कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 1: सुभाषितानी NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 7 के संस्कृत अध्याय 1, 'सुभाषितानी' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय नीति श्लोकों के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों जैसे सत्य, संगति, क्षमा और ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालता है। समाधानों में श्लोकों के अंशों का सही मिलान, एक-शब्द में उत्तर, प्रश्न निर्माण, विस्तृत उत्तर और लिंग-आधारित शब्द वर्गीकरण जैसे अभ्यास शामिल हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से समझाया गया है, जिससे छात्रों को श्लोकों के अर्थ को गहराई से समझने और संस्कृत व्याकरण के नियमों को लागू करने में मदद मिलती है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन हैं, जो उन्हें पाठ की अवधारणाओं को प्रभावी ढंग से दोहराने में सक्षम बनाते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
SubjectSanskrit
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 1

Chapter summary

कक्षा 7 के संस्कृत अध्याय 1 'सुभाषितानी' के ये NCERT समाधान छात्रों को नीति श्लोकों के माध्यम से महत्वपूर्ण जीवन मूल्यों को समझने में मदद करते हैं। इसमें श्लोकों के अंशों का मिलान, एक-शब्द उत्तर, प्रश्न निर्माण, विस्तृत उत्तर और लिंग के अनुसार शब्दों का वर्गीकरण जैसे अभ्यास शामिल हैं। समाधान श्लोकों के अर्थ और व्याकरणिक संरचना को स्पष्ट करते हैं, जिससे छात्रों को संस्कृत भाषा की समझ बेहतर होती है।

Learning outcomes

  • श्लोकों के अंशों का सही मिलान करना सीखना।
  • एक-शब्द में उत्तर देने की क्षमता विकसित करना।
  • रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण का अभ्यास करना।
  • श्लोकों के विस्तृत उत्तर लिखने का कौशल प्राप्त करना।
  • संस्कृत शब्दों को उनके लिंग के अनुसार वर्गीकृत करना सीखना।

Topics covered

Paper topics

  • सुभाषितानी का अर्थ
  • श्लोक अंशों का मिलान
  • एक-शब्द उत्तर
  • प्रश्न निर्माण
  • श्लोक आधारित प्रश्नोत्तर
  • सत्य का महत्व
  • संगति का महत्व
  • क्षमा का महत्व
  • रत्नों का वर्णन
  • संस्कृत व्याकरण: लिंग भेद
  • पुल्लिंग शब्द
  • स्त्रीलिंग शब्द
  • नपुंसक लिंग शब्द

Important topics

  • श्लोक अंशों का मिलान
  • एक-शब्द उत्तर
  • प्रश्न निर्माण
  • सत्य, संगति और क्षमा का महत्व
  • लिंग आधारित शब्द वर्गीकरण

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Questions and Solutions

प्रश्न 2:

यथायोग्यं श्लोकांशान् मेलयत-

क ख धनधान्यप्रयोगेषु नासद्भिः किञ्चिदातरेत्।

विस्मयो न हि कर्तव्यः त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।

सत्येन धार्यते पृथ्वी बहुरत्ना वसुन्धरा।

सद्भिर्विवादं मैत्रीं च विद्याया: संग्रहेषु च।

आहारे व्यवहारे च सत्येन तपते रवि:।

Solution:

श्लोक के अंशों का सही मिलान इस प्रकार है: क ख धनधान्यप्रयोगेषु विद्यायाः संग्रहेषु च।

विस्मयो न हि कर्तव्यः बहुरत्ना वसुन्धरा।

सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रवि:।

सद्भिर्विवादं मैत्रीं च नासद्भिः किञ्चिदातरेत्।

आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।

प्रश्न 3:

एकपदेन उत्तरत-
  • (क) पृथिव्यां कति रत्नानि?
  • (ख) मूढै: कुत्र रत्नसंज्ञा विधीयते?
  • (ग) पृथिवी केन धार्यते?
  • (घ) कै: सङ्गतिं कुर्वीत?
  • (ङ) लोके वशीकृति: का?
Solution:
  • (क) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि सन्ति। (पृथ्वी पर तीन रत्न हैं।)
  • (ख) मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते। (मूर्ख लोग पत्थर के टुकड़ों को रत्न मानते हैं।)
  • (ग) पृथिवी सत्येन धार्यते। (पृथ्वी सत्य के द्वारा धारण की जाती है।)
  • (घ) कै: सङ्गतिं कुर्वीत? सद्भिः एव सङ्गतिं कुर्वीत। (अच्छे लोगों के साथ ही संगति करनी चाहिए।)
  • (ङ) लोके क्षमा वशीकृति: अस्ति। (संसार में क्षमा ही वशीकरण है।)

प्रश्न 4:

रेखाङ्कितपदानी अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
  • (क) <u>सत्येन</u> वाति वायु:।
  • (ख) <u>सद्धिः</u> एव सहासीत।
  • (ग) <u>वसुन्धरा</u> बहुरत्ना भवति।
  • (घ) <u>विद्याया:</u> संग्रहेषु त्यक्तलज्ज: सुखी भवेत्।
  • (ङ) सद्भिः <u>मैत्रीं</u> कुर्वीत।
Solution:

रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण इस प्रकार है:

  • (क) केन वाति वायु:? (वायु किसके द्वारा बहती है?)
  • (ख) कै: एव सहासीत? (किनके साथ बैठना चाहिए?)
  • (ग) का बहुरत्ना भवति? (कौन बहुरत्ना होती है?)
  • (घ) कस्या: संग्रहेषु त्यक्तलज्ज: सुखी भवेत्? (किसके संग्रह में संकोच छोड़ने वाला सुखी होता है?)
  • (ङ) सद्भिः कां कुर्वीत? (अच्छे लोगों के साथ क्या करना चाहिए?)

प्रश्न 5:

प्रश्नानामुत्तराणि लिखत-
  • (क) कुत्र विस्मय: न कर्त्तव्य:?
  • (ख) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि कानि?
  • (ग) त्यक्तलज्जः कुत्र सुखी भवेत्?
Solution:
  • (क) दाने, तपसि, शौर्य च, विज्ञाने, विनये, नये च विस्मय: न कर्तव्य:। (दान, तप, शौर्य, विज्ञान, विनय और नीति में आश्चर्य नहीं करना चाहिए।)
  • (ख) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलम्, अन्नम्, सुभाषितम् सन्ति। (पृथ्वी पर तीन रत्न हैं: जल, अन्न और सुभाषित।)
  • (ग) त्यक्तलज्जः आहारे व्यवहारे च सुखी भवेत्। (संकोच छोड़ने वाला व्यक्ति खाने और व्यवहार में सुखी होता है।)

प्रश्न 6:

मञ्जूषातः पदानि चित्वा लिङ्गानुसारं लिखत-

रत्नानि, वसुन्धरा, सत्येन, सुखी, अन्नम्, वहिः, रविः, पृथ्वी, सङ्गतिम्

पुॅल्लिङ्गम् | स्त्रीलिङ्गम् | नपुंसकलिङ्गम्

Solution:

दिए गए शब्दों को उनके लिंग के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

पुल्लिंगम् (Masculine) स्त्रीलिंगम् (Feminine) नपुंसकलिङ्गम् (Neuter)
रविः वसुन्धरा रत्नानि
पृथ्वी अन्नम्
सङ्गतिम् सत्येन*
सुखी*

*टिप्पणी: 'सत्येन' और 'सुखी' यहाँ क्रमशः करण कारक और प्रथमा विभक्ति एकवचन के रूप में प्रयुक्त हैं, जो नपुंसक लिंग के समान व्यवहार करते हैं या मूल रूप से नपुंसक लिंग से संबंधित हो सकते हैं, लेकिन संदर्भ के अनुसार उनका प्रयोग हुआ है। 'वहिः' (अग्नि) पुल्लिंग है, जो मञ्जूषा में नहीं दिया गया है, और 'सुखी' विशेषण है जो यहाँ नपुंसक लिंग के साथ प्रयुक्त हुआ है।

Common mistakes

  • श्लोक के अंशों को गलत मिलान करना।
  • प्रश्न निर्माण में गलत प्रश्नवाचक शब्दों का प्रयोग करना।
  • शब्दों के लिंग (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसक) को पहचानने में त्रुटि करना।
  • श्लोक के भावार्थ को समझने में कठिनाई।

Revision tips

  • प्रत्येक श्लोक का अर्थ ध्यानपूर्वक पढ़ें और समझें।
  • मिलान वाले प्रश्नों का अभ्यास करते समय श्लोकों के क्रम पर ध्यान दें।
  • प्रश्न निर्माण के लिए प्रश्नवाचक शब्दों (कः, का, किम्, कुत्र, केन आदि) के प्रयोग को समझें।
  • शब्दों के लिंग निर्धारण के लिए अभ्यास को दोहराएं।
  • श्लोक में आए कठिन शब्दों के अर्थ को नोट करें।

Practice MCQs

Q1. पृथिव्यां कति रत्नानि सन्ति?

Q2. मूढैः (मूर्खों द्वारा) रत्नसंज्ञा कुत्र विधीयते?

Q3. पृथिवी केन धार्यते?

Q4. सद्भिः (अच्छे लोगों के साथ) किं कुर्वीत?

Q5. लोके वशीकृति: का अस्ति?

Frequently asked questions

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 1 का शीर्षक क्या है?

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 1 का शीर्षक 'सुभाषितानी' है, जिसका अर्थ है 'अच्छे वचन' या 'सुंदर कथन'।

सुभाषितानी अध्याय में किन मुख्य मूल्यों पर जोर दिया गया है?

यह अध्याय सत्य, संगति, क्षमा, ज्ञान के महत्व और मूर्खतापूर्ण व्यवहार से बचने जैसे महत्वपूर्ण जीवन मूल्यों पर जोर देता है।

क्या इन समाधानों में व्याकरणिक अभ्यास शामिल हैं?

हाँ, इन समाधानों में शब्दों को उनके लिंग (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसक लिंग) के अनुसार वर्गीकृत करने जैसे व्याकरणिक अभ्यास शामिल हैं।

प्रश्न निर्माण अभ्यास का क्या उद्देश्य है?

प्रश्न निर्माण अभ्यास छात्रों को रेखांकित पदों के आधार पर उचित प्रश्नवाचक शब्दों का प्रयोग करके प्रश्न बनाने का कौशल सिखाता है।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?

यह समाधान छात्रों को श्लोकों के अर्थ को समझने, प्रश्नों के उत्तर देने और संस्कृत व्याकरण का अभ्यास करने में मदद करता है, जिससे वे परीक्षा की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकें।

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