कक्षा 7 इतिहास: मुग़ल साम्राज्य NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 7 के लिए 'हमारे अतीत' पुस्तक के अध्याय 4, 'मुग़ल साम्राज्य' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें मुग़ल शासकों, उनकी प्रशासनिक संरचना, मनसबदारी प्रणाली, राजपूतों के साथ उनके संबंध और सांस्कृतिक योगदान जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों में अकबर और औरंगजेब के शासनकाल की तुलना, अकबरनामा और आइने अकबरी का विवरण, तथा मुगल प्रशासन में जमींदारों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। यह सामग्री छात्रों को मुग़ल काल की जटिलताओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectहमारे अतीत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter4. मुग़्ल साम्राज्य

Chapter summary

कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 4 'मुग़ल साम्राज्य' के ये NCERT समाधान मुग़ल शासन की नींव, विस्तार और प्रशासन की पड़ताल करते हैं। इसमें मनसबदारों की भूमिका, राजपूतों के साथ वैवाहिक संबंध, अकबरनामा और आइने अकबरी जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ, और जमींदारों की प्रशासनिक भूमिका जैसे विषयों को स्पष्ट किया गया है। समाधान छात्रों को मुग़ल साम्राज्य की राजनीतिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों को समझने में मदद करते हैं।

Learning outcomes

  • मुग़ल शासकों और उनके वंशजों के बारे में जानें।
  • मनसबदारी प्रणाली और जागीरों के बीच संबंध को समझें।
  • अकबरनामा और आइने अकबरी के महत्व को पहचानें।
  • मुग़ल प्रशासन में जमींदारों की भूमिका का विश्लेषण करें।
  • मुग़लों और राजपूतों के बीच वैवाहिक संबंधों के प्रभाव को समझें।

Topics covered

Paper topics

  • मुग़ल साम्राज्य का परिचय
  • मनसबदारी प्रणाली
  • जागीरदारी प्रथा
  • अकबरनामा और आइने अकबरी
  • मुग़ल और राजपूत संबंध
  • अकबर की सुलह-ए-कुल नीति
  • मुग़ल प्रशासन
  • जमींदारों की भूमिका
  • तैमूर के वंशज होने का दावा
  • चंगेज खान के वंशज होने से बचना

Important topics

  • मनसबदारी प्रणाली और जागीर
  • अकबरनामा और आइने अकबरी का महत्व
  • सुलह-ए-कुल की नीति
  • मुग़ल प्रशासन में जमींदार की भूमिका
  • मुग़लों और राजपूतों के बीच संबंध

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Questions and Solutions

पाठगत प्रश्न 1

1. राजपूतों के साथ मुगलों के शादियों के कुछ उदाहरण दें। (एनसी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-50)
Solution: मुगलों ने अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए राजपूतों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित किए। इसके कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं:
  1. जहाँगीर की माँ, जो अकबर की पत्नी थी, कच्छवाहा राजपूत वंश से थी और अंबर (वर्तमान जयपुर) के शासक की पुत्री थी।
  2. शाहजहाँ की माँ, जो जहाँगीर की पत्नी थी, राठौर राजपूत वंश से थी और मारवाड़ (जोधपुर) के शासक की पुत्री थी।
ये विवाह संबंध मुगलों और राजपूत शासकों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को दर्शाते थे।

पाठगत प्रश्न 2

2. अकबर और औरंगजेब के शासनकाल के मनसबदारों की संख्या की तुलना करें। (एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-31)
Solution: मनसबदारों की संख्या और उनके दर्जे में मुग़ल साम्राज्य के विस्तार के साथ वृद्धि हुई। इसकी तुलना इस प्रकार है:
  • अकबर के शासनकाल में: लगभग 29 मनसबदार ऐसे थे जिनका दर्जा 5000 जात का था। जात का अर्थ मनसबदार के पद और वेतन से था।
  • औरंगजेब के शासनकाल तक: 5000 जात वाले मनसबदारों की संख्या बढ़कर 79 हो गई। यह वृद्धि साम्राज्य के बढ़ते आकार और प्रशासनिक जटिलताओं को दर्शाती है।
इससे पता चलता है कि औरंगजेब के समय में साम्राज्य का विस्तार अधिक था और अधिक संख्या में उच्च पदस्थ अधिकारी नियुक्त किए गए थे।

पाठगत प्रश्न 3

3. अकबरनामा और आइने अकबरी के बारे में व्याख्या करें। (एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-53)
Solution: अकबरनामा और आइने अकबरी, मुग़ल सम्राट अकबर के शासनकाल के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ हैं, जिन्हें अकबर के करीबी मित्र और दरबारी अबुल फजल ने लिखा था।
  • अकबरनामा: यह तीन जिल्दों (खंडों) में लिखा गया इतिहास है। पहली जिल्द में अकबर के पूर्वजों का वर्णन है। दूसरी जिल्द में अकबर के शासनकाल की प्रमुख घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है।
  • आइने अकबरी: यह अकबरनामा की तीसरी जिल्द है। इसमें अकबर के साम्राज्य के प्रशासन, शाही घराने, सेना, राजस्व व्यवस्था और भौगोलिक विवरण का गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त, इसमें समकालीन भारत के लोगों की परंपराओं, संस्कृतियों और सामाजिक जीवन का भी विस्तृत वर्णन है। आइने अकबरी की एक विशेष बात यह है कि इसमें विभिन्न फसलों, पैदावार, कीमतों, मजदूरी और राजस्व का सांख्यिकीय (आंकड़ों पर आधारित) विवरण भी शामिल है, जो इसे एक अनूठा ऐतिहासिक स्रोत बनाता है।
ये ग्रंथ न केवल अकबर के शासनकाल की जानकारी देते हैं, बल्कि उस समय की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति को समझने में भी मदद करते हैं।

फिर से याद करें 1

1. सही जोड़े बनाएँ :
Solution: यहाँ दिए गए शब्दों के सही जोड़े इस प्रकार हैं:
  • मनसब - पद
  • मंगोल - उज़्बेग
  • सिसौदिया राजपूत - मेवाड़
  • राठौर राजपूत - मारवाड़
  • नूरजहाँ - जहाँगीर
  • सूबेदार - गर्वनर
यह मिलान मुग़ल साम्राज्य से संबंधित विभिन्न उपाधियों, शासकों, राजवंशों और क्षेत्रों को जोड़ता है।

फिर से याद करें 2

2. रिक्त स्थानों को भरें :
Solution:
  • (क) काबुल ........... अकबर के सौतेले भाई, मिर्जा हाकिम के राज्य की राजधानी थी।
  • (ख) दक्कन की पाँचों सल्तनत बीजापुर और गोलकुंडा, खानदेश, अहमदनगर, ........... और ........... थीं।
  • (ग) यदि जात एक मनसबदार के पद और वेतन को द्योतक था, तो सवार .......... उसके .......... को दिखाता था।
  • (घ) अकबर के दोस्त और सलाहकार, अबुल फ़ज़ल ने उसकी ...... के विचार को गढ़ने में मदद की जिसके द्वारा वह विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और जातियों से बने समाज पर राज्य कर सका।
सही उत्तर इस प्रकार हैं:
  • (क) काबुल
  • (ख) बीजापुर और गोलकुंडा
  • (ग) सवार उसके सैन्य उत्तरदायित्व को दिखाता था।
  • (घ) सुलह-ए-कुल (सर्वत्र शांति)
यह प्रश्न मुग़ल साम्राज्य के भूगोल, प्रशासन और अकबर की नीतियों से संबंधित ज्ञान का परीक्षण करता है।

प्रश्न-अभ्यास 3

3. मुगल राज्य के अधीन आने वाले केंद्रीय प्रांत कौन-से थे?
Solution: मुगल साम्राज्य के अधीन आने वाले प्रमुख केंद्रीय प्रांत थे:
  1. दिल्ली
  2. आगरा
ये दोनों शहर मुग़ल साम्राज्य के महत्वपूर्ण प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्र थे।

प्रश्न-अभ्यास 4

4. मनसबदार और जागीर में क्या संबंध था?
Solution: मनसबदार और जागीर के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध था, जो मुग़ल प्रशासन की कार्यप्रणाली का आधार था:
  • वेतन का भुगतान: मनसबदार अपना वेतन राजस्व के रूप में प्राप्त करते थे। यह राजस्व एक विशेष प्रकार की भूमि से एकत्रित किया जाता था जिसे 'जागीर' कहा जाता था। यह व्यवस्था कुछ हद तक इक्ता प्रणाली के समान थी।
  • अंतर: हालाँकि, मनसबदार इक्तादारों से भिन्न थे क्योंकि वे अपनी जागीरों पर स्थायी रूप से नहीं रहते थे और न ही उन पर सीधे प्रशासन करते थे।
  • अधिकार: उनका मुख्य अधिकार अपनी जागीर से राजस्व एकत्रित करना था। यह राजस्व उनके नौकर उनके लिए एकत्र करते थे, जबकि मनसबदार स्वयं साम्राज्य के किसी अन्य भाग में सैन्य या प्रशासनिक सेवा में कार्यरत रहते थे।
इस प्रकार, जागीर मनसबदारों के लिए आय का स्रोत थी, जिससे वे अपना वेतन प्राप्त करते थे और अपनी सेवाओं का निर्वहन करते थे।

आइए समझे 5

5. मुगल प्रशासन में जमींदार की क्या भूमिका थी?
Solution: मुगल प्रशासन में जमींदार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे, विशेषकर राजस्व संग्रह के संबंध में:
  • राजस्व संग्रह: मुगलों की आय का मुख्य स्रोत किसानों की उपज से प्राप्त होने वाला राजस्व था। अधिकांश क्षेत्रों में, किसान सीधे अपने राजस्व का भुगतान जमींदारों को करते थे।
  • सरकारी खजाने में जमा: जमींदार किसानों से एकत्रित किए गए राजस्व को सरकारी खजाने में जमा कराने के लिए जिम्मेदार होते थे।
इस प्रकार, जमींदार मुगल राज्य और किसानों के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करते थे, जो राजस्व संग्रह प्रक्रिया को सुगम बनाते थे।

आइए समझे 6

6. शासन-प्रशासन संबंधी अकबर के विचारों के निर्माण में धार्मिक विद्वानों से होने वाली चर्चाएँ कितनी महत्त्वपूर्ण थीं?
Solution: शासन-प्रशासन संबंधी अकबर के विचारों के निर्माण में धार्मिक विद्वानों के साथ होने वाली चर्चाएँ अत्यंत महत्त्वपूर्ण थीं। इन चर्चाओं का प्रभाव इस प्रकार था:
  • धार्मिक सहिष्णुता की समझ: इन चर्चाओं और परिचर्चाओं के माध्यम से अकबर को यह समझ आया कि धार्मिक कट्टरता समाज में विभाजन और असामंजस्य पैदा करती है। विभिन्न धर्मों के विद्वानों से बात करके, उन्होंने विभिन्न धार्मिक दृष्टिकोणों को समझा।
  • सुलह-ए-कुल की ओर झुकाव: इन अनुभवों ने अकबर को 'सुलह-ए-कुल' (सर्वत्र शांति) की नीति अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस नीति के तहत, सभी धर्मों के प्रति सम्मान और सहिष्णुता को बढ़ावा दिया गया।
  • प्रशासनिक स्पष्टता: इन वार्ताओं ने अकबर को एक ऐसी प्रशासनिक सोच विकसित करने में मदद की जो केवल सच्चाई, न्याय और शांति पर आधारित थी। उन्होंने सीखा कि एक विविध समाज पर शासन करने के लिए समावेशी दृष्टिकोण आवश्यक है।
संक्षेप में, धार्मिक विद्वानों के साथ हुई चर्चाओं ने अकबर को एक सहिष्णु, न्यायप्रिय और शांतिपूर्ण शासक बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आइए समझे 7

7. मुगलों ने खुद को मंगोल की अपेक्षा तैमूर के वंशज होने पर क्यों बल दिया?
Solution: मुगलों ने खुद को मंगोलों के बजाय तैमूर का वंशज होने पर अधिक बल दिया, जिसके पीछे मुख्य कारण थे:
  • नकारात्मक छवि: मंगोल शासक चंगेज खान की स्मृतियाँ व्यापक नरसंहार और क्रूरता से जुड़ी हुई थीं। मुगल शासक अपनी प्रजा के बीच इस तरह की नकारात्मक छवि से बचना चाहते थे।
  • सकारात्मक छवि: दूसरी ओर, तैमूर एक महान शासक के रूप में देखे जाते थे जिन्होंने 1398 में दिल्ली पर विजय प्राप्त की थी। तैमूर के वंशज होने पर गर्व करने से मुगलों को अपनी वैधता और शक्ति का प्रदर्शन करने में मदद मिलती थी।
  • वंशावली का दावा: मुगल शासक अपनी माता की ओर से चंगेज खान के वंशज थे, लेकिन पिता की ओर से वे ईरान, इराक और तुर्की के शासक तैमूर के वंशज थे। उन्होंने तैमूर की वंशावली को अपनी प्रतिष्ठा के लिए अधिक उपयुक्त माना।
इस प्रकार, एक बेहतर सार्वजनिक छवि बनाने और अपनी शक्ति को स्थापित करने के लिए, मुगलों ने तैमूर के वंशज होने पर अधिक जोर दिया।

Common mistakes

  • मनसबदार और जागीरदार के बीच अंतर को समझने में भ्रम।
  • अकबरनामा और आइने अकबरी के उद्देश्य को गलत समझना।
  • चंगेज खान और तैमूर के वंशज होने के मुग़लों के दावों के पीछे के कारणों को न समझना।

Revision tips

  • मनसबदारी प्रणाली को समझने के लिए 'जात' और 'सवार' के अर्थ पर ध्यान दें।
  • अकबर के सुलह-ए-कुल की नीति के महत्व को समझें।
  • अकबरनामा और आइने अकबरी से संबंधित मुख्य बिंदुओं को नोट करें।
  • मुग़ल शासकों और उनके पूर्वजों के बीच संबंधों को याद करें।

Practice MCQs

Q1. अकबर के शासनकाल में 5000 जात वाले मनसबदारों की संख्या कितनी थी?

Q2. आइने अकबरी में किस प्रकार का विवरण मिलता है?

Q3. मनसबदार अपना वेतन किस रूप में पाते थे?

Q4. मुगलों ने खुद को तैमूर का वंशज होने पर क्यों बल दिया?

Q5. अकबर की सुलह-ए-कुल की नीति का क्या अर्थ था?

Frequently asked questions

कक्षा 7 के लिए 'मुग़ल साम्राज्य' अध्याय के मुख्य बिंदु क्या हैं?

इस अध्याय के मुख्य बिंदुओं में मुग़ल शासकों की वंशावली, मनसबदारी प्रणाली, जागीरदारी प्रथा, अकबरनामा और आइने अकबरी जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ, मुग़लों और राजपूतों के बीच संबंध, और अकबर की सुलह-ए-कुल की नीति शामिल हैं।

मनसबदार और जागीरदार में क्या अंतर है?

मनसबदार एक पद था जो वेतन और सम्मान निर्धारित करता था, जबकि जागीर वह भूमि थी जिससे मनसबदार अपना राजस्व एकत्रित करते थे। मनसबदार अपनी जागीरों पर शासन नहीं करते थे, बल्कि केवल राजस्व एकत्र करते थे।

अकबरनामा और आइने अकबरी किसने लिखा और क्यों?

अकबरनामा को अबुल फजल ने लिखा था। यह अकबर के शासनकाल का इतिहास है। आइने अकबरी, अकबरनामा का तीसरा भाग है, जिसमें प्रशासन, सेना, राजस्व और भूगोल का विस्तृत विवरण है।

मुगलों ने खुद को मंगोलों के बजाय तैमूर का वंशज क्यों कहा?

मुगलों ने तैमूर का वंशज होने पर जोर दिया क्योंकि चंगेज खान (मंगोल) से जुड़ी स्मृतियाँ नरसंहार से संबंधित थीं, जबकि तैमूर को एक महान पूर्वज के रूप में देखा जाता था जिसने दिल्ली पर विजय प्राप्त की थी।

यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार होने में मदद मिलती है।

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