CBSE Class 8 Hindi Chapter 12 Sudama Charit NCERT Solutions

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सीबीएसई कक्षा 8 हिंदी अध्याय 12, नरोत्तमदास द्वारा रचित 'सुदामा चरित' के लिए यह विस्तृत मार्गदर्शिका है। यह अध्याय भगवान कृष्ण और उनके बचपन के मित्र सुदामा के बीच गहरी मित्रता का सुंदर वर्णन करता है। समाधान सुदामा की द्वारका यात्रा, उनकी गरीबी की स्थिति, कृष्ण की भावनात्मक प्रतिक्रिया और सुदामा के जीवन में आए चमत्कारी परिवर्तन पर प्रकाश डालते हैं। हम उनके रिश्ते की बारीकियों, आदान-प्रदान किए गए उपहारों के प्रतीकात्मक अर्थ और कथा में निहित नैतिक शिक्षाओं का पता लगाते हैं। ये समाधान छात्रों को कविता के गहरे अर्थों को समझने, प्रयुक्त साहित्यिक युक्तियों की सराहना करने और प्रत्येक प्रश्न की स्पष्ट व्याख्या और अंतर्दृष्टिपूर्ण विश्लेषण प्रदान करके अपनी हिंदी परीक्षाओं के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter12. सुदामा चरित - नरोत्तमदास

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 12, 'Sudama Charit', focuses on the timeless tale of friendship between Lord Krishna and Sudama. The solutions cover the emotional depth of Krishna's reaction to Sudama's poverty, the significance of their past and present interactions, and the miraculous change in Sudama's fortune. It helps students understand the poem's narrative, its portrayal of friendship, and the use of literary devices like exaggeration (Atishayokti Alankar).

Learning outcomes

  • Understand the deep bond of friendship between Krishna and Sudama.
  • Analyze Krishna's emotional response to Sudama's plight.
  • Explain the significance of the gifts and the transformation of Sudama's life.
  • Identify and explain the use of Atishayokti Alankar (exaggeration) in the poem.
  • Appreciate the moral and ethical values depicted in the story.

Topics covered

Paper topics

  • Friendship between Krishna and Sudama
  • Sudama's poverty and visit to Dwarka
  • Krishna's emotional reaction
  • Symbolism of gifts
  • Transformation of Sudama's life
  • Atishayokti Alankar (Exaggeration)
  • Narrative analysis of 'Sudama Charit'
  • Moral values in the poem

Important topics

  • Krishna's emotional response to Sudama's plight
  • The theme of friendship and loyalty
  • The miraculous transformation of Sudama's fortune
  • Understanding Atishayokti Alankar
  • Analysis of Sudama's thoughts during his return journey

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

सुदामा की दीनदशा देखकर श्रीकृष्ण की क्या मनोदशा हुई? अपने शब्दों में लिखिए।
Solution:

जब श्रीकृष्ण के बचपन के घनिष्ठ मित्र सुदामा, जो अब अत्यंत निर्धन हो चुके थे, उनसे मिलने आए, तो उनकी दयनीय स्थिति देखकर श्रीकृष्ण का हृदय अत्यंत द्रवित हो उठा। अपने प्रिय मित्र की दुर्दशा से वे इतने दुखी हुए कि उनकी आँखों से आँसुओं की धारा बह निकली। उन्होंने सुदामा के पैर धोने के लिए परात में पानी मंगवाया था, परन्तु उनकी आँखों से निकले आँसुओं की अधिकता के कारण सुदामा के पैर उसी जल से धुल गए।

प्रश्न 2

"पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सों पग धोए।" पंक्ति में वर्णित भाव का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Solution:

इस पंक्ति का भाव यह है कि जब सुदामा अत्यंत दीन और हीन अवस्था में द्वारकाधीश श्रीकृष्ण से मिलने पहुँचे, तो श्रीकृष्ण उन्हें देखकर व्यथित हो गए। श्रीकृष्ण ने सुदामा के चरण धोने के लिए परात में जल तो मंगवाया, परन्तु सुदामा की दुर्दशा से उत्पन्न हुए अत्यधिक प्रेम और करुणा के कारण वे इतने रोए कि उनके आँसुओं के जल से ही सुदामा के पैर धुल गए। उन्होंने परात के पानी को छुआ तक नहीं। यह श्रीकृष्ण के असीम प्रेम और मित्र के प्रति गहरी संवेदना को दर्शाता है।

प्रश्न 3

"चोरी की बान में हौ जू प्रवीने।"

(क) उपर्युक्त पंक्ति कौन, किससे कह रहा है?

(ख) इस कथन की पृष्ठभूमि स्पष्ट कीजिए।

(ग) इस उपालंभ (शिकायत) के पीछे कौन-सी पौराणिक कथा है?

Solution:

(क) उपर्युक्त पंक्ति भगवान श्रीकृष्ण अपने बालसखा सुदामा से कह रहे हैं।

(ख) सुदामा अपनी पत्नी द्वारा दिए गए थोड़े से चावल श्रीकृष्ण को भेंट स्वरूप देने में संकोच कर रहे थे। श्रीकृष्ण, सुदामा के इस संकोच को समझकर, उन्हें चिढ़ाने के अंदाज़ में यह कहते हैं कि तुम तो चोरी करने में माहिर हो, मानो वे यह कहना चाह रहे हों कि चावल चुराकर ले आए हो। यह कथन प्रेमपूर्ण नोक-झोंक का हिस्सा है।

(ग) इस उपालंभ के पीछे एक पौराणिक कथा है जो कृष्ण और सुदामा के गुरुकुल के दिनों की है। जब वे महर्षि सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तब एक बार जंगल से लकड़ियाँ लाते समय गुरुमाता ने उन्हें रास्ते में खाने के लिए मुट्ठी भर चने दिए थे। श्रीकृष्ण थोड़ी देर के लिए विश्राम करने हेतु एक पेड़ के नीचे सो गए, और सुदामा ने चुपके से सारे चने खा लिए। जब श्रीकृष्ण जागे और उन्होंने चने माँगे, तो सुदामा ने बहाना बनाया। श्रीकृष्ण को वह घटना स्मरण है और वे उसी चोरी की घटना का उल्लेख करते हुए सुदामा से यह बात कह रहे हैं।

प्रश्न 4

द्वारका से खाली हाथ लौटते समय सुदामा मार्ग में क्या-क्या सोचते जा रहे थे? वह कृष्ण के व्यवहार से क्यों खीझ रहे थे? सुदामा के मन की दुविधा को अपने शब्दों में प्रकट कीजिए।
Solution:

द्वारका से खाली हाथ लौटते समय सुदामा का मन अनेक विचारों से भरा हुआ था और वे बहुत दुखी थे। वे सोच रहे थे कि श्रीकृष्ण ने उनका आतिथ्य-सत्कार तो बड़े प्रेम से किया, क्या वह सब केवल दिखावा था? वे कृष्ण के व्यवहार से खीझ रहे थे क्योंकि उन्हें आशा थी कि श्रीकृष्ण उनकी दरिद्रता को देखकर उसे दूर करने के लिए धन-संपत्ति प्रदान करेंगे, परन्तु श्रीकृष्ण ने न केवल उन्हें कुछ दिया, बल्कि बचपन की चोरी का उलाहना देकर उन्हें खाली हाथ ही विदा कर दिया। सुदामा की दुविधा यह थी कि वे कृष्ण के प्रेम को समझ नहीं पा रहे थे। वे कृष्ण की अलौकिक शक्ति और उनके द्वारा दिए गए उपहार (जो अदृश्य था) के महत्व से अनभिज्ञ थे, और केवल भौतिक सहायता की अपेक्षा कर रहे थे, जो न मिलने पर वे खीझ उठे।

प्रश्न 5

अपने गाँव लौटकर जब सुदामा अपनी झोंपड़ी नहीं खोज पाए तब उनके मन में क्या-क्या विचार आए? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Solution:

जब सुदामा द्वारका से अपने गाँव लौटे और अपनी झोंपड़ी के स्थान पर एक भव्य महल देखा, तो उनका मन भ्रमित हो गया। उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि यह उनका ही गाँव है और यह उनका ही घर है। उन्हें लगा कि कहीं वे घूमते-घूमते वापस द्वारका ही तो नहीं आ गए। उन्होंने पूरे गाँव में घूम-घूम कर लोगों से अपनी झोंपड़ी के बारे में पूछा, लेकिन किसी ने भी उन्हें उनकी पुरानी झोंपड़ी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। वे इस अप्रत्याशित परिवर्तन को देखकर आश्चर्यचकित और कुछ हद तक भयभीत भी थे।

प्रश्न 6

निर्धनता के बाद मिलने वाली संपन्नता का चित्रण कविता की अंतिम पंक्तियों में वर्णित है। उसे अपने शब्दों में लिखिए।
Solution:

कविता की अंतिम पंक्तियाँ श्रीकृष्ण की कृपा से सुदामा के जीवन में आए आकस्मिक और चमत्कारी परिवर्तन का वर्णन करती हैं। जहाँ पहले सुदामा की एक टूटी-फूटी सी झोंपड़ी थी, वहीं अब सोने के सुंदर और भव्य महल खड़े हैं। पहले उनके पैरों में पहनने के लिए चप्पल तक नहीं थी, परन्तु अब उनके पास घूमने के लिए हाथी-घोड़े जैसे वाहन उपलब्ध हैं। पहले वे कठोर भूमि पर सोते थे, लेकिन अब उनके लिए शानदार और नरम बिस्तर की व्यवस्था है। पहले उन्हें खाने के लिए अनाज के दाने भी मुश्किल से मिलते थे, पर अब उनकी इच्छा अनुसार मनपसंद भोजन उपलब्ध है। हालाँकि, इस अपार संपन्नता के बीच भी सुदामा को पहले जैसा सादा जीवन और सात्विक भोजन अब अच्छा नहीं लगता, जो उनकी पुरानी सादगी और कृष्ण के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।

भाषा की बात - प्रश्न 1

"पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सो पग धोए"

ऊपर लिखी गई पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। इसमें बात को बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर चित्रित किया गया है। जब किसी बात को इतना बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है तो वहाँ पर अतिशयोक्ति अलंकार होता है। आप भी कविता में से एक अतिशयोक्ति अलंकार का उदाहरण छाँटिए।

Solution:

कविता में अतिशयोक्ति अलंकार का एक उदाहरण है: "कै वह टूटी-सी छानी हती, कहँ कंचन के अब धाम सुहावत।" इस पंक्ति में, सुदामा की अत्यंत साधारण और टूटी-फूटी झोंपड़ी के स्थान पर अचानक सोने के भव्य महलों का वर्णन किया गया है, जो कि वास्तविकता से परे है और बात को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करता है। यह अतिशयोक्ति अलंकार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

Common mistakes

  • Misinterpreting Krishna's initial teasing as genuine anger.
  • Failing to recognize the symbolic meaning of the gifts.
  • Not understanding the context of the 'stolen' chana incident.
  • Overlooking the transformation of Sudama's dwelling and lifestyle.

Revision tips

  • Read the poem 'Sudama Charit' carefully to grasp the narrative flow.
  • Focus on the emotional expressions of both Krishna and Sudama.
  • Pay attention to the descriptions of Sudama's poverty and subsequent prosperity.
  • Understand the example of Atishayokti Alankar provided in the solutions.
  • Discuss the theme of friendship and its portrayal in the poem with peers.

Practice MCQs

Q1. सुदामा की दीनदशा देखकर श्रीकृष्ण की क्या मनोदशा हुई?

Q2. पंक्ति 'पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सों पग धोए' में किस अलंकार का प्रयोग हुआ है?

Q3. श्रीकृष्ण ने सुदामा से 'चोरी की बान में हौ जू प्रवीने' कहकर किस घटना का स्मरण कराया?

Q4. द्वारका से खाली हाथ लौटते समय सुदामा क्यों खीझ रहे थे?

Q5. सुदामा को अपनी झोंपड़ी के स्थान पर क्या मिला?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह समाधान कक्षा 8 की हिंदी की पुस्तक के पाठ 12 'सुदामा चरित' के लिए हैं।

'सुदामा चरित' कविता का मुख्य विषय क्या है?

कविता का मुख्य विषय भगवान श्रीकृष्ण और उनके बचपन के मित्र सुदामा के बीच की गहरी मित्रता और प्रेम है, विशेषकर जब सुदामा अपनी गरीबी की स्थिति में श्रीकृष्ण से मिलने जाते हैं।

श्रीकृष्ण ने सुदामा के पैर कैसे धोए?

श्रीकृष्ण सुदामा की दीन-हीन दशा देखकर इतने भावुक हो गए कि उनकी आँखों से आँसू बहने लगे, और उन्हीं आँसुओं से उन्होंने सुदामा के पैर धो दिए।

अतिशयोक्ति अलंकार क्या है और यह 'सुदामा चरित' में कहाँ मिलता है?

अतिशयोक्ति अलंकार में किसी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाता है। कविता में, सुदामा की टूटी झोंपड़ी के स्थान पर सोने का महल बन जाने का वर्णन अतिशयोक्ति का उदाहरण है।

सुदामा को द्वारका से लौटते समय कैसा अनुभव हुआ?

सुदामा को कृष्ण के व्यवहार से खीझ हुई क्योंकि उन्हें लगा कि कृष्ण ने उनकी गरीबी दूर करने के बजाय उन्हें केवल चोरी का उलाहना देकर खाली हाथ लौटा दिया।

ये समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ के प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को कविता के भावार्थ, पात्रों के चरित्र चित्रण और साहित्यिक तत्वों को समझने में मदद मिलती है, जो परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

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