कक्षा 9 हिंदी स्पर्श पाठ 7: धर्म की आड़ - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 9 की हिंदी पुस्तक 'स्पर्श' के पाठ 7, 'धर्म की आड़' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा लिखित यह पाठ धर्म के नाम पर होने वाले छल-कपट और व्यापार पर प्रकाश डालता है। समाधान खंड-क और खंड-ख के सभी प्रश्नों के उत्तर प्रदान करते हैं, जिसमें बताया गया है कि कैसे चालाक लोग धर्म का दुरुपयोग करके आम जनता का शोषण करते हैं। यह पाठ धर्म की सच्ची भावना को समझने और अंधविश्वासों से दूर रहने के महत्व पर जोर देता है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 7

Chapter summary

कक्षा 9 हिंदी 'स्पर्श' पुस्तक के पाठ 7 'धर्म की आड़' के ये NCERT समाधान, गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा रचित पाठ पर आधारित हैं। समाधान धर्म के नाम पर किए जाने वाले शोषण और पाखंड का पर्दाफाश करते हैं। यह पाठ बताता है कि कैसे कुछ लोग धर्म का इस्तेमाल अपने स्वार्थ के लिए करते हैं और आम जनता को गुमराह करते हैं। समाधान अभ्यास के प्रश्नों के माध्यम से इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हैं, जिससे छात्रों को धर्म की सही भावना और समाज में इसके दुरुपयोग को समझने में मदद मिलती है।

Learning outcomes

  • धर्म के नाम पर होने वाले शोषण को पहचानना।
  • लेखक के विचारों को समझना कि धर्म व्यक्तिगत होना चाहिए।
  • साधारण लोगों की भावनाओं का दुरुपयोग कैसे किया जाता है, यह समझना।
  • धर्म की सच्ची भावना और आडंबर में अंतर स्पष्ट करना।
  • देश की स्वाधीनता और धार्मिक सहिष्णुता के महत्व को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • धर्म का दुरुपयोग
  • धार्मिक पाखंड
  • जनता का शोषण
  • धर्म की सच्ची भावना
  • अंधविश्वास
  • देश की स्वाधीनता
  • धार्मिक सहिष्णुता
  • लेखक के विचार
  • गणेश शंकर विद्यार्थी

Important topics

  • धर्म के नाम पर होने वाला व्यापार
  • लेखक की दृष्टि में धर्म का स्वरूप
  • जनता की भोली अवस्था का लाभ उठाना
  • धार्मिक आडंबर और सच्ची भावना में अंतर

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Questions and Solutions

प्रश्न 1:

चलते-पुरजे लोग धर्म के नाम पर क्या-क्या करते हैं?
Solution:

आज के समाज में कुछ 'चलते-पुरजे' या चालाक लोग अपनी नेतृत्व क्षमता और बड़प्पन बनाए रखने के लिए, अनपढ़ और भोले-भाले लोगों की भावनाओं और उत्साह का धर्म और ईमान के नाम पर गलत इस्तेमाल करते हैं। वे उन्हें भड़काकर अपने स्वार्थों को पूरा करते हैं।

प्रश्न 2:

चालाक लोग साधारण आदमी की किस अवस्था का लाभ उठाते हैं?
Solution:

चालाक लोग साधारण आदमी की इस अवस्था का लाभ उठाते हैं कि वे धर्म और ईमान के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। इन चालाक लोगों ने आम आदमी के मन में यह बात अच्छी तरह बिठा दी है कि अपने धर्म की रक्षा के लिए प्राण तक दे देना चाहिए और जो कुछ भी कहा जा रहा है, वही सच्चा धर्म है। इस प्रकार, वे उनकी धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाकर उन्हें अपने नियंत्रण में रखते हैं।

प्रश्न 3:

आने वाला समय किस प्रकार के धर्म को नहीं टिकने देगा?
Solution:

लेखक के अनुसार, आने वाला समय ऐसे धर्म को नहीं टिकने देगा जो आपस में लोगों को लड़ाकर केवल अपने स्वार्थ की पूर्ति करता हो। भविष्य में विभिन्न धर्मों के बीच टकराव के लिए कोई स्थान नहीं होगा। दूसरे धर्मों की निंदा करना या उन्हें नीचा दिखाना देशद्रोह के समान समझा जाएगा, और ऐसे धर्म का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

प्रश्न 4:

कौन-सा कार्य देश की स्वाधीनता के विरुद्ध समझा जाएगा?
Solution:

किसी भी व्यक्ति के धर्म की निंदा करना, उसके धार्मिक कार्यों में बाधा डालना, या धर्म के नाम पर लोगों को आपस में लड़ाना, देश की स्वाधीनता के विरुद्ध समझा जाएगा। यह कार्य देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करता है।

प्रश्न 5:

पाश्चात्य देशों में धनी और निर्धन लोगों में क्या अंतर है?
Solution:

पाश्चात्य देशों में, धनी लोग गरीब मजदूरों की कमाई पर ही पलते हैं और वे ऐसी व्यवस्था बनाए रखते हैं जिससे गरीब हमेशा गरीब ही बने रहें। इस शोषणकारी व्यवस्था के कारण ही साम्यवाद और बोल्शेविज्म जैसी विचारधाराओं का जन्म हुआ, जो धनवानों द्वारा गरीबों के शोषण का विरोध करती हैं।

प्रश्न 6:

कौन-से लोग धार्मिक लोगों से अधिक अच्छे हैं?
Solution:

लेखक के अनुसार, वे लोग उन धार्मिक लोगों से अधिक अच्छे हैं जो दिन-रात केवल अपने आराध्य की पूजा करते हैं और दूसरों को आपस में लड़ाते हैं। भले ही ये 'अच्छे' लोग ईश्वर को न मानें, लेकिन वे दूसरों के सुख-दुख में साथ देते हैं, किसी को परेशान नहीं करते और आपस में नहीं लड़वाते। उनकी मानवतावादी प्रवृत्ति उन पाखंडी धार्मिक लोगों से बेहतर है जो केवल बाहरी आडंबर करते हैं।

खंड – ख

प्रश्न 1:

धर्म और ईमान के नाम पर किए जाने वाले भीषण व्यापार को कैसे रोका जा सकता है?
Solution:

धर्म और ईमान के नाम पर होने वाले इस भीषण व्यापार को रोकने के लिए यह आवश्यक है कि सभी लोग धर्म से ऊपर उठकर देश के हित के बारे में सोचें। उन्हें ऐसे लोगों को स्पष्ट रूप से जवाब देना होगा कि वे अब उनकी बातों में आने वाले नहीं हैं और उनके द्वारा फैलाया जा रहा भ्रम का व्यापार बंद होना चाहिए। राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।

प्रश्न 2:

'बुद्धि पर मार' के संबंध में लेखक के क्या विचार हैं?
Solution:

लेखक का 'बुद्धि पर मार' के संबंध में यह मानना है कि कुछ स्वयंभू मसीहा बनने वाले लोग, भोली-भाली जनता को धर्म के नाम पर डराकर उनकी बुद्धि पर अपना कब्जा कर लेते हैं। वे अपनी मनमानी चलाते हैं और अपना व्यापार बढ़ाते हैं। जनता उनकी बातों में आकर बौद्धिक रूप से उनकी गुलाम बन जाती है, जिससे उनकी अपनी सोचने-समझने की शक्ति समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 3:

लेखक की दृष्टि में धर्म की भावना कैसी होनी चाहिए?
Solution:

लेखक के अनुसार, धर्म की उपासना के मार्ग में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। हर व्यक्ति को अपनी इच्छा अनुसार, जिस प्रकार चाहे, अपने मन में धर्म की भावना को जगाना चाहिए। धर्म और ईमान मन का सौदा होना चाहिए, जो ईश्वर और आत्मा के बीच एक निजी संबंध स्थापित करे। यह आत्मा को शुद्ध करने और उसे ऊंचा उठाने का साधन बने। किसी भी दशा में, धर्म का प्रयोग किसी दूसरे व्यक्ति की स्वतंत्रता को छीनने या कुचलने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

Common mistakes

  • धर्म के नाम पर होने वाले व्यापार को केवल व्यक्तिगत धार्मिक आचरण तक सीमित समझना।
  • लेखक के विचारों को गलत समझना कि धर्म पूरी तरह से व्यक्तिगत होना चाहिए और समाज से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
  • यह न समझ पाना कि कैसे चालाक लोग जनता की भावनाओं का फायदा उठाते हैं।

Revision tips

  • पाठ के मुख्य विचारों को रेखांकित करें, विशेष रूप से धर्म के दुरुपयोग पर लेखक के विचारों पर ध्यान दें।
  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को अपने शब्दों में समझाने का अभ्यास करें।
  • लेखक द्वारा बताए गए 'चलते-पुरजे' और 'चालाक' लोगों के तरीकों को पहचानें।
  • धर्म की सच्ची भावना और समाज में इसके सकारात्मक योगदान पर विचार करें।

Practice MCQs

Q1. धर्म के नाम पर अपना स्वार्थ सिद्ध करने वाले लोग क्या करते हैं?

Q2. लेखक के अनुसार, आने वाला समय किस प्रकार के धर्म को नहीं टिकने देगा?

Q3. किसी के धर्म की निंदा करना या धार्मिक कार्यों में बाधा डालना किसके विरुद्ध समझा जाएगा?

Q4. लेखक की दृष्टि में धर्म कैसा होना चाहिए?

Q5. 'बुद्धि पर मार' के संबंध में लेखक क्या कहते हैं?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी स्पर्श के पाठ 7 का मुख्य विषय क्या है?

पाठ 7 'धर्म की आड़' का मुख्य विषय धर्म के नाम पर होने वाले छल-कपट, पाखंड और शोषण का पर्दाफाश करना है। लेखक बताते हैं कि कैसे कुछ लोग धर्म का दुरुपयोग करके आम जनता को गुमराह करते हैं।

लेखक गणेश शंकर विद्यार्थी धर्म के बारे में क्या विचार रखते हैं?

लेखक के अनुसार, धर्म व्यक्तिगत होना चाहिए, जो आत्मा को शुद्ध करे और ईश्वर व आत्मा के बीच का संबंध हो। यह किसी को नियंत्रित करने या लड़ाने का साधन नहीं बनना चाहिए।

धर्म के नाम पर होने वाले व्यापार को कैसे रोका जा सकता है?

लेखक के अनुसार, इस व्यापार को रोकने के लिए लोगों को धर्म से ऊपर उठकर देश के बारे में सोचना होगा और ऐसे लोगों को स्पष्ट जवाब देना होगा कि वे अब गुमराह नहीं होंगे।

यह NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेगा?

यह समाधान पाठ के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करता है, जिससे छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का सटीक उत्तर देने में मदद मिलती है।

पाठ में 'बुद्धि पर मार' का क्या अर्थ है?

पाठ में 'बुद्धि पर मार' का अर्थ है कि कुछ लोग धर्म के नाम पर भोली-भाली जनता को डराकर उनकी सोचने-समझने की शक्ति पर कब्जा कर लेते हैं और उन्हें अपने अनुसार चलाते हैं।

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