कक्षा 5 सामाजिक विज्ञान: बीज, बीज, बीज - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 5 के छात्रों के लिए सामाजिक विज्ञान के अध्याय 'बीज, बीज, बीज' पर विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें चर्चा प्रश्न शामिल हैं जो बताते हैं कि भोजन पकाने से पहले क्यों भिगोया जाता है और कौन से खाद्य पदार्थ अंकुरित करके खाए जाते हैं, साथ ही अंकुरण के लिए आवश्यक स्थितियाँ भी बताई गई हैं। एक 'करके देखो' प्रयोग छात्रों को विभिन्न परिस्थितियों में बीजों के अंकुरण का निरीक्षण करने में मदद करता है, जिसमें पानी और हवा की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। 'किसका पौधा कितना बड़ा?' अनुभाग छात्रों को विभिन्न बीजों को बोने और उनकी वृद्धि को ट्रैक करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे उन्हें बीज बोने से लेकर पौधे के विकास तक की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलती है। ये समाधान छात्रों को बीज, अंकुरण और पौधों की वृद्धि की अवधारणाओं को स्पष्ट करने में सहायता करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 5
Subjectसामाजिक विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. बीज, बीज, बीज

Chapter summary

कक्षा 5 के सामाजिक विज्ञान के अध्याय 'बीज, बीज, बीज' के लिए NCERT समाधान छात्रों को बीजों के महत्व और अंकुरण की प्रक्रिया से परिचित कराते हैं। यह अध्याय बताता है कि विभिन्न खाद्य पदार्थों को पकाने से पहले क्यों भिगोया जाता है और अंकुरित भोजन के पोषण संबंधी लाभों पर प्रकाश डालता है। इसमें एक व्यावहारिक प्रयोग शामिल है जो पानी और हवा की उपस्थिति में बीज अंकुरण के लिए आवश्यक शर्तों को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, छात्र विभिन्न बीजों को बोने और उनकी वृद्धि की निगरानी करने के माध्यम से पौधों के विकास के चरणों का पता लगाते हैं।

Learning outcomes

  • भोजन पकाने से पहले भिगोने के कारणों को समझना।
  • अंकुरित खाद्य पदार्थों और उनके पोषण संबंधी लाभों की पहचान करना।
  • अंकुरण के लिए आवश्यक पानी और हवा की भूमिका को समझना।
  • विभिन्न बीजों को बोने और उनकी वृद्धि की निगरानी करने की प्रक्रिया सीखना।
  • पौधों के विकास के विभिन्न चरणों का निरीक्षण और रिकॉर्ड करना।
  • बीज के अंदर नन्हे पौधे की अवधारणा को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • भोजन पकाने से पहले भिगोना
  • अंकुरित खाद्य पदार्थ
  • अंकुरण की प्रक्रिया
  • अंकुरण के लिए आवश्यक स्थितियाँ (पानी, हवा)
  • बीज बोना
  • पौधों की वृद्धि
  • पौधों के विकास के चरण
  • विभिन्न बीजों का अंकुरण समय
  • पौधों के लिए पानी का महत्व
  • बीज के अंदर नन्हा पौधा

Important topics

  • अंकुरण के लिए आवश्यक स्थितियाँ (पानी और हवा)
  • भिगोने और अंकुरित करने के लाभ
  • पौधों की वृद्धि के चरण
  • विभिन्न बीजों के अंकुरण में अंतर

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Questions and Solutions

चर्चा करो

तुम्हारे घर में कौन-कौन सी चीजें खाना बनाने से पहले भिगोई जाती है? और क्यों?
Solution: हमारे घर में आमतौर पर चना, मूँग, मोठ, राजमा, छोले, लोबिया और विभिन्न प्रकार की दालें जैसी चीजें खाना बनाने से पहले भिगोई जाती हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इन बीजों और दालों के दाने बहुत कड़े होते हैं। इन्हें सीधे पकाने पर बहुत अधिक समय लगता है और ये ठीक से पकते भी नहीं हैं। भिगोने की प्रक्रिया इन कठोर दानों को नरम बनाती है, जिससे वे पकाने में आसान हो जाते हैं और पकाने में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त, भिगोने से कुछ बीजों में मौजूद पोषक तत्व भी अधिक आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

चर्चा करो

तुम्हारे घर में कौन-कौन सी चीजें अंकुरित करके खाई जाती हैं? उन्हें अंकुरित कैसे किया जाता है? कितना समय लगता है?
Solution: हमारे घर में मुख्य रूप से चना और मूँग अंकुरित करके खाए जाते हैं। इन्हें अंकुरित करने के लिए, पहले बीजों को साफ पानी में रात भर या लगभग 8-10 घंटे के लिए भिगोया जाता है। सुबह, पानी निकालकर बीजों को एक साफ, गीले कपड़े में लपेटकर या एक बर्तन में रखकर ऊपर से गीला कपड़ा ढक दिया जाता है। इस कपड़े को नम बनाए रखना महत्वपूर्ण है। चने को पूरी तरह अंकुरित होने में आमतौर पर 36 से 48 घंटे लगते हैं, जबकि मूँग को अंकुरित होने में लगभग 24 से 32 घंटे का समय लग सकता है। अंकुरण का समय मौसम और तापमान पर भी निर्भर करता है।

चर्चा करो

क्या तुम्हें या तुम्हारे आस-पास किसी को डॉक्टर ने अंकुरित खाना खाने की सलाह दी है? क्यों?
Solution: हाँ, कई बार डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए अंकुरित भोजन खाने की सलाह देते हैं। अंकुरित बीजों में विटामिन (जैसे विटामिन सी और बी-कॉम्प्लेक्स), खनिज (जैसे आयरन और पोटेशियम) और एंजाइम की मात्रा बढ़ जाती है। ये पचाने में भी आसान होते हैं और शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं, जिससे समग्र स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्तर में सुधार होता है। इसलिए, विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों को अक्सर अंकुरित आहार लेने की सलाह दी जाती है।

करके देखो

याद है, कक्षा चार में जड़ों का जाल पाठ में तुमने बीज के प्रयोग किए थे। आओ, एक और प्रयोग करके देखें।
  1. चने के कुछ दाने और तीन कटोरियाँ लो। पहली कटोरी में चने के चार-पाँच दाने लो और कटोरी को पानी से पूरा भर दो।
  2. दूसरी कटोरी में भी उतने ही चने भीगी हुई रूई या कपड़े में लपेटकर रख दो। ध्यान रहे, कपड़ा या रूई सूखने न पाये। तीसरी कटोरी में केवल चने ही रखो।
  3. तीनों कटोरियों को ढँक दो।
दो दिन बाद देखो और लिखो। कटोरियों के चनों में क्या बदलाव दिखा?
Solution: दो दिन बाद तीनों कटोरियों के चनों में निम्नलिखित बदलाव देखे जा सकते हैं:

कटोरी 1 (पानी से भरी हुई): इस कटोरी के चने पानी में डूबे हुए थे। बीज पानी सोखकर थोड़े फूल गए थे, लेकिन उनका रंग थोड़ा काला पड़ गया था। उनमें अंकुरण नहीं हुआ था क्योंकि उन्हें हवा नहीं मिल पा रही थी।

कटोरी 2 (गीले कपड़े/रूई में लिपटे हुए): इस कटोरी के चने फूल गए थे और उनमें से छोटे-छोटे अंकुर (जड़ और तना) निकल आए थे। बीज स्वस्थ दिख रहे थे क्योंकि उन्हें पानी और हवा दोनों मिल रहे थे।

कटोरी 3 (सूखे चने): इस कटोरी के चने में कोई खास बदलाव नहीं आया था। वे वैसे ही सूखे और कड़े थे जैसे शुरुआत में थे। उन्हें न तो पर्याप्त पानी मिला और न ही वे अंकुरित हुए।

बताओ और लिखो

किस कटोरी के बीजों में अंकुरन हुआ? इस कटोरी और बाकी कटोरियों के बीजों में क्या अंतर है?
Solution: अंकुरण केवल दूसरी कटोरी (कटोरी 2) के बीजों में हुआ। इस कटोरी और बाकी कटोरियों के बीजों में मुख्य अंतर यह था कि कटोरी 2 के बीजों को अंकुरण के लिए आवश्यक दोनों चीजें - पानी और हवा - पर्याप्त मात्रा में मिल रही थीं। कटोरी 1 के बीजों को पानी तो मिला, लेकिन हवा नहीं मिली, इसलिए वे अंकुरित नहीं हुए। कटोरी 3 के बीजों को हवा तो मिली, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिला, इसलिए वे भी अंकुरित नहीं हुए। इससे यह सिद्ध होता है कि अंकुरण के लिए पानी और हवा दोनों का होना जरूरी है।

बताओ और लिखो

गोपाल की माँ ने भिगोए हुए चने अंकुरित करने के लिए गीले कपड़े में क्यों बाँधे?
Solution: गोपाल की माँ ने भिगोए हुए चनों को अंकुरित करने के लिए गीले कपड़े में इसलिए बाँधा ताकि चनों को अंकुरण के लिए जरूरी नमी (पानी) और हवा दोनों मिल सकें। गीला कपड़ा चनों को सूखने से बचाता है और उन्हें लगातार नम रखता है, जबकि कपड़ा पूरी तरह से हवा को नहीं रोकता, जिससे चनों को साँस लेने के लिए हवा भी मिलती रहती है। यह स्थिति अंकुरण के लिए सबसे उपयुक्त होती है।

बताओ और लिखो

साबुत मसूर की दाल को हम अंकुरित नहीं कर पाते। सोचो क्यों?
Solution: साबुत मसूर की दाल को अंकुरित न कर पाने का मुख्य कारण यह है कि दाल बनने की प्रक्रिया के दौरान मसूर के दानों पर कई तरह की प्रोसेसिंग (जैसे पॉलिशिंग या अन्य उपचार) की जाती है। इन प्रक्रियाओं के कारण बीज के बाहरी आवरण को नुकसान पहुँच सकता है या बीज के अंदर की वह जीवन शक्ति समाप्त हो सकती है जो अंकुरण के लिए आवश्यक है। इस वजह से, साबुत मसूर के दाने अपनी अंकुरित होने की क्षमता खो देते हैं।

बताओ और लिखो

अपने अंकुरित बीज को ध्यान से देखो और उसका चित्र बनाओ?
Solution: (छात्र यहाँ अपने अंकुरित बीज, जैसे चना या मूँग, का चित्र बना सकते हैं। चित्र में बीज से निकलती हुई छोटी जड़ और तना स्पष्ट दिखना चाहिए।)

किसका पौधा कितना बड़ा?

एक गमला या चौड़े मुँह वाला डिब्बा लो। इसके नीचे छोटा-सा छेद करके, मिट्टी भरो। किसी एक किस्म के चार-पाँच बीज मिट्टी में दबा दो। कक्षा में सभी बच्चे अलग-अलग किस्म के बीज बोएँ। जैसे-सरसों, मेथीदाना, तिल, धनिया।
Solution: यह एक प्रयोगात्मक गतिविधि है जिसमें छात्र विभिन्न प्रकार के बीज बोकर उनकी वृद्धि का अवलोकन करेंगे। गमले या डिब्बे में मिट्टी भरकर उसमें बीज बोने के बाद, नियमित रूप से पानी देना होगा। कक्षा के विभिन्न छात्र अलग-अलग बीज जैसे सरसों, मेथी, तिल, धनिया आदि बो सकते हैं ताकि उनकी वृद्धि की तुलना की जा सके।

लिखो

बीज के नाम ...... किस दिन बोया (तारीख) ....... अब जिस दिन से तुम्हें छोटा-सा पौधा निकलता दिखे, उस दिन से अपनी तालिका भरो।

उत्तर बीज का नाम सरसों

बीज बोने की तिथि पाँच नवम्बर

तारीख पत्ते दिखे पौधे की लम्बाई (से.मी.) पौधे में कोई और बदलाव
5 नवम्बर - 1/2 से.मी. -
6 नवम्बर - 2 से.मी. -
7 नवम्बर - 2½ से.मी. तना मोटा हो गया
8 नवम्बर - 4 से.मी. तना और भी मोटा हो गया
Solution: यह तालिका सरसों के बीज बोने के बाद उसकी वृद्धि को दर्शाती है। बीज बोने की तिथि 5 नवम्बर है। तालिका के अनुसार, 5 नवम्बर को बीज से बहुत छोटा अंकुर (लगभग आधा सेंटीमीटर) निकला। अगले दिन, 6 नवम्बर को, पौधे की लम्बाई बढ़कर 2 सेंटीमीटर हो गई। 7 नवम्बर को, पौधे की लम्बाई 2.5 सेंटीमीटर हो गई और तना मोटा होने लगा। 8 नवम्बर तक, पौधे की लम्बाई 4 सेंटीमीटर तक पहुँच गई और तना और भी मोटा और मजबूत हो गया। यह तालिका दिखाती है कि बीज से पौधा कैसे धीरे-धीरे बढ़ता है और उसमें क्या-क्या बदलाव आते हैं।

पता करो

बीज बोने और छोटा पौधा दिखने में कितने दिन लगे?
Solution: दिए गए तालिका के अनुसार, बीज बोने की तिथि 5 नवम्बर थी और 5 नवम्बर को ही आधा सेंटीमीटर का अंकुर दिखाई देने लगा था। यदि हम 'छोटा पौधा दिखने' का अर्थ पहली बार अंकुर का दिखना मानें, तो यह लगभग उसी दिन या अगले दिन तक स्पष्ट हो जाता है। यदि 'छोटा पौधा' का अर्थ कुछ सेंटीमीटर लम्बा होना मानें, तो 6 नवम्बर तक 2 सेंटीमीटर का पौधा दिख गया था। इस प्रकार, बीज बोने और छोटा पौधा दिखने में लगभग 1 से 2 दिन लगे।

पता करो

पहले दिन और दूसरे दिन पौधे की लंबाई में कितना अंतर था?
Solution: तालिका के अनुसार, पहले दिन (5 नवम्बर) पौधे की लम्बाई ½ से.मी. थी और दूसरे दिन (6 नवम्बर) पौधे की लम्बाई 2 से.मी. थी। इसलिए, पहले दिन और दूसरे दिन पौधे की लम्बाई में अंतर था: 2 से.मी. - ½ से.मी. = 1½ से.मी.।

पता करो

किस दिन पौधे की लंबाई सबसे ज्यादा बढ़ी?
Solution: तालिका में दिए गए आँकड़ों के अनुसार, पौधे की लम्बाई में सबसे अधिक वृद्धि 6 नवम्बर (2 से.मी.) से 7 नवम्बर (2½ से.मी.) के बीच हुई, जहाँ लम्बाई ½ से.मी. बढ़ी। हालाँकि, 7 नवम्बर (2½ से.मी.) से 8 नवम्बर (4 से.मी.) के बीच लम्बाई 1½ से.मी. बढ़ी है, जो कि सबसे अधिक वृद्धि है। इसलिए, 7 नवम्बर से 8 नवम्बर के बीच पौधे की लम्बाई सबसे ज्यादा बढ़ी।

पता करो

क्या हर दिन पौधे में नया पत्ता या पत्ते निकले?
Solution: तालिका में 'पत्ते दिखे' वाले कॉलम में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन 'पौधे में कोई और बदलाव' वाले कॉलम में 7 नवम्बर को 'तना मोटा हो गया' और 8 नवम्बर को 'तना और भी मोटा हो गया' लिखा है। यह अप्रत्यक्ष रूप से इंगित करता है कि पौधे का विकास हो रहा था, जिसमें नए पत्तों का निकलना भी शामिल हो सकता है, हालाँकि तालिका सीधे तौर पर हर दिन नए पत्तों के निकलने की पुष्टि नहीं करती है। सामान्यतः, पौधे के विकास के साथ नए पत्ते निकलते हैं।

पता करो

क्या पौधे के तने में भी कुछ बदलाव आया?
Solution: हाँ, तालिका के अनुसार पौधे के तने में बदलाव आया। 7 नवम्बर को यह नोट किया गया कि 'तना मोटा हो गया' और 8 नवम्बर को यह बदलाव और स्पष्ट हुआ जब लिखा गया कि 'तना और भी मोटा हो गया'। इससे पता चलता है कि जैसे-जैसे पौधा बढ़ रहा था, उसका तना भी मजबूत और मोटा होता जा रहा था।

चर्चा करो

किस बीज के पौधे को मिट्टी से बाहर आने में सबसे ज्यादा दिन लगे?
Solution: इस प्रश्न का उत्तर दिए गए तालिका से सीधे नहीं मिलता है क्योंकि तालिका केवल सरसों के बीज की वृद्धि दिखाती है। हालाँकि, सामान्य ज्ञान के आधार पर, कुछ बीज जैसे तिल या धनिया को अंकुरित होने और मिट्टी से बाहर आने में सरसों या मेथी की तुलना में अधिक समय लग सकता है। पाठ में दिए गए संदर्भ के अनुसार, तिल के बीज को मिट्टी से बाहर आने में सबसे ज्यादा समय लगता है।

चर्चा करो

किस बीज के पौधे को मिट्टी से बाहर आने में सबसे कम दिन लगे?
Solution: दिए गए तालिका के अनुसार, सरसों के बीज को मिट्टी से बाहर निकलने में सबसे कम दिन लगे। 5 नवम्बर को बीज बोया गया और उसी दिन या अगले दिन तक अंकुर दिखना शुरू हो गया था, जो कि बहुत तेज वृद्धि है।

चर्चा करो

कौन-सा बीज उगा ही नहीं? क्यों नहीं उगा होगा?
Solution: यह प्रश्न कक्षा के सभी छात्रों द्वारा बोए गए विभिन्न बीजों के अवलोकन पर आधारित है। यदि कोई बीज नहीं उगता है, तो इसके कई कारण हो सकते हैं: हो सकता है कि बीज पुराना या खराब हो गया हो, या उसे अंकुरण के लिए पर्याप्त पानी या हवा न मिली हो। यदि बीज को बहुत अधिक पानी मिला हो या वह लगातार पानी में डूबा रहा हो, तो वह सड़ भी सकता है और नहीं उगेगा। इसी तरह, यदि बीज को बिल्कुल भी पानी न मिले या वह बहुत ठंडी जगह पर रखा हो, तो भी वह नहीं उग पाएगा।

चर्चा करो

अगर तुम्हारा पौधा सूख गया या पीला हो गया तो सोचो ऐसा क्यों हुआ होगा?
Solution: यदि पौधा सूख गया या पीला हो गया, तो इसका सबसे आम कारण पानी की कमी है। पौधों को जीवित रहने और बढ़ने के लिए नियमित रूप से पानी की आवश्यकता होती है। जब उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिलता है, तो वे निर्जलित हो जाते हैं, जिससे पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं और अंततः पौधा सूख जाता है। इसके अलावा, बहुत अधिक धूप, पोषक तत्वों की कमी, या मिट्टी में पानी का जमाव (जलभराव) भी पौधे के पीले पड़ने या सूखने का कारण बन सकता है।

चर्चा करो

पौधे को पानी न मिले तो क्या होगा?
Solution: यदि पौधे को पानी नहीं मिलेगा, तो वह धीरे-धीरे मुरझाने लगेगा। सबसे पहले, उसकी पत्तियाँ ढीली पड़ जाएँगी और नीचे की ओर झुकने लगेंगी। इसके बाद, पत्तियाँ पीली पड़ने लगेंगी क्योंकि पौधे प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक क्लोरोफिल का उत्पादन नहीं कर पाएगा। अंततः, पानी की पूर्ण अनुपस्थिति में, पौधा पूरी तरह से सूख जाएगा और मर जाएगा।

दिल की बात बताओ

बीज के अंदर क्या होता है?
Solution: बीज के अंदर एक नन्हा, अविकसित पौधा होता है जिसे भ्रूण (embryo) कहते हैं। इस भ्रूण के साथ ही भोजन भंडार (endosperm या cotyledons) भी होता है, जो अंकुरण के समय भ्रूण को पोषण प्रदान करता है। बीज के चारों ओर एक सुरक्षात्मक आवरण होता है जिसे बीज कोट (seed coat) कहते हैं। जब बीज को सही परिस्थितियाँ (जैसे पानी, हवा और उचित तापमान) मिलती हैं, तो यह भ्रूण सक्रिय हो जाता है और अंकुरित होकर एक नए पौधे का रूप ले लेता है।

दिल की बात बताओ

छोटे से बीज से इतना बड़ा पौधा कैसे बनता है?
Solution: एक छोटे से बीज से बड़ा पौधा बनने की प्रक्रिया अद्भुत होती है। जब बीज को मिट्टी में बोया जाता है और उसे पानी मिलता है, तो बीज के अंदर का नन्हा पौधा (भ्रूण) सक्रिय हो जाता है। यह अंकुरित होता है, जिसमें से पहले जड़ें नीचे मिट्टी में फैलती हैं और पानी व पोषक तत्व सोखना शुरू करती हैं। फिर, एक तना ऊपर की ओर मिट्टी से बाहर निकलता है और उसमें पत्तियाँ निकलती हैं। ये पत्तियाँ सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा अपना भोजन बनाती हैं। इस भोजन और मिट्टी से मिले पानी व पोषक तत्वों का उपयोग करके पौधा धीरे-धीरे बढ़ता है, मोटा होता है और बड़ा होता जाता है।

Common mistakes

  • अंकुरण के लिए केवल पानी की आवश्यकता को समझना, हवा की भूमिका को अनदेखा करना।
  • भिगोने या अंकुरित करने के लिए बीजों को पर्याप्त समय न देना।
  • पौधों की वृद्धि के दौरान पानी की कमी या अधिकता के प्रभाव को न समझना।
  • विभिन्न बीजों के अंकुरण समय में अंतर को अनदेखा करना।

Revision tips

  • अंकुरण प्रयोग के चरणों और परिणामों को ध्यान से पढ़ें।
  • पौधों की वृद्धि तालिका में दिए गए डेटा का विश्लेषण करें और पैटर्न को समझें।
  • भिगोने और अंकुरित करने के कारणों को याद करें।
  • बीज के अंदर नन्हे पौधे की अवधारणा को स्पष्ट करें।

Practice MCQs

Q1. खाना पकाने से पहले चने और राजमा जैसी दालों को क्यों भिगोया जाता है?

Q2. अंकुरित करने के लिए बीजों को किसमें लपेटा जाता है ताकि वे सूखें नहीं?

Q3. प्रयोग में कटोरी 1 के बीजों में क्या बदलाव आया जब उन्हें केवल पानी में रखा गया?

Q4. अंकुरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है?

Q5. सरसों के बीज को बोने के कितने दिनों बाद छोटा पौधा दिखने लगा?

Frequently asked questions

कक्षा 5 के सामाजिक विज्ञान के अध्याय 'बीज, बीज, बीज' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?

इस अध्याय में मुख्य रूप से भोजन पकाने से पहले चीजों को भिगोने के कारणों, अंकुरित खाद्य पदार्थों के महत्व, अंकुरण के लिए आवश्यक पानी और हवा की भूमिका, और विभिन्न बीजों को बोने से लेकर पौधों के विकसित होने तक की प्रक्रिया के बारे में सिखाया गया है।

अंकुरण के लिए पानी और हवा क्यों महत्वपूर्ण हैं?

पानी बीजों को अंकुरित होने के लिए आवश्यक नमी प्रदान करता है, जिससे बीज के अंदर का नन्हा पौधा सक्रिय हो जाता है। हवा (ऑक्सीजन) बीज को श्वसन के लिए ऊर्जा प्राप्त करने में मदद करती है, जो अंकुरण के लिए महत्वपूर्ण है।

क्या सभी बीज एक ही गति से अंकुरित होते हैं?

नहीं, सभी बीज एक ही गति से अंकुरित नहीं होते हैं। कुछ बीज, जैसे सरसों, जल्दी अंकुरित हो जाते हैं, जबकि अन्य, जैसे तिल, को अंकुरित होने में अधिक समय लग सकता है। यह बीज के प्रकार और उसकी बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

भिगोए हुए चने को गीले कपड़े में क्यों बाँधा जाता है?

भिगोए हुए चनों को गीले कपड़े में इसलिए बाँधा जाता है ताकि उन्हें अंकुरण के लिए आवश्यक नमी (पानी) और हवा दोनों मिलती रहे। गीला कपड़ा नमी बनाए रखता है और हवा को भी गुजरने देता है।

पौधों की वृद्धि को ट्रैक करने के लिए क्या करना चाहिए?

पौधों की वृद्धि को ट्रैक करने के लिए, उन्हें मिट्टी में बोने के बाद नियमित रूप से पानी देना चाहिए और फिर हर दिन उनकी ऊंचाई, पत्तों की संख्या और तने में होने वाले बदलावों को एक तालिका में दर्ज करना चाहिए।

अगर पौधे को पर्याप्त पानी न मिले तो क्या होगा?

अगर पौधे को पर्याप्त पानी नहीं मिलता है, तो वह पहले पीला पड़ने लगेगा और अंततः सूख जाएगा।

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