कक्षा 7 इतिहास अध्याय 10: अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन - एनसीईआरटी समाधान

NCERT Solutions PDF Class 7 PDF

यह पृष्ठ कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 10, 'अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन' के लिए एनसीईआरटी समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय मुग़ल साम्राज्य के पतन और उसके बाद भारत में उभरे नए क्षेत्रीय राज्यों के गठन की पड़ताल करता है। इसमें औरंगजेब के शासनकाल के दौरान उत्पन्न चुनौतियों, सूबेदारों और दीवानों की भूमिका, खालसा पंथ की स्थापना, और विभिन्न स्वतंत्र राज्यों जैसे अवध, हैदराबाद और मराठा परिसंघ के उदय पर प्रकाश डाला गया है। समाधानों में प्रमुख हस्तियों जैसे सआदत खान और सवाई राजा जयसिंह के योगदान को भी समझाया गया है। ये विस्तृत समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने और याद रखने में मदद करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectहमारे अतीत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter10. अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन

Chapter summary

कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 10, 'अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन' के ये एनसीईआरटी समाधान, मुग़ल साम्राज्य के पतन के बाद भारत में हुए राजनीतिक परिवर्तनों पर केंद्रित हैं। इसमें औरंगजेब के समय की चुनौतियों, नए राज्यों के उदय, जैसे अवध और हैदराबाद, और मराठा शक्ति के विस्तार का विश्लेषण किया गया है। समाधान छात्रों को इन ऐतिहासिक घटनाओं और उनके कारणों को समझने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • औरंगजेब के शासनकाल में मुगल सत्ता को चुनौती देने वाले प्रमुख समूहों की पहचान करना।
  • सूबेदार और दीवान के कार्यालयों के महत्व और उन पर नियंत्रण की इच्छा को समझना।
  • खालसा पंथ की स्थापना और उसके अर्थ को स्पष्ट करना।
  • अठारहवीं शताब्दी में उभरे नए राजनीतिक गठन, जैसे अवध और हैदराबाद, के बारे में जानना।
  • मराठा शक्ति के उदय और उनकी राजनीतिक व्यवस्था को समझना।
  • प्रमुख ऐतिहासिक हस्तियों और उनके योगदान को पहचानना।

Topics covered

Paper topics

  • औरंगजेब के शासनकाल की चुनौतियाँ
  • सूबेदार और दीवान की भूमिका
  • खालसा पंथ का गठन
  • नए राज्यों का उदय
  • अवध राज्य
  • हैदराबाद राज्य
  • मराठा शक्ति का विस्तार
  • चौथ कर
  • सिख योद्धाओं का समूह (मिस्ल)
  • सवाई राजा जयसिंह
  • सआदत खाँ

Important topics

  • औरंगजेब के शासनकाल में मुगल सत्ता को चुनौती
  • सूबेदार और दीवान के कार्यालयों पर नियंत्रण
  • नए राज्यों का उदय (अवध, हैदराबाद)
  • मराठा शक्ति का उदय और चौथ कर
  • खालसा पंथ की स्थापना

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

पाठगत प्रश्न 1

औरंगजेब के शासनकाल में किन-किन लोगों ने मुगल सत्ता को सबसे लम्बे समय तक चुनौती दी?
Solution:

औरंगजेब के लंबे शासनकाल के दौरान, मुगल सत्ता को कई शक्तिशाली समूहों से चुनौती मिली। इनमें उत्तर भारत में सिक्ख, जाट और संतनामी शामिल थे। उत्तर-पूर्व में अहोम लोगों ने भी प्रतिरोध किया। हालांकि, दक्कन में मराठों ने औरंगजेब को सबसे अधिक और लंबे समय तक चुनौती दी। मराठों के लगातार संघर्ष ने मुगल साम्राज्य की शक्ति को काफी हद तक कमजोर कर दिया था।

पाठगत प्रश्न 2

अपने राज्य को सुदृढ़ करने की कोशिशों में मुगल सूबेदार दीवान के कार्यालय पर भी नियंत्रण जमाना क्यों चाहते थे?
Solution:

मुगल सूबेदार अपने प्रांतों में अपनी शक्ति और नियंत्रण को मजबूत करना चाहते थे। दीवान राज्य के वित्तीय मामलों का प्रमुख होता था और उसका मुख्य कार्य विभिन्न क्षेत्रों से राजस्व (कर) वसूलना था। राज्य की आय का मुख्य स्रोत यही राजस्व व्यवस्था थी। इसलिए, सूबेदार यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि वे न केवल प्रशासनिक बल्कि वित्तीय मामलों पर भी नियंत्रण रखें, ताकि वे अपने राज्य को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर सकें और अपनी स्थिति को और मजबूत बना सकें।

पाठगत प्रश्न 3

खालसा से क्या अभिप्राय है?
Solution:

खालसा शब्द का शाब्दिक अर्थ 'शुद्ध' या 'अलग' होता है। खालसा पंथ की स्थापना सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह ने की थी। विक्रम संवत् 1756 (ईस्वी 1699) में बैसाखी के दिन आनंदपुर साहिब में एक विशाल सभा का आयोजन किया गया, जहाँ उन्होंने खालसा पंथ की नींव रखी। यह सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और सामाजिक पुनर्गठन का प्रतीक था।

प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - 1. मेल बैठाएँ

निम्नलिखित का मेल बैठाएँ:

सूबेदार

फ़ौजदार

इजारादार

मिस्ल चौथ कुनबी

उमरा

एक राजस्व कृषक

उच्च अभिजात

प्रांतीय सुबेदार चौथ एक मुगल सैन्य कमांडर

मराठा कृषक योद्धा

सिख योद्धाओं का समूह

मराठों द्वारा लगाया गया कर

Solution:

सही मेल इस प्रकार है:

  • सूबेदार - प्रांतीय सुबेदार
  • फ़ौजदार - एक मुगल सैन्य कमांडर
  • इजारादार - एक राजस्व कृषक
  • मिस्ल - सिख योद्धाओं का समूह
  • चौथ - मराठों द्वारा लगाया गया कर
  • कुनबी - मराठा कृषक योद्धा
  • उमरा - उच्च अभिजात

प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:
  1. औरंगजेब ने ..... में एक लंबी लड़ाई लड़ी।
  2. उमरा और जागीरदार मुगल ...... के शक्तिशाली अंग थे।
  3. आसफ़ जाह ने हैदराबाद राज्य की स्थापना ...... में की।
  4. अवध राज्य का संस्थापक ......था।
Solution:
  1. औरंगजेब ने दक्कन में एक लंबी लड़ाई लड़ी।
  2. उमरा और जागीरदार मुगल साम्राज्य के शक्तिशाली अंग थे।
  3. आसफ़ जाह ने हैदराबाद राज्य की स्थापना 18वीं शताब्दी में की।
  4. अवध राज्य का संस्थापक सआदत खाँ था।

प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - 3. बताएँ सही या गलत

बताएँ सही या गलत:
  1. नादिरशाह ने बंगाल पर आक्रमण किया।
  2. सवाई राजा जयसिंह इन्दौर का शासक था।
  3. गुरु गोविंद सिंह सिक्खों के दसवें गुरु थे।
  4. पुणे अठारहवीं शताब्दी में मराठों की राजधानी बना।
Solution:
  1. गलत - नादिरशाह ने भारत पर आक्रमण किया था, लेकिन उसका मुख्य आक्रमण फारस से हुआ था, बंगाल पर नहीं।
  2. गलत - सवाई राजा जयसिंह जयपुर (आमेर) के शासक थे, इन्दौर के नहीं। इन्दौर होलकर राज्य का हिस्सा था।
  3. सही - गुरु गोविंद सिंह वास्तव में सिक्खों के दसवें और अंतिम मानव गुरु थे।
  4. सही - पुणे अठारहवीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र तथा राजधानी बना।

प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - 4. सआदत ख़ान के पद

सआदत ख़ान के पास कौन-कौन से पद थे?
Solution:

सआदत खाँ, जिन्हें बुरहान-उल-मुल्क भी कहा जाता था, अवध राज्य के संस्थापक थे। उनके पास निम्नलिखित प्रमुख पद थे:

  1. सूबेदारी: वे अवध के सूबेदार (गवर्नर) थे।
  2. फ़ौजदारी: वे फ़ौजदार के पद पर भी थे, जो सैन्य और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालता था।

इन पदों के माध्यम से उन्होंने अवध में अपनी शक्ति स्थापित की।

Common mistakes

  • सूबेदार और फौजदार जैसे पदों के कार्यों को भ्रमित करना।
  • विभिन्न करों (जैसे चौथ) और उनके महत्व को गलत समझना।
  • ऐतिहासिक घटनाओं के कालक्रम को लेकर भ्रमित होना।
  • नए राज्यों के संस्थापकों और उनके क्षेत्रों को गलत जोड़ना।

Revision tips

  • प्रत्येक नए राजनीतिक गठन के प्रमुख शासकों और उनकी उपलब्धियों को सूचीबद्ध करें।
  • मुगल साम्राज्य के पतन के कारणों और नए राज्यों के उदय के बीच संबंध को समझें।
  • चौथ जैसे करों के अर्थ और मराठों के लिए उनके महत्व को याद रखें।
  • पाठ में उल्लिखित प्रमुख स्थानों (जैसे दक्कन, अवध, हैदराबाद, पुणे) और उनकी ऐतिहासिक भूमिका को समझें।

Practice MCQs

Q1. औरंगजेब के शासनकाल में मुगल सत्ता को सबसे लंबे समय तक किसने चुनौती दी?

Q2. सूबेदार अपने राज्य को सुदृढ़ करने के लिए दीवान के कार्यालय पर नियंत्रण क्यों चाहते थे?

Q3. खालसा का शाब्दिक अर्थ क्या है?

Q4. किसने 18वीं शताब्दी में हैदराबाद राज्य की स्थापना की?

Q5. निम्नलिखित में से कौन सा कर मराठों द्वारा लगाया गया था?

Frequently asked questions

कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 10 में किन मुख्य राजनीतिक परिवर्तनों का अध्ययन किया गया है?

अध्याय 10 में मुख्य रूप से अठारहवीं शताब्दी में मुग़ल साम्राज्य के पतन के बाद उभरे नए राजनीतिक गठन, जैसे अवध, हैदराबाद और मराठा राज्यों के उदय का अध्ययन किया गया है।

औरंगजेब के शासनकाल में किन समूहों ने मुगल सत्ता को चुनौती दी?

औरंगजेब के शासनकाल में सिक्खों, जाटों, संतनामियों, अहोम और विशेष रूप से मराठों ने मुगल सत्ता को चुनौती दी।

सूबेदार और दीवान के कार्यालयों का क्या महत्व था?

दीवान राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से कर वसूलता था, जो राज्य की आय का मुख्य स्रोत था। सूबेदार अपने राज्य को सुदृढ़ करने के लिए इस राजस्व पर नियंत्रण चाहते थे, इसलिए वे दीवान के कार्यालय पर भी नियंत्रण जमाना चाहते थे।

खालसा पंथ की स्थापना किसने और कब की?

खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोविंद सिंह ने विक्रम संवत् 1756 (ईस्वी 1699) में बैसाख के प्रथम दिन आनंदपुर में की थी।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझने, महत्वपूर्ण घटनाओं और व्यक्तित्वों को याद रखने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करते हैं।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.