CBSE Class 8 Sanskrit Chapter 6: क्रियापदानि तथा धातुरूपाणि NCERT Solutions
This resource provides detailed NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit, Chapter 6, focusing on 'क्रियापदानि तथा धातुरूपाणि' (Verb Forms and Verb Roots). It covers essential grammatical concepts, including the conjugation of various verb roots (धातु) across different tenses (लट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्) and moods. The solutions guide students through filling in blanks with appropriate verb forms, completing sentences using given verb roots, and selecting the correct verb forms to form grammatically sound sentences. This chapter is crucial for understanding sentence construction and verb usage in Sanskrit. These solutions are designed to help students clarify doubts, practice exercises, and prepare effectively for their examinations by reinforcing their understanding of Sanskrit grammar.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | Sanskrit |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 6 |
Chapter summary
Chapter 6 of the Class 8 Sanskrit NCERT Solutions focuses on 'क्रियापदानि तथा धातुरूपाणि'. This chapter provides practice in conjugating Sanskrit verb roots (धातु) in various tenses and moods like लट् (present), लङ् (past), लोट् (imperative), and विधिलिङ् (optative). It includes exercises on filling in blanks with correct verb forms, completing sentences with specified verbs, and choosing the correct verb form from given options. Mastering these concepts is key to forming grammatically correct Sanskrit sentences.
Learning outcomes
- Understand the concept of verb roots (धातु) in Sanskrit.
- Learn to conjugate verbs in लट्, लङ्, लोट्, and विधिलिङ् tenses/moods.
- Practice filling in blanks with appropriate verb forms.
- Develop the ability to complete sentences using given verb roots.
- Improve sentence construction skills by choosing correct verb forms.
- Reinforce understanding of Sanskrit verb conjugation patterns.
Topics covered
Paper topics
- Verb Roots (धातु)
- Verb Conjugation
- Present Tense (लट् लकार)
- Past Tense (लङ् लकार)
- Imperative Mood (लोट् लकार)
- Optative Mood (विधिलिङ् लकार)
- Sentence Formation
- Grammar Exercises
- Sanskrit Verbs
- Verb Endings
- Subject-Verb Agreement
- Fill in the Blanks
Important topics
- Verb Conjugation in Lट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्
- Identifying and using correct verb forms
- Subject-verb agreement
- Formation of negative imperatives with 'मा'
- Application of verb roots in sentences
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
कृ–लट् अस्–लङ्
सः करोति तौ ते सः आसीत् ______
यह प्रश्न 'कृ' (करना) धातु के लट् (वर्तमान काल) और 'अस्' (होना) धातु के लङ् (भूतकाल) रूपों को भरने के लिए है।
लट् लकार (वर्तमान काल) 'कृ' धातु के रूप:
- प्रथम पुरुष एकवचन: सः करोति
- प्रथम पुरुष द्विवचन: तौ कुरुतः
- प्रथम पुरुष बहुवचन: ते कुर्वन्ति
- मध्यम पुरुष एकवचन: त्वं करोषि
- मध्यम पुरुष द्विवचन: युवां कुरुथः
- मध्यम पुरुष बहुवचन: यूयं कुरुथ
- उत्तम पुरुष एकवचन: अहम् करोमि
- उत्तम पुरुष द्विवचन: आवाम् कुरुवः
- उत्तम पुरुष बहुवचन: वयम् कुर्मः
लङ् लकार (भूतकाल) 'अस्' धातु के रूप:
- प्रथम पुरुष एकवचन: सः आसीत्
- प्रथम पुरुष द्विवचन: तौ आस्ताम्
- प्रथम पुरुष बहुवचन: ते आसन्
- मध्यम पुरुष एकवचन: त्वम् आसीः
- मध्यम पुरुष द्विवचन: युवाम् आस्तम्
- मध्यम पुरुष बहुवचन: यूयम् आस्त
- उत्तम पुरुष एकवचन: अहम् आसम्
- उत्तम पुरुष द्विवचन: आवाम् आस्व
- उत्तम पुरुष बहुवचन: वयम् आस्म
पूर्ण वाक्य: सः करोति तौ कुरुतः ते कुर्वन्ति। सः आसीत् तौ आस्ताम् ते आसन्।
अन्य रिक्त स्थान पूर्ति:
- (क) कुरुतः, कुर्वन्ति। आस्ताम्, आसन्। त्वम् करोषि, युवाम् कुरुथः, यूयम् कुरुथ। त्वम् आसीः, युवाम् आस्तम्, यूयम् आस्त। अहम् करोमि, आवाम् कुरुवः, वयम् कुर्मः। अहम् आसम्, आवाम् आस्व, वयम् आस्म।
प्रश्न 1
सः स्मरत् सः वसेत्
यह प्रश्न 'स्मृ' (याद करना) धातु के लोट् (आज्ञार्थक) और 'वस्' (रहना) धातु के विधिलिङ् (चाहिए/संभावनाार्थक) रूपों को भरने के लिए है।
लोट् लकार (आज्ञार्थक) 'स्मृ' धातु के रूप:
- प्रथम पुरुष एकवचन: सः स्मरताम्
- प्रथम पुरुष द्विवचन: तौ स्मरताम्
- प्रथम पुरुष बहुवचन: ते स्मरन्तु
- मध्यम पुरुष एकवचन: त्वम् स्मर
- मध्यम पुरुष द्विवचन: युवाम् स्मरतम्
- मध्यम पुरुष बहुवचन: यूयम् स्मरत
- उत्तम पुरुष एकवचन: अहम् स्मराणि
- उत्तम पुरुष द्विवचन: आवाम् स्मराव
- उत्तम पुरुष बहुवचन: वयम् स्मराम
विधिलिङ् लकार (चाहिए/संभावनाार्थक) 'वस्' धातु के रूप:
- प्रथम पुरुष एकवचन: सः वसेत्
- प्रथम पुरुष द्विवचन: तौ वसेताम्
- प्रथम पुरुष बहुवचन: ते वसेयुः
- मध्यम पुरुष एकवचन: त्वम् वसेः
- मध्यम पुरुष द्विवचन: युवाम् वसेतम्
- मध्यम पुरुष बहुवचन: यूयम् वसेत
- उत्तम पुरुष एकवचन: अहम् वसेयम्
- उत्तम पुरुष द्विवचन: आवाम् वसेव
- उत्तम पुरुष बहुवचन: वयम् वसेम
पूर्ण वाक्य: सः स्मरताम् तौ स्मरताम्; ते स्मरन्तु। सः वसेत् तौ वसेताम्; ते वसेयुः।
अन्य रिक्त स्थान पूर्ति:
- त्वम् स्मर, युवाम् स्मरतम् यूयम् स्मरत। त्वम् वसेः, युवाम् वसेतम्; यूयम् वसेत। अहम् स्मराणि, आवाम् स्मराव; वयम् स्मराम। अहम् वसेयम्; आवाम् वसेवः; वयम् वसेम।
प्रश्न 1
यह प्रश्न 'हृ' (ले जाना/हरण करना) धातु के विभिन्न लकारों और पुरुषों में रूपों को दर्शाता है। यहाँ दिए गए रूप हैं:
- लट् लकार (वर्तमान काल): हरति (वह ले जाता है)
- लङ् लकार (भूतकाल): अहृत् (उसने ले जाया)
- लोट् लकार (आज्ञार्थक): हरतु (वह ले जाए)
- विधिलिङ् लकार (चाहिए/संभावनाार्थक): हरेत् (उसे ले जाना चाहिए)
- लृट् लकार (भविष्यत् काल): हरिष्यति (वह ले जाएगा)
यह केवल विभिन्न रूपों का प्रदर्शन है, कोई रिक्त स्थान भरने या वाक्य बनाने का कार्य नहीं है।
प्रश्न 1
यह प्रश्न 'घ्रा' (सूंघना) धातु के लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन रूप 'जिघ्रति' को दर्शाता है। इसके आगे के रूप अभ्यास के लिए दिए गए हैं।
- लट् लकार (वर्तमान काल): जिघ्रति (वह सूंघता है)
- लङ् लकार (भूतकाल): अजीघ्रत् (उसने सूंघा)
- लोट् लकार (आज्ञार्थक): जिघ्नतु (वह सूंघे)
- विधिलिङ् लकार (चाहिए/संभावनाार्थक): जिघ्नेत् (उसे सूंघना चाहिए)
- लृट् लकार (भविष्यत् काल): घ्रास्यति (वह सूंघेगा)
प्रश्न 1
यह प्रश्न 'पाल्' (रक्षा करना) धातु के विभिन्न रूपों को दर्शाता है।
- लट् लकार (वर्तमान काल): पालयति (वह रक्षा करता है)
- लङ् लकार (भूतकाल): अपालयत् (उसने रक्षा की)
- लोट् लकार (आज्ञार्थक): पालयतु (वह रक्षा करे)
- विधिलिङ् लकार (चाहिए/संभावनाार्थक): पालयेत् (उसे रक्षा करनी चाहिए)
- लृट् लकार (भविष्यत् काल): पालयिष्यति (वह रक्षा करेगा)
प्रश्न 1
यह प्रश्न 'जि' (जीतना) धातु के लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन 'जयति' और लृट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन 'जेष्यति' को दर्शाता है।
- लट् लकार (वर्तमान काल): जयति (वह जीतता है)
- लङ् लकार (भूतकाल): अजयत् (उसने जीता)
- लोट् लकार (आज्ञार्थक): जयतु (वह जीते)
- विधिलिङ् लकार (चाहिए/संभावनाार्थक): जयेत् (उसे जीतना चाहिए)
- लृट् लकार (भविष्यत् काल): जेष्यति (वह जीतेगा)
प्रश्न 1
यह प्रश्न 'क्षल्' (धोना) धातु के विभिन्न रूपों को दर्शाता है।
- लट् लकार (वर्तमान काल): क्षालयति (वह धोता है)
- लङ् लकार (भूतकाल): अक्षालयत् (उसने धोया)
- लोट् लकार (आज्ञार्थक): क्षालयतु (वह धोए)
- विधिलिङ् लकार (चाहिए/संभावनाार्थक): क्षालयेत् (उसे धोना चाहिए)
- लृट् लकार (भविष्यत् काल): क्षालियष्यति (वह धोएगा)
प्रश्न 1
यह प्रश्न 'तृ' (तैरना) धातु के विभिन्न रूपों को दर्शाता है।
- लट् लकार (वर्तमान काल): तरति (वह तैरता है)
- लङ् लकार (भूतकाल): अतरत् (वह तैरा)
- लोट् लकार (आज्ञार्थक): तरतु (वह तैरे)
- विधिलिङ् लकार (चाहिए/संभावनाार्थक): तरेत् (उसे तैरना चाहिए)
- लृट् लकार (भविष्यत् काल): तरिष्यति (वह तैरेगा)
प्रश्न 2
- सूर्यः पूर्वस्यां दिशायाम् उदयं ······(गम् )।
- ह्यः विद्यालये अवकाशः (अस् )।
- ऋषिः वाल्मीकिः रामायणम् (रच् )।
- यदि त्वं परिश्रम'''''''(कृ ) तर्हि सफल:'''''(भू )।
- अधुना वयम् दूरदर्शनम् (दृश् )।
- अहं त्वां श्वः दिल्ली-दर्शनाय·····( नी )।
यहाँ दिए गए कोष्ठक में धातुएँ हैं, जिन्हें वाक्य के अनुसार उचित काल, पुरुष और वचन में परिवर्तित करके रिक्त स्थानों की पूर्ति करनी है।
- सूर्यः पूर्वस्यां दिशायाम् उदयं गच्छति। (यहाँ वर्तमान काल, प्रथम पुरुष एकवचन का प्रयोग होगा क्योंकि सूर्य का उदय होना एक सामान्य सत्य है।)
- ह्यः विद्यालये अवकाशः आसीत्। (यहाँ 'ह्यः' (बीता हुआ कल) शब्द के कारण भूतकाल, प्रथम पुरुष एकवचन का प्रयोग होगा।)
- ऋषिः वाल्मीकिः रामायणम् अरचयत्। (यहाँ भूतकाल, प्रथम पुरुष एकवचन का प्रयोग होगा क्योंकि रामायण की रचना भूतकाल में हुई थी।)
- यदि त्वं परिश्रमकरिष्यसि तर्हि सफलःभविष्यसि। (यहाँ 'यदि...तर्हि' के प्रयोग में भविष्यत् काल का प्रयोग होता है। 'त्वं' के साथ भविष्यत् काल, मध्यम पुरुष एकवचन 'करिष्यसि' और 'भविष्यसि' का प्रयोग होगा।)
- अधुना वयम् दूरदर्शनम् पश्यामः। (यहाँ 'अधुना' (अब) और 'वयम्' (हम सब) के अनुसार वर्तमान काल, उत्तम पुरुष बहुवचन का प्रयोग होगा।)
- अहं त्वां श्वः दिल्ली-दर्शनायनेष्यामि। (यहाँ 'श्वः' (आने वाला कल) के कारण भविष्यत् काल का प्रयोग होगा। 'अहम्' (मैं) के साथ भविष्यत् काल, उत्तम पुरुष एकवचन 'नेष्यामि' का प्रयोग होगा।)
प्रश्न 3
उदाहरणम्—मोहित: मन्दं मन्दं लिखति। मन्दम् मन्दम् मा लिख।
बालक: मार्गे धावति । मार्गे ····· धाव।
दीपिका उच्चैः हसति। 2. उच्चैः ·····
रोहित: दूरदर्शनं पश्यति। ·····
सुवीर: बहिः गच्छति। 4. बहिः ·····
बालिका मिलनं जलं पिबति। मिलनं जलम् •••••
यह प्रश्न आज्ञार्थक वाक्यों को निषेधात्मक आज्ञार्थक वाक्यों में बदलने का अभ्यास कराता है। उदाहरण में 'मा' का प्रयोग करके आज्ञा को रोका गया है। इसी प्रकार, दिए गए वाक्यों में भी 'मा' का प्रयोग करके निषेधात्मक आज्ञा बनानी है।
- बालक: मार्गे धावति । मार्गे मा धाव। (हे बालक! मार्ग में मत दौड़ो।)
- दीपिका उच्चैः हसति। मा हस। (हे दीपिका! ज़ोर से मत हँसो।)
- रोहित: दूरदर्शनं पश्यति। मा पश्य। (हे रोहित! दूरदर्शन मत देखो।)
- सुवीर: बहिः गच्छति। मा गच्छ। (हे सुवीर! बाहर मत जाओ।)
- बालिका मिलनं जलं पिबति। मा पिब। (हे बालिका! मिल कर जल मत पियो।)
प्रश्न 4
- छात्राः श्लोकम् उच्चैः .....। (पठतु, पठ, पठन्तु)
- हे बालका:! सायं बहिः .....। (क्रीडथ, क्रीडत, क्रीडन्ति)
- हे सुनीते! कक्षायाम् तूर्णीं .....। (तिष्ठसि, स्थास्यसि, तिष्ठ)
- हे बालिका: ! कोलाहलं मा .....। (कुरु, कुरुतम्, कुरुत)
- अधुना सुनीता सङ्गीतशालायाम् ..... (गच्छ, गच्छसि, गच्छतु)
इस प्रश्न में दिए गए वाक्यों के लिए कोष्ठक में से सबसे उपयुक्त क्रिया का रूप चुनना है। यह कर्ता के पुरुष, वचन और लिंग के अनुसार क्रिया के सही रूप का चयन करने का अभ्यास है।
- छात्राः श्लोकम् उच्चैः पठन्तु। ('छात्राः' बहुवचन है, इसलिए क्रिया भी बहुवचन 'पठन्तु' होगी।)
- हे बालका:! सायं बहिः क्रीडत। ('हे बालकाः' सम्बोधन बहुवचन है, इसलिए क्रिया 'क्रीडत' (मध्यम पुरुष बहुवचन, लोट् लकार) होगी।)
- हे सुनीते! कक्षायाम् तूर्णीं तिष्ठ। ('हे सुनीते' सम्बोधन एकवचन है, इसलिए क्रिया 'तिष्ठ' (मध्यम पुरुष एकवचन, लोट् लकार) होगी।)
- हे बालिका: ! कोलाहलं मा कुरुत। ('हे बालिकाः' सम्बोधन बहुवचन है, इसलिए क्रिया 'कुरुत' (मध्यम पुरुष बहुवचन, लोट् लकार) होगी।)
- अधुना सुनीता सङ्गीतशालायाम् गच्छतु। ('सुनीता' प्रथम पुरुष एकवचन है, इसलिए क्रिया 'गच्छतु' (प्रथम पुरुष एकवचन, लोट् लकार) होगी।)
Common mistakes
- Incorrectly conjugating verbs for different persons and numbers.
- Confusing different tenses and moods (e.g., लट् vs. लङ्).
- Selecting the wrong verb form when options are provided.
- Not applying the correct imperative or optative mood forms.
Revision tips
- Focus on memorizing the conjugation patterns for common verb roots.
- Practice each exercise multiple times to ensure retention.
- Pay close attention to the subject-verb agreement in each sentence.
- Use the provided examples to understand the context for each verb form.
- Review the different tenses and moods covered in the chapter.
Practice MCQs
Q1. छात्राः श्लोकम् उच्चैः.....। (पठतु, पठ, पठन्तु)
Explanation: The subject 'छात्राः' (students) is plural and masculine, requiring the plural form of the verb in the imperative mood, which is 'पठन्तु'.
Q2. हे बालका:! सायं बहिः.....। (क्रीडथ, क्रीडत, क्रीडन्ति)
Explanation: The address 'हे बालकाः!' (O boys!) indicates the vocative plural, requiring the second person plural imperative verb form, which is 'क्रीडत'.
Q3. हे सुनीते! कक्षायाम् तूर्णीं.....। (तिष्ठसि, स्थास्यसि, तिष्ठ)
Explanation: Addressing 'सुनीते' (Sunita) directly requires the second person singular imperative verb form, which is 'तिष्ठ' (stand).
Q4. बालक: मार्गे धावति । मार्गे..... धाव। (मा, न, नहि)
Explanation: To form a negative imperative, the particle 'मा' is used before the verb. Thus, 'मा धाव' means 'do not run'.
Q5. अधुना वयम् दूरदर्शनं.....। (पश्याम:, पश्यति, पश्यन्ति)
Explanation: The subject 'वयम्' (we) is first person plural, which requires the first person plural present tense verb form 'पश्यामः' (we see).
Frequently asked questions
What is the main focus of CBSE Class 8 Sanskrit Chapter 6?
Chapter 6 of Class 8 Sanskrit NCERT Solutions focuses on 'क्रियापदानि तथा धातुरूपाणि', which means Verb Forms and Verb Roots. It emphasizes conjugating verbs in different tenses and moods.
Which tenses and moods are covered in this chapter's solutions?
The solutions cover the present tense (लट् लकार), past tense (लङ् लकार), imperative mood (लोट् लकार), and optative mood (विधिलिङ् लकार) for various Sanskrit verb roots.
How do these solutions help in understanding Sanskrit verbs?
These solutions provide step-by-step guidance and rewritten explanations for exercises involving verb conjugation, sentence completion, and choosing correct verb forms, thereby reinforcing the student's understanding of Sanskrit verb usage.
Are the questions in the solutions the same as in the NCERT textbook?
Yes, the questions in these solutions are kept the same as in the NCERT textbook, ensuring that students are practicing with the original problems. The wording of the questions may be expanded for clarity.
What is the purpose of the 'Common Mistakes' section?
The 'Common Mistakes' section highlights typical errors students make while practicing verb conjugations and sentence formation, helping students to be more aware and avoid these pitfalls during their studies and exams.
How can I use these NCERT solutions for exam preparation?
You can use these solutions to understand the correct methods for solving grammar exercises, practice verb conjugations, and reinforce your knowledge of Sanskrit verb forms. Regularly reviewing the exercises and explanations will aid in effective exam preparation.
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