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
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