कक्षा 8 संस्कृत: अध्याय 5 सर्वनामपदानि तथा संख्यावाचकानि - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 8 के छात्रों के लिए संस्कृत के अध्याय 5, 'सर्वनामपदानि तथा संख्यावाचकानि' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें सर्वनामों और संख्यावाचक शब्दों के उचित रूपों का उपयोग करके रिक्त स्थानों को भरने का अभ्यास शामिल है। समाधान छात्रों को विभिन्न संदर्भों में इन शब्दों के सही विभक्ति और वचन रूपों को समझने में मदद करते हैं। अभ्यास में विशेषणों और सर्वनामों के सही रूपों का चयन करना, जैसे कि 'मम', 'त्वम्', 'तत्', 'किम्', और 'सर्व' के विभिन्न रूपों का प्रयोग करना शामिल है। यह विस्तृत समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त मार्गदर्शिका प्रदान करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | Sanskrit |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 5 |
Chapter summary
कक्षा 8 के लिए संस्कृत के अध्याय 5 के ये NCERT समाधान सर्वनाम और संख्यावाचक शब्दों के प्रयोग पर केंद्रित हैं। इसमें छात्रों को उचित सर्वनाम और संख्यावाचक शब्दों के सही रूपों का चयन करके रिक्त स्थानों को भरने का अभ्यास कराया गया है। समाधानों में 'तत्', 'एतत्', 'किम्', 'सर्व' जैसे सर्वनामों के विभिन्न रूपों और 'एक', 'दश', 'शत' जैसी संख्याओं के साथ-साथ विशेषणों के सही प्रयोग को स्पष्ट किया गया है।
Learning outcomes
- सर्वनाम शब्दों के उचित रूपों को पहचानना और उनका प्रयोग करना।
- संख्यावाचक शब्दों के सही रूपों का चयन करना।
- दिए गए संदर्भ के अनुसार सर्वनाम और संख्यावाचक शब्दों की विभक्ति और वचन का निर्धारण करना।
- रिक्त स्थानों को भरने के लिए सर्वनाम और संख्यावाचक शब्दों के उपयुक्त रूपों का प्रयोग करना।
- संस्कृत व्याकरण में सर्वनाम और संख्यावाचक शब्दों के महत्व को समझना।
Topics covered
Paper topics
- सर्वनाम शब्द (तत्, एतत्, किम्, सर्व)
- संख्यावाचक शब्द (एक, त्रय:, चतस्त्र:, पञ्च, दश, विंशति, त्रिंशत्, शत)
- सर्वनामों के विभिन्न रूपों का प्रयोग
- संख्याओं के विभिन्न रूपों का प्रयोग
- लिंग, वचन और कारक के अनुसार सर्वनाम और संख्याओं का प्रयोग
- रिक्त स्थानों की पूर्ति
Important topics
- सर्वनाम शब्दों के विभिन्न रूपों का प्रयोग
- संख्यावाचक शब्दों का लिंग, वचन और कारक के अनुसार प्रयोग
- सर्वनाम और संख्यावाचक शब्दों के साथ रिक्त स्थानों की पूर्ति
- तत्, एतत्, किम्, सर्व सर्वनामों के रूप
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- ..... नार्य:। (चत्वारि, चतस्त्र:, चत्वार:)
- ..... फलानि। (पञ्चानि, पञ्चा:, पञ्च)
- ..... दिवसा:। (त्रिंशत्, त्रिंशत:, त्रिंशता:)
- ..... छात्रा:। (विंशत्, विंशति:, विंशतय:)
- ..... नरा:। (त्रय:, त्रया:, त्रि)
यहाँ दिए गए रिक्त स्थानों को उचित सर्वनाम या संख्यावाचक शब्दों से भरना है। प्रत्येक शब्द का चयन संज्ञा के लिंग, वचन और कारक के अनुसार किया जाएगा।
- नार्य: (नारी शब्द का स्त्रीलिंग बहुवचन) के लिए उचित संख्यावाचक शब्द 'चतस्र:' होगा।
- फलानि (फल शब्द का नपुंसकलिंग बहुवचन) के लिए उचित संख्यावाचक शब्द 'पञ्च' होगा।
- दिवसा: (दिवस शब्द का पुल्लिंग बहुवचन) के लिए उचित संख्यावाचक शब्द 'त्रिंशत्' (तीस) होगा।
- छात्रा: (छात्र शब्द का पुल्लिंग बहुवचन) के लिए उचित संख्यावाचक शब्द 'विंशति:' (बीस) होगा।
- नरा: (नर शब्द का पुल्लिंग बहुवचन) के लिए उचित संख्यावाचक शब्द 'त्रय:' (तीन) होगा।
प्रश्न 2
- ..... तिथि:। (अष्टम:, अष्टमी, अष्टमम्)
- ..... दिवसे। (दशम:, दशमे, दशमम्)
- ..... रुप्यकाणि। (शत, शतम्, शतानि)
- ..... वृक्षे। (एकस्मिन्, एके, एकस्याम्)
- ..... पुरस्कारम्। (द्वितीय, द्वितीयम्, द्वीतीय:)
इस प्रश्न में भी हमें दिए गए विकल्पों में से सही शब्द चुनकर रिक्त स्थानों को भरना है। संज्ञा के लिंग, वचन और कारक का ध्यान रखना आवश्यक है।
- तिथि: (स्त्रीलिंग एकवचन) के लिए उचित संख्यावाचक शब्द 'अष्टमी' (आठवीं) होगा।
- दिवसे (दिवस शब्द का सप्तमी विभक्ति एकवचन) के लिए उचित संख्यावाचक शब्द 'दशमे' (दसवें) होगा।
- रुप्यकाणि (रुप्यक शब्द का नपुंसकलिंग बहुवचन) के लिए उचित संख्यावाचक शब्द 'शतम्' (सौ) होगा।
- वृक्षे (वृक्ष शब्द का सप्तमी विभक्ति एकवचन) के लिए उचित सर्वनाम शब्द 'एकस्मिन्' (एक) होगा।
- पुरस्कारम् (पुरस्कार शब्द का नपुंसकलिंग द्वितीया विभक्ति एकवचन) के लिए उचित संख्यावाचक शब्द 'द्वितीयम्' (दूसरा) होगा।
प्रश्न 3
- प्रत्यूष: ...... मित्रम् अस्ति। (मम्, मम, माम्)
- ..... छात्राः अत्र पठन्ति। (अनेक, अनेकाः, अनेके)
- तुषार: ...... किम् अवदत्? (त्वम्, त्वाम्, त्वया)
- ..... स्वदेशं उन्नतिपथे नेष्यथ। (युयम्, यूयम्, युवाम्)
- इदम् .....गृहम् अस्ति। (आवयो:, आवयो, आव्यो:)
इस अभ्यास में हमें दिए गए सर्वनाम शब्दों के उचित रूपों का चयन करना है। वाक्य के अर्थ और व्याकरणिक संरचना के अनुसार सही रूप का प्रयोग किया जाएगा।
- मित्रम् (नपुंसकलिंग एकवचन) के साथ संबंध कारक के रूप में 'मम' (मेरा) का प्रयोग होगा।
- छात्राः (पुल्लिंग बहुवचन) के लिए विशेषण 'अनेके' (अनेक) का प्रयोग होगा।
- तुषार ने किसी से कहा, इसलिए 'त्वाम्' (तुझे) कर्म कारक के रूप में प्रयुक्त होगा।
- 'नेष्यथ' (ले जाओगे) क्रिया उत्तम पुरुष बहुवचन के लिए है, इसलिए सर्वनाम 'यूयम्' (तुम सब) का प्रयोग होगा।
- गृहम् (नपुंसकलिंग एकवचन) के साथ संबंध कारक के रूप में 'आवयो:' (हम दोनों का) का प्रयोग होगा।
प्रश्न 4
- ..... (तत्) वने।
- ..... वाटिकायाम् (एतत्)।
- (किम्) गृहे।
- (किम्) बालकाय।
- ..... (तत्) गुरवे।
- ..... (सर्व) छात्रेभ्य:।
इस प्रश्न में कोष्ठक में दिए गए सर्वनाम शब्दों के उचित रूपों को रिक्त स्थानों में लिखना है। हमें दिए गए संज्ञा शब्द के लिंग, वचन और कारक के अनुसार सर्वनाम शब्द का सही रूप चुनना होगा।
- वन (नपुंसकलिंग सप्तमी एकवचन) के लिए 'तत्' का उचित रूप 'तस्मिन्' होगा।
- वाटिकायाम् (स्त्रीलिंग सप्तमी एकवचन) के लिए 'एतत्' का उचित रूप 'एतस्याम्' होगा।
- गृह (नपुंसकलिंग सप्तमी एकवचन) के लिए 'किम्' का उचित रूप 'किम्' या 'कस्मिन्' हो सकता है, यहाँ 'किम्' (क्या) प्रश्नवाचक के रूप में भी संभव है, पर संदर्भ के अनुसार 'कस्मिन्' अधिक उपयुक्त है। (मूल उत्तर में 'किम्' दिया गया है, पर व्याकरणिक रूप से 'कस्मिन्' अधिक सटीक है यदि प्रश्नवाचक है)। यदि यह 'क्या' के अर्थ में है तो 'किम् गृहे' सही है। यदि यह 'किस घर में' के अर्थ में है तो 'कस्मिन् गृहे' होगा। दिए गए उत्तर के अनुसार 'किम्' को ही रखा जा रहा है।
- बालकाय (पुल्लिंग चतुर्थी एकवचन) के लिए 'किम्' का उचित रूप 'कस्मै' होगा।
- गुरवे (पुल्लिंग चतुर्थी एकवचन) के लिए 'तत्' का उचित रूप 'तस्मै' होगा।
- $छात्रेभ्य:$(पुल्लिंग चतुर्थी बहुवचन) के लिए 'सर्व' का उचित रूप 'सर्वेभ्य:' होगा।
Common mistakes
- सर्वनाम और संख्यावाचक शब्दों की विभक्तियों और वचनों में भ्रमित होना।
- विशेषणों और सर्वनामों के लिंग के अनुसार सही रूप का चयन न कर पाना।
- अशुद्ध या अनुपयुक्त सर्वनाम या संख्यावाचक रूप का प्रयोग करना।
- वाक्य के संदर्भ को समझे बिना शब्दों का चयन करना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के लिए सर्वनाम या संख्यावाचक शब्द के लिंग, वचन और कारक पर ध्यान दें।
- दिए गए कोष्ठक में शब्द के मूल रूप को पहचानें और उसके विभिन्न रूपों का अभ्यास करें।
- प्रत्येक रिक्त स्थान के लिए संभावित विकल्पों पर विचार करें और सबसे उपयुक्त चुनें।
- समाधानों को ध्यान से पढ़ें और समझें कि प्रत्येक शब्द का विशेष रूप क्यों चुना गया है।
Practice MCQs
Q1. 1...... फलानि। (पञ्चानि, पञ्चा:, पञ्च)
Explanation: फलानि नपुंसकलिंग बहुवचन है, इसलिए संख्यावाचक शब्द 'पञ्च' का प्रयोग होगा।
Q2. 2...... दिवसा:। (त्रिंशत्, त्रिंशत:, त्रिंशता:)
Explanation: दिवसा: पुल्लिंग बहुवचन है, और 'त्रिंशत्' (तीस) संख्यावाचक शब्द का प्रयोग यहाँ उचित है।
Q3. 3. तुषार:...... किम् अवदत्? (त्वम्, त्वाम्, त्वया)
Explanation: यहाँ 'त्वाम्' (तुझे) कर्म कारक के रूप में प्रयुक्त होगा, क्योंकि तुषार ने किसी से कुछ कहा।
Q4. 4. इदम्...... गृहम् अस्ति। (आवयो:, आवयो, आव्यो:)
Explanation: गृहम् नपुंसकलिंग एकवचन है, और 'आवयो:' (हम दोनों का) संबंध कारक के रूप में यहाँ उपयुक्त है।
Q5. 5...... (तत्) वने।
Explanation: वन नपुंसकलिंग सप्तमी विभक्ति एकवचन है, इसलिए 'तत्' का सप्तमी एकवचन रूप 'तस्मिन्' होगा।
Frequently asked questions
कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 5 में किन मुख्य विषयों को शामिल किया गया है?
अध्याय 5 मुख्य रूप से सर्वनाम शब्दों (जैसे तत्, एतत्, किम्, सर्व) और संख्यावाचक शब्दों (जैसे एक, त्रय:, चतस्त्र:, पञ्च, दश, शत) के विभिन्न रूपों और उनके सही प्रयोग पर केंद्रित है।
सर्वनाम और संख्यावाचक शब्दों के सही रूप का चयन कैसे करें?
सही रूप का चयन करने के लिए, वाक्य में संज्ञा के लिंग, वचन और कारक को पहचानना महत्वपूर्ण है। सर्वनाम या संख्यावाचक शब्द को उस संज्ञा के अनुसार ही परिवर्तित करना होगा।
क्या इन समाधानों में सर्वनामों के केवल मूल रूप दिए गए हैं?
नहीं, इन समाधानों में सर्वनामों और संख्यावाचक शब्दों के विभिन्न विभक्तियों और वचनों में परिवर्तित रूपों का अभ्यास कराया गया है, जो वाक्य में उनके प्रयोग के लिए आवश्यक हैं।
यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?
यह समाधान छात्रों को सर्वनाम और संख्यावाचक शब्दों के प्रयोग की गहरी समझ प्रदान करते हैं, जिससे वे परीक्षा में आने वाले ऐसे प्रश्नों को आत्मविश्वास से हल कर सकते हैं।
अभ्यास में 'तत्' और 'एतत्' जैसे सर्वनामों के प्रयोग का क्या महत्व है?
'तत्' (वह) और 'एतत्' (यह) जैसे सर्वनामों का प्रयोग दूर या पास की वस्तुओं या व्यक्तियों को इंगित करने के लिए किया जाता है। इनके विभिन्न रूपों को समझना वाक्य रचना के लिए महत्वपूर्ण है।
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