कक्षा 9 संस्कृत शेमुषी: अध्याय 5 सूक्तिमौक्तिकम् NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 9 की संस्कृत शेमुषी पुस्तक के अध्याय 5, 'सूक्तिमौक्तिकम्' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय जीवन के महत्वपूर्ण नैतिक मूल्यों और सूक्तियों पर केंद्रित है, जो छात्रों को संस्कृत भाषा के माध्यम से ज्ञान और सदाचार सिखाता है। समाधानों में श्लोकों के अर्थ, व्याकरणिक विश्लेषण और अभ्यास प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जो छात्रों को पाठ को गहराई से समझने में मदद करते हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से दिया गया है, जिससे छात्रों को परीक्षा की तैयारी में आसानी हो। यह संसाधन छात्रों को संस्कृत साहित्य की समृद्ध विरासत से जुड़ने और नैतिक शिक्षा प्राप्त करने में सहायता करता है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
SubjectShemushi
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 5

Chapter summary

अध्याय 5 'सूक्तिमौक्तिकम्' में संस्कृत साहित्य के विभिन्न स्रोतों से चुनी गई प्रेरक सूक्तियों का संग्रह है। यह अध्याय छात्रों को जीवन के महत्वपूर्ण पाठ सिखाता है, जैसे मित्रता का महत्व, प्रिय वचन बोलने का प्रभाव, और धन तथा चरित्र की रक्षा। समाधानों में अभ्यास प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जिनमें एक-शब्द उत्तर, पूर्ण वाक्य उत्तर, विशेषण-विशेष्य मिलान, श्लोकों का आशय और भिन्न-प्रकृतिक पद का चयन शामिल है। यह छात्रों को सूक्तियों के अर्थ को समझने और संस्कृत भाषा के प्रयोग में निपुणता प्राप्त करने में मदद करता है।

Learning outcomes

  • एक-शब्द और पूर्ण वाक्यों में उत्तर देने का अभ्यास करना।
  • श्लोकों के आशय को हिंदी या अंग्रेजी में व्यक्त करना सीखना।
  • विशेषण और विशेष्य पदों को सही ढंग से पहचानना और मिलाना।
  • दिए गए शब्दों में से भिन्न-प्रकृतिक पद का चयन करना।
  • संस्कृत सूक्तियों के माध्यम से नैतिक मूल्यों को समझना।
  • प्रिय वचन बोलने और चरित्र की रक्षा के महत्व को जानना।

Topics covered

Paper topics

  • सूक्तिमौक्तिकम् का परिचय
  • एक-शब्द उत्तर वाले प्रश्न
  • पूर्ण वाक्य उत्तर वाले प्रश्न
  • विशेषण-विशेष्य का मिलान
  • श्लोक का आशय (हिंदी/अंग्रेजी)
  • भिन्न-प्रकृतिक पद का चयन
  • नैतिक मूल्य और सूक्तियाँ
  • मित्रता का स्वरूप (खल और सज्जन)
  • प्रिय वचन का महत्व
  • चरित्र और धन की रक्षा

Important topics

  • श्लोक का आशय लिखना
  • भिन्न-प्रकृतिक पद का चयन
  • विशेषण-विशेष्य का मिलान
  • प्रिय वचन और चरित्र रक्षा का महत्व
  • मित्रता के प्रकार

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Questions and Solutions

प्रश्न 1: एकपदेन उत्तरं लिखत

1. एक शब्द में उत्तर लिखिए:
  • (क) वित्ततः क्षीणः कीदृशः भवति?
  • (ख) कस्य प्रतिकूलानि कार्याणि परेषां न समाचरेत्?
  • (ग) कुत्र दरिद्रता न भवेत्?
  • (घ) वृक्षाः स्वयं कानि न खादन्ति?
  • (ङ) का पुरा लघ्वी भवति?
Solution:

यहाँ एक-शब्द में उत्तर दिए गए हैं:

  • (क) वित्ततः क्षीणः व्यक्ति 'अक्षीणः' भवति, अर्थात् उसका चरित्र या गुण नष्ट नहीं होता।
  • (ख) हमें अपने 'आत्मनः' (स्वयं के) प्रतिकूल अर्थात् अप्रिय लगने वाले कार्यों को दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए।
  • (ग) प्रिय वचन बोलने से सभी प्रसन्न होते हैं, इसलिए प्रियवाक्यप्रदानेन (प्रिय वचन बोलने में) दरिद्रता नहीं होनी चाहिए।
  • (घ) वृक्ष स्वयं अपने 'फलानि' (फलों) को नहीं खाते हैं, बल्कि दूसरों के लिए उत्पन्न करते हैं।
  • (ङ) सज्जनानां मैत्री (सज्जनों की मित्रता) आरम्भ में 'लघ्वी' (छोटी) होती है।

प्रश्न 2: अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में लिखिए:
  • (क) यत्नेन किं रक्षेत् वित्तं वृत्तं वा?
  • (ख) अस्माभिः (किं न समाचरेत्) कीदृशम् आचरणं न कर्त्तव्यम्?
  • (ग) जन्तवः केन तुष्यन्ति?
  • (घ) सज्जनानां मैत्री की हशी भवति?
  • (ङ) सरोवराणां हानिः कदा भवति?
Solution:

यहाँ दिए गए प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में प्रस्तुत हैं:

  • (क) यत्नेन वृत्तं रक्षेत्। (हमें प्रयत्नपूर्वक अपने चरित्र की रक्षा करनी चाहिए, धन की अपेक्षा चरित्र अधिक महत्वपूर्ण है।)
  • (ख) अस्माभिः आत्मनः प्रतिकूलानि आचरणं न कर्त्तव्यम्। (हमें ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए जो हमें स्वयं अप्रिय लगे, अर्थात् दूसरों के साथ वैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।)
  • (ग) जनाः प्रियवाक्यप्रदानेन तुष्यन्ति। (सभी प्राणी प्रिय वचन सुनकर प्रसन्न होते हैं।)
  • (घ) सज्जनानां मैत्री पुरा लघ्वी वृद्धिमती च पश्चात् दिनस्य परार्द्धस्य छायेव भवति। (सज्जनों की मित्रता पहले छोटी होती है और बाद में बढ़ती है, ठीक वैसे ही जैसे दिन के उत्तरार्ध की छाया।)
  • (ङ) मरालैः सह विप्रयोगः (वियोगः) सरोवराणां हानिः भवति। (जब हंसों से वियोग हो जाता है, तब सरोवरों की हानि होती है, क्योंकि हंस सरोवरों की शोभा और जीवन होते हैं।)

प्रश्न 3: 'क' स्तम्भः विशेषणानि 'ख' स्तम्भः च विशेष्याणि दत्तानि, तानि यथोचितं योजयत

3. 'क' स्तंभ में विशेषण और 'ख' स्तंभ में विशेष्य दिए गए हैं, उन्हें उचित रूप से मिलाइए:

'क' स्तम्भः — 'ख' स्तम्भः

  • (क) आस्वाद्यतोयाः — (1) खलानां मैत्री
  • (ख) गुणयुक्तः — (2) सज्जनानां मैत्री
  • (ग) दिनस्य पूर्वार्द्धभिन्ना — (3) नद्यः
  • (घ) दिनस्य परार्द्धभिन्ना — (४) दरिद्रः
Solution:

यहाँ 'क' स्तंभ के विशेषणों का 'ख' स्तंभ के विशेष्यों के साथ सही मिलान दिया गया है:

'क' स्तम्भः — 'ख' स्तम्भः

  • (क) आस्वाद्यतोयाः (स्वादिष्ट जल वाली) — (3) नद्यः (नदियाँ)
  • (ख) गुणयुक्तः (गुणों से युक्त) — (४) दरिद्रः (यह विशेषण यहाँ उपयुक्त नहीं है, संभवतः प्रश्न में त्रुटि है या यह किसी अन्य संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है। दिए गए विकल्पों में से कोई भी सीधा मेल नहीं खाता। यदि 'गुणयुक्तः' का अर्थ 'सज्जन' से लिया जाए तो (2) हो सकता है, पर यह प्रत्यक्ष नहीं है। मूल स्रोत के अनुसार मिलान इस प्रकार है।)
  • (ग) दिनस्य पूर्वार्द्धभिन्ना (दिन के पूर्वार्ध से भिन्न) — (1) खलानां मैत्री (खल/दुष्टों की मित्रता)
  • (घ) दिनस्य परार्द्धभिन्ना (दिन के उत्तरार्ध से भिन्न) — (2) सज्जनानां मैत्री (सज्जनों की मित्रता)

स्पष्टीकरण:

  • स्वादिष्ट जल वाली नदियाँ होती हैं।
  • खल/दुष्टों की मित्रता दिन के पूर्वार्ध की छाया की तरह होती है, जो आरम्भ में बड़ी और फिर छोटी होती जाती है।
  • सज्जनों की मित्रता दिन के उत्तरार्ध की छाया की तरह होती है, जो आरम्भ में छोटी और फिर बड़ी होती जाती है।
  • 'गुणयुक्तः' का सीधा विशेष्य यहाँ नहीं है, पर यदि 'गुणयुक्तः' का अर्थ 'सज्जन' के संदर्भ में लिया जाए तो यह 'सज्जनानां मैत्री' से संबंधित हो सकता है, लेकिन यह प्रत्यक्ष मिलान नहीं है। मूल प्रश्न के अनुसार दिए गए उत्तरों का पालन किया गया है।

प्रश्न 4: अधोलिखितयोः श्लोकद्वयोः आशयं हिन्दीभाषया आङ्ग्लभाषया वा लिखत

4. निम्नलिखित दो श्लोकों का आशय हिंदी या अंग्रेजी भाषा में लिखिए:

(क) आरम्भगुर्वी क्षयिणी क्रमेण

लघ्वी पुरा वृद्धिमती च पश्चात्।

दिनस्य पूर्वार्द्धपरार्द्धभिन्ना

छायेव मैत्री खलसज्जनानाम्।।

(ख) प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।

तस्माद् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता।।

Solution:

यहाँ दोनों श्लोकों का आशय हिंदी में प्रस्तुत है:

(क) श्लोक का आशय:

दुष्ट लोगों की मित्रता आरम्भ में बड़ी (गंभीर) होती है और धीरे-धीरे क्षीण (कम) होती जाती है। इसके विपरीत, सज्जन लोगों की मित्रता आरम्भ में छोटी (कम) होती है, परन्तु समय के साथ बढ़ती जाती है। यह मित्रता दिन के पूर्वार्ध (सुबह) की छाया की तरह है जो लम्बी होती है और फिर छोटी होती जाती है, तथा दिन के उत्तरार्ध (दोपहर बाद) की छाया की तरह है जो पहले छोटी होती है और फिर लम्बी होती जाती है।

(ख) श्लोक का आशय:

सभी प्राणी प्रिय वचन सुनकर प्रसन्न होते हैं। इसलिए, हमें हमेशा प्रिय वचन ही बोलना चाहिए। प्रिय वचन बोलने में कैसी कंजूसी या दरिद्रता? हमें मधुर और प्रिय वाणी का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि इससे सभी प्रसन्न होते हैं।

प्रश्न 5: अधोलिखितपदेभ्यः भिन्नप्रकृतिकं पदं चित्वा लिखत

5. निम्नलिखित पदों में से भिन्न प्रकृति (अलग) वाले पद का चयन करके लिखिए:
  • (क) वक्तव्यम्, कर्तव्यम्, सर्वस्वम्, हन्तव्यम्।
  • (ख) यत्नेन, वचने, प्रियवाक्यप्रदानेन, मरालेन।
  • (ग) श्रूयताम्, अवधार्यताम्, धनवताम्, क्षम्यताम्।
  • (घ) जन्तवः, नद्यः, विभूतयः, परितः।
Solution:

यहाँ प्रत्येक समूह से भिन्न प्रकृति वाले पद का चयन किया गया है, साथ ही उसका कारण भी बताया गया है:

  • (क) भिन्न पद है: सर्वस्वम्। कारण: 'वक्तव्यम्', 'कर्तव्यम्', और 'हन्तव्यम्' सभी 'व्य' प्रत्यय वाले क्रियार्थक संज्ञा या अव्यय हैं जो किसी कार्य को करने या न करने का बोध कराते हैं। 'सर्वस्वम्' का अर्थ है 'सब कुछ', जो इस समूह से भिन्न है।
  • (ख) भिन्न पद है: वचने। कारण: 'यत्नेन', 'प्रियवाक्यप्रदानेन', और 'मरालेन' सभी 'एन' (en) प्रत्यय से युक्त हैं जो करण कारक (साधन) का बोध कराते हैं। 'वचने' 'ए' (e) प्रत्यय से युक्त है और सप्तमी विभक्ति (स्थान या समय) का बोध कराता है।
  • (ग) भिन्न पद है: धनवताम्। कारण: 'श्रूयताम्', 'अवधार्यताम्', और 'क्षम्यताम्' सभी 'ताम्' (tām) प्रत्यय वाले लोट् लकार (आज्ञार्थक) के मध्यम पुरुष एकवचन के रूप हैं, जो आज्ञा या अनुरोध का बोध कराते हैं। 'धनवताम्' षष्ठी विभक्ति का बहुवचन रूप है, जिसका अर्थ 'धनवानों का' होता है।
  • (घ) भिन्न पद है: परितः। कारण: 'जन्तवः', 'नद्यः', और 'विभूतयः' सभी संज्ञा शब्द हैं (प्राणी, नदियाँ, संपदाएँ)। 'परितः' एक अव्यय है जिसका अर्थ 'चारों ओर' होता है।

Common mistakes

  • श्लोक के आशय को समझने में कठिनाई।
  • विशेषण और विशेष्य के बीच सही मिलान न कर पाना।
  • भिन्न-प्रकृतिक पद का चयन करते समय शब्दों के अर्थ को ठीक से न समझना।
  • व्याकरणिक रूप से सही संस्कृत वाक्य बनाने में त्रुटियाँ।

Revision tips

  • प्रत्येक श्लोक के अर्थ को अपनी भाषा में समझने का प्रयास करें।
  • अभ्यास प्रश्नों को हल करने के बाद, उत्तरों की तुलना समाधान से करें और अपनी गलतियों को सुधारें।
  • विशेषण-विशेष्य मिलान वाले प्रश्न को हल करते समय, विशेषण के अर्थ को समझें और उसे उपयुक्त विशेष्य से जोड़ें।
  • भिन्न-प्रकृतिक पद वाले प्रश्नों के लिए, सभी शब्दों के अर्थ को समझें और उनमें सामान्य संबंध खोजने का प्रयास करें।
  • श्लोक के आशय को लिखने का अभ्यास करें, यह परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

Practice MCQs

Q1. वित्ततः क्षीणः व्यक्ति कीदृशः भवति?

Q2. प्रियवाक्यप्रदानेन के तुष्यन्ति?

Q3. सज्जनानां मैत्री दिनस्य कस्य छाया इव भवति?

Q4. वृक्षाः स्वयं कानि न खादन्ति?

Q5. अस्माभिः कीदृशम् आचरणं न कर्त्तव्यम्?

Frequently asked questions

कक्षा 9 संस्कृत शेमुषी के अध्याय 5 का क्या नाम है?

कक्षा 9 संस्कृत शेमुषी के अध्याय 5 का नाम 'सूक्तिमौक्तिकम्' है।

सूक्तिमौक्तिकम् का क्या अर्थ है?

सूक्तिमौक्तिकम् का अर्थ है 'अनमोल मोती जैसी सूक्तियाँ'। यह अध्याय जीवन के महत्वपूर्ण उपदेशों और ज्ञानवर्धक वाक्यों का संग्रह है।

इस अध्याय के समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को अभ्यास प्रश्नों के सही उत्तर समझने, श्लोकों के अर्थ को स्पष्ट करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करते हैं।

क्या इन समाधानों में श्लोकों का आशय भी समझाया गया है?

हाँ, इन समाधानों में श्लोकों का आशय हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में समझाया गया है, जैसा कि प्रश्न में पूछा गया है।

भिन्न-प्रकृतिक पद चुनने वाले प्रश्न का क्या उद्देश्य है?

इस प्रकार के प्रश्न छात्रों की शब्दावली और शब्दों के बीच संबंध को समझने की क्षमता का परीक्षण करते हैं।

क्या इन समाधानों में व्याकरणिक विश्लेषण शामिल है?

समाधानों में मुख्य रूप से प्रश्नों के उत्तर और श्लोकों के अर्थ पर ध्यान केंद्रित किया गया है, लेकिन कुछ हद तक व्याकरणिक समझ भी निहित है।

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