CBSE Class 8 Sanskrit Chapter 2: पदविचारः (Pad Vichar) NCERT Solutions
CBSE Class 8 Sanskrit, Chapter 2, 'पदविचारः' (Pad Vichar) delves into the fundamental aspects of Sanskrit word analysis. This chapter is essential for understanding how words function within sentences, focusing on identifying and classifying different types of words, including their grammatical cases and genders. Students will learn to distinguish between declinable and indeclinable words (अव्यय), a key skill in Sanskrit grammar. The NCERT Solutions for this chapter provide clear explanations and step-by-step guidance for exercises that involve selecting words based on specific grammatical criteria such as gender (नपुंसकलिंग), number (बहुवचन), and verb person (उत्तम पुरुष). Mastering 'पदविचारः' is crucial for building a strong foundation in Sanskrit, enabling students to comprehend sentence structure and grammatical nuances effectively, thereby enhancing their overall learning and exam performance.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 2. पदविचारः |
Chapter summary
Chapter 2, 'पदविचारः', of the Class 8 Sanskrit NCERT curriculum delves into the analysis of words (पद). This section focuses on identifying and classifying words based on their grammatical properties such as case endings, gender, number, and person. The exercises provided help students practice distinguishing between different word forms, including indeclinable words (अव्यय), adjectives (विशेषण), and verbs in the first person (उत्तम पुरुष). Mastering these concepts is essential for accurate comprehension and construction of Sanskrit sentences.
Learning outcomes
- Understand the concept of 'पद' (word) in Sanskrit grammar.
- Identify and select words belonging to specific grammatical categories (e.g., indeclinables, adjectives).
- Distinguish between words based on gender (नपुंसकलिंग) and number (बहुवचन).
- Recognize and select verbs in the first person (उत्तम पुरुष).
- Apply grammatical rules to analyze and classify Sanskrit words.
Topics covered
Paper topics
- पद परिचय
- अव्यय पद
- विशेषण पद
- उत्तम पुरुष क्रियापद
- बहुवचनान्त पद
- नपुंसकलिंग पद
- शब्द-रूप
- धातु-रूप
Important topics
- पद की पहचान
- अव्यय पदों का वर्गीकरण
- विशेषण-विशेष्य संबंध
- उत्तम पुरुष क्रियापदों का प्रयोग
- नपुंसकलिंग शब्दों की पहचान
- बहुवचन रूपों का ज्ञान
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
दिए गए शब्दों में से पद (inflected words) वे हैं जो किसी विभक्ति या वचन के अनुसार परिवर्तित हुए हैं। मूल शब्द (root words) वे हैं जो अपने सामान्य रूप में हैं।
इस आधार पर, पद हैं:
- लतायाम् (लता का सप्तमी विभक्ति, एकवचन रूप)
- छात्रान् (छात्र का द्वितीया विभक्ति, बहुवचन रूप)
- गत्या (गति का तृतीया विभक्ति, एकवचन रूप)
- चञ्चुः (चञ्चु का प्रथमा विभक्ति, एकवचन रूप)
- भ्राता (भ्रातृ का प्रथमा विभक्ति, एकवचन रूप)
शेष शब्द जैसे 'छात्र', 'मति', 'मातृ', 'गुरु' अपने मूल या प्रथमा विभक्ति एकवचन रूप में हैं (कुछ अपवादों को छोड़कर जैसे 'मति' का प्रथमा एकवचन 'मतिः' होता है, परन्तु यहाँ मूल शब्द के रूप में माना गया है)।
उत्तर: लतायाम्, छात्रान्, गत्या, चञ्चुः, भ्राता
प्रश्न 2
अव्यय वे शब्द होते हैं जिनके रूप में लिंग, वचन, कारक आदि के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता है। दिए गए शब्दों में से अव्यय पदों को पहचानना है।
- 'मुनेः' (मुनि का षष्ठी/पंचमी विभक्ति एकवचन रूप) - यह अव्यय नहीं है।
- 'तथा' (इस प्रकार) - यह अव्यय है।
- 'बालकम्' (बालक का द्वितीया विभक्ति एकवचन रूप) - यह अव्यय नहीं है।
- 'तस्य' (तद् का षष्ठी विभक्ति एकवचन रूप) - यह अव्यय नहीं है।
- 'तत्र' (वहाँ) - यह अव्यय है।
- 'यत्र' (जहाँ) - यह अव्यय है।
- 'यस्मै' (यद् का चतुर्थी विभक्ति एकवचन रूप) - यह अव्यय नहीं है।
- 'सम्प्रति' (इस समय) - यह अव्यय है।
- 'अधुना' (अब) - यह अव्यय है।
उत्तर: तथा, तत्र, यत्र, सम्प्रति, अधुना
प्रश्न 3
विशेषण वे शब्द होते हैं जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं। यहाँ दिए गए वाक्यों में से विशेषण पदों को चुनना है। विशेषण अपने विशेष्य के लिंग, वचन और कारक के अनुसार ही प्रयुक्त होते हैं।
- 'विशालम्' (बड़ा) - यह 'भवनम्' (नपुंसक लिंग, एकवचन) का विशेषण है।
- 'सुखदः' (सुख देने वाला) - यह 'समाचारः' (पुल्लिंग, एकवचन) का विशेषण है।
- 'पक्वे' (पके हुए) - यह 'फले' (नपुंसक लिंग, द्विवचन) का विशेषण है।
- 'शोभनानि' (सुन्दर) - यह 'पुस्तकानि' (नपुंसक लिंग, बहुवचन) का विशेषण है।
- 'रमणीया' (सुन्दर) - यह 'वाटिका' (स्त्रीलिंग, एकवचन) का विशेषण है।
उत्तर: विशालम्, सुखदः, पक्वे, शोभनानि, रमणीया
प्रश्न 4
उत्तम पुरुष के क्रियापद कर्ता 'मैं' (एकवचन), 'हम दोनों' (द्विवचन) या 'हम सब' (बहुवचन) को दर्शाते हैं। दिए गए क्रियापदों में से उत्तम पुरुष के रूपों को पहचानना है।
- 'कुरु' (करो) - यह मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप है।
- 'कुर्याम' (हम करें) - यह उत्तम पुरुष, बहुवचन का रूप है।
- 'पठेत्' (वह पढ़े) - यह प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है।
- 'पठेयम्' (मैं पढूँ) - यह उत्तम पुरुष, एकवचन का रूप है।
- 'सेवसे' (तू सेवा करता है) - यह मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप है।
- 'सेवे' (मैं सेवा करूँ) - यह उत्तम पुरुष, एकवचन का रूप है।
- 'आगच्छम्' (मैं आया) - यह उत्तम पुरुष, एकवचन का रूप है।
- 'नेष्यति' (वह ले जाएगा) - यह प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है।
- 'स्याम्' (मैं होऊँ) - यह उत्तम पुरुष, एकवचन का रूप है।
उत्तर: कुर्याम, पठेयम्, सेवे, आगच्छम्, स्याम्
प्रश्न 5
बहुवचनान्त पद वे होते हैं जो एक से अधिक वस्तुओं या व्यक्तियों का बोध कराते हैं। दिए गए पदों में से बहुवचन के रूपों को चुनना है।
- 'भ्रातरः' (भाई लोग) - यह भ्रातृ शब्द का प्रथमा विभक्ति, बहुवचन रूप है।
- 'भ्रातरम्' (भाई को) - यह भ्रातृ शब्द का द्वितीया विभक्ति, एकवचन रूप है।
- 'भवताम्' (आप लोगों का/के) - यह सर्वनाम (भवत्) का षष्ठी/सप्तमी विभक्ति, बहुवचन रूप है।
- 'भवतः' (आपका/के) - यह सर्वनाम (भवत्) का षष्ठी/सप्तमी विभक्ति, द्विवचन रूप है।
- 'ददति' (वे देते हैं) - यह 'दा' धातु का वर्तमान काल, प्रथम पुरुष, बहुवचन रूप है।
- 'कव्योः' (दो कवियों का/के) - यह 'कवि' शब्द का षष्ठी/सप्तमी विभक्ति, द्विवचन रूप है।
- 'तासु' (उनमें - स्त्रीलिंग) - यह सर्वनाम (ता:) का सप्तमी विभक्ति, बहुवचन रूप है।
- 'वृक्षयोः' (दो वृक्षों का/के) - यह 'वृक्ष' शब्द का षष्ठी/सप्तमी विभक्ति, द्विवचन रूप है।
- 'सर्वेषाम्' (सभी का/के) - यह सर्वनाम (सर्व) का षष्ठी विभक्ति, बहुवचन रूप है।
उत्तर: भ्रातरः, भवताम्, ददति, तासु, सर्वेषाम्
प्रश्न 6
नपुंसकलिंग पद वे होते हैं जो न तो पुरुष जाति के होते हैं और न ही स्त्री जाति के। इनकी पहचान अक्सर शब्द के अंत में 'म्' (अं) की मात्रा से होती है, या कुछ विशेष शब्द नपुंसकलिंग होते हैं।
- 'यशः' (कीर्ति) - यह नपुंसकलिंग शब्द है।
- 'नेत्रम्' (आँख) - यह नपुंसकलिंग शब्द है।
- 'नासिका' (नाक) - यह स्त्रीलिंग शब्द है।
- 'पादः' (पैर) - यह पुल्लिंग शब्द है।
- 'विद्याधनम्' (शिक्षा रूपी धन) - यह नपुंसकलिंग शब्द है।
- 'महिमा' (महानता) - यह स्त्रीलिंग शब्द है।
- 'मधु' (शहद) - यह नपुंसकलिंग शब्द है।
- 'साधुः' (साधु) - यह पुल्लिंग शब्द है।
- 'मनः' (मन) - यह नपुंसकलिंग शब्द है।
उत्तर: यशः, नेत्रम्, विद्याधनम्, मधु, मनः
Common mistakes
- Confusing base words (मूल शब्द) with inflected words (पद).
- Incorrectly identifying indeclinable words (अव्यय).
- Errors in recognizing gender and number agreement.
- Difficulty in distinguishing between different verb persons.
Revision tips
- Review the definitions of each word type (पद, अव्यय, विशेषण) before attempting exercises.
- Pay close attention to the case endings and suffixes to identify the correct word forms.
- Practice reciting different declensions and conjugations to reinforce recognition.
- Use the provided solutions to cross-check your answers and understand the reasoning behind each selection.
Practice MCQs
Q1. निम्नलिखित में से कौन सा शब्द 'लतायाम्' के समान विभक्ति और वचन का है?
Explanation: लतायाम् सप्तमी विभक्ति, एकवचन में है। मति शब्द भी सप्तमी विभक्ति, एकवचन (मतौ) में समान रूप रखता है।
Q2. दिए गए शब्दों में से कौन सा अव्यय पद है?
Explanation: तथा एक अव्यय पद है, जिसका अर्थ है 'इस प्रकार' या 'वैसे'। अन्य विकल्प संज्ञा या सर्वनाम के विभिन्न रूपों में हैं।
Q3. विशेषण पद 'विशालम्' किस संज्ञा पद के लिए प्रयुक्त हुआ है?
Explanation: विशालम् नपुंसकलिंग, एकवचन विशेषण है जो नपुंसकलिंग, एकवचन संज्ञा पद 'भवनम्' के लिए प्रयुक्त हुआ है।
Q4. निम्नलिखित क्रियापदों में से कौन सा उत्तम पुरुष का है?
Explanation: सेवे उत्तम पुरुष, एकवचन का क्रियापद है। कुरु मध्यम पुरुष, पठेत् प्रथम पुरुष, और नेष्यति प्रथम पुरुष का है।
Q5. दिए गए बहुवचनान्त पदों में से कौन सा सप्तमी विभक्ति, बहुवचन का है?
Explanation: तासु सर्वनाम (ता:) का सप्तमी विभक्ति, बहुवचन रूप है। भवताम् षष्ठी/सप्तमी, बहुवचन है।
Q6. नपुंसकलिंग पदों का सही समूह कौन सा है?
Explanation: यशः, मधु, और मनः नपुंसकलिंग शब्द हैं। नेत्रम् भी नपुंसकलिंग है, लेकिन विकल्प D में दिए गए सभी पद नपुंसकलिंग हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 2 'पदविचारः' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?
इस अध्याय में छात्रों को विभिन्न प्रकार के पदों (शब्दों) की पहचान करना सिखाया गया है, जैसे कि अव्यय पद, विशेषण पद, उत्तम पुरुष के क्रियापद, बहुवचन वाले पद और नपुंसकलिंग पद।
पदविचारः का क्या अर्थ है?
पदविचारः का अर्थ है पदों का विश्लेषण या पदों के बारे में विचार करना। इसमें शब्दों के व्याकरणिक गुणों जैसे लिंग, वचन, विभक्ति और पुरुष के आधार पर उनकी पहचान और वर्गीकरण शामिल है।
क्या ये समाधान केवल उत्तर प्रदान करते हैं?
नहीं, ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को सही उत्तर तक पहुँचने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलती है।
अव्यय पद क्या होते हैं?
अव्यय वे शब्द होते हैं जिनके रूप में लिंग, वचन, विभक्ति आदि के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता है। वे तीनों लिंगों, सभी वचनों और सभी विभक्तियों में एक समान रहते हैं।
नपुंसकलिंग पद की पहचान कैसे करें?
नपुंसकलिंग पदों की पहचान उनके अंत में 'म्' (अं) की मात्रा से होती है, जैसे 'फलम्', 'पुस्तकालयम्', 'मधु' आदि। कुछ शब्द जैसे 'यशः', 'मनः' भी नपुंसकलिंग होते हैं।
उत्तम पुरुष के क्रियापद क्या होते हैं?
उत्तम पुरुष के क्रियापद कर्ता के 'मैं' (एकवचन), 'हम दोनों' (द्विवचन), या 'हम सब' (बहुवचन) होने का बोध कराते हैं। इनके अंत में प्रायः 'आम्', 'आवाव', 'आमः' जैसे प्रत्यय लगते हैं।
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