कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 1: वर्णविचार NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 1, 'वर्णविचार' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें वर्णों के वर्गीकरण, जैसे कि स्वर और व्यंजन, और उनके विभिन्न प्रकारों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। समाधान अभ्यास के प्रश्नों को हल करते हैं, जिसमें रिक्त स्थानों की पूर्ति, वर्ण संयोग और वर्ण वियोजन शामिल हैं। प्रत्येक प्रश्न को स्पष्ट रूप से समझाया गया है, जिससे छात्रों को संस्कृत वर्णमाला की संरचना और उसके उपयोग को समझने में मदद मिलती है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जो वर्णों के बारे में उनकी समझ को मजबूत करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | Sanskrit |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 1 |
Chapter summary
कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 1, 'वर्णविचार' के लिए NCERT समाधान, संस्कृत वर्णमाला की मूल बातें समझने पर केंद्रित हैं। इसमें स्वरों और व्यंजनों के वर्गीकरण, जैसे मूलस्वर, सन्धिस्वर, उष्म और अन्तस्थ व्यंजन, के बारे में बताया गया है। समाधान वर्ण संयोग (शब्द निर्माण) और वर्ण वियोजन (शब्द को उसके घटक वर्णों में तोड़ना) की प्रक्रियाओं को स्पष्ट करते हैं। यह अध्याय छात्रों को वर्णों के सही क्रम और उनके संयोजन के नियमों को समझने में मदद करता है।
Learning outcomes
- संस्कृत वर्णमाला में स्वरों और व्यंजनों के विभिन्न प्रकारों को पहचानना।
- व्यंजन वर्णों के वर्गीकरण (स्पर्श, उष्म, अन्तस्थ) को समझना।
- अयोगवाह (अनुस्वार और विसर्ग) की अवधारणा को स्पष्ट करना।
- वर्ण संयोग की प्रक्रिया द्वारा शब्दों का निर्माण करना सीखना।
- वर्ण वियोजन की प्रक्रिया द्वारा शब्दों को उनके घटक वर्णों में तोड़ना सीखना।
- रिक्त स्थानों की पूर्ति के माध्यम से वर्णों के क्रम और प्रकारों का अभ्यास करना।
Topics covered
Paper topics
- वर्णमाला
- स्वर
- व्यंजन
- मूलस्वर
- सन्धिस्वर
- स्पर्श व्यंजन
- उष्म व्यंजन
- अन्तस्थ व्यंजन
- अयोगवाह (अनुस्वार, विसर्ग)
- वर्ण संयोग
- वर्ण वियोजन
- वर्ण क्रम
Important topics
- स्वरों के प्रकार (मूलस्वर, सन्धिस्वर)
- व्यंजनों का वर्गीकरण (स्पर्श, उष्म, अन्तस्थ)
- अयोगवाह (अनुस्वार और विसर्ग)
- वर्ण संयोग की प्रक्रिया
- वर्ण वियोजन की प्रक्रिया
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
प्रश्न 1
(क) 1. 'ज्' का व्यञ्जन है। (कवर्ग, चवर्ग, तवर्ग)
2. प वर्ग से पहले ——— आता है। (चवर्ग, टवर्ग, तवर्ग)
3. 'श् ष् स् ह' — व्यञ्जन हैं। (स्पर्श, अन्तस्थ, उष्म)
4. विसर्ग कहलाता है। (स्वर, व्यञ्जन, अयोगवाह)
5. अनुस्वार का प्रयोग के साथ किया जाता है। (स्वर, व्यञ्जन, अयोगवाह)
यहाँ वर्णों के वर्गीकरण से संबंधित रिक्त स्थानों की पूर्ति करनी है:
- 'ज्' 'चवर्ग' का व्यञ्जन है। चवर्ग में ज, झ, ञ् वर्ण आते हैं।
- 'प वर्ग' (प, फ्, ब्, भ्, म्) से पहले 'त वर्ग' (त्, थ्, द्, ध्, न्) आता है।
- 'श् ष् स् ह' उष्म व्यञ्जन हैं। इनके उच्चारण में मुख से गर्म वायु निकलती है।
- विसर्ग (:) को अयोगवाह कहा जाता है। यह न तो पूर्ण स्वर है और न ही पूर्ण व्यंजन।
- अनुस्वार (ं) का प्रयोग स्वर के साथ किया जाता है, यह स्वर पर आश्रित होता है।
उत्तर: 1. चवर्ग 2. तवर्ग 3. उष्म 4. अयोगवाह 5. स्वर
प्रश्न 1 (जारी)
(ख) 1. अ, इ, उ, ऋ, लृ _____ कहलाते हैं। (अन्तस्थ, मूलस्वर, सन्धिस्वर)
2. ____ दीर्घ स्वर है। (इ, य्, उ, ए)
3. सिन्धु स्वर है। (लृ, आ, ओ, ज्ञ)
4. अन्तस्थ वर्ण है। (श्, स्, त्, ल्)
5. व्यञ्जन का उच्चारण ——— की सहायता से ही होता है। (ह्रस्व स्वर, दीर्घ स्वर, स्वर)
यहाँ स्वरों और व्यंजनों के वर्गीकरण से संबंधित रिक्त स्थानों की पूर्ति करनी है:
- अ, इ, उ, ऋ, लृ 'मूलस्वर' कहलाते हैं। ये स्वतंत्र रूप से उच्चारित होते हैं।
- 'ए' एक दीर्घ स्वर है। (यहाँ दिए गए विकल्पों में 'ए' को दीर्घ माना गया है, यद्यपि 'इ' भी मूलस्वर है और 'ए' सन्धिस्वर है। सामान्यतः अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ को स्वर माना जाता है, जिनमें आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ दीर्घ या सन्धिस्वर होते हैं। प्रश्न के संदर्भ में 'ए' को दीर्घ माना गया है।)।
- 'आ' दीर्घ स्वर है। (यहाँ 'सिन्धु स्वर' के स्थान पर 'दीर्घ स्वर' होना चाहिए, और दिए गए विकल्पों में 'आ' दीर्घ स्वर है)।
- 'ल्' अन्तस्थ वर्ण है। अन्तस्थ वर्ण य्, र्, ल्, व् होते हैं।
- व्यञ्जन का उच्चारण 'स्वर' की सहायता से ही होता है। बिना स्वर के व्यञ्जन का उच्चारण संभव नहीं है।
उत्तर: 1. मूलस्वर 2. ए 3. आ 4. ल् 5. स्वर।
प्रश्न 2
(क) 1. र् + आ + ष् + ट् + र् + अ + म् = .....
2. क् + आ + र् + य् + आ + ण् + इ = .....
3. क् + र् + म् + आ + ङ् + क् + अ + : = .....
4. न् + अ + द् + य् + ओ + : = .....
5. श् + र् + ई + म् + अ + त् + ई = .....
यहाँ दिए गए वर्णों को मिलाकर शब्द बनाने हैं (वर्ण संयोग):
- र् + आ + ष् + ट् + र् + अ + म् = राष्ट्रम्
- क् + आ + र् + य् + आ + ण् + इ = कार्याणि
- क् + र् + म् + आ + ङ् + क् + अ + : = क्रमाङ्कः
- न् + अ + द् + य् + ओ + : = नद्योः
- श् + र् + ई + म् + अ + त् + ई = श्रीमती
उत्तर: 1. राष्ट्रम् 2. कार्याणि 3. क्रमाङ्कः 4. नद्योः 5. श्रीमती
प्रश्न 2 (जारी)
(ख) 1. प्रार्थना = प् + ..... + र् + ..... + थ् + ..... + न् + आ
2. नद्या: = न् + ..... + द + ..... + :
3. विश्राम्यति = ..... + ..... + श् + ..... + म् + य् + ..... + त् + .....
4. छेतुम् = ..... + ..... + त् + ..... + म्
5. अपेक्षा = ..... + ..... + क् + ष् + ..... + आ
यहाँ दिए गए शब्दों को उनके घटक वर्णों में वियोजित करना है (वर्ण वियोजन), कुछ वर्णों को रिक्त स्थान में भरना है:
- प्रार्थना = प् + र् + आ + थ् + र् + अ + न् + आ (यहाँ मूल प्रश्न में 'र्' के बाद 'थ्' और 'र्' के बाद 'अ' आना चाहिए था, लेकिन दिए गए उत्तर के अनुसार इसे समायोजित किया गया है)।
- नद्या: = न् + अ + द् + य् + आ + : (यहाँ 'द्' और 'य्' मिलकर 'द्य्' बनाते हैं, और 'आ' की मात्रा लगती है)।
- विश्राम्यति = व् + इ + श् + र् + आ + म् + य् + अ + त् + इ (यहाँ 'म्' के बाद 'य्' और 'अ' आते हैं)।
- छेतुम् = छ् + ए + त् + उ + म् (यहाँ 'छ्' पर 'ए' की मात्रा लगती है)।
- अपेक्षा = अ + प् + ए + क् + ष् + य् + आ (यहाँ 'क्' के बाद 'ष्' और 'य्' आते हैं, और 'आ' की मात्रा)।
उत्तर – (ख) 1. ..... र् + ..... + र् + थ् + ..... + न् + आ (पूर्ण उत्तर: प् + र् + आ + थ् + र् + अ + न् + आ) 2. अ + द + य + आ (पूर्ण उत्तर: न् + अ + द् + य् + आ + :) 3. व् + इ + श् + र् + ..... + म् + य् + अ + ..... + इ (पूर्ण उत्तर: व् + इ + श् + र् + आ + म् + य् + अ + त् + इ) 4. छ् + ..... + ..... + त् + ..... + म् (पूर्ण उत्तर: छ् + ए + त् + उ + म्) 5. अ + प् + ..... + क् + ष् + ..... (पूर्ण उत्तर: अ + प् + ए + क् + ष् + य् + आ)
प्रश्न 3
(क) 1. y — a — y .
- — ţ ल —
- त् — द — न् .
- — ष् — ह
यहाँ दिए गए वर्णों के क्रम को पूरा करना है:
- (क) 1. 'य' वर्ग के वर्णों में 'फ्' और 'भ्' नहीं आते। यह प्रश्न का भाग स्पष्ट नहीं है। दिए गए उत्तर के अनुसार, यह 'प वर्ग' के वर्णों से संबंधित हो सकता है। यदि 'प वर्ग' माना जाए तो प, फ्, ब्, भ्, म् होते हैं। प्रश्न में 'y' का प्रयोग अस्पष्ट है। दिए गए उत्तर 'फ्, भ्' के आधार पर, यह संभवतः 'प वर्ग' के वर्णों के बीच के रिक्त स्थान को भरने का प्रयास है, जो कि 'ब्' होना चाहिए। प्रश्न की अस्पष्टता के कारण सटीक उत्तर देना कठिन है।
- (क) 2. 'ट वर्ग' के वर्णों में 'ट्', 'ठ्', 'ड्', 'ढ्', 'ण्' आते हैं। यदि 'ţ' का अर्थ 'ठ्' है, तो 'ठ्', 'ल्' के बीच में 'ड्', 'ढ्', 'ण्' आ सकते हैं। दिए गए उत्तर 'य्, व्' के अनुसार, यह 'अन्तस्थ' वर्णों से संबंधित हो सकता है।
- (क) 3. 'त वर्ग' के वर्ण त्, थ्, द्, ध्, न् हैं। यहाँ 'त्' और 'द्' दिए गए हैं, बीच में 'थ्' और 'ध्' आ सकते हैं। दिए गए उत्तर 'थ्, ध्' के अनुसार, यह 'त वर्ग' के वर्णों का क्रम है।
- (क) 4. 'उष्म' वर्ण श्, ष्, स्, ह हैं। यहाँ 'ष्' और 'ह' दिए गए हैं, बीच में 'श्' और 'स्' आ सकते हैं। दिए गए उत्तर 'श्, स्' के अनुसार, यह 'उष्म' वर्णों का क्रम है।
उत्तर – (क) 1. फ्, भ् (यह उत्तर प्रश्न के प्रारूप से मेल नहीं खाता, संभवतः प्रश्न में त्रुटि है) 2. य्, व् (यह उत्तर प्रश्न के प्रारूप से मेल नहीं खाता, संभवतः प्रश्न में त्रुटि है) 3. थ्, ध् 4. श्, स्
प्रश्न 3 (जारी)
(ख) 1. अ, ....., *ऋ, लू **
- 3.अ, —, — ई, उ — .
- —, —, लृ
यहाँ स्वरों के क्रम में रिक्त स्थानों की पूर्ति करनी है:
- (ख) 1. अ, इ, उ, ऋ, लृ (यहाँ 'लू' के स्थान पर 'लृ' होना चाहिए)। दिए गए उत्तर 'इ, उ' के अनुसार, यह 'अ' के बाद आने वाले मूलस्वरों का क्रम है।
- (ख) 2. 'ए, ऐ, ओ, औ' सन्धिस्वर हैं। दिए गए उत्तर 'ए, औ' के अनुसार, यह सन्धिस्वरों का क्रम हो सकता है।
- (ख) 3. 'आ, इ, ई, उ, ऊ' स्वरों का क्रम है। दिए गए उत्तर 'आ, इ, ऊ' के अनुसार, यह स्वरों का एक क्रम है।
- (ख) 4. 'ऋ' मूलस्वर है। दिए गए उत्तर 'ऋ, ऋ' के अनुसार, यह 'ऋ' स्वर का दोहराव या क्रम हो सकता है।
उत्तर - (ख) 1. इ, उ 2. ए, औ 3. आ, इ, ऊ 4. ऋ, ऋ
Common mistakes
- व्यंजन वर्गीकरण में भ्रम (जैसे उष्म और स्पर्श व्यंजनों को मिलाना)।
- स्वर और व्यंजन के बीच अंतर करने में कठिनाई।
- वर्ण संयोग करते समय मात्राओं या वर्णों को छोड़ देना।
- वर्ण वियोजन करते समय अशुद्ध वर्णों का प्रयोग करना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रकार के वर्ण (स्वर, व्यंजन, अयोगवाह) को उदाहरण सहित याद करें।
- वर्ण संयोग और वर्ण वियोजन के प्रत्येक प्रश्न का अभ्यास करें, पहले स्वयं हल करने का प्रयास करें।
- व्यंजन के विभिन्न वर्गों (कवर्ग, चवर्ग आदि) और उनके अंतर्गत आने वाले वर्णों को कंठस्थ करें।
- रिक्त स्थानों की पूर्ति वाले प्रश्नों को हल करते समय वर्णों के क्रम पर विशेष ध्यान दें।
Practice MCQs
Q1. 'श् ष् स् ह' किस प्रकार के व्यंजन हैं?
Explanation: श्, ष्, स्, ह को उष्म व्यंजन कहा जाता है क्योंकि इनके उच्चारण में वायु के घर्षण से ऊष्मा उत्पन्न होती है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा मूलस्वर है?
Explanation: अ, इ, उ, ऋ, लृ मूलस्वर कहलाते हैं। ए, ओ, ऐ, औ सन्धिस्वर हैं।
Q3. विसर्ग (:) को क्या कहा जाता है?
Explanation: विसर्ग और अनुस्वार को अयोगवाह कहा जाता है क्योंकि वे न तो पूर्ण स्वर हैं और न ही पूर्ण व्यंजन।
Q4. वर्ण संयोग का उदाहरण है:
Explanation: क् + अ = क एक वर्ण संयोग का उदाहरण है, जहाँ एक व्यंजन और एक स्वर मिलकर एक पूर्ण वर्ण बनाते हैं।
Q5. निम्नलिखित में से कौन सा 'त वर्ग' का व्यंजन नहीं है?
Explanation: त वर्ग में त्, थ्, द्, ध्, न् वर्ण आते हैं। भ् 'प वर्ग' का व्यंजन है।
Frequently asked questions
कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 1 का मुख्य विषय क्या है?
कक्षा 8 संस्कृत के अध्याय 1 का मुख्य विषय 'वर्णविचार' है, जिसमें संस्कृत वर्णमाला के स्वरों, व्यंजनों और उनके विभिन्न प्रकारों का अध्ययन किया जाता है।
वर्ण संयोग और वर्ण वियोजन में क्या अंतर है?
वर्ण संयोग में अलग-अलग वर्णों को मिलाकर एक शब्द बनाया जाता है, जबकि वर्ण वियोजन में एक शब्द को उसके मूल वर्णों में अलग किया जाता है।
अयोगवाह क्या होते हैं?
अयोगवाह वे वर्ण होते हैं जो न तो पूर्ण स्वर होते हैं और न ही पूर्ण व्यंजन। अनुस्वार (ं) और विसर्ग (:) अयोगवाह के उदाहरण हैं।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को वर्णों के बारे में अपनी समझ को मजबूत करने और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद मिलती है।
मूलस्वर और सन्धिस्वर में क्या अंतर है?
मूलस्वर वे स्वर होते हैं जिनका उच्चारण स्वतंत्र रूप से होता है (जैसे अ, इ, उ, ऋ, लृ)। सन्धिस्वर दो मूलस्वरों के मेल से बनते हैं (जैसे ए, ओ, ऐ, औ)।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.