कक्षा 7 इतिहास: हजार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 1, 'हजार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय 700 से 1750 ईस्वी तक के भारतीय उपमहाद्वीप में हुए महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तनों की पड़ताल करता है। समाधानों में मध्यकाल में 'विदेशी' की अवधारणा, प्रौद्योगिकी में नवाचार जैसे रहट और चरखे, धार्मिक विकास जैसे भक्ति आंदोलन का उदय, और 'हिंदुस्तान' शब्द के अर्थ में आए बदलावों पर चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त, यह अध्याय जातियों के नियंत्रण, सर्वक्षेत्रीय साम्राज्यों की प्रकृति, पांडुलिपियों के अध्ययन में आने वाली कठिनाइयों और इतिहास को विभिन्न कालों में विभाजित करने की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डालता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त समझ प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectहमारे अतीत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter1. हजार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल

Chapter summary

कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 1 के ये NCERT समाधान 700 से 1750 ईस्वी तक के हजार वर्षों के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में हुए परिवर्तनों पर केंद्रित हैं। इसमें मध्यकालीन भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य को समझने के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है। समाधानों में प्रौद्योगिकी, धर्म, भाषा और भूगोल में हुए बदलावों के साथ-साथ इतिहासकारों द्वारा अतीत के अध्ययन में आने वाली चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया है।

Learning outcomes

  • मध्यकाल में 'विदेशी' की अवधारणा को समझना।
  • 700-1750 ईस्वी के बीच हुए प्रमुख प्रौद्योगिकीय परिवर्तनों की पहचान करना।
  • इस काल के दौरान हुए धार्मिक परिवर्तनों और आंदोलनों का वर्णन करना।
  • 'हिंदुस्तान' शब्द के अर्थ में आए ऐतिहासिक बदलावों का विश्लेषण करना।
  • जाति व्यवस्था और उसके नियंत्रण के तरीकों को समझना।
  • सर्वक्षेत्रीय साम्राज्य की अवधारणा को स्पष्ट करना।
  • पांडुलिपियों के अध्ययन से जुड़ी ऐतिहासिक चुनौतियों का मूल्यांकन करना।
  • इतिहासकारों द्वारा अतीत को कालों में विभाजित करने की प्रक्रिया को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • अतीत का अध्ययन
  • मध्यकाल
  • प्रौद्योगिकीय परिवर्तन
  • धार्मिक परिवर्तन
  • भक्ति आंदोलन
  • इस्लाम का आगमन
  • हिंदुस्तान शब्द का अर्थ
  • जाति व्यवस्था
  • सर्वक्षेत्रीय साम्राज्य
  • पांडुलिपियाँ
  • इतिहास का काल-विभाजन
  • मानचित्रों का अध्ययन

Important topics

  • हिंदुस्तान शब्द का बदलता अर्थ
  • प्रौद्योगिकीय और धार्मिक परिवर्तन
  • पांडुलिपियों के अध्ययन में चुनौतियाँ
  • जाति व्यवस्था का नियंत्रण
  • इतिहास का काल-विभाजन

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

अतीत में 'विदेशी' किसे माना जाता था?
Solution: मध्यकाल में, गाँव में आने वाले किसी भी ऐसे व्यक्ति को 'विदेशी' माना जाता था जो उस समाज और संस्कृति का हिस्सा न हो। ऐसे व्यक्ति को हिंदी में 'परदेसी' और फारसी में 'अजनबी' कहा जा सकता था। यह शब्द केवल बाहरी लोगों के लिए प्रयुक्त होता था, न कि किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जो उसी गाँव या समाज का निवासी हो।

प्रश्न 2

नीचे उल्लिखित बातें सही है या गलत :

(क) सन् 700 के बाद के काल के संबंध में अभिलेख नहीं मिलते हैं।

(ख) इस काल के दौरान मराठों ने अपने राजनीतिक महत्त्व की स्थापना की।

(ग) कृषि-केंद्रित बस्तियों के विस्तार के साथ कभी-कभी वनवासी अपनी जमीन से उखाड़ बाहर कर दिए जाते थे।

(घ) सुलतान ग़यासुद्दीन बलबन असम, मणिपुर तथा कश्मीर का शासक था।

Solution:
  1. (क) गलत। सन् 700 के बाद के काल के संबंध में अभिलेख मिलते हैं, जैसे कि विभिन्न राज्यों के शिलालेख और ताम्रपत्र।
  2. (ख) गलत। मराठों का राजनीतिक महत्त्व मुख्य रूप से 17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शिवाजी के नेतृत्व में स्थापित हुआ, जो इस काल के अंतिम भाग में आता है, लेकिन इस पूरे काल में उनका प्रभुत्व नहीं था।
  3. (ग) सही। कृषि-केंद्रित बस्तियों के विस्तार के कारण अक्सर वनवासी अपनी पारंपरिक भूमि से विस्थापित हो जाते थे।
  4. (घ) गलत। सुलतान ग़यासुद्दीन बलबन दिल्ली सल्तनत का एक शासक था और उसका साम्राज्य मुख्य रूप से उत्तर भारत तक सीमित था; वह असम, मणिपुर तथा कश्मीर का शासक नहीं था।

प्रश्न 3

रिक्त स्थानों को भरें :

(क) अभिलेखागारों में ...... रखे जाते हैं।

(ख) ..... चौदहवीं सदी का एक इतिहासकार था।

(ग) ....... , ..... , ..... , ..... , ...... फसलें हैं।

Solution:
  1. (क) अभिलेखागारों में दस्तावेज रखे जाते हैं। ये ऐतिहासिक महत्व के सरकारी या निजी कागजात होते हैं।
  2. (ख) जियाउद्दीन बरनी चौदहवीं सदी का एक इतिहासकार था, जिसने 'तारीख-ए-फिरोजशाही' जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे।
  3. (ग) आलू, मक्का, मिर्च, चाय, कॉफी फसलें हैं। (ध्यान दें: आलू, मक्का और मिर्च यूरोपीय संपर्क के बाद भारत में आए, जबकि चाय और कॉफी का प्रचलन बाद में बढ़ा। यह प्रश्न उस समय की कृषि विविधता को दर्शाता है।)

प्रश्न 4

इस काल में हुए कुछ प्रौद्योगिकीय परिवर्तनों की तालिका दें।
Solution: 700 से 1750 ईस्वी के बीच के हजार वर्षों में कई महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकीय परिवर्तन हुए, जिनमें प्रमुख थे:
  1. सिंचाई में सुधार: रहट (चरखी) का प्रयोग शुरू हुआ, जिससे सिंचाई अधिक प्रभावी हो गई।
  2. कताई में प्रगति: कताई की प्रक्रिया को तेज करने के लिए चरखे का प्रयोग आम हो गया।
  3. युद्ध में नवाचार: आग्नेयास्त्रों (बारूद वाले हथियारों) का प्रयोग युद्धों में शुरू हो गया, जिसने युद्ध की रणनीति को बदल दिया।
ये प्रौद्योगिकीय विकास कृषि, उत्पादन और सैन्य शक्ति में महत्वपूर्ण बदलाव लाए।

प्रश्न 5

इस काल के दौरान हुए कुछ मुख्य धार्मिक परिवर्तनों की जानकारी दें।
Solution: हजार वर्षों के दौरान (700-1750 ईस्वी) भारत में धार्मिक परंपराओं में कई बड़े परिवर्तन आए:
  1. हिंदू धर्म में विकास: नए देवी-देवताओं की पूजा लोकप्रिय हुई। राजाओं ने मंदिरों के निर्माण पर जोर दिया और पुरोहितों (ब्राह्मणों) का महत्व बढ़ा।
  2. भक्ति आंदोलन का उदय: कर्मकांडों की आलोचना करने वाले भक्ति आंदोलन का प्रारंभ हुआ, जिसने ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत प्रेम और भक्ति पर बल दिया।
  3. इस्लाम का आगमन: सातवीं सदी में इस्लाम का भारत में आगमन हुआ और धीरे-धीरे यह एक महत्वपूर्ण धर्म बन गया।
  4. ईसाई धर्म का प्रादुर्भाव: सोलहवीं सदी में ईसाई धर्म का भी भारत में आगमन हुआ।
ये परिवर्तन समाज की धार्मिक संरचना और मान्यताओं में गहराई से समाहित हुए।

प्रश्न 6

पिछली कई शताब्दियों में 'हिंदुस्तान' शब्द का अर्थ कैसे बदला है?
Solution: पिछली कई शताब्दियों में 'हिंदुस्तान' शब्द के अर्थ में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं:
  1. तेरहवीं सदी: फारसी इतिहासकार मिन्हाज-ए-सिराज ने इस शब्द का प्रयोग गंगा-यमुना के बीच स्थित क्षेत्र और पंजाब, हरियाणा के लिए किया था। यह उन इलाकों को दर्शाता था जो दिल्ली के सुल्तान के राजनीतिक अधिकार क्षेत्र में आते थे।
  2. सोलहवीं सदी: बाबर ने 'हिंदुस्तान' शब्द का प्रयोग इस पूरे उप-महाद्वीप के भूगोल, वहाँ के पशु-पक्षियों और निवासियों की संस्कृति का वर्णन करने के लिए किया। यह प्रयोग चौदहवीं सदी के कवि अमीर खुसरो द्वारा प्रयुक्त 'हिंद' शब्द के समान था, लेकिन इसका दायरा व्यापक था।
इस प्रकार, 'हिंदुस्तान' शब्द का अर्थ राजनीतिक क्षेत्र से बढ़कर एक भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान की ओर विकसित हुआ।

प्रश्न 7

जातियों के मामले कैसे नियंत्रित किए जाते थे?
Solution: जातियों के मामले मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों से नियंत्रित किए जाते थे:
  1. जाति के नियम: प्रत्येक जाति अपने सदस्यों के व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए स्वयं अपने नियम बनाती थी।
  2. जाति पंचायत: इन नियमों का पालन करवाने के लिए जाति के बड़े-बुजुर्गों की एक सभा होती थी, जिसे कुछ इलाकों में 'जाति पंचायत' कहा जाता था। यह सभा जाति के सदस्यों के बीच विवादों का निपटारा करती थी और नियमों का उल्लंघन करने वालों को दंडित करती थी।
  3. गाँवों के रिवाज: जातियों को अपने निवास के गाँवों के रिवाजों और परंपराओं का भी पालन करना पड़ता था।
इस प्रकार, जाति व्यवस्था का नियंत्रण सामाजिक नियमों और सामुदायिक सभाओं के माध्यम से किया जाता था।

प्रश्न 8

'सर्वक्षेत्रीय साम्राज्य' से आप क्या समझते हैं?
Solution: 'सर्वक्षेत्रीय साम्राज्य' से तात्पर्य एक ऐसे विशाल साम्राज्य से है जो अनेक विभिन्न क्षेत्रीय राज्यों या प्रदेशों को अपने अधीन मिलाकर बना हो। ऐसे साम्राज्य में विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और शासनों वाले क्षेत्रों का समावेश होता है। उदाहरण के लिए, सल्तनत साम्राज्य और मुगल साम्राज्य को सर्वक्षेत्रीय साम्राज्य माना जा सकता है, क्योंकि उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े हिस्से पर शासन किया और विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियों को एकीकृत किया।

प्रश्न 9

पांडुलिपियों के उपयोग में इतिहासकारों के सामने कौन-कौन सी समस्याएँ आती हैं?
Solution: इतिहासकारों को पांडुलिपियों के उपयोग में कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
  1. लिखावट को समझना: पांडुलिपियों की लिखावट अक्सर बहुत पुरानी और जटिल होती है, जिसे समझना इतिहासकारों के लिए कठिन हो सकता है।
  2. मूल प्रतिलिपि का अभाव: आज हमें लेखकों द्वारा लिखी गई मूल पांडुलिपियाँ शायद ही कहीं मिलती हैं। हमें अक्सर बाद के लिपिकों द्वारा बनाई गई प्रतिलिपियों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
  3. लिपिकों द्वारा परिवर्तन: जब एक पांडुलिपि की नकल दूसरी प्रतिलिपि में की जाती थी, तो लिपिक अक्सर अनजाने में या जानबूझकर छोटे-मोटे फेर-बदल कर देते थे। वे कुछ शब्द बदल देते थे, कुछ वाक्य जोड़ या हटा देते थे।
  4. प्रतिलिपियों में भिन्नता: सदी-दर-सदी प्रतिलिपियों की भी प्रतिलिपियाँ बनती रहीं, जिसके कारण एक ही मूल ग्रंथ की विभिन्न प्रतिलिपियाँ एक-दूसरे से काफी भिन्न हो गईं।
इन समस्याओं के कारण, मूल लेखक के विचारों को सटीक रूप से जानने के लिए इतिहासकारों को एक ही ग्रंथ की कई प्रतिलिपियों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करना पड़ता है ताकि वे अनुमान लगा सकें कि मूलतः क्या लिखा गया था।

प्रश्न 10

इतिहासकार अतीत को कालों या युगों में कैसे विभाजित करते हैं? क्या इस कार्य में उनके सामने कोई कठिनाई आती है?
Solution: इतिहासकार अतीत को कालों या युगों में विभाजित करने के लिए मुख्य रूप से आर्थिक और सामाजिक कारकों को आधार बनाते हैं। इन आधारों पर इतिहास को सामान्यतः प्राचीन, मध्य और आधुनिक कालों में बाँटा गया है। इस कार्य में इतिहासकारों के सामने कठिनाई यह आती है कि वे किस महत्वपूर्ण घटना या परिवर्तन को विभाजन रेखा मानें। अतीत में परिवर्तन एक सतत प्रक्रिया होती है, और किसी एक घटना के आधार पर कालक्रम को स्पष्ट रूप से विभाजित करना हमेशा संभव नहीं होता। विभिन्न कालों की विशेषताएँ एक-दूसरे में मिश्रित हो सकती हैं, जिससे काल-विभाजन की प्रक्रिया जटिल हो जाती है।

प्रश्न 11

अध्याय में दिए गए मानचित्र 1 अथवा मानचित्र 2 की तुलना उपमहाद्वीप के आज के मानचित्र से करें। तुलना करते हुए दोनों के बीच जितनी भी समानताएँ और असमानताएँ मिलती हैं, उनकी सूची बनाइए।
Solution:

मानचित्र 1 (अल इद्रीसी द्वारा 1154 में बनाया गया) और मानचित्र 2 (फ्रांसीसी मानचित्रकार द्वारा 1720 में बनाया गया) की तुलना उपमहाद्वीप के आज के मानचित्र से करने पर निम्नलिखित समानताएँ और असमानताएँ मिलती हैं:

समानताएँ:

  • दोनों मानचित्रों में उपमहाद्वीप का मूल भौगोलिक आकार काफी हद तक समान दिखाई देता है।
  • प्रमुख नदियाँ जैसे गंगा, सिंधु आदि की स्थिति मोटे तौर पर पहचानी जा सकती है।
  • तटीय रेखाओं का सामान्य स्वरूप आज के मानचित्र से मिलता-जुलता है।

असमानताएँ:

  • नामकरण और सीमाएँ: मध्यकालीन मानचित्रों में क्षेत्रों के नाम और उनकी राजनीतिक सीमाएँ आज के मानचित्रों से बहुत भिन्न हैं। आज के देशों जैसे भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि का स्पष्ट विभाजन उस समय नहीं था।
  • विस्तार और सटीकता: अल इद्रीसी का मानचित्र (1154) अधिक प्रतीकात्मक है और इसमें कुछ क्षेत्र (जैसे दक्षिण भारत) का चित्रण कम विस्तृत है। फ्रांसीसी मानचित्र (1720) अधिक विस्तृत है लेकिन फिर भी आज की तरह सटीक नहीं है।
  • क्षेत्रीय विवरण: मध्यकालीन मानचित्रों में शहरों, राज्यों और भौगोलिक विशेषताओं का विवरण आज के मानचित्रों की तुलना में कम और भिन्न होता है। उदाहरण के लिए, अल इद्रीसी के मानचित्र में श्रीलंका को 'लंका' के रूप में दर्शाया गया है और भारत को 'हिंदुश' कहा गया है।
  • मानचित्रण शैली: दोनों मध्यकालीन मानचित्रों की शैली और उद्देश्य आज के मानचित्रों से भिन्न हैं, जो मुख्य रूप से सटीक भौगोलिक प्रतिनिधित्व पर केंद्रित होते हैं।

यह तुलना दर्शाती है कि समय के साथ भौगोलिक ज्ञान, मानचित्रण तकनीक और राजनीतिक समझ में कैसे परिवर्तन आया है।

Common mistakes

  • विभिन्न ऐतिहासिक कालों में 'विदेशी' की अवधारणा को एक समान समझना।
  • प्रौद्योगिकीय परिवर्तनों को केवल एक ही समय अवधि से जोड़ना।
  • 'हिंदुस्तान' शब्द के बदलते अर्थों को अनदेखा करना।
  • पांडुलिपियों की प्रतिलिपियों में होने वाले बदलावों के प्रभाव को कम आंकना।
  • अतीत को कालखंडों में विभाजित करने की प्रक्रिया की जटिलताओं को न समझना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को मुख्य बिंदुओं में सारांशित करें।
  • प्रौद्योगिकीय और धार्मिक परिवर्तनों की एक तुलनात्मक तालिका बनाएँ।
  • 'हिंदुस्तान' शब्द के अर्थ के विकास को कालानुक्रमिक रूप से समझें।
  • पांडुलिपियों से संबंधित समस्याओं पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि यह इतिहासकारों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
  • अभ्यास प्रश्नों को हल करने के बाद, पाठ्यपुस्तक के मानचित्रों का आज के मानचित्रों से तुलनात्मक अध्ययन करें।

Practice MCQs

Q1. मध्यकाल में गाँव में आने वाले किसी भी अनजान व्यक्ति को क्या कहा जाता था, यदि वह समाज और संस्कृति का अंग न हो?

Q2. 700 से 1750 ईस्वी के बीच सिंचाई के क्षेत्र में कौन सी नई प्रौद्योगिकी का प्रयोग शुरू हुआ?

Q3. किस सदी में इस्लाम का भारत में प्रादुर्भाव हुआ?

Q4. तेरहवीं सदी में मिन्हाज-ए-सिराज द्वारा 'हिंदुस्तान' शब्द का प्रयोग किन क्षेत्रों के लिए किया गया था?

Q5. जाति के सदस्यों के व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए कौन सी सभा नियम बनाती थी?

Q6. इतिहासकारों को मूल पांडुलिपि की नई प्रतिलिपि बनाते समय लिपिकों द्वारा की गई किस समस्या का सामना करना पड़ता है?

Frequently asked questions

कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 1 में किन प्रमुख परिवर्तनों का अध्ययन किया गया है?

अध्याय 1, 'हजार वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल', 700 से 1750 ईस्वी तक के मध्यकालीन भारत में हुए सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तनों का अध्ययन करता है। इसमें प्रौद्योगिकी, धर्म, भाषा और भूगोल में हुए बदलाव शामिल हैं।

मध्यकाल में 'विदेशी' किसे माना जाता था?

मध्यकाल में गाँव में आने वाले किसी भी ऐसे अनजान व्यक्ति को 'विदेशी' माना जाता था जो उस समाज और संस्कृति का हिस्सा न हो। इसे हिंदी में परदेसी और फारसी में अजनबी भी कहा जा सकता था।

'हिंदुस्तान' शब्द का अर्थ समय के साथ कैसे बदला है?

तेरहवीं सदी में 'हिंदुस्तान' का अर्थ गंगा-यमुना के बीच का क्षेत्र था, जो दिल्ली सल्तनत के अधीन था। सोलहवीं सदी तक आते-आते बाबर ने इसका प्रयोग उपमहाद्वीप के भूगोल, निवासियों और संस्कृति का वर्णन करने के लिए किया।

पांडुलिपियों के अध्ययन में इतिहासकारों को क्या समस्याएँ आती हैं?

इतिहासकारों को पांडुलिपियों की लिखावट समझने, मूल प्रतिलिपियों के अभाव, लिपिकों द्वारा किए गए फेरबदल और समय के साथ प्रतिलिपियों के भिन्न हो जाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

इतिहासकार अतीत को किन मुख्य कालों में विभाजित करते हैं?

अधिकतर इतिहासकार आर्थिक और सामाजिक कारकों के आधार पर अतीत को प्राचीन, मध्य और आधुनिक कालों में विभाजित करते हैं।

यह NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता मिलती है।

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