कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: समकालीन विश्व राजनीति - पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 के लिए समकालीन विश्व राजनीति के अध्याय 8, 'पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय वैश्विक पर्यावरण के सामने आने वाली प्रमुख चिंताओं, जैसे कि मानवीय गतिविधियों से होने वाले क्षरण, और पृथ्वी शिखर सम्मेलन और रियो शिखर सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों पर प्रकाश डालता है। समाधान 'विश्व की साझी विरासत' की अवधारणा, इसके शोषण और प्रदूषण के मुद्दों, और 'साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियों' के सिद्धांत की पड़ताल करते हैं। यह बताता है कि कैसे पर्यावरणीय मुद्दे 1990 के दशक से देशों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय बन गए हैं, जिसमें एजेंडा 21 और क्योटो प्रोटोकॉल जैसे समझौतों का उल्लेख है। ये विस्तृत समाधान छात्रों को इन जटिल पर्यावरणीय चुनौतियों और वैश्विक प्रतिक्रियाओं को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | समकालीन विश्व राजनीति |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 8. पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन |
Chapter summary
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 8, 'पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन' के लिए NCERT समाधान, वैश्विक पर्यावरण के मुद्दों पर केंद्रित हैं। यह अध्याय पर्यावरणीय क्षरण के कारणों, विशेष रूप से मानवीय गतिविधियों के प्रभाव, और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर चर्चा करता है। समाधान पृथ्वी शिखर सम्मेलन और रियो शिखर सम्मेलन जैसे प्रमुख वैश्विक मंचों के परिणामों और महत्व की व्याख्या करते हैं। यह 'विश्व की साझी विरासत' की अवधारणा और इसके प्रबंधन से संबंधित विवादों को भी स्पष्ट करता है। इसके अतिरिक्त, यह 'साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियों' के सिद्धांत और 1990 के दशक से पर्यावरणीय चिंताओं के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है।
Learning outcomes
- पर्यावरण के बारे में बढ़ती चिंताओं के कारणों को समझना।
- पृथ्वी शिखर सम्मेलन और रियो शिखर सम्मेलन के महत्व और परिणामों का विश्लेषण करना।
- 'विश्व की साझी विरासत' की अवधारणा और इसके प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट करना।
- 'साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियों' के सिद्धांत की व्याख्या करना।
- वैश्विक पर्यावरण संरक्षण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका का मूल्यांकन करना।
Topics covered
Paper topics
- पर्यावरणीय चिंताएँ
- मानवीय गतिविधियाँ और पर्यावरण
- पृथ्वी शिखर सम्मेलन (1992)
- रियो शिखर सम्मेलन (1992)
- विश्व की साझी विरासत
- साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ
- सतत विकास
- एजेंडा 21
- क्योटो प्रोटोकॉल
- वैश्विक पर्यावरण राजनीति
Important topics
- पर्यावरणीय क्षरण के कारण और प्रभाव
- पृथ्वी शिखर सम्मेलन और रियो शिखर सम्मेलन के निष्कर्ष
- 'विश्व की साझी विरासत' की अवधारणा
- 'साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियों' का सिद्धांत
- सतत विकास की अवधारणा
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- (क) विकसित देश प्रकृति की रक्षा के लिए चिंतित हैं।
- (ख) पर्यावरण का संरक्षण स्वदेशी लोगों और प्राकृतिक आवासों के लिए महत्वपूर्ण है।
- (ग) मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाला पर्यावरणीय ह्रास व्यापक हो गया है और खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है।
- (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
(ग) मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाला पर्यावरणीय ह्रास व्यापक हो गया है और खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है।
स्पष्टीकरण: पर्यावरण के बारे में बढ़ती चिंता का मुख्य कारण यह है कि मानवीय गतिविधियों, जैसे औद्योगीकरण, शहरीकरण और संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण पर्यावरण का क्षरण बहुत बड़े पैमाने पर हो गया है और यह खतरनाक स्तर तक पहुँच गया है। इसके परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का नुकसान और प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं।
प्रश्न 2
- (क) इसमें 170 देशों, हजारों एनजीओ और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया।
- (ख) शिखर सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
- (ग) पहली बार, वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों को राजनीतिक स्तर पर मजबूती से पेश किया गया।
- (घ) यह एक महासम्मेलनी बैठक थी।
- (क) सही - पृथ्वी शिखर सम्मेलन (1992) में 170 से अधिक देशों, हजारों गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया था।
- (ख) गलत - पृथ्वी शिखर सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (UNCED) के रूप में संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। यह कथन गलत है क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में ही आयोजित हुआ था, इसलिए यह सही होना चाहिए। (स्रोत के अनुसार उत्तर गलत दिया गया है, लेकिन ऐतिहासिक तथ्य यह है कि यह संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में हुआ था)।
- (ग) सही - इस सम्मेलन में पहली बार वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों को अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर प्रमुखता से उठाया गया और उन पर चर्चा हुई।
- (घ) गलत - यह एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन था, लेकिन इसे केवल 'महासम्मेलनी बैठक' कहना इसके महत्व को कम कर सकता है। यह एक व्यापक शिखर सम्मेलन था जिसका उद्देश्य पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर समाधान खोजना था।
प्रश्न 3
- (क) पृथ्वी के वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्र तल और बाहरी अंतरिक्ष को 'विश्व की साझी विरासत' माना जाता है।
- (ख) 'विश्व की साझी विरासत' संप्रभु क्षेत्राधिकार के बाहर हैं।
- (ग) 'विश्व की साझी विरासत' के प्रबंधन के सवाल पर उत्तर-दक्षिण देशों के बीच मतभेद है।
- (घ) उत्तर के देश, दक्षिण के देशों की तुलना में 'विश्व की साझी विरासत' के संरक्षण के लिए अधिक चिंतित हैं।
(क) पृथ्वी के वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्र तल और बाहरी अंतरिक्ष को 'विश्व की साझी विरासत' माना जाता है।
स्पष्टीकरण: 'विश्व की साझी विरासत' उन प्राकृतिक संसाधनों और क्षेत्रों को कहा जाता है जो किसी एक राष्ट्र के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, बल्कि पूरी मानवता के साझा हित के होते हैं। इनमें पृथ्वी का वायुमंडल, महासागरों के तल, अंटार्कटिका और बाहरी अंतरिक्ष शामिल हैं। इन क्षेत्रों के प्रबंधन को लेकर विकसित (उत्तर) और विकासशील (दक्षिण) देशों के बीच अक्सर मतभेद रहे हैं, क्योंकि उनके हित और क्षमताएं अलग-अलग होती हैं।
प्रश्न 4
रियो शिखर सम्मेलन (1992), जिसे पृथ्वी शिखर सम्मेलन भी कहा जाता है, के कई महत्वपूर्ण सकारात्मक परिणाम हुए:
- अंतर्राष्ट्रीय समझौते: इसने जलवायु परिवर्तन (UNFCCC), जैव विविधता (CBD), और वनों के प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण सम्मेलनों को जन्म दिया।
- एजेंडा 21: यह सतत विकास के लिए एक विस्तृत कार्य योजना थी, जिसने आर्थिक विकास को पारिस्थितिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ने की सिफारिश की।
- सतत विकास की अवधारणा: इसने भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों से समझौता किए बिना वर्तमान की जरूरतों को पूरा करने वाले विकास के विचार को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।
- वैश्विक जागरूकता: इसने पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर वैश्विक राजनीतिक चेतना को बढ़ाया और 'विश्व की साझी विरासत' जैसे विवादास्पद मुद्दों को चर्चा में लाया।
कुल मिलाकर, रियो शिखर सम्मेलन ने वैश्विक पर्यावरण राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ प्रदान किया।
प्रश्न 5
'विश्व की साझी विरासत' का अर्थ: 'विश्व की साझी विरासत' उन प्राकृतिक क्षेत्रों और संसाधनों को संदर्भित करती है जो किसी भी एक देश के संप्रभु अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और पूरी मानवता के साझा हित के माने जाते हैं। इनमें पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, गहरे समुद्र और बाहरी अंतरिक्ष शामिल हैं।
शोषण और प्रदूषण: इन साझी विरासतों का शोषण और प्रदूषण कई कारणों से होता है:
- अस्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण और आम सहमति की कमी: कुछ पर्यावरणीय मुद्दों पर वैज्ञानिक समझ अभी भी विकसित हो रही है, जिससे उनके प्रभाव को लेकर आम सहमति बनाना मुश्किल होता है।
- उत्तर-दक्षिण असमानताएँ: विकसित (उत्तर) और विकासशील (दक्षिण) देशों के बीच आर्थिक असमानताएँ हैं। विकसित देश अक्सर अपने औद्योगिक विकास के लिए इन संसाधनों का अधिक उपयोग करते हैं, जबकि विकासशील देश गरीबी उन्मूलन के लिए संसाधनों पर निर्भर हो सकते हैं।
- प्रबंधन का अभाव: चूँकि ये क्षेत्र किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं हैं, इसलिए उनके प्रबंधन के लिए एक प्रभावी अंतर्राष्ट्रीय ढाँचे का अभाव है। इससे प्रतिस्पर्धा और अनियंत्रित दोहन को बढ़ावा मिलता है। उदाहरण के लिए, बाहरी अंतरिक्ष में उपग्रहों की बढ़ती संख्या और समुद्री संसाधनों का अंधाधुंध दोहन इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 6
'साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियों' का अभिप्राय: यह सिद्धांत स्वीकार करता है कि सभी देशों की पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और अखंडता को बनाए रखने में एक साझा जिम्मेदारी है। हालाँकि, यह भी मानता है कि विभिन्न देशों की पर्यावरणीय समस्याओं में ऐतिहासिक योगदान और वर्तमान क्षमताएँ अलग-अलग हैं। इसलिए, विकसित देशों पर, जिनके पास अधिक तकनीकी और वित्तीय संसाधन हैं और जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से अधिक पर्यावरणीय क्षति पहुंचाई है, विकासशील देशों की तुलना में अधिक जिम्मेदारी है।
इस विचार को लागू करना: इस विचार को निम्नलिखित तरीकों से लागू किया जा सकता है:
- अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और समझौते: रियो शिखर सम्मेलन (1992) जैसे मंचों ने इस सिद्धांत को अपनाया। इस सम्मेलन ने एजेंडा 21 की सिफारिश की, जिसमें सतत विकास के लिए एक वैश्विक साझेदारी का प्रस्ताव था।
- वित्तीय और तकनीकी सहायता: विकसित देश विकासशील देशों को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए वित्तीय सहायता और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रदान कर सकते हैं।
- विशिष्ट समझौते: जलवायु परिवर्तन पर क्योटो प्रोटोकॉल जैसे समझौतों ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए विभिन्न देशों के लिए अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए, जो इस सिद्धांत को दर्शाता है।
- जागरूकता और सहयोग: वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और सहयोग को बढ़ावा देना भी इस सिद्धांत को लागू करने में मदद करता है।
प्रश्न 7
1990 के दशक से वैश्विक पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दे देशों की प्राथमिक चिंता बनने के कई कारण हैं:
- बढ़ती पर्यावरणीय समस्याएँ: इस अवधि तक, जलवायु परिवर्तन, ओजोन परत का क्षरण, जैव विविधता का नुकसान और प्रदूषण जैसी पर्यावरणीय समस्याएँ स्पष्ट रूप से दिखने लगी थीं और उनके वैश्विक प्रभाव महसूस किए जाने लगे थे।
- अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों का प्रभाव: जून 1992 में रियो-डी-जेनेरियो में आयोजित पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (पृथ्वी शिखर सम्मेलन) एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इसने वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों को अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे पर प्रमुखता से रखा।
- एजेंडा 21 और सतत विकास: रियो शिखर सम्मेलन से निकले एजेंडा 21 ने पारिस्थितिक जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक विकास को एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे देशों को अपनी विकास नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ा।
- अंतर्राष्ट्रीय समझौते: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए क्योटो प्रोटोकॉल जैसे अंतर्राष्ट्रीय समझौतों ने देशों को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए बाध्य किया, जिससे पर्यावरण संरक्षण एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया।
- गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और जन दबाव: पर्यावरण के मुद्दों पर काम करने वाले राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों की बढ़ती सक्रियता और जन जागरूकता ने भी सरकारों पर पर्यावरण संरक्षण के लिए कदम उठाने का दबाव बढ़ाया।
इन सब कारणों से, वैश्विक पर्यावरण संरक्षण 1990 के दशक के बाद से देशों की विदेश और घरेलू नीतियों का एक अभिन्न अंग बन गया।
Common mistakes
- पृथ्वी शिखर सम्मेलन के आयोजकों और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका के बारे में भ्रमित होना।
- 'विश्व की साझी विरासत' के उदाहरणों और उनके प्रबंधन पर असहमति को गलत समझना।
- 'साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियों' के सिद्धांत के निहितार्थों को पूरी तरह से न समझना।
Revision tips
- पर्यावरण संबंधी प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों जैसे पृथ्वी शिखर सम्मेलन और रियो शिखर सम्मेलन की तारीखों और मुख्य निष्कर्षों को याद करें।
- 'विश्व की साझी विरासत' और 'साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियों' जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझें।
- पर्यावरणीय क्षरण के कारणों और वैश्विक समाधानों के बीच संबंध स्थापित करें।
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए प्रमुख शब्दों और सिद्धांतों को रेखांकित करें।
Practice MCQs
Q1. पर्यावरण के बारे में बढ़ती चिंताओं का मुख्य कारण क्या है?
Explanation: मानवीय गतिविधियों के कारण पर्यावरणीय क्षरण का खतरनाक स्तर तक पहुंचना पर्यावरण संबंधी चिंताओं का प्रमुख कारण है।
Q2. पृथ्वी शिखर सम्मेलन में कितने देशों ने भाग लिया था?
Explanation: पृथ्वी शिखर सम्मेलन में 170 से अधिक देशों, हजारों गैर-सरकारी संगठनों और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया था।
Q3. निम्नलिखित में से किसे 'विश्व की साझी विरासत' का हिस्सा नहीं माना जाता है?
Explanation: किसी एक राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर स्थित क्षेत्र, जैसे वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्र तल और बाहरी अंतरिक्ष को 'विश्व की साझी विरासत' माना जाता है, न कि किसी देश का आंतरिक जल क्षेत्र।
Q4. रियो शिखर सम्मेलन ने किस अवधारणा को बढ़ावा दिया?
Explanation: रियो शिखर सम्मेलन ने सतत विकास की अवधारणा को बढ़ावा दिया, जिसमें पारिस्थितिक जिम्मेदारी के साथ आर्थिक विकास को जोड़ा गया।
Q5. 'साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियों' का सिद्धांत क्या दर्शाता है?
Explanation: यह सिद्धांत वैश्विक पर्यावरण के संरक्षण में सहयोग की आवश्यकता पर बल देता है, साथ ही यह स्वीकार करता है कि विभिन्न देशों की ऐतिहासिक और वर्तमान क्षमताएं अलग-अलग हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 8 में किन मुख्य पर्यावरणीय मुद्दों पर चर्चा की गई है?
अध्याय 8 मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाले पर्यावरणीय क्षरण, 'विश्व की साझी विरासत' की अवधारणा, और पृथ्वी शिखर सम्मेलन व रियो शिखर सम्मेलन जैसे अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों पर चर्चा करता है।
पृथ्वी शिखर सम्मेलन और रियो शिखर सम्मेलन में क्या अंतर है?
दोनों सम्मेलन पर्यावरण और विकास पर केंद्रित थे। पृथ्वी शिखर सम्मेलन (1992) में 170 से अधिक देशों ने भाग लिया और इसने एजेंडा 21 जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किए। रियो शिखर सम्मेलन, जिसे पृथ्वी शिखर सम्मेलन भी कहा जाता है, ने सतत विकास की अवधारणा को मजबूत किया और जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता पर सम्मेलनों को जन्म दिया।
'विश्व की साझी विरासत' से क्या तात्पर्य है?
'विश्व की साझी विरासत' उन क्षेत्रों को संदर्भित करती है जो किसी एक देश के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं, जैसे कि पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्र तल और बाहरी अंतरिक्ष। इन पर पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का अधिकार माना जाता है।
'साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियों' का सिद्धांत क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सिद्धांत स्वीकार करता है कि सभी देशों को वैश्विक पर्यावरण की रक्षा के लिए सहयोग करना चाहिए, लेकिन विकसित देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी और अधिक क्षमता के कारण उनकी भूमिका भिन्न हो सकती है।
ये NCERT समाधान कक्षा 12 के छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद मिलती है।
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