CBSE Class 9 Shemushi Chapter 4: Kalpavriksha (कल्पतरुः) NCERT Solutions
This section provides detailed NCERT Solutions for Class 9 Shemushi, Chapter 4, titled 'Kalpavriksha' (कल्पतरुः). The chapter narrates the story of Jimutavahana and the wish-fulfilling Kalpavriksha tree. The solutions cover various aspects of the chapter, including one-word answers, full sentence answers, identifying words used in context, and finding synonyms from the text. Students will find explanations for questions related to the characters, their actions, the significance of the Kalpavriksha, and the moral lessons of generosity and selflessness. These solutions are designed to help students understand the chapter thoroughly and prepare effectively for their examinations by clarifying complex concepts and providing accurate answers.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | Shemushi |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 4 |
Chapter summary
Chapter 4 of CBSE Class 9 Shemushi, 'Kalpavriksha' (कल्पतरुः), focuses on the story of Jimutavahana and his encounter with a wish-granting tree. The NCERT Solutions provided here cover exercises that test comprehension of the narrative, character analysis, and vocabulary. Students will practice answering questions in different formats, identifying the usage of specific words, and finding synonyms within the text, reinforcing their understanding of the chapter's themes of altruism and the transient nature of wealth.
Learning outcomes
- Understand the story of Jimutavahana and the Kalpavriksha.
- Identify key characters and their motivations.
- Answer comprehension questions in Hindi based on the text.
- Learn the usage of specific words in context.
- Expand vocabulary by finding synonyms for given words.
- Grasp the moral of the story regarding generosity and selflessness.
Topics covered
Paper topics
- Kalpavriksha Story
- Jimutavahana's Character
- Generosity and Altruism
- The Nature of Wealth
- Sanskrit Comprehension
- Vocabulary Building
- Synonyms in Sanskrit
- Grammar in Context
Important topics
- The moral of Jimutavahana's story
- Understanding the Kalpavriksha's power
- Identifying character traits
- Vocabulary and synonyms
- Answering comprehension questions
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Questions and Solutions
प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरं लिखत –
- (क) जीमूतवाहनः कस्य पुत्रः अस्ति?
- (ख) संसारेऽस्मिन् कः अनश्वरः भवति?
- (ग) जीमूतवाहनः परोपकारैकफलसिद्धये कम् आराधयति?
- (घ) जीमूतवाहनस्य सर्वभूतानुकम्पया सर्वत्र किं प्रथितम्?
- (ङ) कल्पतरुः भुवि कानि अवर्ष?
यहाँ प्रश्न 1 के एक-शब्द में उत्तर दिए गए हैं:
- (क) जीमूतवाहनः जीमूतकेतोः पुत्रः आसीत्।
- (ख) संसार में परोपकारः ही अनश्वर (अविनाशी) होता है।
- (ग) जीमूतवाहनः परोपकार के एकमात्र फल की सिद्धि के लिए कल्पपादपम् (कल्पवृक्ष) की आराधना करता है।
- (घ) जीमूतवाहन की सभी प्राणियों के प्रति करुणा के कारण उसका यशः (यश) सर्वत्र फैल गया था।
- (ङ) कल्पवृक्ष ने पृथ्वी पर वसूनी (धन-सम्पत्ति) की वर्षा की।
प्रश्न 2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तरः संस्कृतभाषया लिखित –
- (क) कञ्चनपुरं नाम नगरं कुत्र विभाति स्म?
- (ख) जीमूतवाहनः कीदृशः आसीत्?
- (ग) कल्पतरोः वैशिष्ट्यमाकर्ण्य जीमूतवाहनः किम् अचिन्तयत्?
- (घ) हितैषिणः मन्त्रिणः जीमूतवाहनं किम् उक्तवन्तः?
- (ङ) जीमूतवाहनः कल्पतरुम् उपगम्य किम् उवाच?
यहाँ प्रश्न 2 के उत्तर संस्कृत भाषा में दिए गए हैं:
- (क) कञ्चनपुर नाम का नगर हिमवान पर्वत की चोटी पर सुशोभित होता था। कञ्चनपुर नाम नगर हिमवतः सानोपरि विभाति स्म।
- (ख) जीमूतवाहन महान दानवीर और सभी प्राणियों पर दया करने वाला था। जीमूतवाहनः महान् दानवीरः सर्वभूतानुकम्पी च आसीत्।
- (ग) कल्पवृक्ष की विशेषता सुनकर जीमूतवाहन ने सोचा कि "अहो! इस प्रकार के अमर वृक्ष को पाकर भी पूर्वजों ने हमसे कोई विशेष फल प्राप्त नहीं किया। केवल कुछ कृपणों ने ही कुछ इच्छाएँ माँगी। इसलिए मैं इस कल्पवृक्ष से अपनी मनचाही इच्छा पूरी करूँगा।" कल्पतरोः वैशिष्ट्यमाकर्ण्य जीमूतवाहनः अचिन्तयत् यत् "अहो! ईदृशम् अमरपादपं प्राप्यापि पूर्वैः पुरुषैः अस्माकं तादृशं फलं किमपि न प्राप्तम्। किन्तु केवलं कैश्चिदेव कृपणैः कश्चिदपि अर्थः अर्थितः। तदहमस्मात् कल्पतरोः अभीष्टं साधयामि" इति।
- (घ) हितैषी मंत्रियों ने जीमूतवाहन से कहा: "युवराज! यह जो सर्वकामनाओं को पूर्ण करने वाला कल्पवृक्ष आपके उद्यान में स्थित है, वह सदा पूजनीय है। इसके अनुकूल रहने पर इन्द्र भी हमें बाधा नहीं पहुँचा सकता।" हितैषिणः मन्त्रिणः जीमूतवाहनं उक्तवन्त:- "युवराज! योऽयं सर्वकामदः कल्पतरुः तवोद्याने तिष्ठति स तव सदा पूज्यः। अस्मिन् अनुकूले स्थिते सति शक्रोऽपि अस्मान् बाधितुं न शक्नुयात्।"
- (ङ) जीमूतवाहन कल्पवृक्ष के पास जाकर बोला: "देव! आपने हमारे पूर्वजों की इच्छाएँ पूरी की हैं, तो मेरी एक इच्छा पूरी करें। कृपया ऐसा करें कि मैं पृथ्वी को दरिद्र रहित देखूँ।" जीमूतवाहन: कल्पतरुम् उपगम्य उवाच- "देव! त्वया अस्मत्पूर्वेषाम् अभीष्टाः कामाः पूरिताः तन्ममैक कामं पूरय। यथा पृथिवीम् अदरिद्राम् पश्यामि तथा करोतु देव" इति।
प्रश्न 3. अधोलिखितवाक्येषु स्थूलपदानि कस्मै प्रयुक्तानि?
- (क) तस्य सानोरुपरि विभाति कञ्चनपुरं नाम नगरम्।
- (ख) राजा सम्प्राप्तयौवनं तं यौवराज्ये अभिषिक्तवान्?
- (ग) अयं तव सदा पूज्यः।
- (घ) तात! त्वं तु जानासि यत् धनं वीचिवच्चञ्चलम्।
उत्तर:
- (क) हिमवते (हिमालयाय)
- (ख) राजपुत्राय (जीमूतवाहनाय)
- (ग) कल्पतरवे
- (घ) पित्रे (जीमूतकेतवे राज्ञे)
यहाँ वाक्यों में मोटे अक्षरों वाले पदों का प्रयोग किसके लिए किया गया है, यह बताया गया है:
- (क) वाक्य "तस्य सानोरुपरि विभाति कञ्चनपुरं नाम नगरम्" में 'तस्य' (उसके) शब्द का प्रयोग हिमवान पर्वत (हिमालय) के लिए किया गया है।
- (ख) वाक्य "राजा सम्प्राप्तयौवनं तं यौवराज्ये अभिषिक्तवान्" में 'तं' (उसको) शब्द का प्रयोग राजकुमार जीमूतवाहन के लिए किया गया है।
- (ग) वाक्य "अयं तव सदा पूज्यः" में 'अयं' (यह) शब्द का प्रयोग कल्पवृक्ष के लिए किया गया है।
- (घ) वाक्य "तात! त्वं तु जानासि यत् धनं वीचिवच्चञ्चलम्" में 'तात' (पिता) शब्द का प्रयोग जीमूतकेतु राजा (जीमूतवाहन के पिता) के लिए किया गया है।
प्रश्न ४. अधोलिखितानां पदानां पर्यायपदं पाठात् चित्वा लिखत –
- (क) पर्वत: – .....
- (ख) भूपतिः – .....
- (ग) इन्द्रः – .....
- (घ) धनम् – .....
- (ङ) इच्छितम् – .....
- (च) समीपम् – .....
- (छ) धरित्रीम् – .....
- (ज) कल्याणम् – .....
- (झ) वाणी – .....
- (ज) वृक्षः – .....
उत्तर:
- (क) पर्वत: – नगेन्द्रः
- (ख) भूपतिः – राजा
- (ग) इन्द्रः – शक्रः
- (घ) धनम् – अर्थः
- (ङ) इच्छितम् – अभीष्टम्/अर्थितः
- (च) समीपम् – अन्तिकम्
यहाँ पाठ से चुनकर दिए गए पदों के पर्यायवाची शब्द लिखे गए हैं:
- (क) पर्वत: – नगेन्द्रः (पाठ में 'हिमवान' का प्रयोग पर्वत के लिए हुआ है, और 'नगेन्द्रः' भी पर्वत का पर्यायवाची है, यहाँ संभवतः पाठ में 'नगेन्द्रः' शब्द नहीं है, पर 'हिमवान' का प्रयोग हुआ है। दिए गए उत्तर के अनुसार 'नगेन्द्रः' सही है।)
- (ख) भूपतिः – राजा (पाठ में 'राजा' शब्द का प्रयोग हुआ है।)
- (ग) इन्द्रः – शक्रः (पाठ में 'शक्रः' शब्द का प्रयोग हुआ है।)
- (घ) धनम् – अर्थः (पाठ में 'अर्थः' शब्द का प्रयोग हुआ है।)
- (ङ) इच्छितम् – अभीष्टम् / अर्थितः (पाठ में 'अभीष्टम्' और 'अर्थितः' दोनों का प्रयोग हुआ है।)
- (च) समीपम् – अन्तिकम् (पाठ में 'अन्तिकम्' शब्द का प्रयोग हुआ है।)
- (छ) धरित्रीम् – वसुनी (यहाँ 'धरित्रीम्' का अर्थ पृथ्वी है, और पाठ में 'पृथिवीम्' शब्द का प्रयोग हुआ है। दिए गए उत्तर 'वसूनी' का अर्थ धन है, जो यहाँ मेल नहीं खाता। संभवतः यहाँ 'पृथिवीम्' अपेक्षित था।)
- (ज) कल्याणम् – यशः (यहाँ 'कल्याणम्' का अर्थ मंगल या शुभ है, जबकि 'यशः' का अर्थ कीर्ति है। पाठ में 'यशः' शब्द का प्रयोग हुआ है, पर 'कल्याणम्' के पर्यायवाची के रूप में नहीं।)
- (झ) वाणी – उवाच (यहाँ 'वाणी' का अर्थ 'बोलना' या 'कथन' है, और 'उवाच' क्रियापद है। पाठ में 'उवाच' का प्रयोग हुआ है।)
- (ज) वृक्षः – कल्पपादपम् (पाठ में 'कल्पपादपम्' शब्द का प्रयोग वृक्ष के लिए हुआ है।)
नोट: कुछ पर्यायवाची शब्द पाठ के संदर्भ के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं या दिए गए उत्तर पाठ में सीधे उपलब्ध नहीं हो सकते हैं।
Common mistakes
- Confusing the meanings of similar-sounding Sanskrit words.
- Incorrectly identifying the referent of a pronoun or noun in a sentence.
- Difficulty in recalling specific details from the story for full sentence answers.
- Errors in matching synonyms due to lack of contextual understanding.
Revision tips
- Read the chapter 'Kalpavriksha' thoroughly before attempting the solutions.
- Pay close attention to the meaning of highlighted words in Question 3.
- Practice writing the answers in full sentences as required in Question 2.
- Use the synonym matching exercise (Question 4) to build your Sanskrit vocabulary.
- Discuss the moral of the story with classmates to solidify understanding.
Practice MCQs
Q1. कल्पतरुः इति कथायाः मुख्य पात्रं कः अस्ति?
Explanation: कथायाः मुख्य पात्रं जीमूतवाहनः अस्ति, यः परोपकारिणः स्वभावस्य प्रतीकः अस्ति।
Q2. जीमूतवाहनः कस्य पुत्रः आसीत्?
Explanation: जीमूतवाहनः राजा जीमूतकेतोः पुत्रः आसीत्।
Q3. संसारेऽस्मिन् कः अनश्वरः भवति इति पाठः सूचयति?
Explanation: पाठः सूचयति यत् परोपकारः एव अनश्वरः भवति, न तु धनम्।
Q4. कल्पतरुः किं दातुं समर्थः आसीत्?
Explanation: कल्पतरुः सर्वकामदः आसीत्, अर्थात् सः सर्वेषाम् इच्छितान् कामान् पूरयितुं समर्थः आसीत्।
Q5. जीमूतवाहनः कल्पतरुम् उपगम्य किं प्रार्थितवान्?
Explanation: जीमूतवाहनः प्रार्थितवान् यत् पृथिवीम् अदरिद्राम् पश्येत्, अर्थात् सर्वेभ्यः दुःखं दूरीकुर्यात्।
Frequently asked questions
कक्षा 9 के लिए CBSE Shemushi के अध्याय 4 का शीर्षक क्या है?
कक्षा 9 के लिए CBSE Shemushi के अध्याय 4 का शीर्षक 'कल्पतरुः' है।
यह NCERT समाधान किस भाषा में हैं?
ये NCERT समाधान हिंदी भाषा में उपलब्ध हैं।
अध्याय 'कल्पतरुः' की मुख्य कहानी क्या है?
यह अध्याय जीमूतवाहन नामक राजकुमार और एक इच्छा-पूर्ति करने वाले कल्पवृक्ष की कहानी बताता है, जो परोपकार और निस्वार्थता के महत्व पर जोर देता है।
इन समाधानों से छात्रों को क्या सीखने को मिलेगा?
छात्रों को कहानी की समझ, पात्रों का विश्लेषण, संस्कृत शब्दावली और वाक्य-निर्माण का अभ्यास करने में मदद मिलेगी।
प्रश्न 3 में 'स्थूलपदानि कस्मै प्रयुक्तानि?' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि पाठ में मोटे अक्षरों में दिए गए शब्दों (स्थूलपदानि) का प्रयोग किसके लिए किया गया है, यह बताना।
प्रश्न 4 में 'पर्यायपदं पाठात् चित्वा लिखत' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि दिए गए शब्दों के पर्यायवाची शब्द पाठ से चुनकर लिखने हैं।
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