CBSE Class 9 Shemushi Chapter 12: वाडमनःप्राणस्वरूपम् NCERT Solutions
This chapter, 'वाडमनःप्राणस्वरूपम्' (The Nature of Speech, Mind, and Life Force), from CBSE Class 9 Shemushi (Hindi), delves into the fundamental elements that constitute human existence. The NCERT Solutions provide clear explanations and answers to questions related to the essence of food (अन्न), its transformation into mind (मनस्), the vital life force (प्राण) derived from water (आपः), and the radiant nature of speech (वाक्) originating from celestial energy (तेजस्). The solutions meticulously break down complex concepts, helping students grasp the philosophical underpinnings of these elements as explained through dialogues and teachings. These solutions are designed to aid students in understanding the text thoroughly, preparing them effectively for their examinations by offering precise answers and clarifying the relationships between different concepts.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | Shemushi |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 12 |
Chapter summary
Chapter 12 of CBSE Class 9 Shemushi, titled 'वाडमनःप्राणस्वरूपम्', explores the philosophical concepts of mind, life force, and speech. The NCERT Solutions cover exercises that require students to identify the essence of food as mind, water as life force, and celestial energy as speech. It includes single-word answers, full-sentence answers in Sanskrit, matching exercises, antonym identification, and verb conjugation with the 'तुमन्' (tumun) suffix. These solutions aim to enhance comprehension of the chapter's core ideas and Sanskrit grammar.
Learning outcomes
- Understand the relationship between food, mind, life force, and speech.
- Identify the essence of mind, life force, and speech as described in the text.
- Answer questions in Sanskrit based on the chapter's content.
- Match related concepts and identify antonyms.
- Apply the 'tumun' suffix to verbs correctly.
Topics covered
Paper topics
- मन का स्वरूप (Nature of Mind)
- प्राण का स्वरूप (Nature of Life Force)
- वाणी का स्वरूप (Nature of Speech)
- अन्न, जल और तेजस् का संबंध (Relation of Food, Water, and Radiance)
- श्वेतकेतु और आरुणि संवाद (Dialogue of Shvetaketu and Aruni)
- संस्कृत वाक्य निर्माण (Sanskrit Sentence Construction)
- शब्दार्थ (Word Meanings)
- विलोम शब्द (Antonyms)
- प्रत्यय (Suffixes - तुमन्)
- मिलान (Matching)
Important topics
- मन, प्राण और वाक् की परिभाषाएँ
- अन्न, जल और तेजस् से क्रमशः मन, प्राण और वाक् की उत्पत्ति
- संस्कृत में प्रश्नों के उत्तर देना
- तुमन् प्रत्यय का प्रयोग
- विलोम शब्दों की पहचान
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Questions and Solutions
प्रश्न 1. एक पद में उत्तर लिखिए।
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखिए:
- (क) अन्न का कौन सा भाग मन है?
- (ख) मथने पर दही का सबसे सूक्ष्म भाग क्या होता है?
- (ग) मन कैसा होता है?
- (घ) तेजोमयी क्या होती है?
- (ङ) इस पाठ में आरुणि किसे उपदेश देते हैं?
- (च) "वत्स! चिरञ्जीव" (पुत्र! दीर्घायु हो) ऐसा कौन कहता है?
- (छ) यह पाठ किस उपनिषद से लिया गया है?
- (क) अन्न का सबसे सूक्ष्म (अणिष्ठ) भाग मन होता है।
- (ख) मथने पर दही का सबसे सूक्ष्म भाग सर्पिः (घृत) होता है।
- (ग) मन अन्नमय होता है, अर्थात अन्न से उत्पन्न होता है।
- (घ) वाणी (वाक्) तेजोमयी होती है, अर्थात दिव्य ऊर्जा से युक्त होती है।
- (ङ) इस पाठ में आरुणि अपने पुत्र श्वेतकेतु को उपदेश देते हैं।
- (च) आरुणि (पिता) अपने पुत्र श्वेतकेतु से ऐसा कहते हैं।
- (छ) यह पाठ छान्दोग्य उपनिषद से संगृहीत है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में लिखिए।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में लिखिए:
- (क) श्वेतकेतु सर्वप्रथम आरुणि से किस स्वरूप के विषय में पूछता है?
- (ख) आरुणि प्राण के स्वरूप को कैसे निरूपित करते हैं?
- (ग) मनुष्यों के मन (चेतना) कैसे होते हैं?
- (घ) सर्पिः (घृत) क्या होता है?
- (ङ) आरुणि के मत के अनुसार मन कैसा होता है?
- (क) श्वेतकेतु सर्वप्रथमम् आरुणिं मनसः स्वरूपस्य विषये पृच्छति। (श्वेतकेतु सबसे पहले आरुणि से मन के स्वरूप के विषय में पूछता है।)
- (ख) आरुणिः प्राणस्वरूपं इत्थम् निरूपयति यत पीतानाम् अपां यः अणिष्ठः सः प्राणः भवति। (आरुणि प्राण के स्वरूप को इस प्रकार निरूपित करते हैं कि पिए हुए जल का जो सबसे सूक्ष्म भाग है, वही प्राण होता है।)
- (ग) यादृशम् अन्नादिकं मानवाः गृह्णन्ति तादृशानि एव मानवानाम् चेतांसि भवन्ति। (जैसे अन्न आदि मनुष्य ग्रहण करते हैं, वैसे ही मनुष्यों के मन (चेतना) होते हैं।)
- (घ) मथ्यमानस्य दनः यो अणिमा ऊर्ध्वं समुदीषति तत् सर्पिः भवति। (मथने की क्रिया में दही का जो सूक्ष्म भाग ऊपर उठता है, वह सर्पिः (घृत) होता है।)
- (ङ) आरुणेः मतानुसारं अशितस्य अन्नस्य यः अणिष्ठः तत् एव मनः भवति। (आरुणि के मत के अनुसार, खाए हुए अन्न का जो सबसे सूक्ष्म भाग है, वही मन होता है।)
प्रश्न 3. (अ) 'अ' स्तंभ के पदों का 'ब' स्तंभ के पदों के साथ सही मिलान कीजिए।
3. (अ) 'अ' स्तंभ के पदों का 'ब' स्तंभ के पदों के साथ सही मिलान कीजिए:
अ — ब
मनः — अन्नमयम्
प्राणः — तेजोमयी
वाक् — आपोमयः
सही मिलान इस प्रकार है:
अ — ब
मनः — अन्नमयम् (मन अन्न से उत्पन्न होता है)
प्राणः — आपोमयः (प्राण जल से उत्पन्न होता है)
वाक् — तेजोमयी (वाणी तेज से उत्पन्न होती है)
प्रश्न 3. (आ) निम्नलिखित पदों के विलोम पद पाठ से चुनकर लिखिए।
3. (आ) निम्नलिखित पदों के विलोम पद पाठ से चुनकर लिखिए:
पद — विलोम पद
- (क) गरिष्ठः — .....
- (ख) अधः — .....
- (ग) एकवारम् — .....
- (घ) अनवधीतम् — .....
- (ङ) किञ्चित् — .....
पाठ के अनुसार विलोम पद निम्नलिखित हैं:
पद — विलोम पद
- (क) गरिष्ठः — अणिष्ठः (सबसे भारी — सबसे हल्का)
- (ख) अधः — ऊर्ध्वम् (नीचे — ऊपर)
- (ग) एकवारम् — भूयो (एक बार — बार-बार)
- (घ) अनवधीतम् — अवधीतम् (न खाया हुआ — खाया हुआ)
- (ङ) किञ्चित् — सर्वं (कुछ — सब)
प्रश्न 4. उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित क्रियापदों में 'तुमन्' प्रत्यय जोड़कर पद निर्माण कीजिए।
4. उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित क्रियापदों में 'तुमन्' प्रत्यय जोड़कर पद निर्माण कीजिए:
यथा-प्रच्छ् + तुमुन् — प्रष्टुम् (पूछने के लिए)
निम्नलिखित क्रियापदों में 'तुमन्' प्रत्यय जोड़कर पद निर्माण करें:
- (क) श्रु + तुमुन् – .....
- (ख) वन्द् + तुमुन् – .....
- (ग) पठ् + तुमुन् – ..... (पठितुम्)
- (घ) कृ + तुमुन् – .....
'तुमन्' प्रत्यय का प्रयोग क्रिया के साथ 'के लिए' अर्थ को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के अनुसार पद निर्माण इस प्रकार है:
- (क) श्रु + तुमुन् – श्रोतुम् (सुनने के लिए)
- (ख) वन्द् + तुमुन् – वन्दितुम् (वंदन करने के लिए)
- (ग) पठ् + तुमुन् – पठितुम् (पढ़ने के लिए)
- (घ) कृ + तुमुन् – कर्तुम् (करने के लिए)
Common mistakes
- Confusing the origins of mind, life force, and speech.
- Incorrectly identifying antonyms.
- Errors in forming Sanskrit sentences.
- Misapplying verb conjugations and suffixes.
Revision tips
- Focus on the core definitions of मनस्, प्राण, and वाक्.
- Practice matching exercises to reinforce concept connections.
- Review the antonyms provided in the chapter.
- Pay close attention to the Sanskrit sentence construction in the answers.
- Revisit the examples of 'tumun' suffix usage.
Practice MCQs
Q1. अन्न का सबसे सूक्ष्म (अणिष्ठ) भाग क्या माना गया है?
Explanation: पाठ के अनुसार, अन्न का सबसे सूक्ष्म भाग मन कहलाता है।
Q2. मथने पर दही का जो सूक्ष्म भाग ऊपर उठता है, वह क्या कहलाता है?
Explanation: दही को मथने पर जो सूक्ष्म भाग ऊपर उठता है, उसे सर्पिः या घृत कहा जाता है।
Q3. प्राण का स्वरूप किस तत्व से संबंधित है?
Explanation: पाठ में बताया गया है कि पिए हुए जल का जो सूक्ष्म भाग है, वही प्राण है।
Q4. वाणी (वाक्) का स्वरूप किस तत्व से उत्पन्न होता है?
Explanation: वाणी को तेजोमयी कहा गया है, जिसका अर्थ है कि वह दिव्य ऊर्जा से उत्पन्न होती है।
Q5. श्वेतकेतु ने सर्वप्रथम अपने पिता आरुणि से किस विषय में प्रश्न पूछा?
Explanation: श्वेतकेतु ने सबसे पहले अपने पिता आरुणि से मन के स्वरूप के बारे में पूछा।
Frequently asked questions
कक्षा 9 की शेमुषी पुस्तक के अध्याय 12 का क्या शीर्षक है?
कक्षा 9 की शेमुषी पुस्तक के अध्याय 12 का शीर्षक 'वाडमनःप्राणस्वरूपम्' है, जिसका अर्थ है वाणी, मन और प्राण का स्वरूप।
इस अध्याय में किन मुख्य दार्शनिक अवधारणाओं पर चर्चा की गई है?
इस अध्याय में मुख्य रूप से अन्न से उत्पन्न होने वाले मन, जल से उत्पन्न होने वाले प्राण और तेजस् से उत्पन्न होने वाली वाणी की अवधारणाओं पर चर्चा की गई है।
क्या ये समाधान संस्कृत में उत्तर देने में मदद करते हैं?
हाँ, ये समाधान छात्रों को अध्याय के आधार पर संस्कृत में प्रश्नों के उत्तर देने का तरीका सिखाते हैं।
अध्याय 12 के अभ्यास में व्याकरण के किस भाग पर ध्यान केंद्रित किया गया है?
अभ्यास में 'तुमन्' प्रत्यय जोड़कर क्रिया निर्माण और विलोम शब्दों की पहचान जैसे व्याकरणिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
यह समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?
यह समाधान छात्रों को अध्याय की मुख्य अवधारणाओं को समझने, संस्कृत में उत्तर लिखने का अभ्यास करने और व्याकरण के नियमों को लागू करने में मदद करके परीक्षा की तैयारी में सहायता करते हैं।
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