कक्षा 12 हिंदी आरोह पाठ 5 गजानन माधव मुक्तिबोध NCERT समाधान
यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 12 हिंदी आरोह पाठ 5, गजानन माधव मुक्तिबोध पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें कविता की पंक्तियों की विस्तृत व्याख्या, महत्वपूर्ण वाक्यांशों पर टिप्पणी और कवि के भावों का विश्लेषण शामिल है। समाधान छात्रों को 'गरबीली गरीबी', 'भीतर की सरिता', 'ममता के बादल' जैसे प्रयोगों के अर्थ को समझने में मदद करते हैं। यह कविता के गहन अर्थों, जैसे कि प्रिय को भूलने की इच्छा और प्रेम के उजाले से मुक्ति पाने की आकांक्षा, को स्पष्ट करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए कविता की गहरी समझ विकसित करने में सहायता करेंगे।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | आरोह |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 5. गजानन माध्व मुक्तिबोध |
Chapter summary
कक्षा 12 हिंदी आरोह के पाठ 5, गजानन माधव मुक्तिबोध के लिए प्रस्तुत NCERT समाधान, कविता के प्रमुख भावों और अभिव्यक्तियों पर केंद्रित हैं। इसमें 'गरबीली गरीबी', 'भीतर की सरिता', 'ममता के बादल' जैसे पद-प्रयोगों की विस्तृत टिप्पणी दी गई है। साथ ही, कविता की पंक्तियों की व्याख्या की गई है, जिसमें प्रिय को भूलने की कवि की तीव्र इच्छा और प्रेम के उजाले से मुक्ति पाने की आकांक्षा को समझाया गया है। यह समाधान छात्रों को कविता के गूढ़ अर्थों को समझने और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने में सहायक होगा।
Learning outcomes
- कविता के महत्वपूर्ण पद-प्रयोगों के अर्थ को समझना।
- कविता की पंक्तियों की व्याख्या करने की क्षमता विकसित करना।
- कवि के प्रेम, वियोग और आत्म-निर्भरता संबंधी भावों का विश्लेषण करना।
- कविता में प्रयुक्त प्रतीकों और बिंबों को समझना।
- परीक्षा के दृष्टिकोण से कविता के भावार्थ को स्पष्ट करना।
Topics covered
Paper topics
- गरबीली गरीबी
- भीतर की सरिता
- बहलाती सहलाती आत्मीयता
- ममता के बादल
- विचार-वैभव
- कविता की पंक्तियों की व्याख्या
- प्रिय को भूलने की इच्छा
- आत्मनिर्भरता की आकांक्षा
- प्रेम के उजाले से मुक्ति
- दक्षिण ध्रुवी अंधकार-अमावस्या
Important topics
- पद-प्रयोगों की विस्तृत टिप्पणी
- कविता की पंक्तियों की व्याख्या
- प्रिय को भूलने की कवि की युक्ति
- आत्मनिर्भरता और प्रेम के उजाले का द्वंद्व
- दक्षिण ध्रुवी अंधकार-अमावस्या का प्रतीकात्मक अर्थ
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
'गरबीली गरीबी' का अर्थ है कि कवि गरीब होते हुए भी स्वाभिमानी है। उसे अपनी गरीबी पर कोई ग्लानि या हीनता महसूस नहीं होती, बल्कि वह इस पर गर्व करता है।
'भीतर की सरिता' से कवि का तात्पर्य है कि उसके हृदय में कोमल भावनाएँ नदी की लहरों की तरह निरंतर प्रवाहित होती रहती हैं और हलचल मचाती रहती हैं।
'बहलाती सहलाती आत्मीयता' का अर्थ है किसी व्यक्ति के अपनेपन के कारण हृदय को मिलने वाली प्रसन्नता। यह प्रिय के प्रति गहरी आत्मीयता को दर्शाता है।
'ममता के बादल' का आशय है कि कवि प्रेयसी के स्नेह और अपनत्व से पूरी तरह सराबोर हो गया है। उसका मन अपने प्रिय के प्रति पूर्णतः समर्पित है, जैसे बादल जल से भरे हों।
प्रश्न 2
कविता में एक अन्य महत्वपूर्ण पद-प्रयोग 'विचार-वैभव' है। इस पर टिप्पणी इस प्रकार है:
'विचार-वैभव' का अर्थ है विचारों की समृद्धि या धन-संपदा। कवि के अनुसार, मनुष्य को वैभवशाली बनाने के लिए केवल भौतिक धन-संपदा का होना ही पर्याप्त नहीं है। मनुष्य अपने उच्च और समृद्ध विचारों से भी धनी और वैभवशाली बन सकता है। वास्तव में, यही सच्चा वैभव है क्योंकि उत्कृष्ट विचार व्यक्ति को सामान्य जन से अलग और श्रेष्ठ बनाते हैं।
प्रश्न 3
जाने क्या रिश्ता है , जाने क्या नाता है
जितना भी उँड़ेलता हूँ , भर-भर फिर आता है
दिल में क्या झरना है?
मीठे पानी का सोता है
भीतर वह , ऊपर तुम
मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर
मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है!
उपर्युक्त पंक्तियों की व्याख्या करते हुए यह बताइए कि यहाँ चाँद की तरह आत्मा पर झुका चेहरा भूलकर अंधकार-अमावस्या में नहाने की बात क्यों की गई है?
इन पंक्तियों में कवि प्रियतमा के प्रेम और उसकी स्मृतियों से घिरे रहने की सुखद स्थिति का वर्णन करता है। कवि कहता है कि प्रिय के साथ उसका रिश्ता या नाता ऐसा है कि वह जितना भी प्रेम या स्मृतियाँ उँडेलता है, वे फिर से भर जाती हैं। उसे लगता है कि उसके हृदय में कोई मीठे पानी का झरना या सोता है जो कभी खाली नहीं होता। जिस प्रकार मुस्कुराता हुआ चाँद रात भर धरती पर अपनी चाँदनी बिखेरता रहता है, उसी प्रकार प्रिय का खिला हुआ चेहरा कवि पर सदैव छाया रहता है।
कवि यह चेहरा, जो आत्मा पर झुका हुआ है, को भूलकर 'दक्षिण ध्रुवी अंधकार-अमावस्या' में नहाना चाहता है। इसका कारण यह है कि प्रिय के प्रेम और उसकी स्मृतियों से निरंतर घिरे रहना, जो कि एक सुखद उजाला है, अब कवि के लिए असहनीय हो गया है। इस आनंद से हमेशा वंचित रह जाने का भय उसे सताता रहता है। कवि इस स्थिति से मुक्त होकर, प्रिय के प्रेम से अलग, आत्मनिर्भर बनकर अपने व्यक्तित्व का विकास करना चाहता है। इसलिए, वह प्रिय की स्मृतियों के उजाले को भूलकर वियोग के गहन अंधकार में डूब जाना चाहता है।
प्रश्न 4.1
यहाँ 'अंधकार-अमावस्या' के लिए 'दक्षिण ध्रुवी' विशेषण का प्रयोग किया गया है। 'दक्षिण ध्रुवी' विशेषण अंधकार के घनत्व और उसकी व्यापकता को दर्शाता है। यह बताता है कि अंधकार अत्यंत गहरा, घना और विस्तृत है, जैसे कि दक्षिण ध्रुव पर पाया जाने वाला स्थायी अंधकार। इस प्रकार, विशेषण ने विशेष्य (अंधकार-अमावस्या) में गहनता और व्यापकता का अर्थ जोड़ा है।
प्रश्न 4.2
कवि ने व्यक्तिगत संदर्भ में उस स्थिति को अमावस्या कहा है जब वह प्रिय के स्नेह और प्रेम के उजाले से दूर होता है। यह स्थिति प्रिय से अलगाव की है, जिसमें वह अकेला और निराशा से भरा हुआ महसूस करता है। यह एकाकी और अंधकारमय स्थिति ही कवि के लिए अमावस्या के समान है।
प्रश्न 4.3
इस स्थिति (अंधकार-अमावस्या) से ठीक विपरीत ठहरने वाली स्थिति 'परिवेष्टित आच्छादित रहने का रमणीय यह उजेला' है। यह उजाला प्रियतमा की आभा, उसके प्रेम और सुखद भावों से सदैव घिरे रहने की स्थिति को दर्शाता है। यह उजाला कवि के जीवन को मार्ग तो दिखाता है, परंतु इतना अधिक प्रेम और आत्मीयता कवि के लिए असहनीय हो जाती है। यह वैपरीत्य (उजाला बनाम अंधकार) कवि के मन की दुविधा को दर्शाता है, जहाँ वह प्रेम के सुखद बंधन से मुक्ति चाहता है।
प्रश्न 4.4
कवि अपने प्रिय को पूरी तरह भूल जाने की अपनी तीव्र इच्छा को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने के लिए एक युक्ति अपनाता है। वह कहता है कि वह प्रिय के वियोग के अंधकार को अपने शरीर, चेहरे और अंतर में झेलना चाहता है। वह उस गहन अंधकार में पूरी तरह नहा लेना चाहता है, ताकि प्रिय की कोई भी स्मृति उसके हृदय में शेष न रहे। इस प्रकार, कवि वियोग की इस 'अंधकार-अमावस्या' में डूबकर प्रिय को भुला देने की अपनी मंशा को बलपूर्वक व्यक्त करता है।
Common mistakes
- पद-प्रयोगों के शाब्दिक अर्थ पर अटक जाना और भावार्थ को न समझ पाना।
- कवि की प्रिय को भूलने की इच्छा के पीछे के गहरे कारण को समझने में चूक करना।
- कविता में प्रयुक्त बिंबों (जैसे चाँद, अंधकार) के प्रतीकात्मक अर्थ को अनदेखा करना।
- व्याख्या करते समय मूल भाव से भटक जाना।
Revision tips
- प्रत्येक पद-प्रयोग को उसके भावार्थ के साथ याद करें।
- कविता की पंक्तियों की व्याख्या को अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
- कवि की मुख्य भावनाओं (जैसे प्रेम, वियोग, स्वतंत्रता की चाह) को रेखांकित करें।
- परीक्षा में आने वाले संभावित प्रश्नों के अनुसार उत्तर तैयार करें।
Practice MCQs
Q1. कविता में 'गरबीली गरीबी' का क्या अर्थ है?
Explanation: कवि गरीब होते हुए भी स्वाभिमानी है और उसे अपनी गरीबी पर ग्लानि या हीनता नहीं, बल्कि गर्व है।
Q2. 'भीतर की सरिता' से कवि का क्या तात्पर्य है?
Explanation: कवि के हृदय में बहने वाली कोमल भावनाएँ नदी की लहरों के समान उथल-पुथल मचाती रहती हैं।
Q3. कवि प्रिय को भूलकर 'दक्षिण ध्रुवी अंधकार-अमावस्या' में क्यों नहाना चाहता है?
Explanation: कवि प्रिय के प्रेम के निरंतर उजाले से असहज हो गया है और स्वयं को मुक्त कर आत्मनिर्भर बनने के लिए वियोग के गहन अंधकार को अपनाना चाहता है।
Q4. 'ममता के बादल' से कवि का क्या आशय है?
Explanation: कवि का आशय है कि वह प्रेयसी के स्नेह से पूरी तरह सराबोर हो गया है और उसका मन प्रिय के प्रति पूर्णतः समर्पित है।
Q5. कविता में 'विचार-वैभव' का क्या अर्थ है?
Explanation: कवि के अनुसार, मनुष्य केवल धन-संपदा से नहीं, बल्कि अपने उच्च और समृद्ध विचारों से भी वैभवशाली बन सकता है, जो कि असली वैभव है।
Frequently asked questions
कक्षा 12 हिंदी आरोह के पाठ 5 में किन प्रमुख पद-प्रयोगों की व्याख्या की गई है?
पाठ 5 में 'गरबीली गरीबी', 'भीतर की सरिता', 'बहलाती सहलाती आत्मीयता', और 'ममता के बादल' जैसे पद-प्रयोगों की विस्तृत व्याख्या की गई है।
कवि प्रिय को भूलकर अंधकार-अमावस्या में नहाने की बात क्यों करता है?
कवि प्रिय के प्रेम के निरंतर उजाले से असहज हो गया है और वह आत्मनिर्भर बनकर अपने व्यक्तित्व का विकास करना चाहता है, इसलिए वह वियोग के गहन अंधकार को अपनाना चाहता है।
कविता में 'विचार-वैभव' का क्या महत्व है?
कविता के अनुसार, मनुष्य केवल धन-संपदा से नहीं, बल्कि अपने उच्च और समृद्ध विचारों से भी वैभवशाली बन सकता है, जो कि असली वैभव माना गया है।
ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?
ये समाधान कविता के कठिन भावों और पद-प्रयोगों को सरल भाषा में समझाते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में आसानी होगी और उनकी समझ बेहतर होगी।
'दक्षिण ध्रुवी अंधकार-अमावस्या' का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?
यह प्रिय के वियोग के गहन अंधकार और निराशा का प्रतीक है, जिसे कवि अपने ऊपर ओढ़कर प्रिय की स्मृतियों से मुक्ति पाना चाहता है।
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