कक्षा 7 इतिहास: दिल्ली के सुलतान NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय "दिल्ली के सुलतान" के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें दिल्ली सल्तनत के प्रारंभिक शासकों, उनके प्रशासन, न्याय प्रणाली और सामाजिक व्यवस्था से संबंधित पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं। समाधान न्याय-चक्र की अवधारणा, रजिया सुल्तान के शासन की चुनौतियों, गुलामों को बेटे से बढ़कर मानने के कारणों, मुहम्मद तुगलक के प्रशासनिक निर्णयों की आलोचना, और इब्नबतूता द्वारा वर्णित सरदारों की रक्षा-व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालते हैं। इसके अतिरिक्त, यह अध्याय सल्तनत की 'भीतरी' और 'बाहरी' सीमाओं, मुक्तीओं पर नियंत्रण के उपायों और मंगोल आक्रमणों के प्रभावों की भी व्याख्या करता है। ये समाधान छात्रों को दिल्ली सल्तनत के इतिहास की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 7 |
| Subject | हमारे अतीत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 3. दिल्ली के सुलतान |
Chapter summary
कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय "दिल्ली के सुलतान" के ये NCERT समाधान दिल्ली सल्तनत के महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर करते हैं। इनमें शासकों के न्याय और प्रशासन के प्रति दृष्टिकोण, जैसे न्याय-चक्र की व्याख्या, रजिया सुल्तान के शासन की कठिनाइयाँ, और गुलामों की भूमिका पर चर्चा शामिल है। समाधान मुहम्मद तुगलक की नीतियों की आलोचना और इब्नबतूता द्वारा वर्णित सरदारों की सुरक्षा व्यवस्था का भी विश्लेषण करते हैं। साथ ही, सल्तनत की आंतरिक और बाहरी सीमाओं, प्रशासकों (मुक्तीओं) पर नियंत्रण रखने के तरीके और मंगोल आक्रमणों के प्रभाव जैसे विषयों को भी स्पष्ट किया गया है।
Learning outcomes
- न्याय-चक्र की अवधारणा और राजा-प्रजा संबंध को समझना।
- रजिया सुल्तान के शासनकाल की चुनौतियों और स्त्री शासकों के प्रति समाज के दृष्टिकोण का विश्लेषण करना।
- गुलामों को बेटे से बढ़कर मानने के ऐतिहासिक कारणों की व्याख्या करना।
- सुल्तान मुहम्मद तुगलक की आलोचना के पीछे के कारणों को समझना।
- इब्नबतूता के विवरण के आधार पर सरदारों की रक्षा-व्यवस्था का वर्णन करना।
- सल्तनत की 'भीतरी' और 'बाहरी' सीमाओं के अर्थ को स्पष्ट करना।
- मुक्तीओं पर नियंत्रण के लिए सल्तनत द्वारा उठाए गए कदमों का मूल्यांकन करना।
- दिल्ली सल्तनत पर मंगोल आक्रमणों के प्रभावों का अध्ययन करना।
Topics covered
Paper topics
- दिल्ली सल्तनत का उदय
- न्याय-चक्र की अवधारणा
- रजिया सुल्तान का शासन
- गुलाम वंश के शासक
- इल्तुतमिश और कुतुबुद्दीन ऐबक
- मुहम्मद तुगलक की नीतियाँ
- जियाउद्दीन बरनी का इतिहास लेखन
- इब्नबतूता का भारत वर्णन
- सरदारों की रक्षा-व्यवस्था
- सल्तनत की प्रशासनिक सीमाएँ ('भीतरी' और 'बाहरी')
- मुक्तीओं पर नियंत्रण
- मंगोल आक्रमणों का प्रभाव
Important topics
- न्याय-चक्र और राजा-प्रजा संबंध
- रजिया सुल्तान: एक महिला शासक की चुनौतियाँ
- गुलामों की भूमिका और योग्यता
- मुहम्मद तुगलक की विवादास्पद नियुक्तियाँ
- इब्नबतूता द्वारा वर्णित सरदारों की सुरक्षा व्यवस्था
- सल्तनत की प्रशासनिक संरचना (भीतरी/बाहरी सीमाएँ, मुक्ती)
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Questions and Solutions
पाठगत प्रश्न 1
पाठगत प्रश्न 2
रजिया सुल्तान (1236-1240 ई.) दिल्ली सल्तनत की शासिका थीं। उन्होंने पुरुषों की तरह शासन चलाया, लेकिन एक महिला शासक होने के कारण उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ा। यह स्पष्ट है कि रजिया सुल्तान के विचार मिन्हाज-ए-सिराज के विचारों से भिन्न थे; रजिया ने स्वयं को एक सक्षम शासक के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया, न कि अधीन रहने का।
स्त्री के लिए शासक बनना उस समय अत्यंत कठिन था क्योंकि समाज पितृ-प्रधान था। समाज में यह मान्यता थी कि शासन का अधिकार केवल पुरुषों का है, और पिता के बाद पुत्र ही उत्तराधिकारी होता है। स्त्रियों को सार्वजनिक जीवन और शासन से दूर रखा जाता था, और उन्हें पुरुषों के अधीन माना जाता था। इस सामाजिक पूर्वाग्रह के कारण, एक स्त्री को शासक के रूप में स्वीकार करना और उसके अधिकार को मानना बहुत मुश्किल था।
पाठगत प्रश्न 3
बुद्धिमानों का यह कथन कि 'योग्य और अनुभवी गुलाम बेटे से भी बढ़कर होता है' इसलिए सही माना जाता था क्योंकि ये गुलाम अपनी निष्ठा, योग्यता और अनुभव के बल पर सुल्तानों का विश्वास जीतते थे। वे अक्सर सुल्तान के सबसे भरोसेमंद सलाहकार और प्रशासक बनते थे। उनकी नियुक्ति किसी वंशानुगत अधिकार पर आधारित नहीं होती थी, बल्कि उनकी व्यक्तिगत योग्यता पर होती थी। इस कारण, सुल्तान उन्हें अपने जैविक पुत्रों से भी अधिक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय मानते थे, क्योंकि वे राज्य के प्रति अधिक समर्पित और सक्षम साबित होते थे।
पाठगत प्रश्न 4
बरनी इन नियुक्तियों को सुल्तान के 'राजनीतिक विवेक के नाश' और 'शासन करने की अक्षमता' के उदाहरण के रूप में देखते थे। उनका मानना था कि ऐसे व्यक्तियों को ऊँचे पद देना राज्य के हित में नहीं था और यह सुल्तान की निर्णय लेने की क्षमता पर प्रश्नचिह्न लगाता था। बरनी जैसे इतिहासकार अक्सर शासकों की नीतियों का मूल्यांकन उनकी योग्यता और राज्य की स्थिरता के आधार पर करते थे।
पाठगत प्रश्न 5
इब्नबतूता बताते हैं कि ये जंगल सरदारों के लिए एक प्राकृतिक किले की प्राचीर का काम करते थे। इन जंगलों के भीतर ही उनके मवेशी और फसलें सुरक्षित रहती थीं। साथ ही, इन स्थानों पर पानी की भी व्यवस्था होती थी, जैसे वर्षा का जल एकत्रित करना। इन दुर्गम और सुरक्षित स्थानों के कारण, सरदारों को बड़ी और शक्तिशाली सेनाओं के बिना हराना अत्यंत कठिन होता था। यह व्यवस्था उनकी सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करती थी।
प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - प्रश्न 1
प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - प्रश्न 2
प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - प्रश्न 3
प्रश्न-अभ्यास: फिर से याद करें - प्रश्न 4
प्रश्न-अभ्यास: आइए समझें - प्रश्न 1
प्रश्न-अभ्यास: आइए समझें - प्रश्न 6
भीतरी सीमा: इसका अभिप्राय उन क्षेत्रों से था जो गैरिसन शहरों (सैनिक छावनी वाले शहर) की पृष्ठभूमि में स्थित थे। ये क्षेत्र सीधे सल्तनत के नियंत्रण में थे और गैरिसन शहरों की आवश्यकताओं, जैसे रसद और अन्य संसाधन, की पूर्ति करते थे।
बाहरी सीमा: इसका अभिप्राय उन सुदूरवर्ती क्षेत्रों से था जो गैरिसन शहरों की पृष्ठभूमि से काफी दूर थे। इन क्षेत्रों पर सल्तनत का नियंत्रण कमज़ोर हो सकता था और यहाँ अक्सर स्थानीय सरदार या अन्य शक्तियाँ प्रभावी होती थीं। सल्तनत का लक्ष्य इन बाहरी सीमाओं पर भी अपना प्रभुत्व स्थापित करना और नियंत्रण बढ़ाना होता था।
प्रश्न-अभ्यास: आइए समझें - प्रश्न 7
- नियुक्ति का आधार: मुक्तीओं की नियुक्ति वंशानुगत नहीं होती थी, बल्कि सुल्तान द्वारा की जाती थी, जिससे उनकी निष्ठा सुल्तान के प्रति बनी रहे।
- इक्ता का अल्पकालिक आवंटन: उन्हें कोई भी इक्ता (क्षेत्र) थोड़े समय के लिए ही दिया जाता था।
- स्थानांतरण: मुक्तीओं का समय-समय पर स्थानांतरण किया जाता था, ताकि वे अपने क्षेत्र में बहुत अधिक शक्तिशाली न हो जाएँ और स्थानीय सत्ता स्थापित न कर सकें।
- लेखा अधिकारी: राज्य द्वारा लेखा अधिकारी नियुक्त किए जाते थे जो मुक्तीओं द्वारा एकत्रित राजस्व का हिसाब रखते थे, ताकि वे अधिक वसूली न कर सकें।
- नियंत्रण और निगरानी: यह सुनिश्चित किया जाता था कि मुक्ती केवल राज्य द्वारा निर्धारित कर ही वसूलें और तय संख्या के अनुसार सैनिक रखें।
सुल्तान के आदेशों का उल्लंघन करने के पीछे मुक्तीओं के कई कारण हो सकते थे, जैसे:
- शक्ति का केंद्रीकरण: यदि उन्हें लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में रहने दिया जाता, तो वे वहाँ अपनी जड़ें जमा लेते और अधिक शक्तिशाली होकर सुल्तान के आदेशों को मानने से इनकार कर सकते थे।
- आर्थिक लाभ: वे किसानों से अधिक कर वसूलकर या अन्य तरीकों से आर्थिक लाभ कमाना चाहते थे, जो सुल्तान के नियमों के विरुद्ध होता।
- महत्वाकांक्षा: कुछ मुक्ती अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सल्तनत के विरुद्ध विद्रोह कर सकते थे या स्वतंत्र शासक बनने का प्रयास कर सकते थे।
प्रश्न-अभ्यास: आइए समझें - प्रश्न 8
- सैन्य दबाव और सुरक्षा चिंताएँ: मंगोलों के लगातार आक्रमणों के कारण सल्तनत को अपनी सीमाओं की सुरक्षा पर बहुत अधिक ध्यान देना पड़ा। इसके लिए एक बड़ी और मजबूत सेना बनाए रखने की आवश्यकता हुई, जिससे राज्य के संसाधनों पर भारी बोझ पड़ा।
- प्रशासनिक और आर्थिक नीतियाँ: मंगोलों के खतरे का सामना करने के लिए, सल्तनत के शासकों को अपनी प्रशासनिक और आर्थिक नीतियों में बदलाव करने पड़े। उदाहरण के लिए, अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद तुगलक जैसे शासकों ने सेना के प्रबंधन और रसद आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुधार किए।
- सैन्य सुधार: मंगोलों की युद्ध-नीतियों का सामना करने के लिए सल्तनत ने अपनी सेना की संरचना और रणनीति में भी सुधार किए।
- साम्राज्य का विस्तार प्रभावित: मंगोल आक्रमणों के कारण सल्तनत के शासकों को अपने साम्राज्य के विस्तार की योजनाओं को रोकना पड़ा या धीमा करना पड़ा, क्योंकि उनका मुख्य ध्यान अपनी मौजूदा सीमाओं की रक्षा पर केंद्रित हो गया था।
- सांस्कृतिक और तकनीकी आदान-प्रदान: यद्यपि आक्रमणों का प्रभाव नकारात्मक था, फिर भी कुछ हद तक मंगोलों के साथ संपर्क से सांस्कृतिक और तकनीकी आदान-प्रदान भी हुआ।
Common mistakes
- न्याय-चक्र के महत्व को केवल राजा के दृष्टिकोण से देखना, प्रजा के हितों को अनदेखा करना।
- रजिया सुल्तान के शासन की कठिनाइयों को केवल व्यक्तिगत विरोध के रूप में देखना, सामाजिक पूर्वाग्रहों को नजरअंदाज करना।
- गुलामों को बेटे से बढ़कर मानने के पीछे की योग्यता और निष्ठा के महत्व को न समझना।
- मुहम्मद तुगलक की आलोचना को केवल व्यक्तिगत अक्षमता के रूप में देखना, तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों को न समझना।
- सल्तनत की सीमाओं को केवल भौगोलिक रूप से समझना, प्रशासनिक और राजनीतिक विस्तार को नजरअंदाज करना।
Revision tips
- न्याय-चक्र के सिद्धांत को राजा और प्रजा के बीच एक दो-तरफा संबंध के रूप में समझें।
- रजिया सुल्तान के शासनकाल से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देते समय सामाजिक और राजनीतिक बाधाओं पर ध्यान केंद्रित करें।
- गुलामों की नियुक्ति और उनकी योग्यता के बीच संबंध को स्पष्ट करें।
- इब्नबतूता के विवरणों को ध्यान से पढ़ें और सरदारों की रक्षा-व्यवस्था के महत्व को समझें।
- सल्तनत के प्रशासन में मुक्तीओं की भूमिका और उन पर नियंत्रण के उपायों को सूचीबद्ध करें।
Practice MCQs
Q1. फख़-ए मुदब्बिर के अनुसार, राजा का काम सैनिकों के बिना क्यों नहीं चल सकता?
Explanation: फख़-ए मुदब्बिर के अनुसार, राजा का काम सैनिकों के बिना नहीं चल सकता क्योंकि सैनिकों को वेतन देने के लिए किसानों से एकत्रित राजस्व की आवश्यकता होती है, जो राजा के शासन का आधार है।
Q2. मिन्हाज-ए-सिराज के अनुसार, ईश्वर द्वारा बनाई गई समाज व्यवस्था में स्त्रियों की क्या स्थिति होनी चाहिए?
Explanation: मिन्हाज-ए-सिराज का मानना था कि ईश्वर द्वारा बनाई गई आदर्श समाज व्यवस्था में स्त्रियों को पुरुषों के अधीन होना चाहिए।
Q3. रजिया सुल्तान को महिला शासक होने के कारण किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
Explanation: रजिया सुल्तान को एक महिला शासक होने के कारण काफी विरोध का सामना करना पड़ा था, जो तत्कालीन पितृ-सत्तात्मक समाज की सोच को दर्शाता है।
Q4. सल्तनत काल के शासक गुलामों को बेटे से बढ़कर क्यों मानते थे?
Explanation: सल्तनत काल के शासक गुलामों को बेटे से बढ़कर मानते थे क्योंकि ये गुलाम अपनी योग्यता और बुद्धि से राजा या सुल्तान का दिल जीत पाते थे और अक्सर योग्य व अनुभवी होते थे।
Q5. इतिहासकार जियाउद्दीन बरनी ने सुल्तान मुहम्मद तुगलक की किन नियुक्तियों की आलोचना की थी?
Explanation: जियाउद्दीन बरनी ने सुल्तान मुहम्मद तुगलक द्वारा अजीज खुम्मार (कलाल), फिरुज हज्जाम (नाई) और मनका तब्बाख (बावर्जी) जैसे निम्न वर्ग के लोगों को ऊँचे प्रशासनिक पदों पर बैठाने की आलोचना की थी।
Q6. इब्नबतूता के अनुसार, सरदार कहाँ किले बनाकर रहते थे?
Explanation: इब्नबतूता ने वर्णन किया था कि सरदार चट्टानी, उबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों में किले बनाकर रहते थे और कभी-कभी बाँस के झुरमुटों में, जो दुर्गम स्थान होते थे।
Q7. सल्तनत की 'भीतरी' सीमा से क्या अभिप्राय है?
Explanation: सल्तनत की 'भीतरी' सीमा से अभिप्राय गैरिसन शहरों की पृष्ठभूमि में स्थित उन क्षेत्रों से था जो सीधे गैरिसन शहरों की आवश्यकताओं की पूर्ति करते थे।
Frequently asked questions
कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 'दिल्ली के सुलतान' में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में दिल्ली सल्तनत के प्रारंभिक शासकों, उनके प्रशासन, न्याय प्रणाली, सामाजिक व्यवस्था, रजिया सुल्तान के शासन की चुनौतियों, मुहम्मद तुगलक की नीतियों, इब्नबतूता के विवरणों और मंगोल आक्रमणों के प्रभावों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।
न्याय-चक्र की अवधारणा क्या है और यह राजा और प्रजा के बीच संबंध को कैसे समझाती है?
न्याय-चक्र के अनुसार, राजा का काम सैनिकों के बिना नहीं चल सकता, सैनिक वेतन के बिना नहीं जी सकते, और वेतन किसानों से एकत्रित राजस्व से आता है। किसान तभी राजस्व चुका सकते हैं जब वे खुशहाल हों, जो न्यायपूर्ण और ईमानदार प्रशासन से ही संभव है। यह राजा और प्रजा के बीच एक-दूसरे पर निर्भरता को दर्शाता है।
रजिया सुल्तान को महिला शासक होने के कारण किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
रजिया सुल्तान को महिला शासक होने के कारण काफी विरोध का सामना करना पड़ा था। तत्कालीन पितृ-सत्तात्मक समाज में स्त्री का शासन करना एक असामान्य बात थी, जिससे उन्हें अपनी योग्यता साबित करने में अधिक संघर्ष करना पड़ा।
इतिहासकार जियाउद्दीन बरनी ने सुल्तान मुहम्मद तुगलक की आलोचना क्यों की थी?
बरनी ने सुल्तान मुहम्मद तुगलक की आलोचना इसलिए की थी क्योंकि उन्होंने अजीज खुम्मार (कलाल), फिरुज हज्जाम (नाई) और मनका तब्बाख (बावर्जी) जैसे निम्न वर्ग के लोगों को ऊँचे प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया था, जिन्हें बरनी राजनीतिक विवेक के नाश और शासन करने की अक्षमता का उदाहरण मानते थे।
सल्तनत की 'भीतरी' और 'बाहरी' सीमाओं से क्या तात्पर्य है?
'भीतरी' सीमा से तात्पर्य गैरिसन शहरों की पृष्ठभूमि में स्थित उन क्षेत्रों से था जो सीधे शहरों की आवश्यकताओं की पूर्ति करते थे। 'बाहरी' सीमा उन क्षेत्रों को कहा जाता था जो गैरिसन शहरों की पृष्ठभूमि से सुदूरवर्ती थे।
ये NCERT समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?
ये समाधान छात्रों को प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को विस्तार से समझने, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करते हैं। इनमें विस्तृत स्पष्टीकरण और महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया गया है।
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