कक्षा 12 हिंदी आरोह पाठ 6: शमशेर बहादुर सिंह NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 की हिंदी पुस्तक 'आरोह' के पाठ 6, शमशेर बहादुर सिंह द्वारा रचित कविताओं के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें 'उषा' कविता के उन उपमानों का विश्लेषण शामिल है जो ग्रामीण सुबह के गतिशील चित्रण को दर्शाते हैं, जैसे राख से लीपा चौका और स्लेट की कालिमा। समाधान यह भी बताते हैं कि कैसे कोष्ठक और विराम चिह्नों का प्रयोग कविता के अर्थ को गहरा करता है, विशेष रूप से 'भोर का नभ' के संदर्भ में। इसके अतिरिक्त, छात्रों को अपने परिवेश के उपमानों का उपयोग करके सूर्योदय और सूर्यास्त के सजीव शब्दचित्र बनाने का तरीका सिखाया गया है। ये समाधान छात्रों को कविता की बारीकियों को समझने, काव्यात्मक भाषा का विश्लेषण करने और अपनी रचनात्मक लेखन क्षमताओं को विकसित करने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectआरोह
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter6. शमशेर बहादुर सिंह

Chapter summary

कक्षा 12 हिंदी आरोह के पाठ 6 में शमशेर बहादुर सिंह की कविताओं पर केंद्रित NCERT समाधान दिए गए हैं। ये समाधान 'उषा' कविता के काव्यात्मक बिंबों का विश्लेषण करते हैं, जो ग्रामीण सुबह के सजीव और गतिशील चित्रण को प्रस्तुत करते हैं। इसमें कोष्ठक जैसे साहित्यिक उपकरणों के प्रयोग से कविता के अर्थ विस्तार पर भी प्रकाश डाला गया है। छात्रों को सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य चित्रण के अभ्यास के माध्यम से अपनी कल्पना शक्ति और भाषा कौशल को निखारने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया गया है।

Learning outcomes

  • कविता 'उषा' में प्रयुक्त उपमानों की पहचान करना और ग्रामीण सुबह के चित्रण को समझना।
  • नयी कविता में कोष्ठक और विराम चिह्नों के प्रयोग से उत्पन्न अर्थ-विस्तार का विश्लेषण करना।
  • अपने परिवेश के उपमानों का प्रयोग करके सूर्योदय और सूर्यास्त के सजीव शब्दचित्र बनाने का कौशल विकसित करना।
  • कवि की भाषा शैली और बिंब-विधान की समझ को बढ़ाना।

Topics covered

Paper topics

  • उषा कविता का विश्लेषण
  • ग्रामीण सुबह का चित्रण
  • गतिशील शब्दचित्र
  • नयी कविता में कोष्ठक का प्रयोग
  • विराम चिह्नों का महत्व
  • सूर्योदय का काव्यात्मक वर्णन
  • सूर्यास्त का काव्यात्मक वर्णन
  • उपमानों का प्रयोग
  • शमशेर बहादुर सिंह की काव्य शैली
  • बिंब विधान

Important topics

  • उषा कविता के उपमान और उनका अर्थ
  • कोष्ठक के प्रयोग से अर्थ विस्तार
  • सूर्योदय और सूर्यास्त का शब्दचित्रण
  • ग्रामीण परिवेश का काव्यात्मक चित्रण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

कविता के किन उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि उषा कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र है?
Solution: कवि शमशेर बहादुर सिंह ने अपनी कविता 'उषा' में ऐसे उपमानों का प्रयोग किया है जो सीधे तौर पर ग्रामीण परिवेश की सुबह की गतिशीलता और सजीवता को दर्शाते हैं। निम्नलिखित उपमान इस बात की पुष्टि करते हैं:
  1. राख से लीपा हुआ चौका: यह उपमान भोर के आकाश के लिए प्रयुक्त हुआ है। जिस प्रकार घर में चूल्हा जलाने के बाद चौके को राख से लीपा जाता है, वह एक नई शुरुआत का प्रतीक है। इसी तरह, भोर का आकाश भी नवजीवन और स्वच्छता का आभास देता है।
  2. स्लेट की कालिमा पर चाक से रंग मलते अदृश्य बच्चों के नन्हें हाथ: यह उपमान आकाश के रंग परिवर्तन को दर्शाता है। जैसे बच्चे स्लेट पर चाक से चित्र बनाते हैं, वैसे ही भोर के समय आकाश में विभिन्न रंग धीरे-धीरे उभरते हैं। यह क्रियाशीलता और गति का बोध कराती है।
इन उपमानों के माध्यम से कवि ने केवल दृश्य का वर्णन नहीं किया है, बल्कि उसमें क्रिया और जीवन का संचार किया है, जिससे यह गाँव की सुबह का एक अत्यंत गतिशील और सजीव शब्दचित्र बन गया है।

प्रश्न 2

भोर का नभ, राख से लीपा हुआ चौका (अभी गीला पड़ा है)। नयी कविता में कोष्ठक, विराम-चिह्नों और पंक्तियों के बीच का स्थान भी कविता को अर्थ देता है। उपर्युक्त पंक्तियों में कोष्ठक से कविता में क्या विशेष अर्थ पैदा हुआ है? समझाइए।
Solution: नयी कविता की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें कोष्ठक, विराम-चिह्नों और पंक्तियों के बीच खाली छोड़े गए स्थान का भी विशेष अर्थ होता है। ये तत्व कविता के मूल अर्थ को समझने में सहायक होते हैं या उसमें एक नया आयाम जोड़ते हैं।

प्रस्तुत पंक्तियों में, 'राख से लीपा हुआ चौका' के बाद कोष्ठक में '(अभी गीला पड़ा है)' लिखा गया है। इसका विशेष अर्थ यह है:

  • यह कोष्ठक 'राख से लीपा हुआ चौका' के बिंब को और अधिक स्पष्ट करता है। यह बताता है कि आकाश रूपी चौका अभी पूरी तरह सूखा नहीं है, अर्थात उसमें भोर की नमी और ताजगी बाकी है।
  • यह पंक्ति कविता में एक ठहराव लाती है, जिससे पाठक उस बिंब पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाता है।
  • यह आकाश की कोमलता और नवजात अवस्था का भी संकेत देता है, जो सूर्योदय से ठीक पहले का समय होता है।
इस प्रकार, कोष्ठक में दी गई यह अतिरिक्त जानकारी कविता के बिंब को अधिक सजीव और अर्थपूर्ण बनाती है।

प्रश्न 3

अपने परिवेश के उपमानों का प्रयोग करते हुए सूर्योदय और सूर्यास्त का शब्दचित्र खींचिए।
Solution: अपने परिवेश के उपमानों का प्रयोग करके सूर्योदय और सूर्यास्त का शब्दचित्र इस प्रकार खींचा जा सकता है:

सूर्योदय का शब्दचित्र:

जैसे कोई सुनार भट्टी में तपाकर अपने सोने के गहनों को चमकाता है, वैसे ही सूर्य अपनी पहली किरणों से पूर्वी क्षितिज को सुनहरे रंग से रंग रहा है। आकाश में फैले हल्के गुलाबी और नारंगी रंग ऐसे लग रहे हैं मानो किसी कुशल चित्रकार ने गीले कैनवास पर अपने रंग बिखेर दिए हों। पक्षी चहचहाते हुए अपने घोंसलों से निकल रहे हैं, मानो वे भी इस नव प्रभात का स्वागत कर रहे हों। ओस की बूँदें घास पर मोतियों की तरह चमक रही हैं। यह दृश्य मन को शांति और नई ऊर्जा से भर देता है।

सूर्यास्त का शब्दचित्र:

जैसे दिन भर की थकान के बाद कोई व्यक्ति अपने रंगीन वस्त्र उतारकर विश्राम के लिए तैयार होता है, वैसे ही सूर्य भी धीरे-धीरे पश्चिम दिशा में ढल रहा है। आकाश सिंदूरी, लाल और बैंगनी रंगों से भर गया है, मानो किसी ने विशाल चादर पर गहरे रंग घोल दिए हों। पेड़ों की छायाएँ लंबी होती जा रही हैं और हवा में एक हल्की ठंडक घुलने लगी है। दिन भर की भागदौड़ के बाद अब प्रकृति भी विश्राम की मुद्रा में आ रही है। यह दृश्य दिन के अंत का एक शांत और मनमोहक चित्रण प्रस्तुत करता है।

Common mistakes

  • कविता के उपमानों और उनके प्रतीकात्मक अर्थों के बीच संबंध स्थापित करने में कठिनाई।
  • नयी कविता में कोष्ठक और अन्य विराम चिह्नों के महत्व को कम आंकना।
  • सूर्योदय और सूर्यास्त के चित्रण में केवल शाब्दिक वर्णन पर ध्यान केंद्रित करना, काव्यात्मकता की उपेक्षा करना।

Revision tips

  • कविता 'उषा' के प्रत्येक उपमान को ध्यान से पढ़ें और समझें कि वह ग्रामीण सुबह का कैसे चित्रण करता है।
  • कोष्ठक में दी गई अतिरिक्त जानकारी के महत्व पर विचार करें और यह कैसे मूल अर्थ को प्रभावित करती है।
  • सूर्योदय और सूर्यास्त के अपने शब्दचित्र बनाते समय, विभिन्न उपमानों और विशेषणों का प्रयोग करने का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. कविता 'उषा' में 'राख से लीपा हुआ चौका' उपमान किसका चित्रण करता है?

Q2. नयी कविता में कोष्ठक का प्रयोग किस उद्देश्य से किया जाता है?

Q3. सूर्यास्त के समय सूर्य की पोशाक का वर्णन कवि ने कैसा किया है?

Q4. 'उषा' कविता में किन उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि यह गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 हिंदी आरोह पाठ 6 में किन कवियों की कविताओं का अध्ययन किया गया है?

कक्षा 12 हिंदी आरोह पाठ 6 में शमशेर बहादुर सिंह की कविताओं का अध्ययन किया गया है।

'उषा' कविता में कवि ने किन उपमानों का प्रयोग करके ग्रामीण सुबह का चित्रण किया है?

कवि ने 'राख से लीपा हुआ चौका' और 'स्लेट की कालिमा पर चाक से रंग मलते अदृश्य बच्चों के नन्हें हाथ' जैसे उपमानों का प्रयोग करके ग्रामीण सुबह का गतिशील चित्रण किया है।

नयी कविता में कोष्ठक का प्रयोग किस प्रकार कविता के अर्थ को प्रभावित करता है?

नयी कविता में कोष्ठक का प्रयोग अतिरिक्त जानकारी देकर या किसी विशेष बात पर जोर देकर कविता के अर्थ को अधिक स्पष्ट और गहरा बनाता है।

क्या ये NCERT समाधान परीक्षा की तैयारी में सहायक हैं?

हाँ, ये समाधान कविता की बारीकियों को समझने, काव्यात्मक भाषा का विश्लेषण करने और रचनात्मक लेखन का अभ्यास करने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी है।

सूर्योदय और सूर्यास्त का शब्दचित्र बनाने के लिए क्या सुझाव दिया गया है?

छात्रों को अपने परिवेश के उपमानों का प्रयोग करते हुए सूर्योदय और सूर्यास्त के सजीव और काव्यात्मक शब्दचित्र बनाने का अभ्यास करने का सुझाव दिया गया है।

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