कक्षा 9 हिंदी स्पर्श पाठ 8: तुम कब जाओगे, अतिथि - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 की हिंदी पुस्तक 'स्पर्श' के पाठ 8, 'तुम कब जाओगे, अतिथि' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ शरद जोशी द्वारा लिखा गया है और एक अनचाहे अतिथि के मेजबान पर पड़ने वाले प्रभाव को व्यंग्यात्मक ढंग से दर्शाता है। समाधानों में लेखक की भावनाओं, अतिथि के व्यवहार के विभिन्न पहलुओं और भारतीय संस्कृति में अतिथि सत्कार की परंपरा पर प्रकाश डाला गया है। इसमें पाठ के मुख्य कथनों की व्याख्या भी शामिल है, जैसे कि बटुए का कांपना, अतिथि का देवता न होना, और संबंधों में आने वाले बदलाव। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यह समाधान छात्रों को पाठ के केंद्रीय विचारों को समझने में मदद करते हैं, जिसमें अनचाहे मेहमान के आने पर मेजबान की मानसिक स्थिति, अतिथि सत्कार की सीमाओं और सामाजिक संबंधों में आने वाले बदलावों का वर्णन है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट और विस्तृत है, जिससे छात्रों को परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। यह पाठ व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर भी प्रकाश डालता है, जिसे समाधानों में समझाया गया है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 8 |
Chapter summary
कक्षा 9 हिंदी 'स्पर्श' पुस्तक के पाठ 8, 'तुम कब जाओगे, अतिथि' के लिए NCERT समाधान। यह पाठ शरद जोशी द्वारा लिखित एक व्यंग्यात्मक रचना है जो एक अनचाहे अतिथि के लंबे प्रवास के कारण मेजबान पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक और आर्थिक दबाव को दर्शाती है। समाधान पाठ के मुख्य प्रश्नों के उत्तर प्रदान करते हैं, जिसमें लेखक की अतिथि को विदा करने की इच्छा, अतिथि के व्यवहार पर व्यंग्य, और संबंधों में आने वाले बदलावों का विश्लेषण शामिल है।
Learning outcomes
- लेखक की अतिथि के प्रति भावनाओं को समझना।
- पाठ में प्रयुक्त व्यंग्य की पहचान करना।
- भारतीय संस्कृति में अतिथि सत्कार की परंपरा और उसकी सीमाओं का विश्लेषण करना।
- पाठ के मुख्य कथनों का अर्थ स्पष्ट करना।
- अनचाहे अतिथि के मेजबान पर पड़ने वाले प्रभाव का वर्णन करना।
Topics covered
Paper topics
- अतिथि सत्कार की परंपरा
- व्यंग्य विधा
- अनचाहे अतिथि का प्रभाव
- मानवीय संबंध
- लेखक की मनोदशा
- पाठ के मुख्य कथनों की व्याख्या
- आर्थिक दबाव
- सामाजिक कुरीतियों पर कटाक्ष
Important topics
- पाठ का व्यंग्यात्मक विश्लेषण
- लेखक की अतिथि के प्रति बदलती भावनाएं
- अतिथि सत्कार की सीमाएं
- मुख्य कथनों की व्याख्या
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Questions and Solutions
प्रश्न 1:
लेखक अपने अतिथि को एक ऐसी विदाई देना चाहता था जो स्नेहपूर्ण और यादगार हो। वह चाहता था कि अतिथि उसके घर से जाते समय यहाँ की सुखद स्मृतियाँ अपने मन में संजोकर ले जाए। लेखक मन ही मन यह भी सोचता है कि यदि अतिथि जाने का नाम न ले, तो वह सपरिवार नम आँखों से उसे रेलगाड़ी तक छोड़ने जाएगा, जो एक औपचारिक लेकिन भावुक विदाई का प्रतीक होगा।
प्रश्न 2:
(क) अंदर ही अंदर कहीं मेरा बटुआ काँप गया ।
यह कथन लेखक की आर्थिक चिंता को दर्शाता है। जब लेखक के घर में एक अनचाहा अतिथि आ गया, तो उसे इस बात का अहसास हुआ कि अब उसे अतिथि की खातिरदारी में काफी खर्च करना पड़ेगा। इस महँगाई के दौर में, जहाँ घर चलाना पहले से ही मुश्किल था, अतिथि के आने से खर्चों का बोझ और बढ़ गया। इसी आर्थिक बोझ के डर से लेखक का बटुआ अंदर ही अंदर काँप उठा, अर्थात वह पैसों की तंगी को लेकर चिंतित हो गया।
(ख) अतिथि सदैव देवता नहीं होता ,वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता हैं ।
भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता तुल्य माना जाता है और उसका आदर-सत्कार किया जाता है। हालाँकि, यह कथन इस विचार को चुनौती देता है। लेखक का कहना है कि जब कोई अतिथि आवश्यकता से अधिक समय तक रुककर मेजबान पर बोझ बनने लगता है, तो उसका देवता जैसा सम्मानजनक व्यवहार कम होने लगता है। ऐसी स्थिति में, वह एक सामान्य मानव की तरह व्यवहार करने लगता है और यदि वह और भी अधिक परेशानी का कारण बने, तो वह राक्षस के समान भी लग सकता है, क्योंकि वह मेजबान के लिए असुविधा और तनाव का स्रोत बन जाता है।
(ग) लोग दूसरे के होम की स्वीटनेस को काटने न दौड़ें ।
इस कथन का अर्थ है कि किसी व्यक्ति के घर को 'स्वीट होम' यानी सुखद और आनंदमय स्थान कहा जाता है क्योंकि वहाँ उसे शांति और खुशी मिलती है। लोगों को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे किसी दूसरे के घर का यह सुखद और आनंदमय माहौल बिगड़े। यदि कोई व्यक्ति किसी के घर में अनावश्यक रूप से रुककर या अनुचित व्यवहार करके वहाँ के शांतिपूर्ण और खुशनुमा माहौल को खराब करता है, तो वह अनजाने में ही सही, उस घर की मिठास को कम कर रहा होता है।
(घ) मेरी सहनशीलता की की वह अंतिम सुबह होगी ।
लेखक अपने अतिथि को चार दिनों से झेल रहा था और अब उसकी सहनशक्ति जवाब देने लगी थी। अतिथि के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आ रहा था और वह लगातार रुकता जा रहा था। लेखक मन ही मन अतिथि से ऊब चुका था और उसे कोस रहा था। उसने यह मान लिया था कि यदि अगले दिन भी अतिथि नहीं गया, तो उसकी सहनशीलता की सीमा समाप्त हो जाएगी और वह शायद अतिथि का अपमान करके भी उसे जाने पर मजबूर कर देगा। यह कथन उसकी अत्यधिक निराशा और हताशा को व्यक्त करता है।
(ङ) एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर तक साथ नहीं रह सकते
इस कथन का तात्पर्य यह है कि देवता और मनुष्य दोनों अपने-अपने स्थान पर ही शोभा पाते हैं। देवता मंदिर में पूजनीय होते हैं और मनुष्य समाज में रहने के लिए बने हैं। अतिथि को देवता इसलिए कहा जाता है क्योंकि उसका आगमन घर में खुशियाँ लाता है और वह थोड़े समय के लिए रुककर चला जाता है, ठीक वैसे ही जैसे भगवान भक्त को दर्शन देकर चले जाते हैं। इस दूरी के कारण ही उनके प्रति सम्मान और प्रेम बना रहता है। यदि वे बहुत अधिक समय तक साथ रहें, तो उनके बीच की दूरी समाप्त हो जाती है और सामान्य मानवीय व्यवहार के कारण मन-मुटाव या कड़वाहट पैदा हो सकती है, जिससे वह अलौकिक या पूजनीय भाव समाप्त हो जाता है।
खड – ख
प्रश्न 1:
लेखक अपने अतिथि से बुरी तरह ऊब चुका था और चाहता था कि वह किसी भी तरह सम्मानपूर्वक चला जाए। ऐसे में, जब अतिथि ने कहा कि वह धोबी से अपने कपड़े धुलवाना चाहता है, तो यह बात लेखक के लिए एक अप्रत्याशित और अत्यंत पीड़ादायक आघात थी। इस बात से लेखक को यह आभास हुआ कि अतिथि अभी और रुकने का इरादा रखता है, क्योंकि कपड़े धुलवाने का मतलब है कि वह कुछ और दिन ठहरने की योजना बना रहा है। यह विचार लेखक के लिए असहनीय होता जा रहा था, क्योंकि वह अतिथि के जाने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था।
प्रश्न 2:
इस पंक्ति का अर्थ है कि रिश्तों में एक ऐसा समय आता है जब उनमें दूरी, मन-मुटाव या खटास आने लगती है। जब अतिथि पहली बार लेखक के घर आया था, तो लेखक ने उसका खूब आदर-सत्कार किया था, जिससे घर में खुशी का माहौल था। लेकिन जैसे-जैसे अतिथि के रुकने के दिन बढ़ते गए और वह बोझ बनने लगा, घर के सदस्यों का व्यवहार उसके प्रति बदलने लगा। वे उससे कतराने लगे और उसके जाने की सोचने लगे। यह बदलाव, यानी प्रेम और आदर से दूरी और कड़वाहट की ओर बढ़ना, ही 'संबंधों का संक्रमण का दौर' कहलाता है।
Common mistakes
- अतिथि सत्कार की परंपरा को बिना किसी सीमा के मानना।
- पाठ के व्यंग्यात्मक लहजे को न समझ पाना।
- लेखक की आंतरिक भावनाओं को अनदेखा करना।
Revision tips
- पाठ को व्यंग्य के दृष्टिकोण से पढ़ें और समझें।
- लेखक की मनोदशा को समझने का प्रयास करें।
- पाठ के मुख्य कथनों और उनकी व्याख्याओं को याद करें।
- अतिथि सत्कार की परंपरा और उसके सामाजिक प्रभावों पर विचार करें।
Practice MCQs
Q1. लेखक अपने अतिथि को कैसी विदाई देना चाहता था?
Explanation: लेखक चाहता था कि अतिथि एक अच्छी यादें लेकर जाए और उसे नम आँखों से विदा किया जाए।
Q2. अतिथि के आने पर लेखक का बटुआ क्यों काँप गया?
Explanation: महंगाई के दौर में अनचाहे अतिथि की खातिरदारी के खर्च का विचार करके लेखक का बटुआ काँप गया।
Q3. पाठ के अनुसार, 'अतिथि सदैव देवता नहीं होता' का क्या अर्थ है?
Explanation: यह पंक्ति दर्शाती है कि अतिथि का व्यवहार जब परेशानी का कारण बनने लगे, तो वह देवता समान नहीं रह जाता।
Q4. धोबी से कपड़े धुलवाने की बात अतिथि के लिए क्या संकेत थी?
Explanation: कपड़े धुलवाने की बात से लेखक को लगा कि अतिथि अभी और रुकने का इरादा रखता है, जो उसके लिए असहनीय था।
Q5. लेखक के अनुसार, 'एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर तक साथ नहीं रह सकते' क्यों?
Explanation: यह पंक्ति दर्शाती है कि किसी भी रिश्ते में दूरी प्रेम और सम्मान बनाए रखने में सहायक होती है, जबकि अत्यधिक निकटता से मन-मुटाव उत्पन्न हो सकता है।
Frequently asked questions
कक्षा 9 हिंदी स्पर्श पाठ 8 का मुख्य विषय क्या है?
कक्षा 9 हिंदी स्पर्श पाठ 8, 'तुम कब जाओगे, अतिथि', एक अनचाहे अतिथि के लंबे प्रवास के कारण मेजबान पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक और आर्थिक दबाव पर एक व्यंग्यात्मक रचना है।
लेखक अतिथि को कैसी विदाई देना चाहता था?
लेखक अतिथि को एक भावभीनी विदाई देना चाहता था, ताकि अतिथि उसके घर की अच्छी यादें लेकर जाए।
पाठ में 'बटुआ काँप गया' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि अनचाहे अतिथि की खातिरदारी के बढ़ते खर्च के विचार से लेखक चिंतित और भयभीत हो गया।
क्या यह पाठ अतिथि सत्कार की परंपरा के विरुद्ध है?
नहीं, यह पाठ अतिथि सत्कार की परंपरा के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह उस स्थिति पर व्यंग्य करता है जब कोई अतिथि अनावश्यक रूप से लंबा रुककर मेजबान के लिए बोझ बन जाता है।
इन NCERT समाधानों से छात्रों को कैसे मदद मिलेगी?
ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, मुख्य प्रश्नों के उत्तर तैयार करने और परीक्षा में अच्छे अंक लाने में मदद करेंगे।
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