कक्षा 9 हिंदी स्पर्श: अध्याय 9 'कीचड़ का काव्य' के लिए NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 की हिंदी स्पर्श पुस्तक के अध्याय 9, 'कीचड़ का काव्य' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। काका कालेलकर द्वारा लिखित यह पाठ कीचड़ के प्रति हमारे दृष्टिकोण पर प्रकाश डालता है, जो अक्सर उपेक्षित होता है लेकिन जीवन और सौंदर्य का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। समाधानों में कीचड़ के प्रति सहानुभूति की कमी के कारणों, जमीन के ठोस होने पर बनने वाले पदचिह्नों, और कीचड़ के अप्रत्याशित सौंदर्य पर चर्चा की गई है। यह पाठ हमें सिखाता है कि कैसे अन्न और कमल जैसे पवित्र फूल भी कीचड़ से ही उत्पन्न होते हैं, और कैसे कलाकार और प्रकृति प्रेमी कीचड़ के रंगों और रूपों की सराहना करते हैं। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 9 |
Chapter summary
कक्षा 9 हिंदी स्पर्श पुस्तक के अध्याय 9 'कीचड़ का काव्य' के NCERT समाधानों में कीचड़ के प्रति समाज की उपेक्षा और उसके वास्तविक महत्व पर प्रकाश डाला गया है। समाधानों में कीचड़ के विभिन्न रूपों, जैसे कि सूखने पर बनने वाले सुंदर दृश्य, और उसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले जीवन (अन्न, कमल) पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह खंड छात्रों को कीचड़ के सौंदर्यशास्त्र और प्रकृति के अभिन्न अंग के रूप में उसके महत्व को समझने में मदद करता है।
Learning outcomes
- कीचड़ के प्रति सामान्य उपेक्षा के कारणों को समझना।
- सूखे कीचड़ के विभिन्न दृश्यों और उनके सौंदर्य का वर्णन करना।
- कीचड़ से उत्पन्न होने वाले जीवन (अन्न, कमल) के महत्व को पहचानना।
- कलाकारों और प्रकृति प्रेमियों द्वारा कीचड़ के सौंदर्य की सराहना को समझना।
- लेखक द्वारा कवियों की धारणा की आलोचना को स्पष्ट करना।
Topics covered
Paper topics
- कीचड़ का महत्व
- कीचड़ के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण
- कीचड़ का सौंदर्य
- प्रकृति और जीवन का संबंध
- अन्न और कमल का उद्गम
- कलात्मक दृष्टिकोण
- कवियों की आलोचना
- काका कालेलकर का लेखन
Important topics
- कीचड़ का अप्रत्याशित सौंदर्य
- कीचड़ से उत्पन्न होने वाले जीवन का महत्व
- कीचड़ के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता
- कलाकारों की नजर में कीचड़ का रंग
- कवियों की दोहरी मानसिकता
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Questions and Solutions
प्रश्न 1:
कीचड़ के प्रति किसी को सहानुभूति नहीं होती क्योंकि यह हमारे शरीर और कपड़ों को गंदा कर देता है। कोई भी व्यक्ति अपने शरीर पर या अपने वस्त्रों पर कीचड़ लगना पसंद नहीं करता। इस कारण लोग इससे दूर रहना चाहते हैं और इसके प्रति उदासीनता रखते हैं।
प्रश्न 2:
जब नदी किनारे का कीचड़ सूख जाता है, तो उस पर बगुले और अन्य पक्षियों के पंजों के निशान अंकित हो जाते हैं। ये निशान दूर तक फैले सूखे कीचड़ पर स्पष्ट दिखाई देते हैं। इसके अतिरिक्त, जब कीचड़ पूरी तरह सूख जाता है, तब गाय, भैंस, पांड़े, भेड़ और बकरी जैसे विभिन्न जानवर भी उस पर अपने पदचिह्न छोड़ जाते हैं, जो प्राकृतिक शोभा को बढ़ाते हैं।
प्रश्न 3:
यदि मनुष्य को यह भान होता कि हम जो अन्न खाते हैं, वह कीचड़ में ही पैदा होता है, और भगवान पर चढ़ाया जाने वाला पवित्र पुष्प कमल भी कीचड़ में ही उगता है, तो वह कीचड़ का तिरस्कार नहीं करता। यह ज्ञान उसे कीचड़ के महत्व को समझने में मदद करता।
प्रश्न 4:
लेखक गंगा या सिंधु नदी के किनारे दूर तक फैले कीचड़ का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि यदि इससे भी मन न भरे, तो खंभात जाकर कीचड़ देखने की इच्छा पूरी की जा सकती है। वहाँ इतना अधिक कीचड़ होता है कि उसके अंदर पूरा का पूरा हाथी भी डूब जाए। यह विशेषता कीचड़ की विशालता और गहराई को दर्शाती है।
प्रश्न 1:
कीचड़ का रंग विशेष रूप से कलाकारों और उन लोगों को खुश करता है जो प्रकृति की सुंदरता का महत्व समझते हैं। पुस्तकों के गत्तों और खरीदे गए कपड़ों के लिए भी कीचड़ के रंग को सबसे अच्छा माना जाता है। जब मिट्टी के बर्तन ज्यादा पक जाने पर काले पड़ जाते हैं, तो कलाकार उसे 'वार्टमोन' (शायद 'वार्म टोन' का आशय है) कहकर उसकी प्रशंसा करते हैं।
प्रश्न 2:
जब नदी के किनारे का कीचड़ सूख जाता है, तो उसमें दरारें पड़ जाती हैं। ये दरारें टूटकर छोटे-छोटे टुकड़ों का रूप ले लेती हैं, जो देखने में अत्यंत सुंदर लगते हैं। दूर-दूर तक फैली यह दरारयुक्त सतह एक ऐसा दृश्य प्रस्तुत करती है जो यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि कीचड़ भी इतना सुंदर हो सकता है।
प्रश्न 3:
कीचड़ की वास्तविक सुंदरता का अनुभव करने के लिए गंगा किनारे या मही नदी के तट पर जाना चाहिए। यदि इससे भी मन तृप्त न हो, तो खंभात जाकर देखना चाहिए, जहाँ दूर-दूर तक फैला कीचड़ प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाता रहता है। इन स्थानों पर सूखे कीचड़ के सुंदर दृश्य देखे जा सकते हैं।
प्रश्न 4:
लेखक ने कवियों की धारणा को युक्तिशून्य इसलिए कहा है क्योंकि वे कमल के फूल के लिए तो बड़ी-बड़ी और सुंदर उपमाएं गढ़ लेते हैं, परंतु जब उनसे कीचड़ के लिए कोई उपमा देने को कहा जाता है, तो वे नाक-भौं सिकोड़ने लगते हैं। लेखक का मानना है कि ऐसी दोहरी मानसिकता वाला व्यक्ति सच्चा प्रकृति प्रेमी नहीं हो सकता।
Common mistakes
- कीचड़ को केवल गंदगी और अप्रियता से जोड़ना।
- कीचड़ से उत्पन्न होने वाले जीवन के महत्व को अनदेखा करना।
- कलात्मक और प्राकृतिक सौंदर्य के रूप में कीचड़ की सराहना न कर पाना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को ध्यान से पढ़ें और कीचड़ के विभिन्न पहलुओं को नोट करें।
- लेखक के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करें कि कैसे कीचड़ का तिरस्कार नहीं किया जाना चाहिए।
- कलाकारों और कवियों के विचारों पर लेखक की प्रतिक्रिया को समझें।
- पाठ में वर्णित कीचड़ के सौंदर्य के उदाहरणों को याद करें।
Practice MCQs
Q1. कीचड़ के प्रति सामान्यतः सहानुभूति क्यों नहीं होती?
Explanation: कीचड़ के प्रति सहानुभूति न होने का मुख्य कारण यह है कि यह हमारे शरीर और कपड़ों को गंदा कर देता है, जिससे लोग इससे दूर रहना पसंद करते हैं।
Q2. सूखे कीचड़ पर किनके पदचिह्न अंकित होते हैं?
Explanation: जब कीचड़ सूख जाता है, तो उस पर बगुले, अन्य पक्षी, गाय, भैंस, भेड़ और बकरी जैसे जानवरों के पदचिह्न अंकित हो जाते हैं।
Q3. लेखक के अनुसार, मनुष्य कीचड़ का तिरस्कार क्यों नहीं करता?
Explanation: लेखक बताते हैं कि यदि मनुष्य को यह भान हो कि अन्न और कमल जैसे पवित्र फूल कीचड़ में ही पैदा होते हैं, तो वह कीचड़ का तिरस्कार नहीं करेगा।
Q4. किन लोगों को कीचड़ का रंग खुश करता है?
Explanation: कलाकारों और प्रकृति की सुंदरता का महत्व समझने वाले लोगों को कीचड़ के रंग की सुंदरता विशेष रूप से आकर्षित करती है।
Q5. लेखक ने कवियों की धारणा को युक्तिशून्य क्यों कहा है?
Explanation: लेखक ने कवियों की धारणा को युक्तिशून्य इसलिए कहा है क्योंकि वे कमल के लिए तो सुंदर उपमाएं गढ़ लेते हैं, परंतु कीचड़ के लिए उपमा देने को कहा जाए तो वे नाक-भौं सिकोड़ते हैं।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 9 के हिंदी विषय के लिए है, जो स्पर्श पुस्तक के अध्याय 9 'कीचड़ का काव्य' पर आधारित है।
इस समाधान में क्या शामिल है?
इसमें अध्याय 9 'कीचड़ का काव्य' के अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत और पुनरलिखित उत्तर शामिल हैं, जो छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं।
कीचड़ के प्रति सहानुभूति क्यों नहीं होती?
कीचड़ के प्रति सहानुभूति इसलिए नहीं होती क्योंकि यह शरीर और कपड़ों को गंदा करता है, जिससे लोग इसे अप्रिय मानते हैं।
लेखक के अनुसार कीचड़ का क्या महत्व है?
लेखक के अनुसार, कीचड़ का महत्व इसलिए है क्योंकि इसी से अन्न पैदा होता है और कमल जैसे पवित्र फूल खिलते हैं, जो जीवन और पवित्रता के प्रतीक हैं।
कलाकारों को कीचड़ का रंग क्यों पसंद आता है?
कलाकारों को कीचड़ का रंग पसंद आता है क्योंकि वे इसे पुस्तकों के गत्तों और कपड़ों के लिए एक उत्कृष्ट रंग मानते हैं और इसके विभिन्न शेड्स में सौंदर्य देखते हैं।
यह समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?
यह समाधान पाठ के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट करता है और अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत उत्तर प्रदान करता है, जिससे छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों को समझने और उनका उत्तर देने में मदद मिलती है।
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