CBSE Class 8 Hindi Chapter 11 NCERT Solutions: जब सिनेमा ने बोलना सीखा

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This chapter delves into the historical transition of Indian cinema from silent films to talkies, focusing on the making of the first Indian talkie, 'Alam Ara'. It explores the challenges faced by filmmakers like Ardeshir M. Irani, the evolution of acting and audience reception, and the technical advancements that accompanied the advent of sound. The solutions provide detailed answers to questions about the film's posters, the inspiration behind it, casting issues, and the impact of sound on cinema. Additionally, it touches upon the concept of dubbing and linguistic aspects like prefixes. These NCERT Solutions are designed to help students understand the nuances of this significant era in Indian film history and prepare effectively for their examinations by offering clear, step-by-step explanations.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter11. जब सिनेमा ने बोलना सीखा - प्रदीप तिवारी ; कंप्यूटर गाएगा गीत ऋत्विक घटक

Chapter summary

Chapter 11 of Class 8 Hindi NCERT Solutions covers the groundbreaking shift from silent films to 'talking pictures' in India, primarily through the lens of the first talkie, 'Alam Ara'. It details the initial promotional slogans, the directorial vision of Ardeshir M. Irani, the challenges in casting, and the subsequent legal battle for the lead role. The solutions also discuss the broader impact of sound on acting, audience engagement, and filmmaking technology, including the rise of dubbing. The language section focuses on understanding prefixes like 'स' and the difference between prefixes and suffixes.

Learning outcomes

  • Understand the historical significance of the first Indian talkie, 'Alam Ara'.
  • Identify the key figures and challenges involved in the transition to sound cinema.
  • Analyze the changes in acting, audience perception, and technical aspects of filmmaking.
  • Explain the concept and potential issues with film dubbing.
  • Recognize and use prefixes like 'स' to form new words and understand their meanings.

Topics covered

Paper topics

  • History of Indian Cinema
  • First Talkie Film 'Alam Ara'
  • Ardeshir M. Irani
  • Challenges in Filmmaking
  • Evolution of Acting
  • Impact of Sound on Cinema
  • Dubbing in Films
  • Linguistic Concepts
  • Prefixes (उपसर्ग)
  • Suffixes (प्रत्यय)
  • Silent vs. Sound Films
  • Parsee Theatre Influence

Important topics

  • The making of 'Alam Ara'
  • Ardeshir M. Irani's contribution
  • Changes brought by sound in cinema
  • Understanding prefixes
  • Comparison of silent and talkie films

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

जब पहली बोलती फिल्म प्रदर्शित हुई तो उसके पोस्टरों पर कौन-से वाक्य छापे गए? उस फिल्म में कुल कितने चेहरे थे? स्पष्ट कीजिए।
Solution: देश की पहली बोलती फिल्म, 'आलम आरा', के प्रदर्शन से पहले उसके पोस्टरों पर दर्शकों को आकर्षित करने के लिए विशेष वाक्य छापे गए थे। इन वाक्यों में फिल्म की सजीवता और संवादों पर जोर दिया गया था। पोस्टरों पर लिखा था - "वे सभी सजीव हैं, साँस ले रहे हैं, शत-प्रतिशत बोल रहे हैं, अठहत्तर मुर्दा इनसान जिंदा हो गए, उनको बोलते, बातें करते देखो।" इन वाक्यों से यह स्पष्ट होता है कि फिल्म में कुल मिलाकर 78 चेहरे थे, जिसका अर्थ है कि फिल्म में 78 कलाकारों ने काम किया था।

प्रश्न 2

पहला बोलता सिनेमा बनाने के लिए फिल्मकार अर्देशिर एम. ईरानी को प्रेरणा कहाँ से मिली? उन्होंने 'आलम आरा' फिल्म के लिए आधार कहाँ से लिया? अपने विचार व्यक्त कीजिए।
Solution: फिल्मकार अर्देशिर एम. ईरानी को पहला बोलता सिनेमा बनाने की प्रेरणा 1929 में हॉलीवुड की एक बोलती फिल्म 'शो बोट' को देखकर मिली थी। इस फिल्म को देखने के बाद उनके मन में भारत में भी ऐसी ही बोलती फिल्म बनाने की तीव्र इच्छा जागृत हुई। 'आलम आरा' फिल्म के लिए उन्होंने पारसी रंगमंच के एक बहुत लोकप्रिय नाटक को आधार बनाया। उस नाटक के गीतों को भी फिल्म में ज्यों का त्यों प्रयोग किया गया, जिससे फिल्म को और अधिक प्रामाणिकता और आकर्षण मिला।

प्रश्न 3

विड्ठल का चयन 'आलम आरा' फिल्म के नायक के रूप में हुआ था, लेकिन उन्हें फिल्म से हटाया क्यों गया? विड्ठल ने पुनः नायक होने के लिए क्या किया? अपने विचार प्रकट कीजिए।
Solution: विड्ठल को 'आलम आरा' फिल्म के नायक के रूप में चुना गया था, परंतु उन्हें फिल्म से इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उन्हें उर्दू भाषा में संवाद बोलने में कठिनाई हो रही थी। उस समय की बोलती फिल्मों के लिए अभिनेताओं का स्पष्ट उच्चारण और संवाद अदायगी बहुत महत्वपूर्ण थी। अपना हक वापस पाने और नायक के रूप में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने के लिए, विड्ठल ने एक कानूनी रास्ता अपनाया और मुकदमा दायर कर दिया। तत्कालीन प्रसिद्ध वकील मोहम्मद अली जिन्ना ने उनका मुकदमा लड़ा, जिसमें विड्ठल विजयी हुए और अंततः वे भारत की पहली बोलती फिल्म के नायक बने।

प्रश्न 4

पहली सवाक् (बोलती) फिल्म के निर्माता-निर्देशक अर्देशिर को जब सम्मानित किया गया तब सम्मानकर्ताओं ने उनके लिए क्या कहा था? अर्देशिर ने क्या कहा? और इस प्रसंग में लेखक ने क्या टिप्पणी की है? लिखिए।
Solution: जब पहली सवाक् फिल्म 'आलम आरा' के प्रदर्शन के पच्चीस वर्ष पूरे होने पर निर्माता-निर्देशक अर्देशिर एम. ईरानी को सम्मानित किया गया, तो सम्मानकर्ताओं ने उन्हें "भारतीय सवाक् (बोलती) फिल्मों का पिता" कहकर संबोधित किया। इस सम्मान के जवाब में अर्देशिर ने विनम्रतापूर्वक कहा, "मुझे इतना बड़ा खिताब देने की जरूरत नहीं है। मैंने तो देश के लिए अपने हिस्से का जरूरी योगदान दिया है।" इस प्रसंग पर लेखक ने टिप्पणी करते हुए अर्देशिर एम. ईरानी के विनम्र स्वभाव की प्रशंसा की है और उन्हें एक महान व्यक्ति बताया है जो अपनी उपलब्धियों का श्रेय स्वयं न लेकर उसे देश के प्रति योगदान मानते हैं।

प्रश्न 5

मूक सिनेमा में संवाद नहीं होते, उसमें दैहिक अभिनय की प्रधानता होती है। पर, जब सिनेमा बोलने लगा, उसमें अनेक परिवर्तन हुए। उन परिवर्तनों को अभिनेता, दर्शक और कुछ तकनीकी दृष्टि से पाठ का आधार लेकर खोजें, साथ ही अपनी कल्पना का भी सहयोग लें।
Solution: मूक सिनेमा से बोलती फिल्मों की ओर संक्रमण ने सिनेमा जगत में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए, जिन्हें हम अभिनेता, दर्शक और तकनीकी दृष्टिकोण से देख सकते हैं:

अभिनेताओं के लिए परिवर्तन:

  • संवाद अदायगी: सबसे बड़ा परिवर्तन यह था कि अभिनेताओं को अब केवल अपने हाव-भाव से ही नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से संवाद बोलकर भी अपनी भूमिका निभानी पड़ती थी। इसके लिए उन्हें बेहतर उच्चारण और अभिनय कौशल की आवश्यकता हुई।
  • अभिनय शैली: मूक फिल्मों की अतिरंजित (over-the-top) अभिनय शैली की जगह अधिक स्वाभाविक और सजीव अभिनय की मांग बढ़ी।
  • योग्यता: अभिनेताओं के लिए शिक्षित होना या कम से कम संवादों को सही ढंग से याद करके बोलना आवश्यक हो गया।

दर्शकों के लिए परिवर्तन:

  • जुड़ाव: बोलती फिल्मों ने दर्शकों को पात्रों से भावनात्मक रूप से अधिक गहराई से जुड़ने का अवसर दिया, क्योंकि वे पात्रों की भावनाओं को उनकी आवाज़ के माध्यम से भी समझ सकते थे।
  • प्रभाव: लोकप्रिय नायक-नायिकाओं का दर्शकों पर प्रभाव बढ़ा। दर्शक उनकी केशसज्जा, वेशभूषा और बोलने के ढंग की नकल करने लगे।
  • अनुभव: फिल्म देखना एक अधिक समृद्ध और समग्र अनुभव बन गया, जिसमें दृश्य और श्रव्य दोनों का आनंद शामिल था।

तकनीकी दृष्टि से परिवर्तन:

  • ध्वनि रिकॉर्डिंग: ध्वनि रिकॉर्डिंग की नई तकनीकें विकसित हुईं। पहले मूक फिल्मों की शूटिंग दिन में ही हो जाती थी, लेकिन बोलती फिल्मों के लिए रात में भी शूटिंग संभव हुई।
  • संगीत और वाद्य यंत्र: फिल्मों में वाद्य यंत्रों का प्रयोग और गीत-संगीत का महत्व बढ़ गया। पार्श्व संगीत (background music) और गीतों को फिल्म का अभिन्न अंग बनाया गया।
  • भाषा: हिंदी-उर्दू के मेल वाली 'हिंदुस्तानी' भाषा की लोकप्रियता बढ़ी, क्योंकि यह आम जनता के बीच अधिक समझी जाती थी।
  • उपकरण: ध्वनि रिकॉर्डिंग और प्लेबैक के लिए नए और जटिल उपकरणों की आवश्यकता हुई।

संक्षेप में, बोलती फिल्मों ने न केवल सिनेमा की प्रस्तुति को बदला, बल्कि अभिनेताओं के कौशल, दर्शकों की अपेक्षाओं और पूरी फिल्म निर्माण प्रक्रिया को भी रूपांतरित कर दिया।

प्रश्न 6

डब फिल्में किसे कहते हैं? कभी-कभी डब फिल्मों में अभिनेता के मुँह खोलने और आवाज़ में अंतर आ जाता है। इसका कारण क्या हो सकता है?
Solution: डब फिल्में वे होती हैं जिनमें मूल अभिनेताओं की आवाज़ को हटाकर किसी दूसरे कलाकार की आवाज़ को जोड़ा जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर तब की जाती है जब किसी फिल्म को एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवादित किया जाता है, ताकि उस भाषा के दर्शक उसे आसानी से समझ सकें।

कभी-कभी डब की हुई फिल्मों में अभिनेता के मुँह खोलने की गति और सुनाई देने वाली आवाज़ के बीच अंतर आ जाता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • गति का अंतर: डबिंग करने वाले कलाकार की बोलने की गति और मूल अभिनेता के होंठों के हिलने की गति में सामंजस्य न होना। यदि डबिंग करने वाला बहुत तेज़ी से या बहुत धीरे बोलता है, तो यह अंतर स्पष्ट दिखाई देता है।
  • तकनीकी समस्याएँ: ध्वनि रिकॉर्डिंग या संपादन (editing) के दौरान कोई तकनीकी खराबी आ सकती है, जिससे आवाज़ और दृश्य का तालमेल बिगड़ जाता है।
  • अनुवाद की सीमाएँ: कभी-कभी मूल संवादों का दूसरी भाषा में सटीक अनुवाद करना मुश्किल होता है, जिससे वाक्य की लंबाई या लय बदल जाती है, और यह होंठों के हिलने से मेल नहीं खा पाता।

इस अंतर को कम करने के लिए डबिंग कलाकार को मूल अभिनेता के अभिनय और होंठों की गति का बारीकी से ध्यान रखना पड़ता है और संपादन टीम को भी सटीकता से काम करना होता है।

भाषा की बात - प्रश्न 1

'सवाक्' शब्द 'वाक्' के पहले 'स' उपसर्ग लगाने से बना है। 'स' उपसर्ग से कई शब्द बनते हैं। निम्नलिखित शब्दों के साथ 'स' का उपसर्ग की भाँति प्रयोग करके शब्द बनाएँ और शब्दार्थ में होने वाले परिवर्तन को बताएँ: हित, परिवार, विनय, चित्र, बल, सम्मान।
Solution: 'स' एक उपसर्ग है जिसका अर्थ होता है 'साथ', 'सहित', 'अच्छा', या 'पूर्ण'। जब इसे मूल शब्दों के साथ जोड़ा जाता है, तो यह उनके अर्थ में परिवर्तन लाता है।

दिए गए शब्दों के साथ 'स' उपसर्ग लगाकर नए शब्द और उनके अर्थ इस प्रकार हैं:

  • मूल शब्द: हित (लाभ, भलाई) उपसर्ग:उपसर्ग युक्त शब्द: सहित (अर्थ: साथ, युक्त) शब्दार्थ में परिवर्तन: 'हित' का अर्थ है लाभ, जबकि 'सहित' का अर्थ है किसी चीज़ के साथ होना।
  • मूल शब्द: परिवार (घर के सदस्य) उपसर्ग:उपसर्ग युक्त शब्द: सपरिवार (अर्थ: पूरे परिवार के साथ) शब्दार्थ में परिवर्तन: 'परिवार' स्वयं में एक समूह है, जबकि 'सपरिवार' का अर्थ है किसी व्यक्ति का अपने पूरे परिवार के साथ होना।
  • मूल शब्द: विनय (विनम्रता, प्रार्थना) उपसर्ग:उपसर्ग युक्त शब्द: सविनय (अर्थ: विनम्रतापूर्वक, अत्यंत नम्रता के साथ) शब्दार्थ में परिवर्तन: 'विनय' एक भाव है, जबकि 'सविनय' उस भाव को व्यक्त करने का तरीका बताता है।
  • मूल शब्द: चित्र (तस्वीर, आरेख) उपसर्ग:उपसर्ग युक्त शब्द: सचित्र (अर्थ: चित्र सहित, जिसमें चित्र हों) शब्दार्थ में परिवर्तन: 'चित्र' स्वयं एक तस्वीर है, जबकि 'सचित्र' किसी वस्तु या लेख का वर्णन करता है जिसमें चित्र भी शामिल हों।
  • मूल शब्द: बल (शक्ति, जोर) उपसर्ग:उपसर्ग युक्त शब्द: सबल (अर्थ: बलवान, शक्तिशाली) शब्दार्थ में परिवर्तन: 'बल' शक्ति का माप है, जबकि 'सबल' उस व्यक्ति या वस्तु को दर्शाता है जिसमें वह शक्ति हो।
  • मूल शब्द: सम्मान (आदर, प्रतिष्ठा) उपसर्ग:उपसर्ग युक्त शब्द: ससम्मान (अर्थ: आदर सहित, पूरी इज्जत के साथ) शब्दार्थ में परिवर्तन: 'सम्मान' स्वयं आदर है, जबकि 'ससम्मान' किसी कार्य को करने का तरीका बताता है, जो आदरपूर्ण हो।

भाषा की बात - प्रश्न 2

उपसर्ग और प्रत्यय दोनों ही शब्दांश होते हैं। वाक्य में इनका अकेला प्रयोग नहीं होता। इन दोनों में अंतर केवल इतना होता है कि उपसर्ग किसी भी शब्द में पहले लगता है और प्रत्यय बाद में। हिंदी के सामान्य उपसर्ग इस प्रकार हैं - अ/अन, नि, दु, क/कु, स/सु, अध, बिन, औ आदि। पाठ में आए उपसर्ग और प्रत्यय युक्त शब्दों के कुछ उदाहरण नीचे दिए जा रहे हैं।
Solution: यह प्रश्न उपसर्ग और प्रत्यय के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। दोनों ही शब्दांश (शब्द के अंश) होते हैं जिनका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता। मुख्य अंतर उनके लगने के स्थान में है:
  • उपसर्ग: यह मूल शब्द के पहले लगता है और उसके अर्थ में परिवर्तन करता है। उदाहरण के लिए, 'स' + 'हित' = 'सहित'।
  • प्रत्यय: यह मूल शब्द के बाद लगता है और उसके अर्थ में परिवर्तन करता है या नया शब्द बनाता है। उदाहरण के लिए, 'मानव' + 'ता' = 'मानवता'।

पाठ में आए कुछ उपसर्ग और प्रत्यय युक्त शब्दों के उदाहरणों को समझने के लिए, हमें मूल शब्द, उसमें लगा उपसर्ग या प्रत्यय, और उससे बना नया शब्द देखना होगा। पाठ के अनुसार, हिंदी के कुछ सामान्य उपसर्गों में 'अ/अन', 'नि', 'दु', 'क/कु', 'स/सु', 'अध', 'बिन', 'औ' आदि शामिल हैं।

उदाहरण के लिए (पाठ से संबंधित):

  • उपसर्ग युक्त शब्द: 'सवाक्' (स + वाक्), 'सपरिवार' (स + परिवार), 'सविनय' (स + विनय), 'सचित्र' (स + चित्र), 'सबल' (स + बल), 'ससम्मान' (स + सम्मान)। यहाँ 'स' उपसर्ग है।
  • प्रत्यय युक्त शब्द: पाठ में सीधे तौर पर प्रत्यय युक्त शब्दों के उदाहरण नहीं दिए गए हैं, लेकिन यदि हम 'मानवता' (मानव + ता) या 'भारतीय' (भारत + ईय) जैसे शब्दों को देखें, तो 'ता' और 'ईय' प्रत्यय के उदाहरण होंगे।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि उपसर्ग और प्रत्यय दोनों ही शब्दों को नया अर्थ या रूप देने में सहायक होते हैं, जिससे भाषा समृद्ध होती है।

Common mistakes

  • Confusing the number of actors with the number of characters or faces mentioned in posters.
  • Not fully explaining the reasons behind casting changes or legal battles.
  • Overlooking the technical and artistic transformations brought by sound.
  • Misunderstanding the formation and meaning of words with prefixes.

Revision tips

  • Focus on the timeline of events leading to the first talkie.
  • Pay attention to the specific details mentioned about the film 'Alam Ara' and its actors.
  • Understand the 'why' behind each change discussed, from acting to technology.
  • Practice forming new words using the prefix 'स' and defining them.
  • Review the differences between silent and sound cinema in terms of audience and actor impact.

Practice MCQs

Q1. पहली बोलती फिल्म 'आलम आरा' के पोस्टरों पर किस प्रकार के वाक्य छापे गए थे?

Q2. फिल्मकार अर्देशिर एम. ईरानी को बोलती फिल्म बनाने की प्रेरणा किससे मिली?

Q3. आलम आरा फिल्म के नायक विड्ठल को उर्दू बोलने में परेशानी के कारण क्यों हटाया गया?

Q4. जब सिनेमा बोलने लगा, तो अभिनेताओं के लिए क्या आवश्यक हो गया?

Q5. 'डब' की हुई फिल्मों में कभी-कभी आवाज और होंठों के हिलने में अंतर क्यों आ जाता है?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह समाधान CBSE बोर्ड की कक्षा 8 के हिंदी विषय के लिए हैं, विशेष रूप से पाठ 11 'जब सिनेमा ने बोलना सीखा' पर केंद्रित हैं।

'आलम आरा' फिल्म के बारे में मुख्य जानकारी क्या है?

'आलम आरा' भारत की पहली बोलती फिल्म थी, जो 1931 में प्रदर्शित हुई थी। इसके निर्माता-निर्देशक अर्देशिर एम. ईरानी थे।

बोलती फिल्मों के आने से अभिनय में क्या बदलाव आया?

बोलती फिल्मों के आने से अभिनेताओं के लिए केवल शारीरिक अभिनय के साथ-साथ संवाद बोलना भी आवश्यक हो गया, जिससे उन्हें अधिक प्रशिक्षित और कभी-कभी पढ़ा-लिखा होना पड़ता था।

डबिंग (Dubbing) क्या होती है?

डबिंग वह प्रक्रिया है जिसमें किसी फिल्म के पात्रों की आवाज़ को किसी अन्य कलाकार की आवाज़ से बदला जाता है, ताकि फिल्म को विभिन्न भाषाओं में प्रस्तुत किया जा सके।

भाषा की बात खंड में किन व्याकरणिक बिंदुओं पर चर्चा की गई है?

भाषा की बात खंड में उपसर्ग (जैसे 'स') के प्रयोग से नए शब्द बनाने और उनके अर्थ परिवर्तन तथा उपसर्ग और प्रत्यय के बीच अंतर को समझाया गया है।

ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ के महत्वपूर्ण प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

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