कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 3, 'समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय समकालीन विश्व व्यवस्था में संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रभुत्व की प्रकृति और आयामों की पड़ताल करता है। समाधान वर्चस्व की अवधारणा, इसके विभिन्न रूपों (जैसे सैन्य, आर्थिक और सांस्कृतिक), और शीत युद्ध के बाद से अमेरिकी शक्ति के विकास पर प्रकाश डालते हैं। इसमें ऑपरेशन इराकी फ्रीडम जैसे प्रमुख सैन्य अभियानों और अमेरिकी वर्चस्व पर विभिन्न बाधाओं पर भी चर्चा की गई है। ये समाधान छात्रों को अमेरिकी वर्चस्व के जटिल तंत्र को समझने, महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं का विश्लेषण करने और वैश्विक राजनीति में इसके निहितार्थों का मूल्यांकन करने में मदद करते हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए, ये समाधान प्रमुख अवधारणाओं को स्पष्ट करने और अभ्यास प्रश्नों के उत्तर देने के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में काम करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | समकालीन विश्व राजनीति |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 3. समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व |
Chapter summary
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 3, 'समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व' के लिए ये NCERT समाधान, वैश्विक मंच पर संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रमुखता की पड़ताल करते हैं। यह अध्याय अमेरिकी वर्चस्व के विभिन्न आयामों, जैसे सैन्य शक्ति, आर्थिक प्रभुत्व और सांस्कृतिक प्रभाव को स्पष्ट करता है। समाधानों में वर्चस्व की अवधारणा, इसके विभिन्न प्रकारों और शीत युद्ध के बाद से अमेरिकी शक्ति के विकास पर चर्चा की गई है। यह अध्याय प्रमुख अमेरिकी सैन्य अभियानों और समकालीन विश्व में अमेरिकी प्रभुत्व को प्रभावित करने वाली बाधाओं का भी विश्लेषण करता है।
Learning outcomes
- वर्चस्व की अवधारणा और इसके विभिन्न रूपों को समझना।
- समकालीन विश्व में अमेरिकी प्रभुत्व के कारणों और अभिव्यक्तियों का विश्लेषण करना।
- अमेरिकी सैन्य अभियानों और वैश्विक राजनीति पर उनके प्रभाव का मूल्यांकन करना।
- अमेरिकी वर्चस्व पर विभिन्न बाधाओं और चुनौतियों की पहचान करना।
- वैश्विक व्यवस्था में अमेरिकी शक्ति की भूमिका और महत्व को समझना।
Topics covered
Paper topics
- वर्चस्व की अवधारणा
- अमेरिकी वर्चस्व के प्रकार (हार्ड पावर, स्ट्रक्चरल पावर, सॉफ्ट पावर)
- शीत युद्ध के बाद की विश्व व्यवस्था
- ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म
- ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच
- ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम
- ऑपरेशन इराकी फ्रीडम
- अमेरिकी वर्चस्व पर बाधाएं
- वैश्विक राजनीति में अमेरिका की भूमिका
- सैन्य शक्ति
- आर्थिक शक्ति
- सांस्कृतिक शक्ति
Important topics
- वर्चस्व के विभिन्न प्रकार और उनके उदाहरण
- अमेरिकी सैन्य अभियानों का विश्लेषण
- शीत युद्ध के बाद अमेरिकी प्रभुत्व की विशिष्टताएँ
- अमेरिकी वर्चस्व पर वर्तमान बाधाएँ
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
(अ) इस शब्द का अर्थ है एक देश का नेतृत्व या प्रबलता।
(ब) इसका उपयोग प्राचीन ग्रीस में एथेंस की प्रबलता को दर्शाने के लिए किया गया था।
(स) वर्चस्वशील स्थिति वाले देश के पास सैन्य शक्ति अजेय होती है।
(द) वर्चस्व की स्थिति नियत है। जिसने एक बार वर्चस्व कायम कर लिया उसने हमेशा के लिए वर्चस्व कायम कर लिया।
वर्चस्व का अर्थ है किसी एक देश का अन्य देशों पर नेतृत्व या प्रबलता। यह शब्द प्राचीन ग्रीस में एथेंस की प्रबलता को दर्शाने के लिए भी इस्तेमाल किया गया था। हालाँकि, यह कहना गलत है कि वर्चस्वशील देश की सैन्य शक्ति हमेशा अजेय होती है; अन्य देश भी अपनी सैन्य क्षमता विकसित कर सकते हैं। इसके अलावा, वर्चस्व की स्थिति नियत नहीं होती; यह समय के साथ बदल सकती है और इसे बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। इसलिए, कथन (द) गलत है क्योंकि वर्चस्व की स्थिति स्थायी नहीं होती।
सही उत्तर है: (द) वर्चस्व की स्थिति नियत है। जिसने एक बार वर्चस्व कायम कर लिया उसने हमेशा के लिए वर्चस्व कायम कर लिया।
प्रश्न 2
(अ) विश्व सरकार की अनुपस्थिति है, जो राज्य के व्यवहार को नियंत्रित कर सकती है।
(ब) अमेरिका विश्व के मामले में सबसे प्रमुख है।
(स) देश एक दूसरे के खिलाफ बलों का उपयोग कर रहे हैं।
(द) अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाले देशों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा कड़ी सजा दी जाती है।
समकालीन विश्व व्यवस्था की विशेषता यह है कि कोई वैश्विक सरकार नहीं है जो राज्यों के व्यवहार को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सके। संयुक्त राज्य अमेरिका वर्तमान में विश्व मामलों में सबसे प्रमुख शक्ति है। यह सच है कि विभिन्न देशों के बीच संघर्षों में बलों का उपयोग होता रहा है। हालाँकि, यह कथन कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाले देशों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा कड़ी सजा दी जाती है, हमेशा सही नहीं होता है। संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई अक्सर सदस्य देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और सहमति पर निर्भर करती है, जो हमेशा प्रभावी सजा सुनिश्चित नहीं करती है। इसलिए, कथन (द) गलत है।
सही उत्तर है: (अ) विश्व सरकार की अनुपस्थिति है, जो राज्य के व्यवहार को नियंत्रित कर सकती है।
प्रश्न 3
(अ) इराक पर आक्रमण करने के लिए अमेरिका के नेतृत्व में चालीस से अधिक देशों ने भाग लिया।
(ब) इराक पर हमला करने का कारण इसे सामूहिक विनाश के हथियार विकसित करने से रोकना था।
(स) संयुक्त राष्ट्र की पूर्व स्वीकृति के साथ कार्रवाई की गई थी।
(द) अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन को इराकी बलों के बड़े प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा।
ऑपरेशन इराकी स्वतंत्रता (2003) एक विवादास्पद सैन्य अभियान था। जबकि यह सच है कि अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन में कई देश शामिल थे और इसका घोषित उद्देश्य इराक को सामूहिक विनाश के हथियारों के विकास से रोकना था, यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र की पूर्व स्वीकृति के बिना की गई थी। यह संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के सिद्धांतों के विपरीत था और इसलिए यह कथन (स) गलत है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि गठबंधन को इराकी बलों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था, हालांकि यह प्रतिरोध अपेक्षा से कम तीव्र हो सकता है।
सही उत्तर है: (स) संयुक्त राष्ट्र की पूर्व स्वीकृति के साथ कार्रवाई की गई थी।
प्रश्न 4
अध्याय में तीन प्रकार के वर्चस्व का उल्लेख किया गया है: हार्ड पावर, स्ट्रक्चरल पावर और सॉफ्ट पावर।
- हार्ड पावर के रूप में वर्चस्व: इसका तात्पर्य सैन्य शक्ति के प्रभुत्व से है। इसका एक प्रमुख उदाहरण संयुक्त राज्य अमेरिका की वर्तमान सैन्य क्षमता है, जो दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक उन्नत और शक्तिशाली हथियारों का उत्पादन और तैनाती करती है।
- स्ट्रक्चरल पावर के रूप में वर्चस्व: इसका तात्पर्य वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों पर प्रभुत्व से है। सोवियत संघ के विघटन के बाद, अमेरिका ने विश्व अर्थव्यवस्था की संरचना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों पर उसका प्रभाव भी शामिल है।
- सॉफ्ट पावर के रूप में वर्चस्व: इसका तात्पर्य सांस्कृतिक प्रभाव, विचारों के प्रसार और सहमति बनाने की क्षमता से है। मैकडॉनल्ड्स, पेप्सी और हॉलीवुड फिल्मों जैसी अमेरिकी कंपनियों और सांस्कृतिक उत्पादों का वैश्विक प्रसार सॉफ्ट पावर का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो दुनिया भर के बाजारों और लोगों की पसंद को प्रभावित करता है।
प्रश्न 5
शीत युद्ध के बाद (1991 के बाद) अमेरिका का प्रभुत्व शीत युद्ध के दौरान एक महाशक्ति के रूप में उसकी स्थिति से कई मायनों में भिन्न है:
- एकध्रुवीयता (Unipolarity): शीत युद्ध के दौरान, दुनिया द्विध्रुवीय (अमेरिका और सोवियत संघ) थी। शीत युद्ध के बाद, सोवियत संघ के विघटन के साथ, अमेरिका एकमात्र महाशक्ति (एकध्रुवीय विश्व) के रूप में उभरा, जिससे उसे वैश्विक मामलों में अभूतपूर्व स्वतंत्रता और प्रभाव मिला।
- सैन्य और तकनीकी श्रेष्ठता का प्रदर्शन: प्रथम खाड़ी युद्ध (1991) जैसे अभियानों ने अमेरिकी सेना और अन्य देशों की सेनाओं के बीच विशाल तकनीकी अंतर को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया। स्मार्ट बमों जैसे उन्नत हथियारों का उपयोग कंप्यूटर युद्ध की एक नई अवधारणा को सामने लाया, जो शीत युद्ध के दौरान संभव नहीं था।
- वैश्विक संस्थानों पर प्रभाव: हालाँकि अमेरिका शीत युद्ध के दौरान भी एक प्रमुख शक्ति था, लेकिन शीत युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में उसका प्रभुत्व और भी स्पष्ट हो गया। वह सबसे बड़ा वित्तीय योगदानकर्ता बना रहा, जिससे उसे इन संस्थानों के एजेंडे और निर्णयों को प्रभावित करने की अधिक शक्ति मिली।
प्रश्न 6
(1) ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच
(2) ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम
(3) ऑपरेशन डेजर्ट स्टार्म
(4) ऑपरेशन इराकी फ्रीडम
(क) तालिबान और अल-कायदा के खिलाफ जंग
(ख) इराक पर हमले के इच्छुक देशों का गठबंधन
(ग) सूडान पर मिसाइल से हमला
(घ) प्रथम खाड़ी युद्ध
यहाँ दिए गए ऑपरेशनों का उनके संबंधित विवरणों से सही मिलान इस प्रकार है:
- (1) ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच - (ग) सूडान पर मिसाइल से हमला: यह ऑपरेशन 1998 में अमेरिका द्वारा सूडान में एक रासायनिक कारखाने पर मिसाइल हमले के रूप में किया गया था।
- (2) ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम - (क) तालिबान और अल-कायदा के खिलाफ जंग: यह ऑपरेशन 2001 में 9/11 के हमलों के बाद अफगानिस्तान में तालिबान और अल-कायदा के खिलाफ शुरू किया गया था।
- (3) ऑपरेशन डेजर्ट स्टार्म - (घ) प्रथम खाड़ी युद्ध: यह ऑपरेशन 1991 में कुवैत से इराकी सेना को बाहर निकालने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा प्रथम खाड़ी युद्ध के दौरान किया गया था।
- (4) ऑपरेशन इराकी फ्रीडम - (ख) इराक पर हमले के इच्छुक देशों का गठबंधन: यह ऑपरेशन 2003 में इराक पर आक्रमण के लिए था, जिसमें अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भाग लिया था।
प्रश्न 7
1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद से, अमेरिका ने हार्ड पावर, स्ट्रक्चरल पावर और सॉफ्ट पावर के रूप में वैश्विक वर्चस्व का अनुभव किया है। हालाँकि, आज अमेरिकी वर्चस्व पर कई अड़चनें हैं:
- अन्य शक्तियों का उदय: चीन जैसी उभरती हुई आर्थिक और सैन्य शक्तियाँ धीरे-धीरे अमेरिका के प्रभुत्व को चुनौती दे रही हैं। रूस भी अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है।
- अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में असहमति: संयुक्त राष्ट्र और विश्व व्यापार संगठन जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका के प्रस्तावों और नीतियों पर अक्सर अन्य देशों द्वारा सवाल उठाए जाते हैं या उनका विरोध किया जाता है।
- आर्थिक चुनौतियाँ: अमेरिका को अपने विशाल राष्ट्रीय ऋण और व्यापार घाटे जैसी आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जो उसकी वैश्विक आर्थिक शक्ति को प्रभावित कर सकती हैं।
- सॉफ्ट पावर का क्षरण: कुछ अमेरिकी नीतियों, जैसे कि इराक युद्ध या जलवायु परिवर्तन पर रुख, ने दुनिया भर में अमेरिका की सॉफ्ट पावर को नुकसान पहुँचाया है।
- आतंकवाद और गैर-राज्य कर्ता: अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे आतंकवादी समूह और अन्य गैर-राज्य कर्ता भी पारंपरिक राज्य-आधारित शक्ति संरचनाओं के लिए चुनौतियाँ पेश करते हैं।
भविष्य में अधिक महत्वपूर्ण होने की उम्मीद:
भविष्य में, **अन्य शक्तियों का उदय**, विशेष रूप से चीन का आर्थिक और सैन्य विकास, अमेरिकी वर्चस्व के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती बनने की उम्मीद है। चीन की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति और प्रभाव अमेरिका के एकध्रुवीय प्रभुत्व को कम कर सकता है और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर ले जा सकता है। इसके अतिरिक्त, **अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में असहमति** और **सॉफ्ट पावर का क्षरण** भी अमेरिकी प्रभाव को सीमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Common mistakes
- वर्चस्व के विभिन्न प्रकारों (हार्ड पावर, स्ट्रक्चरल पावर, सॉफ्ट पावर) के बीच अंतर करने में भ्रमित होना।
- अमेरिकी सैन्य अभियानों के उद्देश्यों और परिणामों को गलत समझना।
- वर्चस्व की प्रकृति को स्थिर मानना और यह भूल जाना कि यह गतिशील है और इसमें बाधाएं हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका और अमेरिकी वर्चस्व के साथ उनके संबंध को कम आंकना।
Revision tips
- वर्चस्व के तीन मुख्य प्रकारों - हार्ड पावर, स्ट्रक्चरल पावर और सॉफ्ट पावर - के उदाहरणों को याद करें।
- प्रमुख अमेरिकी सैन्य अभियानों (जैसे डेजर्ट स्टॉर्म, इराकी फ्रीडम) और उनके उद्देश्यों को समझें।
- उन बाधाओं की सूची बनाएं जो वर्तमान में अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देती हैं।
- शीत युद्ध के दौरान और बाद में अमेरिकी शक्ति की तुलना करने वाले बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Practice MCQs
Q1. निम्नलिखित में से कौन सा कथन वर्चस्व के बारे में गलत है?
Explanation: वर्चस्वशील देश की सैन्य शक्ति बहुत मजबूत होती है, लेकिन यह हमेशा अजेय नहीं होती है। अन्य देश भी समय के साथ अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा सकते हैं।
Q2. समकालीन विश्व व्यवस्था के बारे में कौन सा कथन गलत है?
Explanation: अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाले देशों को हमेशा संयुक्त राष्ट्र द्वारा कड़ी सजा नहीं दी जाती है। संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई अक्सर सदस्य देशों की सहमति पर निर्भर करती है, जो हमेशा संभव नहीं होता।
Q3. ऑपरेशन इराकी फ्रीडम के संबंध में कौन सा कथन गलत है?
Explanation: ऑपरेशन इराकी फ्रीडम संयुक्त राष्ट्र की पूर्व स्वीकृति के बिना की गई कार्रवाई थी, जो इसे विवादास्पद बनाती है।
Q4. निम्नलिखित में से कौन सा वर्चस्व का एक प्रकार नहीं है जैसा कि अध्याय में बताया गया है?
Explanation: अध्याय में हार्ड पावर, स्ट्रक्चरल पावर और सॉफ्ट पावर का उल्लेख किया गया है। डिजिटल पावर का विशेष रूप से इन तीन श्रेणियों के तहत उल्लेख नहीं किया गया है।
Q5. ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच का संबंध किस देश पर हमले से था?
Explanation: ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच सूडान पर मिसाइल हमले से संबंधित था।
Frequently asked questions
समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व का क्या अर्थ है?
समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व का अर्थ है कि संयुक्त राज्य अमेरिका वैश्विक मामलों में सैन्य, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से सबसे प्रमुख और प्रभावशाली देश है।
वर्चस्व के तीन मुख्य प्रकार कौन से हैं?
अध्याय में बताए गए तीन मुख्य प्रकार हैं: हार्ड पावर (सैन्य शक्ति), स्ट्रक्चरल पावर (आर्थिक और संस्थागत शक्ति), और सॉफ्ट पावर (सांस्कृतिक प्रभाव और विचारों का प्रसार)।
ऑपरेशन इराकी फ्रीडम क्यों विवादास्पद था?
ऑपरेशन इराकी फ्रीडम विवादास्पद था क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र की पूर्व स्वीकृति के बिना किया गया था और इसके घोषित कारणों (सामूहिक विनाश के हथियार) पर सवाल उठाए गए थे।
क्या अमेरिकी वर्चस्व पर कोई बाधाएं हैं?
हाँ, अमेरिकी वर्चस्व पर कई बाधाएं हैं, जिनमें अन्य देशों का बढ़ता सैन्य और आर्थिक प्रभाव, अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में असहमति और अमेरिकी नीतियों के प्रति वैश्विक विरोध शामिल हैं।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?
यह समाधान छात्रों को अध्याय की प्रमुख अवधारणाओं को समझने, महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण करने और परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्नों के उत्तर तैयार करने में मदद करता है।
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