कक्षा 9 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 2 स्मृति

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यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की पुस्तक 'संचयन' के पाठ 2 'स्मृति' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें लेखक के बचपन की स्मृतियों, विशेष रूप से कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने के साहसिक कार्य का वर्णन है। समाधान पाठ में वर्णित विभिन्न घटनाओं, जैसे भाई के बुलाने पर लेखक के मन में डर, बच्चों की शरारतें, और अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने के लिए बनाई गई योजनाओं की पड़ताल करते हैं। यह पाठ बाल-सुलभ शरारतों, मनुष्य के अनुमानों की अनिश्चितता और कर्म व फल के संबंध जैसे विषयों पर प्रकाश डालता है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 2

Chapter summary

कक्षा 9 हिंदी की पुस्तक 'संचयन' के पाठ 2 'स्मृति' के ये NCERT समाधान छात्रों को लेखक की बचपन की स्मृतियों से परिचित कराते हैं। इसमें कुएँ में गिरी चिट्ठियों को साँप के होते हुए भी निकालने के साहसिक प्रयास का विस्तृत वर्णन है। समाधान बच्चों की शरारतों, अप्रत्याशित घटनाओं के प्रति उनकी प्रतिक्रियाओं और मनुष्य के अनुमानों की सीमाओं जैसे विषयों को स्पष्ट करते हैं। यह पाठ कर्म और फल की अनिश्चितता पर भी प्रकाश डालता है, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं।

Learning outcomes

  • लेखक के बचपन की स्मृतियों और अनुभवों को समझना।
  • साहसिक कार्यों और अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने की रणनीतियों का विश्लेषण करना।
  • बाल-सुलभ शरारतों और उनके पीछे की मनोदशा को पहचानना।
  • मनुष्य के अनुमानों और योजनाओं की अनिश्चितता को समझना।
  • कर्म और फल के संबंध में पाठ के संदेश को स्पष्ट करना।

Topics covered

Paper topics

  • बचपन की स्मृतियाँ
  • साहसिक कार्य
  • साँप का भय
  • चिट्ठियों का महत्व
  • बाल-सुलभ शरारतें
  • अप्रत्याशित घटनाएँ
  • मनुष्य के अनुमान
  • कर्म और फल का सिद्धांत

Important topics

  • कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने का साहसिक वर्णन
  • लेखक के मन का डर और साहस
  • बाल-सुलभ शरारतों का चित्रण
  • मनुष्य के अनुमानों की अनिश्चितता
  • कर्म और फल का संबंध

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में किस बात का डर था?
Solution: जब लेखक झरबेरी से बेर तोड़ रहा था, तभी एक आदमी ने पुकार कर कहा कि उसके भाई बुला रहे हैं और शीघ्र घर चले आएँ। यह सुनकर लेखक घर की ओर लौटने लगा। पर लेखक के मन में अपने भाई की मार का डर था, इसलिए वह सहमा हुआ जा रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उससे कौन-सा अपराध हो गया है। उसे यह आशंका थी कि कहीं बेर तोड़ने के अपराध में ही उसे सज़ा न मिल जाए। इसी अज्ञात डर से वह डरते-डरते घर में घुसा।

प्रश्न 2

मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढेला क्यों फेंकती थी?
Solution: मक्खनपुर पढ़ने जाने वाले बच्चों की टोली शरारती थी। उन्हें पता था कि कुएँ में साँप रहता है। लेखक ढेला फेंककर साँप से फुफकार करवाना एक महत्वपूर्ण कार्य समझता था। बच्चों में ढेला फेंककर फुफकार सुनने की प्रवृत्ति जागृत हो गई थी। वे कुएँ में ढेला फेंककर उसकी आवाज और उससे उत्पन्न प्रतिध्वनि सुनने की लालसा रखते थे।

प्रश्न 3

'साँप ने फुफकार मारी या नहीं, ढेला उसे लगा या नहीं, यह बात अब तक स्मरण नहीं' – यह कथन लेखक की किस मनोदशा को स्पष्ट करता है?
Solution: यह कथन लेखक की उस मनोदशा को स्पष्ट करता है जब वह अत्यधिक भयभीत और घबराया हुआ था। यह घटना १९०८ में घटी थी और लेखक ने इसे बहुत बाद में लिखा। जब लेखक ने ढेला उठाकर कुएँ में साँप पर फेंका, तब उसकी टोपी में रखी चिट्ठियाँ कुएँ में गिर गईं। यह देखकर दोनों भाई घबरा गए और रोने लगे। लेखक को भाई की पिटाई का डर था और वह माँ की गोद याद कर रहा था। इस अत्यधिक भय और घबराहट के कारण उसे यह ठीक से याद नहीं कि साँप ने फुफकार मारी थी या नहीं, और ढेला उसे लगा भी था या नहीं।

प्रश्न 4

किन कारणों से लेखक ने चिट्ठियों को कुएँ से निकालने का निर्णय लिया?
Solution: लेखक ने चिट्ठियों को कुएँ से निकालने का निर्णय कई कारणों से लिया। सबसे प्रमुख कारण यह था कि वे चिट्ठियाँ उसके बड़े भाई ने दी थीं और उनके गिरने से उसे भाई की पिटाई का डर सता रहा था। चिट्ठियाँ गिरने के बाद वह और भी भयभीत हो गया था। इस डर और घबराहट की मनःस्थिति में, उसने कुएँ में उतरकर चिट्ठियों को निकालने का जोखिम भरा निर्णय लिया।

प्रश्न 5

साँप का ध्यान बाँटने के लिए लेखक ने क्या-क्या युक्तियाँ अपनाई?
Solution: साँप का ध्यान बाँटने और चिट्ठियों को निकालने के लिए लेखक ने निम्नलिखित युक्तियाँ अपनाईं:
  1. सबसे पहले, उसने डंडे से साँप को दबाने का विचार छोड़ दिया क्योंकि यह संभव नहीं था।
  2. जब साँप का फन पीछे की ओर हुआ, तो उसने तुरंत अपने डंडे को चिट्ठियों की ओर बढ़ाया और लिफाफा उठाने की कोशिश की।
  3. जब साँप डंडे से चिपक गया और डंडा लेखक की ओर खिंच आया, तो साँप का आसन बदल गया। इस अवसर का लाभ उठाकर लेखक ने तुरंत लिफाफे और पोस्टकार्ड उठा लिए और उन्हें अपनी धोती के छोर में बाँध लिया।

प्रश्न 6

कुएँ में उतरकर चिट्ठियों को निकालने संबंधी साहसिक वर्णन को अपने शब्दों में लिखिए।
Solution: चिट्ठियाँ एक सूखे कुएँ में गिर गई थीं, जहाँ साँप भी था। कुएँ में उतरकर चिट्ठियाँ निकालना एक अत्यंत साहसिक कार्य था। लेखक ने इस चुनौती को स्वीकार किया। उसने छः धोतियों को जोड़कर एक लंबा डंडा बनाया। डंडे के एक सिरे को कुएँ में डालकर, दूसरे सिरे को कुएँ के चारों ओर घुमाकर गाँठ लगाई और अपने छोटे भाई को पकड़ने के लिए दे दिया। इसी धोती के सहारे लेखक कुएँ में उतरा। जब वह ज़मीन से चार-पाँच गज ऊपर था, उसने साँप को फन फैलाए देखा। वह कुछ देर धोती पकड़े लटका रहा ताकि साँप उस पर हमला न कर सके। साँप को धोती पर लटककर मारना संभव नहीं था और डंडा चलाने के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं थी। उसने डंडे से चिट्ठियों को खिसकाने का प्रयास किया, जिस पर साँप डंडे से चिपक गया। साँप का पिछला हिस्सा लेखक के हाथ को छू गया, जिससे लेखक ने घबराकर डंडा फेंक दिया। डंडा लेखक की ओर खिंच आने से साँप का आसन बदल गया। इसी क्षण का लाभ उठाकर लेखक ने तुरंत लिफाफे और पोस्टकार्ड चुन लिए और उन्हें अपनी धोती के छोर में बाँध लिया।

प्रश्न 7

इस पाठ को पढ़ने के बाद किन-किन बाल-सुलभ शरारतों के विषय में पता चलता है?
Solution: इस पाठ को पढ़ने के बाद निम्नलिखित बाल-सुलभ शरारतों के विषय में पता चलता है:
  • बच्चे झरबेरी के पेड़ से बेर तोड़कर खाने का आनंद लेते हैं।
  • स्कूल जाते समय रास्ते में शरारतें करते हैं, जैसे कुएँ में ढेला फेंकना।
  • कठिन और जोखिम भरे कार्य करने का प्रयास करते हैं, जैसे साँप के होते हुए कुएँ में उतरना।
  • जानवरों और जीव-जंतुओं को तंग करते हैं, जैसे साँप को फुफकारने के लिए ढेला मारना।
  • कुएँ में ढेला फेंककर उसकी आवाज और प्रतिध्वनि सुनने में आनंद पाते हैं।
  • माली से छिपकर फल तोड़ने की कोशिश करते हैं (यह सामान्य बाल-सुलभ शरारत का उदाहरण है)।
  • गलत काम करने के बाद पकड़े जाने या सज़ा मिलने से डरते हैं।

प्रश्न 8

'मनुष्य का अनुमान और भावी योजनाएँ कभी-कभी कितनी मिथ्या और उलटी निकलती हैं'- का आशय स्पष्ट कीजिए।
Solution: इस कथन का आशय यह है कि मनुष्य किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए विभिन्न प्रकार के अनुमान लगाता है और भविष्य के लिए योजनाएँ बनाता है। परंतु, उसकी सभी योजनाएँ और अनुमान हमेशा सफल नहीं होते। कभी उसे सफलता मिलती है तो कभी विफलता का सामना करना पड़ता है। कई बार उसकी बनाई योजनाएँ उम्मीद के विपरीत परिणाम देती हैं। इस पाठ में लेखक ने कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने के लिए कई अनुमान लगाए, योजनाएँ बनाईं और उनमें फेर-बदल भी किया, लेकिन अंततः उसे सफलता मिली। यह दर्शाता है कि मनुष्य के प्रयास महत्वपूर्ण हैं, पर अंतिम परिणाम हमेशा उसके नियंत्रण में नहीं होता।

प्रश्न 9

'फल तो किसी दूसरी शक्ति पर निर्भर है' – पाठ के संदर्भ में इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Solution: इस पंक्ति का आशय यह है कि मनुष्य केवल कर्म कर सकता है, परंतु उस कर्म का फल क्या मिलेगा, यह ईश्वर या किसी अन्य उच्च शक्ति पर निर्भर करता है। मनुष्य अपनी इच्छा अनुसार फल प्राप्त नहीं कर सकता; यह उस शक्ति पर निर्भर करता है जो फल प्रदान करती है। पाठ के संदर्भ में, लेखक ने कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने के लिए बहुत प्रयास किए, योजनाएँ बनाईं और जोखिम उठाया। यद्यपि उसने कर्म किया, पर उसे सफलता मिली या नहीं, यह एक प्रकार से उस 'दूसरी शक्ति' पर निर्भर था जिसने उसे सुरक्षित बाहर निकाला और चिट्ठियाँ प्राप्त करने में सहायता की। यह विचार भगवद्गीता के कर्म-फल सिद्धांत से भी मेल खाता है, जिसमें कहा गया है कि 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन्' (कर्म पर तुम्हारा अधिकार है, फल पर नहीं)।

Common mistakes

  • घटनाओं के क्रम को समझने में गलती करना।
  • साँप के डर और चिट्ठियाँ निकालने के साहस के बीच के द्वंद्व को न समझ पाना।
  • लेखक की मनोदशा का सही विश्लेषण न कर पाना।
  • पाठ में वर्णित बाल-सुलभ शरारतों को सतही तौर पर लेना।

Revision tips

  • पाठ में वर्णित घटनाओं के क्रम को याद करें, विशेषकर कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने की प्रक्रिया।
  • लेखक के मन में उठ रहे डर और उसके साहस के बीच के द्वंद्व पर ध्यान केंद्रित करें।
  • पाठ में बाल-सुलभ शरारतों के उदाहरणों को पहचानें और उनका विश्लेषण करें।
  • मनुष्य के अनुमानों और कर्म-फल के संबंध पर आधारित पंक्तियों के आशय को समझें।

Practice MCQs

Q1. भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में किस बात का डर था?

Q2. मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चे कुएँ में ढेला क्यों फेंकते थे?

Q3. कुएँ में गिरी चिट्ठियों को निकालने का निर्णय लेखक ने क्यों लिया?

Q4. साँप का ध्यान बाँटने के लिए लेखक ने डंडे का प्रयोग कैसे किया?

Q5. 'मनुष्य का अनुमान और भावी योजनाएँ कभी-कभी कितनी मिथ्या और उलटी निकलती हैं' - यह कथन पाठ के किस प्रसंग से संबंधित है?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी के पाठ 2 'स्मृति' में मुख्य रूप से किन घटनाओं का वर्णन है?

पाठ 2 'स्मृति' में मुख्य रूप से लेखक की बचपन की स्मृतियों का वर्णन है, जिसमें भाई के बुलाने पर घर लौटते समय का डर, बच्चों द्वारा कुएँ में ढेला फेंकना और साँप के होते हुए भी कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने का साहसिक कार्य शामिल है।

लेखक को कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने में किस बात का डर था?

लेखक को मुख्य रूप से अपने बड़े भाई की पिटाई का डर था, क्योंकि चिट्ठियाँ उसके भाई ने दी थीं और वे कुएँ में गिर गई थीं। उसे यह भी डर था कि कहीं बेर तोड़ने के अपराध में उसे सज़ा न मिले।

पाठ 'स्मृति' में बाल-सुलभ शरारतों के कौन-कौन से उदाहरण दिए गए हैं?

पाठ में झरबेरी से बेर तोड़ना, स्कूल जाते समय कुएँ में ढेला फेंककर साँप की फुफकार सुनना, और जोखिम भरे काम करना जैसी बाल-सुलभ शरारतों का वर्णन है।

'मनुष्य का अनुमान और भावी योजनाएँ कभी-कभी कितनी मिथ्या और उलटी निकलती हैं' - इस पंक्ति का क्या अर्थ है?

इस पंक्ति का अर्थ है कि मनुष्य किसी भी स्थिति से निपटने के लिए जो अनुमान लगाता है और योजनाएँ बनाता है, वे हमेशा सफल नहीं होतीं। कभी-कभी वे गलत साबित होती हैं या उनका परिणाम अप्रत्याशित होता है।

यह NCERT समाधान कक्षा 9 के छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को पाठ 'स्मृति' के सभी प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद मिलती है।

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