कक्षा 9 हिंदी संचयन: अध्याय 3 कल्लू कुम्हार की उनाकोटी - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की पुस्तक 'संचयन' के अध्याय 3, 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय त्रिपुरा की सांस्कृतिक और भौगोलिक विरासत की पड़ताल करता है, जिसमें उनाकोटी के प्रसिद्ध मूर्तिकला स्थल, स्थानीय किंवदंतियाँ और विभिन्न समुदायों के सह-अस्तित्व पर प्रकाश डाला गया है। समाधानों में 'उनाकोटी' नाम की उत्पत्ति, गंगावतरण की कथा, कल्लू कुम्हार की किंवदंती, और त्रिपुरा के बहुधार्मिक समाज की संरचना जैसे विषयों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, यह अध्याय त्रिपुरा के घरेलू उद्योगों, जैसे अगरबत्ती निर्माण और आलू की खेती, के महत्व पर भी प्रकाश डालता है। ये समाधान छात्रों को अध्याय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 3

Chapter summary

कक्षा 9 हिंदी संचयन के अध्याय 3 के ये NCERT समाधान 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' पर केंद्रित हैं। इसमें उनाकोटी के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व, मूर्तियों की उत्पत्ति से जुड़ी किंवदंतियों, और स्थानीय समुदायों के जीवन पर प्रकाश डाला गया है। समाधान त्रिपुरा के सामाजिक ताने-बाने, बहुधार्मिक सह-अस्तित्व और स्थानीय उद्योगों जैसे आलू की खेती और अगरबत्ती निर्माण की जानकारी भी प्रदान करते हैं।

Learning outcomes

  • उनाकोटी के अर्थ और इसके नामकरण के पीछे की किंवदंतियों को समझना।
  • गंगावतरण से संबंधित स्थानीय कथा को अपने शब्दों में व्यक्त करना।
  • कल्लू कुम्हार की कहानी और उनाकोटी से उसके जुड़ाव को समझाना।
  • त्रिपुरा के बहुधार्मिक समाज की विशेषताओं का वर्णन करना।
  • लेखक के अनुभव और त्रिपुरा की सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को समझना।
  • त्रिपुरा के घरेलू उद्योगों और कृषि (आलू की खेती) के महत्व को पहचानना।

Topics covered

Paper topics

  • उनाकोटी का अर्थ और महत्व
  • गंगावतरण की कथा
  • कल्लू कुम्हार की किंवदंती
  • त्रिपुरा का बहुधार्मिक समाज
  • लेखक का त्रिपुरा अनुभव
  • त्रिपुरा के घरेलू उद्योग
  • आलू की खेती
  • स्थानीय कला और शिल्प

Important topics

  • उनाकोटी का अर्थ और नामकरण
  • कल्लू कुम्हार की कहानी
  • त्रिपुरा का बहुधार्मिक समाज
  • त्रिपुरा के घरेलू उद्योग और कृषि

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Questions and Solutions

1. 'उनाकोटी' का अर्थ स्पष्ट करते हुए बतलाएँ कि यह स्थान इस नाम से क्यों प्रसिद्ध है?

'उनाकोटी' का अर्थ स्पष्ट करते हुए बतलाएँ कि यह स्थान इस नाम से क्यों प्रसिद्ध है?
Solution: 'उनाकोटी' शब्द का अर्थ है 'एक करोड़ से एक कम'। त्रिपुरा राज्य में स्थित यह स्थान अपनी विशाल और अनूठी मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध है। एक स्थानीय दंत कथा के अनुसार, यहाँ शिव की एक करोड़ मूर्तियाँ बनाने का प्रयास किया गया था, लेकिन एक मूर्ति कम रह गई। इसी कारण इस स्थान का नाम 'उनाकोटी' पड़ गया, जो इसकी विशिष्ट पहचान बन गई है।

2. पाठ के संदर्भ में उनाकोटी में स्थित गंगावतरण की कथा को अपने शब्दों में लिखिए।

पाठ के संदर्भ में उनाकोटी में स्थित गंगावतरण की कथा को अपने शब्दों में लिखिए।
Solution: पाठ के अनुसार, उनाकोटी में गंगावतरण की कथा को एक पहाड़ी पर चित्रित किया गया है। यह कथा बताती है कि कैसे राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं। चूँकि गंगा का वेग बहुत अधिक था, जिसे पृथ्वी सहन नहीं कर सकती थी, इसलिए शिवजी ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण कर लिया और फिर धीरे-धीरे पृथ्वी पर छोड़ा। इस प्रकार गंगा का वेग नियंत्रित हुआ और वे 'भागीरथी' कहलाईं। उनाकोटी की मूर्तियाँ इस पौराणिक घटना को दर्शाती हैं।

3. कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी से किस प्रकार जुड़ गया?

कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी से किस प्रकार जुड़ गया?
Solution: उनाकोटी में बनी हजारों मूर्तियों के निर्माता के बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं है। हालाँकि, स्थानीय आदिवासियों के बीच एक लोकप्रिय किंवदंती है कि इन मूर्तियों का निर्माता कल्लू कुम्हार नामक एक व्यक्ति था। वह पार्वती का परम भक्त था और शिव-पार्वती के साथ कैलाश पर्वत जाना चाहता था। पार्वती के आग्रह पर शिवजी मान गए, लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि कल्लू को एक रात में शिव की एक करोड़ मूर्तियाँ बनानी होंगी। भोर होने तक मूर्तियाँ एक करोड़ से एक कम निकलीं। इस प्रकार, शिवजी को कल्लू से पीछा छुड़ाने का बहाना मिल गया और वे उसे उसकी मूर्तियों के साथ उनाकोटी में ही छोड़कर चले गए। इसी कथा के कारण कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी से जुड़ गया।

4. 'मेरी रीढ़ में एक झ्रझ्री-सी दौड़ गई' – लेखक के इस कथन के पीछे कौन-सी घटना जुड़ी है?

'मेरी रीढ़ में एक झ्रझ्री-सी दौड़ गई' – लेखक के इस कथन के पीछे कौन-सी घटना जुड़ी है?
Solution: लेखक त्रिपुरा में शूटिंग के दौरान सी.आर.पी.एफ. के जवानों द्वारा सुरक्षा प्रदान किए जाने के समय की घटना का वर्णन कर रहे हैं। जवानों ने लेखक का ध्यान निचली पहाड़ियों पर जानबूझकर रखे गए दो पत्थरों की ओर खींचा। जब जवानों ने बताया कि दो दिन पहले ही एक सेना का जवान विद्रोहियों द्वारा इसी स्थान पर मारा गया था, तो यह सुनकर लेखक को गहरा सदमा लगा और उनकी रीढ़ में एक झुरझुरी-सी दौड़ गई। यह घटना त्रिपुरा में व्याप्त अशांति और खतरे के माहौल को दर्शाती है।

5. त्रिपुरा 'बहुधार्मिक समाज' का उदाहरण कैसे बना?

त्रिपुरा 'बहुधार्मिक समाज' का उदाहरण कैसे बना?
Solution: त्रिपुरा एक बहुधार्मिक समाज का उत्कृष्ट उदाहरण है क्योंकि यहाँ विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के लोग सदियों से एक साथ निवास करते आ रहे हैं। लगातार बाहरी लोगों के आगमन और प्रवास के कारण, त्रिपुरा में सांस्कृतिक विविधता बढ़ी है। यहाँ उन्नीस अनुसूचित जनजातियाँ निवास करती हैं, और बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म जैसे विश्व के प्रमुख धर्मों के अनुयायी भी यहाँ पाए जाते हैं। अगरतला के बाहरी इलाके में एक सुंदर बौद्ध मंदिर भी स्थित है, जो यहाँ की धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाता है।

6. टीलियामुरा कस्बे में लेखक का परिचय किन दो प्रमुख हस्तियों से हुआ? समाज-कल्याण के कार्यों में उनका क्या योगदान था?

टीलियामुरा कस्बे में लेखक का परिचय किन दो प्रमुख हस्तियों से हुआ? समाज-कल्याण के कार्यों में उनका क्या योगदान था?
Solution: टीलियामुरा कस्बे में लेखक का परिचय दो प्रमुख हस्तियों से हुआ: समाज सेविका मंजु ऋषिदास और लोकगायक हेमंत कुमार जमातिया। मंजु ऋषिदास एक रेडियो कलाकार होने के साथ-साथ नगर पंचायत में अपने वार्ड का प्रतिनिधित्व भी करती थीं। यद्यपि वे स्वयं निरक्षर थीं, फिर भी उन्होंने अपने वार्ड की सबसे बड़ी आवश्यकता, स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास किए। उन्होंने वार्ड में नल लगवाने, सभी घरों तक पानी पहुँचाने और गलियों में ईंटें बिछवाने जैसे महत्वपूर्ण समाज-कल्याण के कार्य किए। हेमंत कुमार जमातिया एक लोकगायक थे जिन्होंने अपने संगीत के माध्यम से समाज में योगदान दिया (हालांकि उनके विशिष्ट योगदान का विवरण यहाँ नहीं दिया गया है, पर लोकगायक के रूप में उनका सांस्कृतिक महत्व रहा होगा)।

7. कैलासशहर के ज़िलाधिकारी ने आलू की खेती के विषय में लेखक को क्या जानकारी दी?

कैलासशहर के ज़िलाधिकारी ने आलू की खेती के विषय में लेखक को क्या जानकारी दी?
Solution: उत्तरी त्रिपुरा जिले के मुख्यालय कैलासशहर में लेखक ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। जिलाधिकारी ने आलू की खेती के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पारंपरिक आलू के बीजों से एक हेक्टेयर भूमि में बुवाई के लिए आमतौर पर दो मीट्रिक टन बीज की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, टी.पी.एस. (Tissue Culture Potato Seed) की केवल 100 ग्राम मात्रा ही एक हेक्टेयर की बुवाई के लिए पर्याप्त होती है। जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि त्रिपुरा की टी.पी.एस. का निर्यात न केवल भारत के अन्य राज्यों जैसे असम, मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में किया जा रहा है, बल्कि बांग्लादेश, मलेशिया और वियतनाम जैसे देशों में भी इसका निर्यात हो रहा है, जो त्रिपुरा की कृषि उत्पादकता और निर्यात क्षमता को दर्शाता है।

8. त्रिपुरा के घरेलू उद्योगों पर प्रकाश डालते हुए अपनी जानकारी के कुछ अन्य घरेलू उद्योगों के विषय में बताइए?

त्रिपुरा के घरेलू उद्योगों पर प्रकाश डालते हुए अपनी जानकारी के कुछ अन्य घरेलू उद्योगों के विषय में बताइए?
Solution: त्रिपुरा में आलू की खेती के अलावा कई महत्वपूर्ण घरेलू उद्योग भी संचालित होते हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान करते हैं। इनमें प्रमुख हैं: 1. **अगरबत्ती बनाना:** अगरबत्ती बनाने का उद्योग यहाँ काफी विकसित है। विशेष रूप से अगरबत्ती बनाने के लिए सीकों को तैयार किया जाता है, जिनका निर्यात गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में होता है। 2. **बाँस के खिलौने बनाना:** त्रिपुरा अपने बाँस के हस्तशिल्प के लिए भी जाना जाता है, जिसमें खिलौने बनाना भी शामिल है। 3. **मालाएँ बनाना:** गले में पहनने की मालाएँ बनाने का उद्योग भी यहाँ प्रचलित है। इनके अतिरिक्त, लेखक ने कुछ अन्य घरेलू उद्योगों का भी उल्लेख किया है जो त्रिपुरा में प्रसिद्ध हैं, जैसे माचिस, साबुन, प्लास्टिक उत्पाद, जूते और कपड़े का निर्माण। ये उद्योग स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं।

Common mistakes

  • उनाकोटी के नामकरण के पीछे की किंवदंतियों को समझने में भ्रम।
  • कल्लू कुम्हार की कहानी के विभिन्न पहलुओं को याद रखने में कठिनाई।
  • त्रिपुरा के बहुधार्मिक समाज के उदाहरणों को स्पष्ट रूप से न बता पाना।
  • घरेलू उद्योगों और कृषि के महत्व को कम आंकना।

Revision tips

  • उनाकोटी से संबंधित सभी किंवदंतियों को एक साथ सूचीबद्ध करें।
  • कल्लू कुम्हार की कहानी के मुख्य बिंदुओं को नोट करें।
  • त्रिपुरा के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विशेष ध्यान दें।
  • घरेलू उद्योगों और कृषि से संबंधित जानकारी को संक्षेप में लिखें।

Practice MCQs

Q1. 'उनाकोटी' का शाब्दिक अर्थ क्या है?

Q2. उनाकोटी में मूर्तियों की संख्या कितनी बताई गई है?

Q3. कल्लू कुम्हार का संबंध किस स्थान से जोड़ा जाता है?

Q4. त्रिपुरा को 'बहुधार्मिक समाज' का उदाहरण क्यों माना जाता है?

Q5. लेखक के कथन 'मेरी रीढ़ में एक झ्रझ्री-सी दौड़ गई' का क्या कारण था?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी के अध्याय 3 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' में मुख्य रूप से किन विषयों पर चर्चा की गई है?

इस अध्याय में मुख्य रूप से त्रिपुरा के उनाकोटी नामक स्थान की मूर्तिकला, उससे जुड़ी किंवदंतियाँ (जैसे कल्लू कुम्हार की कहानी और गंगावतरण), त्रिपुरा के बहुधार्मिक समाज की संरचना, और वहाँ के घरेलू उद्योगों जैसे अगरबत्ती निर्माण और आलू की खेती पर चर्चा की गई है।

'उनाकोटी' का क्या अर्थ है और यह नाम क्यों प्रसिद्ध है?

'उनाकोटी' का शाब्दिक अर्थ है 'एक करोड़ से एक कम'। यह त्रिपुरा में स्थित एक स्थान है जो अपनी विशाल मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध है। एक दंत कथा के अनुसार, यहाँ शिव की एक करोड़ में एक मूर्ति कम है, इसी कारण इसका नाम 'उनाकोटी' पड़ा।

कल्लू कुम्हार का उनाकोटी से क्या संबंध है?

स्थानीय आदिवासियों का मानना है कि उनाकोटी की हजारों मूर्तियों का निर्माता कल्लू कुम्हार था। वह शिव-पार्वती के साथ कैलाश जाना चाहता था, जिसके लिए उसे एक रात में एक करोड़ मूर्तियाँ बनानी थीं। मूर्तियाँ कम बनने पर शिवजी उसे वहीं छोड़कर चले गए, इस प्रकार कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी से जुड़ गया।

त्रिपुरा को 'बहुधार्मिक समाज' का उदाहरण क्यों कहा गया है?

त्रिपुरा में विभिन्न जनजातियों और संस्कृतियों के लोगों के लगातार आगमन के कारण यह एक बहुधार्मिक समाज का उदाहरण बन गया है। यहाँ उन्नीस अनुसूचित जनजातियाँ निवास करती हैं और बौद्ध, हिंदू जैसे विभिन्न धर्मों के अनुयायी एक साथ रहते हैं।

इस अध्याय के समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को अध्याय के कठिन प्रश्नों के उत्तर समझने में मदद करते हैं। प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान किया गया है, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में सहायता मिलती है।

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