कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 11: समवाये हि दुर्जयः NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 7 के संस्कृत अध्याय 11, 'समवाये हि दुर्जयः' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय एकता की शक्ति पर प्रकाश डालता है, यह दर्शाता है कि कैसे छोटे और कमजोर जीव भी मिलकर एक बड़े और शक्तिशाली शत्रु का सामना कर सकते हैं। समाधानों में अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जो छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और संस्कृत व्याकरण के विभिन्न पहलुओं, जैसे कि एकवचन, बहुवचन, क्रियाओं और संज्ञाओं के सही रूपों को समझने में मदद करते हैं। ये समाधान छात्रों को पाठ के मुख्य संदेश को समझने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। अध्याय की कहानी एक छोटी चिड़िया के इर्द-गिर्द घूमती है जिसकी संतान एक हाथी द्वारा नष्ट कर दी जाती है। वह बदला लेने के लिए विभिन्न छोटे जानवरों से मदद लेती है, जिनमें एक कौआ, एक मक्खी और एक मेंढक शामिल हैं। वे मिलकर हाथी को मारने की एक योजना बनाते हैं और उसे सफलतापूर्वक क्रियान्वित करते हैं। यह कहानी सिखाती है कि एकता और सहयोग से बड़ी से बड़ी बाधाओं पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है। समाधानों में प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में, एक-एक वाक्य में और व्याकरणिक सुधारों के साथ दिए गए हैं। रिक्त स्थानों को भरने और क्रियाओं के सही रूपों का चयन करने जैसे अभ्यास छात्रों की व्याकरणिक समझ को मजबूत करते हैं। यह विस्तृत मार्गदर्शिका छात्रों को न केवल पाठ को समझने में मदद करती है, बल्कि संस्कृत भाषा में उनकी दक्षता को भी बढ़ाती है, जिससे वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 7 |
| Subject | Sanskrit |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 11 |
Chapter summary
कक्षा 7 संस्कृत के अध्याय 11, 'समवाये हि दुर्जयः' के NCERT समाधान एकता की शक्ति पर केंद्रित हैं। यह अध्याय दर्शाता है कि कैसे छोटे जीव मिलकर एक बड़े शत्रु का सामना कर सकते हैं। समाधानों में पाठ-आधारित प्रश्नों के उत्तर, व्याकरणिक अभ्यास जैसे कि एकवचन/बहुवचन सुधार, क्रियाओं का सही प्रयोग, और रिक्त स्थान भरना शामिल हैं। ये अभ्यास छात्रों को कहानी के संदेश को समझने और संस्कृत व्याकरण की अपनी समझ को मजबूत करने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- एकता और सहयोग के महत्व को समझना।
- संस्कृत में एकवचन और बहुवचन रूपों का सही प्रयोग सीखना।
- क्रियाओं के विभिन्न रूपों को पहचानना और उनका सही प्रयोग करना।
- पाठ के पात्रों और उनकी भूमिकाओं का विश्लेषण करना।
- संस्कृत में वाक्य निर्माण और समझ को बेहतर बनाना।
Topics covered
Paper topics
- एकता की शक्ति
- पशु-पक्षी पात्र
- बदला और न्याय
- संस्कृत व्याकरण: एकवचन, बहुवचन
- संस्कृत व्याकरण: क्रिया रूप
- संस्कृत व्याकरण: विभक्ति प्रयोग
- कहानी का सारांश
- नैतिक शिक्षा
Important topics
- एकता में बल का सिद्धांत
- संस्कृत क्रिया रूपों का सही प्रयोग
- संज्ञाओं और सर्वनामों की विभक्तियों का ज्ञान
- कहानी के पात्रों और उनकी भूमिकाओं को समझना
- नैतिक मूल्यों की पहचान
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Questions and Solutions
प्रश्न 1: एक पद में उत्तर दें।
प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत-
- (क) वृक्षे का प्रतिवसित स्म?
- (ख) वृक्षस्य अधः कः आगतः?
- (ग) गज: केन शाखाम् अत्रोटयत्?
- (घ) काष्ठकूट: चटकां कस्या: समीपम् अनयत्?
- (ङ) मिक्षकाया: मित्रं कः आसीत्?
यहाँ दिए गए प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में प्रस्तुत हैं:
- (क) वृक्ष पर एक चिड़िया (चटका) रहती थी। उत्तर: चटका।
- (ख) वृक्ष के नीचे एक हाथी (गज) आया। उत्तर: गज:।
- (ग) हाथी ने अपनी सूंड (शुण्डेन) से शाखाओं को तोड़ा। उत्तर: शुण्डेन।
- (घ) कठफोड़वा (काष्ठकूट) चिड़िया को वीणारवा नाम की मक्खी के पास ले गया। उत्तर: वीणारवा नाम्न्याः मक्षिकायाः।
- (ङ) चिड़िया का मित्र मेंढक मेघनाद था। उत्तर: मण्डूक: मेघनाद:।
प्रश्न 3: रेखांकित पदों को संशोधित करके लिखें।
रेखाङ्कितानि पदानि संशोध्य लिखत-
- (क) छात्रा: क्रीडाक्षेत्रे <u>कन्दुकात</u> क्रीडन्ति।
- (ख) <u>ते</u> बालिका: मधुरं गायन्ति।
- (ग) अहं पुस्तकालयेन पुस्तकानि आनयामि।
- (घ) तवं किं नाम?
- (ङ) <u>गुर</u>ुं नम:।
यहाँ रेखांकित पदों को व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध करके लिखा गया है:
- (क) छात्र खेल के मैदान में गेंद से खेलते हैं। 'कन्दुकात' (पंचमी विभक्ति) के स्थान पर 'कन्दुकेन' (तृतीया विभक्ति) सही है क्योंकि 'क्रीडन्ति' क्रिया के साथ साधन बताने के लिए तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है। शुद्ध वाक्य: छात्रा: क्रीडाक्षेत्रे <u>कन्दुकेन्</u> क्रीडन्ति।
- (ख) वे लड़कियाँ मधुर गाती हैं। 'ते' (पुल्लिंग बहुवचन) के स्थान पर 'ता:' (स्त्रीलिंग बहुवचन) होना चाहिए क्योंकि 'बालिका:' स्त्रीलिंग बहुवचन है। शुद्ध वाक्य: <u>ता:</u> बालिका: मधुरं गायन्ति।
- (ग) मैं पुस्तकालय से पुस्तकें लाता हूँ। 'पुस्तकालयेन' (तृतीया विभक्ति) के स्थान पर 'पुस्तकालयात्' (पंचमी विभक्ति) का प्रयोग होगा क्योंकि 'आनयामि' (लाना) क्रिया के साथ 'से' (स्रोत) का अर्थ बताने के लिए पंचमी विभक्ति का प्रयोग होता है। शुद्ध वाक्य: अहं पुस्तकालयात् पुस्तकानि आनयामि।
- (घ) तुम्हारा क्या नाम है? 'तवं' (सर्वनाम का प्रथम पुरुष एकवचन) के स्थान पर 'तव' (सर्वनाम का षष्ठी विभक्ति एकवचन) होना चाहिए, जो 'नाम' के साथ प्रयोग होता है। शुद्ध वाक्य: <u>तव</u> किं नाम?
- (ङ) गुरु को नमस्कार। 'गुरुं' (द्वितीय विभक्ति) के स्थान पर 'गुरवे' (चतुर्थी विभक्ति) होना चाहिए क्योंकि 'नमः' (नमस्कार) के साथ चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है। शुद्ध वाक्य: <u>गुरवे</u> नम:।
प्रश्न 3: मंजूषा से क्रिया पदों को चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।
मञ्जूषात: क्रियापदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
करिष्यामि गमिष्यति अनयत् पतिष्यति स्फोटयिष्यति त्रोटयति
- (क) काष्ठकूट: चञ्च्वा गजस्य नयने -----।
- (ख) मार्गे स्थित: अहमपि शब्दं -----।
- (ग) तृषार्त: गज: जलाशयं -----।
- (घ) गज: गर्ते -----।
- (ङ) काष्ठकूट: तां मक्षिकाया: समीपं -----।
- (च) गज: श्ण्डेन वृक्षशाखा: -----।
दिए गए क्रिया पदों का सही स्थान पर प्रयोग इस प्रकार है:
- (क) कठफोड़वा अपनी चोंच से हाथी की आँखों को फोड़ देगा। यहाँ भविष्य काल की क्रिया 'स्फोटयिष्यति' उपयुक्त है। उत्तर: स्फोटयिष्यति।
- (ख) रास्ते में स्थित मैं भी शोर करूँगा। यहाँ उत्तम पुरुष एकवचन की क्रिया 'करिष्यामि' उपयुक्त है। उत्तर: करिष्यामि।
- (ग) प्यासा हाथी जलाशय की ओर जाएगा। यहाँ तृतीय पुरुष एकवचन की भविष्य काल की क्रिया 'गमिष्यति' उपयुक्त है। उत्तर: गमिष्यति।
- (घ) हाथी गड्ढे में गिर जाएगा। यहाँ तृतीय पुरुष एकवचन की भविष्य काल की क्रिया 'पतिष्यति' उपयुक्त है। उत्तर: पतिष्यति।
- (ङ) कठफोड़वा उसे मक्खी के पास ले गया। यहाँ भूतकाल की क्रिया 'अनयत्' उपयुक्त है। उत्तर: अनयत्।
- (च) हाथी सूंड से वृक्ष की शाखाओं को तोड़ता है। यहाँ वर्तमान काल की क्रिया 'त्रोटयति' उपयुक्त है। उत्तर: त्रोटयति।
प्रश्न 4: प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखें।
प्रश्नानाम् उत्तराणि एकवाक्येन लिखत-
- (क) चटकाया: विलापं श्रुत्वा काष्ठकूट: तां किम् अपृच्छत्?
- (ख) चटकाया: काष्ठकूटस्य च वार्तां श्रुत्वा मक्षिका किम् अवदत्?
- (ग) मेघनाद: मिक्षकां किम् अवदत्?
- (घ) चटका काष्ठकूटं किम् अवदत्?
यहाँ दिए गए प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में प्रस्तुत हैं:
- (क) चिड़िया के विलाप को सुनकर कठफोड़वे ने उससे दुखपूर्वक पूछा कि वह क्यों रो रही है। उत्तर: चटकाया: विलापं श्रुत्वा काष्ठकूट: तां दु:खेन अपृच्छत् "भद्रे किमर्थ विलपसि?"
- (ख) चिड़िया और कठफोड़वे की बातें सुनकर मक्खी ने कहा कि उसका मित्र मेंढक मेघनाद है और वे शीघ्र ही मिलकर उचित कार्यवाही करेंगे। उत्तर: चटकाया: काष्ठकूटस्य च वार्तां श्रुत्वा मक्षिकाऽवदत् - "ममापि मित्रं मण्डुक: मेघनाद: अस्ति। शीघ्रं तमुपेत्य यथोचितं करिष्याम:।"
- (ग) मेघनाद ने मक्खी से कहा कि वह जैसा कहे वैसा करे, पहले मक्खी दोपहर में हाथी के कान में शोर करे ताकि वह आँखें बंद कर ले, फिर कठफोड़वा उसकी आँखें फोड़ देगा, जिससे हाथी अंधा हो जाएगा और प्यास लगने पर जलाशय की ओर जाएगा। रास्ते में एक बड़ा गड्ढा है, जिसके पास मेंढक की आवाज़ सुनकर वह उसे जलाशय समझकर उसी में गिर जाएगा और मर जाएगा। उत्तर: मेघनाद: मक्षिकां अवदत् यत "यथाहं कथयामि तथा कुरुतम्। मिक्षके प्रथंम त्वं मध्याह्रो तस्य गजस्य कर्णे शब्दं कुरु, येन सः नयने निमील्य स्थास्यति। तदा काष्ठकूट चञ्च्वा तस्य नयने स्फोटयिष्यति एवं सः गजः अन्धः भविष्यति। तृषार्तः सः जलाशयं गमिष्यति। मार्गे महान गर्तः अस्ति तस्य अन्टिके मम शब्देन तं गर्त जलाशयं मत्वा स तस्मिन्नेव गर्ते पतिष्यति मरिष्यति च।"
- (घ) चिड़िया ने कठफोड़वे से कहा कि एक दुष्ट हाथी ने उसके बच्चों को नष्ट कर दिया है और उसके दुख का निवारण केवल उस हाथी के वध से ही हो सकता है। उत्तर: चटका काष्ठकूटं अवदत् य - "दुष्टेनैकेन गजेन मम सन्तित: नाशिता। तस्य गजस्य वधेनैव मम दु:खम् अपसरेत्।"
प्रश्न 5: उदाहरण के अनुसार रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।
उदाहरणमनुसृत्य रिक्तस्थानानि प्रयत-
- (क) पुरुष: एकवचनम् बहुवचनम्
यह प्रश्न संस्कृत व्याकरण में 'पुरुष' (व्यक्ति) के एकवचन और बहुवचन रूपों को दर्शाने के लिए है। यहाँ उदाहरण के अनुसार इसे पूरा किया गया है:
पुरुष:
| एकवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|
| प्रथम पुरुष: (First Person) | अहम् (मैं) | वयम् (हम सब) |
| मध्यम पुरुष: (Second Person) | त्वम् (तुम) | यूयम् (तुम सब) |
| अन्य पुरुष: (Third Person) | स: (वह - पुल्लिंग) / सा (वह - स्त्रीलिंग) / तत् (वह - नपुंसक) | ते (वे - पुल्लिंग) / ता: (वे - स्त्रीलिंग) / तानि (वे - नपुंसक) |
यह तालिका दर्शाती है कि संस्कृत में क्रियाओं और सर्वनामों का प्रयोग पुरुष और वचन के अनुसार बदलता है। उदाहरण के लिए, 'प्रथम पुरुष' में एकवचन 'अहम्' और बहुवचन 'वयम्' होता है।
Common mistakes
- एकवचन और बहुवचन संज्ञाओं के प्रयोग में भ्रमित होना।
- क्रियाओं के काल और पुरुष के अनुसार सही रूप का चयन न कर पाना।
- वाक्य के संदर्भ को समझे बिना रिक्त स्थानों को भरना।
- संज्ञाओं और सर्वनामों के सही विभक्ति रूपों को पहचानने में त्रुटि करना।
Revision tips
- कहानी को ध्यान से पढ़ें और मुख्य पात्रों के उद्देश्यों को समझें।
- व्याकरण अभ्यासों पर विशेष ध्यान दें, विशेषकर एकवचन/बहुवचन और क्रिया रूपों पर।
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को पाठ के संदर्भ में देखें।
- रिक्त स्थान भरने वाले अभ्यासों में दिए गए क्रिया शब्दों के अर्थ को समझें।
Practice MCQs
Q1. वृक्ष पर कौन रहता था?
Explanation: पाठ के अनुसार, वृक्ष पर एक चिड़िया (चटका) रहती थी।
Q2. हाथी ने चिड़िया के बच्चों का क्या किया?
Explanation: हाथी ने अपनी सूंड से वृक्ष की शाखाओं को तोड़कर चिड़िया के बच्चों को कुचल दिया।
Q3. चिड़िया का बदला लेने में किसने मदद की?
Explanation: चिड़िया ने कौआ (काष्ठकूट), मक्खी (वीणारवा) और मेंढक (मेघनाद) की मदद से हाथी को मारने की योजना बनाई।
Q4. मक्खी का मित्र कौन था?
Explanation: मक्खी (वीणारवा) का मित्र मेंढक मेघनाद था, जिसने हाथी को मारने की योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Q5. हाथी को मारने की योजना का मुख्य उद्देश्य क्या था?
Explanation: योजना के अनुसार, कौए ने हाथी की आँखों को चोट पहुँचाई, जिससे वह अंधा हो गया और मेंढक की आवाज़ का पीछा करते हुए एक गड्ढे में गिर गया।
Frequently asked questions
कक्षा 7 संस्कृत के अध्याय 11 का शीर्षक क्या है?
कक्षा 7 संस्कृत के अध्याय 11 का शीर्षक 'समवाये हि दुर्जयः' है, जिसका अर्थ है 'एकता में ही विजय है' या 'संगठित होने पर पराजित करना कठिन है'।
इस अध्याय की मुख्य कहानी क्या है?
यह अध्याय एक चिड़िया की कहानी बताता है जिसके बच्चे एक हाथी द्वारा मार दिए जाते हैं। वह कौए, मक्खी और मेंढक जैसे अपने छोटे दोस्तों की मदद से हाथी से बदला लेती है, जो एकता और सहयोग की शक्ति को दर्शाता है।
NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?
ये समाधान छात्रों को पाठ के प्रश्नों के उत्तर समझने, संस्कृत व्याकरण (जैसे एकवचन, बहुवचन, क्रिया रूप) का अभ्यास करने और कहानी के नैतिक संदेश को आत्मसात करने में मदद करते हैं।
क्या इस अध्याय में व्याकरण के महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं?
हाँ, समाधानों में एकवचन और बहुवचन संज्ञाओं के सही प्रयोग, क्रियाओं के विभिन्न रूपों और वाक्यों में उनके उचित उपयोग जैसे व्याकरणिक अभ्यासों को शामिल किया गया है।
यह अध्याय छात्रों को क्या नैतिक सीख देता है?
यह अध्याय मुख्य रूप से यह सिखाता है कि एकता में बहुत शक्ति होती है। छोटे और कमजोर जीव भी मिलकर संगठित होकर किसी बड़े और शक्तिशाली शत्रु का सामना कर सकते हैं और उसे पराजित कर सकते हैं।
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