कक्षा 7 इतिहास: नए राजा और उनके राज्य - NCERT समाधान

NCERT Solutions PDF Class 7 PDF

यह पृष्ठ कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 'नए राजा और उनके राज्य' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें नए राजवंशों के उदय, उनके प्रशासन की संरचना, और कन्नौज जैसे क्षेत्रों पर नियंत्रण के लिए हुए संघर्षों पर चर्चा की गई है। समाधानों में प्रशस्तियों में किए गए शासकों के दावों, चाहमानों के साम्राज्य विस्तार की रणनीतियों और चोल प्रशासन की समितियों की सदस्यता की शर्तों का विश्लेषण शामिल है। यह अध्याय छात्रों को मध्यकालीन भारत के राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य को समझने में मदद करता है, जिसमें विभिन्न शक्तियों के बीच सत्ता संघर्ष और क्षेत्रीय विस्तार की प्रवृत्तियों को उजागर किया गया है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने और विषय की गहरी समझ विकसित करने में सहायता करेंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectहमारे अतीत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. नये राजा और उनके राज्य

Chapter summary

कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 'नए राजा और उनके राज्य' के ये NCERT समाधान छात्रों को मध्यकालीन भारत में उभरे नए राजवंशों, जैसे गुर्जर-प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट के बारे में बताते हैं। यह अध्याय प्रशासन की भिन्नताओं, कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष के कारणों, और शासकों द्वारा अपनी शक्ति और प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए किए गए दावों की पड़ताल करता है। इसमें चोल प्रशासन की समितियों की सदस्यता की शर्तों और चाहमानों के क्षेत्रीय विस्तार पर भी प्रकाश डाला गया है।

Learning outcomes

  • नए राजवंशों के उदय और उनके राज्यों के विस्तार को समझना।
  • मध्यकालीन भारतीय प्रशासन की विशेषताओं और आज की व्यवस्था से भिन्नताओं का विश्लेषण करना।
  • कन्नौज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए हुए त्रिपक्षीय संघर्ष के कारणों की पहचान करना।
  • शासकों द्वारा अपनी प्रशंसा में किए गए दावों के पीछे के उद्देश्यों को समझना।
  • चोल प्रशासन में समितियों की सदस्यता के लिए निर्धारित शर्तों का वर्णन करना।
  • क्षेत्रीय विस्तार के लिए शासकों द्वारा अपनाई गई रणनीतियों का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • नए राजवंशों का उदय
  • राजवंशों का प्रशासन
  • भूमि अनुदान
  • प्रशस्तियाँ और दावे
  • कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष
  • गुर्जर-प्रतिहार
  • पाल वंश
  • राष्ट्रकूट
  • चोल साम्राज्य
  • चोल प्रशासन
  • चाहमान (चौहान)
  • क्षेत्रीय विस्तार

Important topics

  • नए राजवंशों का उदय और विस्तार
  • कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष
  • प्रशस्तियों के माध्यम से शासकों के दावे
  • चोल प्रशासन की व्यवस्था और समितियाँ
  • क्षेत्रीय शक्तियों का उदय और संघर्ष

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Questions and Solutions

पाठगत प्रश्न 1

क्या आपके विचार से उस दौर में एक शासक बनने के लिए क्षत्रिय के रूप में पैदा होना महत्त्वपूर्ण था? (एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-17)
Solution: हमारे विचार से, उस काल में शासक बनने के लिए क्षत्रिय के रूप में जन्म लेना आवश्यक नहीं था। यद्यपि उस समय अधिकांश शासक क्षत्रिय वर्ग से थे, लेकिन ऐसे कई उदाहरण भी मिलते हैं जहाँ गैर-क्षत्रिय पृष्ठभूमि के व्यक्तियों ने शासन संभाला। उदाहरण के लिए, कदंब राजवंश के मयूरशर्मन और गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के हरिचंद्र जैसे शासक मूल रूप से ब्राह्मण थे। उन्होंने अपनी पारंपरिक शिक्षा और पेशे को छोड़कर सैन्य शक्ति अर्जित की और सफलतापूर्वक राज्य स्थापित किए। यह दर्शाता है कि योग्यता, राजनीतिक कौशल और सैन्य क्षमता भी शासक बनने के लिए महत्वपूर्ण कारक थे, न कि केवल जन्म।

पाठगत प्रश्न 2

प्रशासन का यह रूप आज की व्यवस्था से किन मायनों में भिन्न था? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-18)
Solution: मध्यकाल की प्रशासनिक व्यवस्था आज की व्यवस्था से कई महत्वपूर्ण मायनों में भिन्न थी। मध्यकाल में मुख्य रूप से राजतंत्र प्रचलित था, जहाँ शासक का पद वंशानुगत होता था, अर्थात् राजा का पुत्र ही राजा बनता था। जनता की भूमिका सीमित थी और वे शासक का चुनाव नहीं कर सकते थे, न ही उसे हटा सकते थे। इसके विपरीत, आज की प्रशासनिक व्यवस्था लोकतांत्रिक है। इसमें जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है, जो सरकार का गठन करते हैं और शासन चलाते हैं। जनता के पास अपने शासकों को चुनने और जवाबदेह ठहराने का अधिकार होता है।

पाठगत प्रश्न 3

मानचित्र 1 को देखें और वे कारण बताइए, जिनके चलते ये शासक कन्नौज और गंगा घाटी के ऊपर नियंत्रण चाहते थे। (एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-21)
Solution: आठवीं सदी से लेकर बारहवीं सदी के पूर्वार्द्ध तक, कन्नौज उत्तर भारत के राजनीतिक और आर्थिक रूप से एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र था। इसकी भौगोलिक स्थिति गंगा घाटी के मध्य में होने के कारण सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण थी। जो भी शासक कन्नौज पर नियंत्रण स्थापित करता, वह गंगा के उपजाऊ मैदानों और विस्तृत व्यापार मार्गों पर प्रभुत्व स्थापित कर लेता था। इसी रणनीतिक महत्व के कारण गुर्जर-प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट जैसे शक्तिशाली राजवंशों ने लंबे समय तक कन्नौज पर नियंत्रण के लिए संघर्ष किया। इस संघर्ष में तीन प्रमुख पक्षों के शामिल होने के कारण इतिहासकार इसे 'त्रिपक्षीय संघर्ष' के रूप में जानते हैं।

पाठगत प्रश्न 4

प्राचीन व मध्यकाल के राजाओं द्वारा कई तरह के दावे किए जाते थे, आपके विचार से ऐसे दावे उन्होंने क्यों किए होंगे? (एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-19)
Solution: प्राचीन और मध्यकाल के राजा अक्सर अपनी प्रशस्तियों (प्रशंसात्मक लेखों) में स्वयं को महान योद्धा, शूरवीर और विजयी शासक के रूप में प्रस्तुत करते थे। उदाहरण के लिए, समुद्रगुप्त की प्रशस्ति में यह दावा किया गया है कि आंध्र, सैंधव, विदर्भ और कलिंग के राजा उनके सामने तब धराशायी हो गए थे जब वे केवल राजकुमार थे। ऐसे दावे करने के पीछे मुख्य उद्देश्य अपनी शक्ति, प्रतिष्ठा और वैधता को बढ़ाना होता था। यह जनता और अन्य शासकों को यह दिखाना था कि वे कितने शक्तिशाली और योग्य हैं, जिससे उनका सम्मान बढ़े और उनका शासन मजबूत हो।

पाठगत प्रश्न 5

मानचित्र 1 को दोबारा देखिए और विचार-विमर्श कीजिए कि चाहमानों ने अपने इलाके का विस्तार क्यों करना चाहा होगा? (एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-21)
Solution: चाहमान (जिन्हें चौहान भी कहा जाता है) दिल्ली और अजमेर के आसपास के क्षेत्रों पर शासन करते थे। उन्होंने अपने राज्य का विस्तार पश्चिम और पूर्व की ओर करने का प्रयास किया। इस विस्तार के क्रम में उन्हें गुजरात के चालुक्यों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गहड़वालों जैसे शक्तिशाली शासकों से संघर्ष करना पड़ा। साम्राज्य का विस्तार करने के पीछे मुख्य कारण अपनी शक्ति को और अधिक मजबूत करना, अधिक संसाधन जुटाना, अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा को बढ़ाना और अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त हासिल करना हो सकता है।

पाठगत प्रश्न 6

क्या आपको लगता है कि महिलाएँ इन सभाओं में हिस्सेदारी करती थीं? क्या आप समझते हैं कि समितियों के सदस्यों के चुनाव के लिए लॉटरी का तरीका उपयोगी होता है? (एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-27)
Solution: उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, महिलाओं की इन सभाओं में सक्रिय भागीदारी का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता है। चोल प्रशासन में, कुछ समितियों के सदस्यों का चुनाव लॉटरी पद्धति से किया जाता था, जबकि अन्य सदस्यों का चयन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया जाता था। लॉटरी द्वारा सदस्यों का चुनाव कुछ हद तक उपयोगी हो सकता है क्योंकि यह पक्षपात की संभावना को कम करता है और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को अवसर प्रदान कर सकता है। हालाँकि, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि चुने गए सदस्य योग्य और सक्षम हों।

प्रश्न-अभ्यास 1: जोड़ा बनाओ

गुर्जर-प्रतिहार - पश्चिमी दक्कन राष्ट्रकूट – बंगाल पाल – गुजरात और राजस्थान चोल – तिमलनाडु
Solution: सही जोड़ा इस प्रकार है: गुर्जर-प्रतिहार - गुजरात और राजस्थान राष्ट्रकूट - पश्चिमी दक्कन पाल - बंगाल चोल - तमिलनाडु

प्रश्न-अभ्यास 2

'त्रिपक्षीय संघर्ष' में लगे तीनों पक्ष कौन-कौन से थे?
Solution: 'त्रिपक्षीय संघर्ष' में लगे तीनों पक्ष थे: 1. गुर्जर-प्रतिहार 2. राष्ट्रकूट 3. पाल वंश

प्रश्न-अभ्यास 3

चोल साम्राज्य में सभा की किसी समिति का सदस्य बनने के लिए आवश्यक शर्ते क्या थीं?
Solution: चोल साम्राज्य में सभा की किसी समिति का सदस्य बनने के लिए निम्नलिखित शर्ते आवश्यक थीं: 1. सदस्य बनने के इच्छुक व्यक्ति को ऐसी भूमि का स्वामी होना चाहिए जहाँ से भू-राजस्व वसूला जाता हो। 2. उसके पास अपना स्वयं का घर होना चाहिए। 3. उसकी आयु 35 वर्ष से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए। 4. उसे वेदों का ज्ञान होना चाहिए। 5. वह ईमानदार होना चाहिए। 6. उसे प्रशासनिक मामलों की अच्छी जानकारी होनी चाहिए।

प्रश्न-अभ्यास 4

चाहमानों के नियंत्रण में आने वाले दो प्रमुख नगर कौन-से थे?
Solution: चाहमानों के नियंत्रण में आने वाले दो प्रमुख नगर दिल्ली और अजमेर थे। हालाँकि प्रश्न में कन्नौज और बनारस का उल्लेख किया गया है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से चाहमानों का मुख्य केंद्र दिल्ली और अजमेर के आसपास था। कन्नौज पर गुर्जर-प्रतिहारों का प्रभाव था, और बनारस भी उस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शहर था। चाहमानों ने अपने साम्राज्य का विस्तार करते हुए इन क्षेत्रों को भी अपने प्रभाव में लाने का प्रयास किया होगा।

Common mistakes

  • क्षत्रिय पृष्ठभूमि को शासक बनने के लिए एकमात्र आवश्यक शर्त मानना।
  • प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच ऐतिहासिक भिन्नताओं को नजरअंदाज करना।
  • त्रिपक्षीय संघर्ष के पक्षों या कारणों को गलत बताना।
  • चोल प्रशासन की समितियों की सदस्यता की शर्तों को ठीक से याद न रखना।

Revision tips

  • प्रत्येक नए राजवंश के प्रमुख शासकों और उनके राज्यों के भौगोलिक विस्तार को सूचीबद्ध करें।
  • प्रशासनिक व्यवस्थाओं की तुलना करते समय मुख्य अंतरों पर ध्यान केंद्रित करें।
  • त्रिपक्षीय संघर्ष में शामिल तीनों शक्तियों और उनके कन्नौज पर नियंत्रण के कारणों को समझें।
  • चोल प्रशासन की समितियों की सदस्यता की शर्तों को याद करने के लिए एक तालिका बनाएं।

Practice MCQs

Q1. मध्यकाल में भारत की प्रशासनिक व्यवस्था आज की व्यवस्था से मुख्य रूप से किस प्रकार भिन्न थी?

Q2. आठवीं से बारहवीं सदी के बीच कन्नौज किस कारण राजनीतिक शक्ति का केंद्र बना रहा?

Q3. निम्नलिखित में से कौन से शासक त्रिपक्षीय संघर्ष में शामिल थे?

Q4. समुद्रगुप्त की प्रशस्ति में किस प्रकार के दावे किए गए थे?

Q5. चोल साम्राज्य में सभा की किसी समिति का सदस्य बनने के लिए आवश्यक शर्तों में से एक क्या थी?

Frequently asked questions

कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 'नए राजा और उनके राज्य' में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में मध्यकालीन भारत में उभरे नए राजवंशों, उनके प्रशासन, कन्नौज जैसे क्षेत्रों के लिए हुए संघर्षों, शासकों द्वारा किए गए दावों और चोल प्रशासन की व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।

क्या शासक बनने के लिए क्षत्रिय होना आवश्यक था?

नहीं, हालाँकि उस दौर में अधिकांश शासक क्षत्रिय थे, लेकिन कदंब मयूरशर्मन और गुर्जर प्रतिहार हरिचंद्र जैसे ब्राह्मण भी शासक बने जिन्होंने पारंपरिक पेशे छोड़कर शस्त्र अपना लिए।

कन्नौज पर नियंत्रण के लिए किन तीन प्रमुख शक्तियों के बीच संघर्ष हुआ था?

कन्नौज पर नियंत्रण के लिए गुर्जर-प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट राजवंशों के बीच त्रिपक्षीय संघर्ष हुआ था।

चोल प्रशासन में समितियों के सदस्य बनने के लिए क्या योग्यताएँ आवश्यक थीं?

सदस्य बनने के लिए व्यक्ति को अपनी भूमि का स्वामी होना चाहिए, उसका अपना घर हो, उसकी उम्र 35 से 70 वर्ष के बीच हो, उसे वेदों का ज्ञान हो, वह ईमानदार हो और उसे प्रशासनिक मामलों की अच्छी जानकारी हो।

ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद कर सकते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को विस्तृत और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद मिलती है।

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