कक्षा 5 सामाजिक विज्ञान NCERT समाधान: बूँद-बूँद; दरिया-दरिया

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यह खंड कक्षा 5 के छात्रों के लिए सामाजिक विज्ञान के अध्याय 6, 'बूँद-बूँद; दरिया-दरिया' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय जल संरक्षण, जल स्रोतों के ऐतिहासिक और वर्तमान परिदृश्य, और पानी की उपलब्धता से संबंधित मुद्दों की पड़ताल करता है। इसमें स्कूल के आसपास के इलाके में पानी के बहाव, पानी की कमी के कारणों, पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कुओं, तालाबों और बावड़ियों के महत्व पर चर्चा की गई है। साथ ही, आधुनिक जल प्रबंधन प्रणालियों, जल बिलों को समझने और पानी के साझा संसाधन के रूप में इसके महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को जल के महत्व को समझने और जल संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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BoardCBSE
ClassClass 5
Subjectसामाजिक विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter6. बूँद-बूँद; दरिया-दरिया...

Chapter summary

कक्षा 5 के सामाजिक विज्ञान के अध्याय 'बूँद-बूँद; दरिया-दरिया' के ये NCERT समाधान जल के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित हैं। इसमें स्थानीय जल स्रोतों, पानी की कमी के कारणों, और ऐतिहासिक जल प्रबंधन तकनीकों जैसे कुओं और बावड़ियों की भूमिका का पता लगाया गया है। छात्र यह भी सीखेंगे कि कैसे पानी की उपलब्धता समय के साथ बदली है और आज के जल वितरण प्रणालियों को कैसे समझा जाए, जिसमें जल बिलों का विश्लेषण भी शामिल है। यह अध्याय जल के महत्व और संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर जोर देता है।

Learning outcomes

  • स्थानीय जल स्रोतों और जल के बहाव के पैटर्न की पहचान करना।
  • पानी की कमी के संभावित कारणों को समझना।
  • ऐतिहासिक जल भंडारण विधियों (जैसे कुएँ, बावड़ी) और उनके महत्व का वर्णन करना।
  • पानी के बिलों को पढ़ना और समझना।
  • जल संरक्षण के महत्व को समझाना।
  • पानी को एक साझा संसाधन के रूप में देखना।

Topics covered

Paper topics

  • जल स्रोत
  • पानी की कमी
  • ऐतिहासिक जल संरचनाएं (कुआँ, तालाब, बावड़ी)
  • जल प्रबंधन
  • जल बिल
  • जल संरक्षण
  • साझा संसाधन
  • शहरी और ग्रामीण जल आपूर्ति
  • जल के उपयोग के तरीके
  • जल का महत्व

Important topics

  • जल स्रोतों की पहचान और उनका महत्व
  • पानी की कमी के कारण और समाधान
  • ऐतिहासिक जल संरचनाओं का अध्ययन
  • जल बिलों को समझना
  • जल संरक्षण की आवश्यकता

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Questions and Solutions

सोचो और पता करो

अपने स्कूल के आस-पास के इलाके को देखो। क्या वहाँ कच्चा मैदान, पक्की सड़कें, नालियाँ, आदि हैं। इलाका किस तरह का है? जैसे-ढलानवाला, पथरीला या किसी और तरह का। तुम्हें क्या लगता है, बारिश का पानी बहकर कहाँ-कहाँ जाता होगा? जैसे-जमीन में, नालियों में, गड्ढों में आदि।
Solution: मेरे स्कूल के आसपास का इलाका मुख्य रूप से पक्की सीमेंट की सड़कों वाला है और यह थोड़ा ढलान वाला है। बारिश का पानी बहकर मुख्य रूप से पक्की सड़कों से नीचे की ओर बहता है और नालियों में चला जाता है। कुछ पानी जमीन में भी सोख लिया जाता है, और यदि कहीं गड्ढे हों तो वहाँ भी जमा हो जाता है। अंततः, यह पानी नालों के माध्यम से बड़े जल निकायों जैसे नदियों तक पहुँच जाता है।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 54)

क्या तुम्हारे यहाँ कभी पानी की किल्लत हुई है? अगर हुई है, तो उसका कारण बताओ।
Solution: हाँ, मेरे यहाँ कई बार पानी की किल्लत का सामना करना पड़ा है। इसका मुख्य कारण जल विभाग की ओर से होने वाली तकनीकी खराबी या पाइपलाइन में मरम्मत का काम होता है, जिसके कारण नियमित जलापूर्ति बाधित हो जाती है। कभी-कभी अत्यधिक गर्मी या कम बारिश के कारण भी पानी की कमी महसूस होती है।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 54)

अपनी दादी, नानी या किसी और बड़ी से बातचीत करो कि जब वे तुम्हारी उम्र की थीं, तब- (क) घर में पानी कहाँ से आता था? क्या तब और अब में कोई बदलाव हुआ है?
Solution: मेरी दादी बताती हैं कि जब वे मेरी उम्र की थीं, तब उनके घर में पानी मुख्य रूप से नदी, तालाब या कुओं से आता था। लोग बाल्टियों या घड़ों में पानी भरकर लाते थे। अब समय के साथ बहुत बदलाव आया है। आजकल अधिकांश घरों में पानी जल विभाग द्वारा पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घर तक पहुँचाया जाता है, जो कि एक बड़ा बदलाव है।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 54)

अपनी दादी, नानी या किसी और बड़ी से बातचीत करो कि जब वे तुम्हारी उम्र की थीं, तब- (ख) मुसाफिरों के लिए पानी का किस-किस तरह का इंतजाम होता था? जैसे प्याउ, मशक या कुछ और? आजकल सफर में लोग क्या करते हैं?
Solution: दादी के अनुसार, पहले के समय में यात्रियों और राहगीरों के लिए पानी की व्यवस्था के लिए प्याऊ (सार्वजनिक पीने के पानी के स्थान) और मशक (चमड़े से बनी पानी की मशक) का उपयोग होता था। लोग अक्सर यात्रा के दौरान अपने साथ पानी के बर्तन लेकर चलते थे। आजकल, यात्रा के दौरान लोग आमतौर पर अपने साथ प्लास्टिक की बोतलों में पानी ले जाते हैं, या रास्ते में दुकानों से खरीद लेते हैं।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 55)

पता करो - क्या तुम्हारे घर या स्कूल के आस-पास तालाब, कुआँ या बावडी बनी है? उसे देखने जाओ और पता भी करो। यह कितना पुराना है? किसने बनवाया होगा?
Solution: हाँ, मेरे घर के पास एक बहुत पुराना तालाब है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह तालाब हजारों साल पुराना है। ऐसा कहा जाता है कि इसका निर्माण इस क्षेत्र के किसी प्राचीन राजा ने करवाया था ताकि लोगों को पानी की सुविधा मिल सके।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 55)

इसके आस-पास किस तरह की इमारत बनी है?
Solution: तालाब के चारों ओर कुछ पुरानी इमारतें बनी हुई हैं, जो संभवतः उसी समय की हैं जब तालाब का निर्माण हुआ था। ये इमारतें अब काफी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 55)

पानी साफ है या नहीं? क्या इसकी सफाई होती है?
Solution: तालाब का पानी आजकल साफ नहीं है। इसमें काई जमी हुई है और गंदगी भी दिखाई देती है। इसकी सफाई बहुत अनियमित रूप से होती है, शायद ही कभी इसकी ठीक से सफाई की जाती है, जिसके कारण पानी की गुणवत्ता खराब हो गई है।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 55)

यहाँ से कौन-कौन पानी भरता है?
Solution: आजकल इस तालाब से कोई भी व्यक्ति पानी नहीं भरता है। पानी के साफ न होने और अन्य स्रोतों से आसानी से पानी उपलब्ध होने के कारण लोग इसका उपयोग पीने या घरेलू कामों के लिए नहीं करते हैं।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 55)

क्या कभी यहाँ कोई त्योहार मनाया जाता है?
Solution: हाँ, इस तालाब के पास एक महत्वपूर्ण त्योहार मनाया जाता है, जिसे छठ पर्व के नाम से जाना जाता है। इस त्योहार के दौरान लोग तालाब के पानी में खड़े होकर सूर्य देव की पूजा करते हैं।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 55)

पानी कहीं सूख तो नहीं गया?
Solution: नहीं, इस तालाब का पानी कभी नहीं सूखता है। यह एक बारहमासी जल स्रोत है, जो पूरे साल पानी से भरा रहता है, भले ही बारिश कम हो।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 56)

चर्चा करो-पुनीता के मोहल्ले में दो पुराने कुँए हैं। उसकी दादी बताती हैं कि लगभग 15-20 साल पहले तक उसमें पानी था। क्या कुँए सूखने की कुछ वजह ये हो सकती हैं? चर्चा करो- कई जगह मोटर लगाकर जमीन का पानी निकाला जा रहा है। तालाब जिनमें बारिश का पानी इकट्ठा होता था, अब नहीं रहे। पेड़ों के आस-पास और पार्क में भी जमीन को सीमेंट से पक्का कर दिया गया है। क्या तुम कोई और वजह भी सुझा सकते हो?
Solution: पुनीता की दादी की बात सही है। कुओं के सूखने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
  1. मोटर से पानी निकालना: आजकल लोग अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए या व्यावसायिक उपयोग के लिए जमीन से बहुत अधिक पानी निकालने के लिए शक्तिशाली मोटरों का उपयोग करते हैं। इससे भूजल स्तर तेजी से नीचे चला जाता है, जिससे पुराने कुओं में पानी की कमी हो जाती है या वे सूख जाते हैं।
  2. तालाबों का खत्म होना: तालाब बारिश के पानी को जमा करने और भूजल को रिचार्ज करने का काम करते हैं। जब तालाब पाट दिए जाते हैं या उनका रखरखाव नहीं होता, तो बारिश का पानी सीधे बह जाता है और जमीन में रिसने के बजाय नालियों में चला जाता है, जिससे भूजल स्तर पर असर पड़ता है।
  3. कंक्रीटीकरण: पार्कों और अन्य खुले स्थानों पर जहाँ पहले मिट्टी होती थी, अब सीमेंट या पक्की सड़कें बना दी गई हैं। इससे बारिश का पानी जमीन में रिस नहीं पाता और बहकर नालियों में चला जाता है, जो भूजल पुनर्भरण को कम करता है।
  4. अन्य कारण: इसके अलावा, पेड़ों की कटाई भी एक बड़ा कारण है क्योंकि पेड़ मिट्टी को बांधे रखते हैं और पानी को जमीन में सोखने में मदद करते हैं। वनों की कटाई से मिट्टी का कटाव बढ़ता है और पानी का रिसाव कम हो जाता है। साथ ही, कुओं का उचित रखरखाव न करना भी उनके सूखने का कारण बन सकता है।

हाल की बात

आज लोग पानी का इंतजाम किस-किस तरह से करते हैं। चित्र को देखकर चर्चा करो। तुम्हारे यहाँ जिस तरह पानी आता है उस पर 🗸 ) निशान लगाओ। अगर किसी अलग तरीके से आता है तो अलग से कॉपी में लिखो?
Solution: आज के समय में लोग पानी का इंतजाम कई तरीकों से करते हैं, जिनमें शामिल हैं:
  • हैंड पम्प से पानी निकालना।
  • मोटर या सबमर्सिबल पम्प द्वारा जमीन से पानी खींचना।
  • जल-बोर्ड या नगर निगम द्वारा आपूर्ति किया गया पानी।
  • टैंकरों द्वारा पानी की आपूर्ति।
  • निजी बोरवेल से पानी प्राप्त करना।
मेरे घर में पानी जल-बोर्ड द्वारा आपूर्ति की जाती है, इसलिए मैं उस साधन पर निशान लगाऊँगा जो जल-बोर्ड की आपूर्ति को दर्शाता है। यदि पानी किसी अन्य तरीके से आता है, जैसे हैंडपंप या निजी बोरवेल से, तो उसे अलग से कॉपी में लिखा जाएगा।

चर्चा करो

जिंदगी का हक तो सभी का है। फिर जीने के लिए या पीने भर के लिए पानी मिल जाए क्या यह हर एक को मिल रहा है? ऐसा क्यों है कि कुछ लोगों को तो खरीदकर ही पानी पीना पड़ता है? पृथ्वी पर तो पानी सभी का है, साझा है। कुछ लोग गहरा बोरिंग करके जमीन के नीचे से ज्यादा पानी खींच लेते हैं यह कहाँ तक सही है। तुमने क्या ऐसा कहीं देखा है? कुछ लोगों को जल बोर्ड के पाइप में टुल्लु पंप क्यों लगाना पड़ रहा होगा? इससे दूसरे लोगों को परेशानी हो रही होगी? तुम्हारा क्या कुछ ऐसा अनुभव है?
Solution: यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है। वास्तव में, पीने के पानी का अधिकार सभी का है, लेकिन दुर्भाग्यवश, यह सभी को समान रूप से उपलब्ध नहीं है। कुछ लोगों को, विशेषकर गरीब या दूरदराज के इलाकों में रहने वालों को, पानी खरीदकर पीना पड़ता है, जो कि अन्यायपूर्ण है। इसके कई कारण हैं:
  • असमान वितरण: पानी का वितरण समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों में पानी की प्रचुरता है, जबकि अन्य में कमी है।
  • अत्यधिक दोहन: कुछ लोग या कंपनियाँ गहरे बोरिंग करके जमीन के नीचे से बहुत अधिक पानी खींच लेते हैं। यह पानी का अत्यधिक दोहन है और यह तब तक सही नहीं है जब तक कि यह सभी की जरूरतों को पूरा करने के बाद ही किया जाए। यह भूजल स्तर को खतरनाक रूप से कम कर सकता है और भविष्य के लिए पानी की उपलब्धता को खतरे में डाल सकता है।
  • टुल्लु पंप का उपयोग: जल बोर्ड के पाइपों में टुल्लु पंप लगाने का मुख्य कारण यह है कि वे कम दबाव वाले पानी को भी खींचकर अपने घरों तक पहुँचा सकें। ऐसा तब होता है जब जल बोर्ड की आपूर्ति कम होती है या दबाव बहुत कम होता है। यह तरीका गलत है क्योंकि इससे दूसरों के लिए पानी का दबाव और कम हो जाता है, जिससे उन्हें पानी मिलने में और परेशानी होती है। मेरे मोहल्ले में भी कुछ लोगों ने ऐसा किया है, जिससे हमारे घर में पानी का प्रेशर बहुत कम हो जाता है।
यह अनुभव दर्शाता है कि पानी के प्रबंधन और वितरण में सुधार की तत्काल आवश्यकता है ताकि यह सभी के लिए सुलभ हो सके।

एन.सी.ई.आर.टी. पाट्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 58)

यह बिल कौन-से दफ्तर से आता है?
Solution: स्रोत में दिए गए बिल के अनुसार, यह बिल दिल्ली जल बोर्ड के दफ्तर से आता है।

एन.सी.ई.आर.टी. पाट्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 58)

तुम्हारे यहाँ अगर बिल आता है तो कहाँ से आता है?
Solution: हाँ, मेरे यहाँ भी पानी का बिल आता है। यह बिल स्थानीय जल विभाग या नगर निगम के कार्यालय से आता है, जो हमारे क्षेत्र में पानी की आपूर्ति और बिलिंग का प्रबंधन करता है।

एन.सी.ई.आर.टी. पाट्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 58)

इस बिल में दिल्ली जल बोर्ड के नीचे दिल्ली सरकार क्यों लिखा होता है?
Solution: बिल में दिल्ली जल बोर्ड के नीचे 'दिल्ली सरकार' इसलिए लिखा होता है क्योंकि दिल्ली जल बोर्ड एक सरकारी संस्था है और यह दिल्ली सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करती है। यह दर्शाता है कि जल बोर्ड दिल्ली सरकार की एक एजेंसी है जो जल आपूर्ति और सीवेज प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालती है।

एन.सी.ई.आर.टी. पाट्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 58)

बिल किसके नाम से है? कितने महीनों के कितने पैसे देने पड़ रहे हैं?
Solution: स्रोत में दिए गए बिल के अनुसार, यह बिल मो. उमर और मो. शोएब के नाम से है। इसमें दो महीनों के लिए 350 रुपये का भुगतान करने के लिए कहा गया है। इसका मतलब है कि प्रति माह लगभग 175 रुपये का भुगतान करना होगा।

एन.सी.ई.आर.टी. पाट्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 58)

क्या तुम्हारे यहाँ पानी के पैसे चुकाने पड़ते हैं? क्या तुम्हारे यहाँ अलग-अलग इलाकों में पानी का रेट अलग है? बड़ों से पता करो।
Solution: हाँ, मेरे यहाँ पानी के उपयोग के लिए पैसे चुकाने पड़ते हैं, जो जल विभाग द्वारा भेजे गए बिल में दर्शाए जाते हैं। यह भी सच है कि अलग-अलग इलाकों में पानी का रेट अलग-अलग हो सकता है। आमतौर पर, शहरी या अधिक विकसित इलाकों में पानी का रेट ग्रामीण या कम विकसित इलाकों की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि वहाँ जल आपूर्ति और रखरखाव की लागत अधिक हो सकती है। बड़ों से पूछने पर इस अंतर की पुष्टि की जा सकती है।

एन.सी.ई.आर.टी. पाट्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 58)

तुमने इस तरह की क्या कोई खबर पढ़ी है? लोगों ने मिल कर पानी की परेशानी को कैसे दूर किया? क्या किसी पुराने तालाब या बावडी को फिर ठीक करके इस्तेमाल किया?
Solution: हाँ, मैंने ऐसी खबरें पढ़ी हैं जहाँ लोगों ने मिलकर पानी की समस्या का समाधान किया है। एक उदाहरण महाराष्ट्र के एक गाँव का है, जहाँ के लोगों ने मिलकर एक पुराने, सूखे पड़े तालाब की सफाई की और उसे फिर से पानी से भर दिया। इस सामूहिक प्रयास से न केवल गाँव की पानी की समस्या दूर हुई, बल्कि भूजल स्तर भी सुधरा और तालाब एक जल स्रोत के रूप में फिर से उपयोगी हो गया। इस तरह के प्रयास दिखाते हैं कि कैसे सामुदायिक भागीदारी से जल संकट का समाधान किया जा सकता है।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 59)

पोस्टर बनाओ-पृथ्वी पर पानी सभी का है, साझा है। कुछ और ऐसे ही नारे सोचो और साथ ही चित्र भी बनाकर अपना एक सुन्दर पोस्टर बनाओ।
Solution: पोस्टर बनाने के लिए, हम 'पृथ्वी पर पानी सभी का है, साझा है' जैसे नारे का उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ, हम अन्य नारे भी सोच सकते हैं जैसे:
  • जल ही जीवन है, इसे बचाओ।
  • पानी अनमोल है, इसे व्यर्थ न बहाओ।
  • हर बूँद कीमती है, संरक्षण ही उपाय है।
  • पानी बचाओ, भविष्य बचाओ।
इन नारों के साथ, हम पानी के महत्व को दर्शाने वाले चित्र बना सकते हैं, जैसे कि एक हाथ से पानी की बूँद को बचाना, या एक हरा-भरा पृथ्वी जिस पर पानी का चक्र दिखाया गया हो। एक सुन्दर पोस्टर बनाने के लिए इन नारों और चित्रों का रचनात्मक उपयोग किया जा सकता है।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 59)

यह बिल किस तारीख तक का है?
Solution: स्रोत में दिए गए बिल के अनुसार, यह बिल 7 जनवरी तक की अवधि के लिए है।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 59)

इस बिल के लिए कितने पैसे भरने पड़ेंगे?
Solution: स्रोत में दिए गए बिल के अनुसार, इस बिल के लिए पचास रुपये (50 रु.) भरने पड़ेंगे।

एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 59)

इनके अलावा बिल में और क्या-क्या देख पा रहे हो?
Solution: बिल में 50 रुपये के मुख्य भुगतान के अलावा, 35 रुपये का एक अतिरिक्त शुल्क भी देखा जा सकता है। यह शुल्क संभवतः मरम्मत या रखरखाव के लिए लगाया गया है, जैसा कि बिल में उल्लेखित है।

Common mistakes

  • पानी की कमी के कारणों को केवल एक कारक तक सीमित समझना।
  • ऐतिहासिक जल स्रोतों के महत्व को कम आंकना।
  • जल बिलों में दी गई जानकारी को समझने में कठिनाई।
  • पानी को एक असीमित संसाधन मानना।

Revision tips

  • अपने आस-पास के जल स्रोतों का निरीक्षण करें और उनके बारे में जानकारी एकत्र करें।
  • पानी के बिलों को ध्यान से देखें और उनमें दी गई जानकारी को समझने का प्रयास करें।
  • जल संरक्षण के विभिन्न तरीकों पर चर्चा करें और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने का प्रयास करें।
  • पानी की कमी से जुड़े सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर विचार करें।

Practice MCQs

Q1. बारिश का पानी बहकर कहाँ-कहाँ जा सकता है?

Q2. पुराने समय में पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत क्या था?

Q3. बावड़ी क्या है?

Q4. कुएँ सूखने का एक कारण क्या हो सकता है?

Q5. जल बिल में 'दिल्ली सरकार' क्यों लिखा होता है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान कक्षा 5 के सामाजिक विज्ञान विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 6 'बूँद-बूँद; दरिया-दरिया' पर केंद्रित हैं।

इन समाधानों में किन मुख्य विषयों को शामिल किया गया है?

इन समाधानों में जल स्रोतों, पानी की कमी के कारणों, ऐतिहासिक जल संरचनाओं जैसे कुओं और बावड़ियों, जल बिलों को समझने और जल संरक्षण के महत्व जैसे विषयों को शामिल किया गया है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान अध्याय के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को समझने और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

पानी की कमी के क्या कारण बताए गए हैं?

समाधानों में पानी की कमी के कारणों में मोटर से अत्यधिक पानी निकालना, तालाबों का सूखना, और शहरीकरण के कारण जमीन का पक्का हो जाना शामिल हैं।

जल बिलों के बारे में क्या जानकारी दी गई है?

समाधानों में जल बिलों को पढ़ने, समझने और यह जानने पर चर्चा की गई है कि बिल किस विभाग से आता है और उसमें क्या-क्या शुल्क शामिल होते हैं।

जल संरक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?

जल संरक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि पृथ्वी पर पानी एक सीमित और साझा संसाधन है, और सभी को पीने के लिए पर्याप्त पानी मिलना चाहिए। अत्यधिक उपयोग और प्रदूषण से जल की कमी हो सकती है।

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