कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: दो ध्रुवीयता का अंत - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 'दो ध्रुवीयता का अंत' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय सोवियत संघ के विघटन के कारणों, प्रमुख घटनाओं जैसे बर्लिन की दीवार का गिरना और शॉक थेरेपी की अवधारणा पर केंद्रित है। समाधानों में बहुविकल्पीय प्रश्नों, कालानुक्रमिक घटनाओं के क्रम, मिलान वाले प्रश्नों और रिक्त स्थान भरने जैसे अभ्यासों को शामिल किया गया है। यह छात्रों को सोवियत संघ के पतन के बाद की विश्व व्यवस्था, नई शक्तियों के उदय और वैश्विक राजनीति पर इसके प्रभाव को समझने में मदद करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त समझ प्रदान करते हैं, जिससे वे जटिल अवधारणाओं को आसानी से आत्मसात कर सकें।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | समकालीन विश्व राजनीति |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 2. दो ध्रुवीयता का अंत |
Chapter summary
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 'दो ध्रुवीयता का अंत' के ये NCERT समाधान सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया और उसके वैश्विक प्रभाव पर केंद्रित हैं। इसमें बहुविकल्पीय प्रश्न, कालानुक्रमिक क्रम, मिलान और रिक्त स्थान भरने जैसे अभ्यास शामिल हैं, जो छात्रों को सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था, प्रमुख घटनाओं और परिणामों को समझने में मदद करते हैं। यह अध्याय शीत युद्ध के अंत और एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था के उदय की व्याख्या करता है।
Learning outcomes
- सोवियत संघ के विघटन के कारणों और परिणामों को समझना।
- शीत युद्ध के अंत से संबंधित प्रमुख घटनाओं के कालानुक्रमिक क्रम को पहचानना।
- शॉक थेरेपी जैसी आर्थिक अवधारणाओं को समझना।
- सोवियत राजनीतिक और आर्थिक प्रणाली की विशेषताओं का विश्लेषण करना।
- वैश्विक राजनीति पर दो ध्रुवीयता के अंत के प्रभाव का मूल्यांकन करना।
Topics covered
Paper topics
- सोवियत संघ का विघटन
- शीत युद्ध का अंत
- एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था
- शॉक थेरेपी
- वैचारिक संघर्ष
- साम्यवादी शासन
- राष्ट्रकुल (सी.आई.एस.)
- बर्लिन की दीवार
- सोवियत अर्थव्यवस्था
- मिखाइल गोर्बाचेव के सुधार
Important topics
- सोवियत संघ के विघटन के कारण और परिणाम
- शॉक थेरेपी की अवधारणा और प्रभाव
- शीत युद्ध के अंत से जुड़ी प्रमुख घटनाएँ
- एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था का उदय
- सोवियत अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (क) सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रकृति का वर्णन करने वाले निम्नलिखित कथनों में से कौन सा गलत है?
(अ) समाजवाद प्रमुख विचारधारा थी।
- (ब) उत्पादन के साधनो पर राज्य का स्वामित्व / नियंत्रण होना था ।
- (स) लोगों ने आर्थिक स्वतंत्रता का आनंद लिया।
- (द) अर्थव्यवस्था के हर पहलू की योजना और नियंत्रण राज्य द्वारा किया गया था।
सही उत्तर विकल्प (स) है। सोवियत अर्थव्यवस्था समाजवाद पर आधारित थी, जहाँ उत्पादन के साधनों पर राज्य का स्वामित्व और नियंत्रण होता था और अर्थव्यवस्था के हर पहलू की योजनाबद्ध तरीके से राज्य द्वारा निगरानी की जाती थी। इस प्रणाली में, व्यक्तिगत आर्थिक स्वतंत्रता सीमित थी, इसलिए यह कहना गलत है कि लोगों ने आर्थिक स्वतंत्रता का आनंद लिया।
प्रश्न 2
निम्नलिखित को कालक्रमानुसार सजाएँ:
- (क) अफ़गान संकट
- (ख) बर्लिन- दीवार का गिरना
- (ग) सोवियत संघ का विघटन
- (घ) रुसी क्रांति
घटनाओं का सही कालानुक्रमिक क्रम इस प्रकार है:
- (घ) रुसी क्रांति (1917)
- (क) अफ़गान संकट (1979)
- (ख) बर्लिन- दीवार का गिरना (1989)
- (ग) सोवियत संघ का विघटन (1991)
यह क्रम इन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के घटित होने के समय को दर्शाता है, जो विश्व राजनीति के बदलते परिदृश्य को समझने के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 3
निम्नलिखित में कौन सा सोवियत संघ के विघटन का परिणाम नहीं है?
- (क) संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच विचारधरात्मक लड़ाई का अंत
- (ख) स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रकुल (सी. आई. एस ) का जन्म
- (घ) मध्यपूर्व में संकट।
सोवियत संघ के विघटन का प्रत्यक्ष परिणाम 'मध्यपूर्व में संकट' नहीं है। सोवियत संघ के विघटन से संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच वैचारिक संघर्ष का अंत हुआ और स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रकुल (सी.आई.एस.) का जन्म हुआ। मध्यपूर्व में संकट एक जटिल क्षेत्रीय मुद्दा है जिसके कारण सोवियत विघटन से भिन्न हैं, हालांकि वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव ने अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र को प्रभावित किया हो सकता है।
प्रश्न 4
निम्नलिखित का मेल बैठाएं:
- मिख़ाइल गोर्बाचेव
- शॉक थेरेपी
- रूस
- बोरिस येल्तसिन
- वारसॉ
के साथ:
- (क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी
- (ख) सैन्य समझौता
- (ग) सुधारों की शुरुआत
- (घ) आर्थिक मॉडल
- (ङ) रूस के राष्ट्रपति
निम्नलिखित का सही मिलान इस प्रकार है:
- मिख़ाइल गोर्बाचेव - (ग) सुधारों की शुरुआत (उन्होंने सोवियत संघ में पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त जैसे सुधारों की शुरुआत की)
- शॉक थेरेपी - (घ) आर्थिक मॉडल (यह सोवियत संघ के विघटन के बाद अपनाई गई एक तीव्र बाजार-उन्मुख आर्थिक परिवर्तन की नीति थी)
- रूस - (क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी (रूस ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सोवियत संघ की जगह ली)
- बोरिस येल्तसिन - (ङ) रूस के राष्ट्रपति (वे सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस के पहले राष्ट्रपति बने)
- वारसॉ - (ख) सैन्य समझौता (वारसॉ पैक्ट सोवियत संघ के नेतृत्व वाला एक सैन्य गठबंधन था)
प्रश्न 5
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:
- (क) सोवियत राजनीतिक प्रणाली ..... की विचारधरा पर आधारित थी।
- (ख) सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबंध्न ......था।
- (ग) ...... पार्टी का सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर दबदबा था।
- (घ) ...... ने 1985 में सोवियत संघ में सुधरों की शुरुआत की।
(ड.) ..... का गिरना शीत युद्ध के अंत का प्रतीक था।
रिक्त स्थानों की पूर्ति इस प्रकार है:
- (क) सोवियत राजनीतिक प्रणाली समाजवाद की विचारधारा पर आधारित थी।
- (ख) सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबंध्न वारसा पैक्ट था।
- (ग) साम्यवादी (कम्युनिस्ट) पार्टी का सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर दबदबा था।
- (घ) मिखाइल गोर्बाचेव ने 1985 में सोवियत संघ में सुधरों की शुरुआत की।
- (ड.) बर्लिन दीवार का गिरना शीत युद्ध के अंत का प्रतीक था।
प्रश्न 6
सोवियत अर्थव्यवस्था को किसी पूँजीवादी देश जैसे संयुक्त राज्य अमरीका की अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली किन्हीं तीन विशेषताओं का जिक्र करें।
सोवियत अर्थव्यवस्था को संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी पूँजीवादी अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली तीन प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- स्वामित्व का स्वरूप: सोवियत संघ में, उत्पादन के सभी साधनों (जैसे कारखाने, भूमि) पर राज्य का स्वामित्व और नियंत्रण था। इसके विपरीत, पूँजीवादी देशों में निजी संपत्ति का अधिकार होता है और उत्पादन के साधनों का स्वामित्व व्यक्तियों या निजी कंपनियों के पास होता है।
- आर्थिक योजना: सोवियत अर्थव्यवस्था पूरी तरह से एक केंद्रीय योजना पर आधारित थी। राज्य अर्थव्यवस्था के हर पहलू, जैसे उत्पादन की मात्रा, वितरण और मूल्य निर्धारण, की योजना बनाता और उसे नियंत्रित करता था। पूँजीवादी अर्थव्यवस्थाएँ मुख्य रूप से बाजार की शक्तियों (मांग और आपूर्ति) द्वारा संचालित होती हैं, जिसमें सरकारी हस्तक्षेप न्यूनतम होता है।
- आर्थिक स्वतंत्रता: सोवियत प्रणाली में नागरिकों को सीमित आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त थी। उन्हें अपनी पसंद का व्यवसाय चुनने या निजी उद्यम स्थापित करने की बहुत कम स्वतंत्रता थी। पूँजीवादी अर्थव्यवस्थाओं में, व्यक्तियों को व्यवसाय चुनने, निवेश करने और लाभ कमाने की अधिक स्वतंत्रता होती है।
प्रश्न 7
क्या कारण थे जो गोर्बाचेव सोवियत संघ में सुधार करने के लिए मजबूर हुए?
मिखाइल गोर्बाचेव सोवियत संघ में सुधार करने के लिए कई कारणों से मजबूर हुए थे:
- आर्थिक ठहराव: सोवियत अर्थव्यवस्था लंबे समय से ठहराव का सामना कर रही थी। उत्पादन घट रहा था, प्रौद्योगिकी पिछड़ रही थी, और नागरिकों के लिए वस्तुओं की कमी हो रही थी। पश्चिमी देशों की तुलना में जीवन स्तर काफी नीचे था।
- राजनीतिक जड़ता और जवाबदेही की कमी: कम्युनिस्ट पार्टी का 70 वर्षों से अधिक समय तक शासन रहा था, जिससे राजनीतिक व्यवस्था में जड़ता आ गई थी। पार्टी नेतृत्व जनता के प्रति जवाबदेह नहीं था और नौकरशाही भ्रष्टाचार बढ़ रहा था।
- राष्ट्रवादी भावनाएँ: सोवियत संघ एक बहु-जातीय और विशाल देश था। विभिन्न गणराज्यों में राष्ट्रवादी भावनाएँ और अलगाववादी आंदोलन बढ़ रहे थे, जो संघ की एकता के लिए खतरा बन रहे थे।
- पश्चिमी देशों का प्रभाव: पश्चिमी देशों की आर्थिक समृद्धि और राजनीतिक स्वतंत्रता का सोवियत नागरिकों पर प्रभाव पड़ रहा था, जिससे वे अपनी व्यवस्था में बदलाव की माँग कर रहे थे।
- प्रौद्योगिकी में पिछड़ना: सैन्य और आर्थिक क्षेत्रों में पश्चिमी देशों की तुलना में सोवियत संघ प्रौद्योगिकी के मामले में पिछड़ रहा था, जिससे उसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो रही थी।
इन समस्याओं को दूर करने और सोवियत संघ को आधुनिक बनाने के लिए, गोर्बाचेव ने 'पेरेस्त्रोइका' (आर्थिक पुनर्गठन) और 'ग्लासनोस्त' (खुलापन) जैसी सुधार नीतियों की शुरुआत की।
Common mistakes
- सोवियत संघ के विघटन के कारणों और परिणामों को भ्रमित करना।
- प्रमुख घटनाओं के कालानुक्रमिक क्रम में त्रुटियाँ करना।
- शॉक थेरेपी के प्रभाव को गलत समझना।
- सोवियत अर्थव्यवस्था की विशेषताओं को पूंजीवादी अर्थव्यवस्था से अलग करने में चूक।
Revision tips
- सभी बहुविकल्पीय प्रश्नों और उनके सही उत्तरों की समीक्षा करें।
- प्रमुख घटनाओं के कालानुक्रमिक क्रम को याद करने के लिए फ़्लैशकार्ड का उपयोग करें।
- शॉक थेरेपी और उसके प्रभावों पर विशेष ध्यान दें।
- सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था और पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के बीच अंतर को समझें।
Practice MCQs
Q1. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रकृति का वर्णन करने के लिए गलत है?
Explanation: सोवियत अर्थव्यवस्था में, लोगों को सीमित आर्थिक स्वतंत्रता थी क्योंकि उत्पादन के साधनों पर राज्य का पूर्ण नियंत्रण था, इसलिए यह कथन गलत है कि लोगों ने आर्थिक स्वतंत्रता का आनंद लिया।
Q2. निम्नलिखित घटनाओं को उनके कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करें:
Explanation: रुसी क्रांति (1917) सबसे पहले हुई, उसके बाद अफ़गान संकट (1979), फिर बर्लिन की दीवार का गिरना (1989), और अंत में सोवियत संघ का विघटन (1991) हुआ।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा सोवियत संघ के विघटन का प्रत्यक्ष परिणाम नहीं माना जाता है?
Explanation: मध्यपूर्व में संकट सोवियत संघ के विघटन का सीधा परिणाम नहीं था, हालांकि वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव ने अप्रत्यक्ष रूप से क्षेत्रीय संघर्षों को प्रभावित किया हो सकता है।
Q4. किस नेता ने 1985 में सोवियत संघ में सुधारों की शुरुआत की?
Explanation: मिखाइल गोर्बाचेव ने 1985 में सोवियत संघ में राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की शुरुआत की, जिन्हें 'पेरेस्त्रोइका' और 'ग्लासनोस्त' के नाम से जाना जाता है।
Q5. किस घटना का गिरना शीत युद्ध के अंत का प्रतीक माना जाता है?
Explanation: बर्लिन की दीवार का गिरना (1989) पूर्वी और पश्चिमी यूरोप के बीच विभाजन के अंत और शीत युद्ध की समाप्ति का एक शक्तिशाली प्रतीक बन गया।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह समाधान कक्षा 12 के लिए राजनीति विज्ञान (समकालीन विश्व राजनीति) विषय का है, जो विशेष रूप से अध्याय 2 'दो ध्रुवीयता का अंत' पर केंद्रित है।
इस अध्याय में किन प्रमुख अवधारणाओं को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में सोवियत संघ के विघटन के कारण, बर्लिन की दीवार का गिरना, शॉक थेरेपी, स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रकुल का गठन और शीत युद्ध के अंत जैसी प्रमुख अवधारणाओं को शामिल किया गया है।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान विस्तृत स्पष्टीकरण, प्रमुख घटनाओं के कालानुक्रमिक क्रम और अभ्यास प्रश्नों के उत्तर प्रदान करके परीक्षा की तैयारी में बहुत मदद करेंगे।
सोवियत अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ क्या थीं?
सोवियत अर्थव्यवस्था समाजवाद पर आधारित थी, जिसमें उत्पादन के साधनों पर राज्य का स्वामित्व और नियंत्रण होता था। योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था थी और लोगों को सीमित आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त थी।
शॉक थेरेपी का क्या अर्थ है?
शॉक थेरेपी एक आर्थिक मॉडल था जिसे सोवियत संघ के विघटन के बाद पूर्व साम्यवादी देशों में अपनाया गया था। इसका उद्देश्य तेजी से बाजार अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण करना था, जिसमें निजीकरण और सरकारी नियंत्रण को कम करना शामिल था।
बर्लिन की दीवार का गिरना क्यों महत्वपूर्ण था?
बर्लिन की दीवार का गिरना (1989) शीत युद्ध के अंत और पूर्वी यूरोप में साम्यवाद के पतन का एक शक्तिशाली प्रतीक था, जिसने यूरोप के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त किया।
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