कक्षा 12 हिंदी आरोह पाठ 7 सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' NCERT समाधान
यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 12 हिंदी आरोह पुस्तक के पाठ 7, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' पर केंद्रित है। इसमें कविता से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट समाधान दिए गए हैं। समाधानों में 'अस्थिर सुख पर दुख की छाया', 'अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर', और 'विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते' जैसी पंक्तियों की गहन व्याख्या शामिल है। यह छात्रों को कविता के मूल भाव, प्रकृति के मानवीकरण और क्रांति के प्रतीक के रूप में बादलों के चित्रण को समझने में मदद करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए कविता की गहरी समझ विकसित करने और महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने में सहायता करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | आरोह |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 7. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ |
Chapter summary
कक्षा 12 हिंदी आरोह के पाठ 7 में सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता के NCERT समाधान प्रस्तुत हैं। यह समाधान कविता की पंक्तियों की व्याख्या पर केंद्रित है, जिसमें क्रांति के आगमन से समाज और प्रकृति पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन है। इसमें पूंजीपतियों के अस्थिर सुख, क्रांति के विरुद्ध खड़े वीरों की स्थिति, और क्रांति के छोटे व सामान्य वर्ग के लिए महत्व को समझाया गया है। साथ ही, कविता में प्रकृति के मानवीकरण और बादलों के गर्जन को क्रांति के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने के तरीके पर भी प्रकाश डाला गया है।
Learning outcomes
- कविता की पंक्तियों का अर्थ और भावार्थ समझना।
- क्रांति के प्रतीक के रूप में बादलों के चित्रण का विश्लेषण करना।
- प्रकृति के मानवीकरण के प्रयोग को पहचानना।
- पूंजीवाद और क्रांति के बीच संबंध को समझना।
- कविता में प्रयुक्त अलंकारिक भाषा का विश्लेषण करना।
Topics covered
Paper topics
- सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता
- क्रांति का चित्रण
- प्रकृति का मानवीकरण
- पूंजीवाद और शोषक वर्ग
- सामान्य वर्ग का दृष्टिकोण
- कविता की व्याख्या
- अस्थिर सुख
- विप्लव का अर्थ
- बादलों का प्रतीकवाद
- सामाजिक परिवर्तन
Important topics
- कविता की पंक्तियों की व्याख्या
- क्रांति के प्रतीक के रूप में बादलों का मानवीकरण
- पूंजीपतियों के सुख पर दुख की छाया का अर्थ
- विप्लव-रव का महत्व
- प्रकृति के मानवीकरण का प्रभाव
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
प्रश्न 1
'अस्थिर सुख पर दुख की छाया' पंक्ति में दुख की छाया से तात्पर्य क्रांति या विनाश की आशंका से है। कवि का मानना है कि पूंजीपतियों का सुख-वैभव अत्यंत अस्थिर होता है, क्योंकि यह समाज के शोषण पर आधारित होता है। जब क्रांति की हुंकार उठती है, तो पूंजीपति वर्ग अपनी सुख-सुविधाओं और संपत्ति के खोने के भय से घबरा उठता है। उन्हें अपनी सुख-सुविधाओं के छिन जाने का डर सताता है, जो उनके लिए दुख की छाया के समान है। क्रांति उन्हीं से कुछ छीनती है जिनके पास आवश्यकता से अधिक होता है, और उस अतिरिक्त संपत्ति के खोने की आशंका ही उन्हें दुखी करती है।
प्रश्न 2
'अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर' पंक्ति क्रांति के विरोधी, गर्वीले वीरों की ओर संकेत करती है। जिस प्रकार बादलों के वज्रपात (अशनि-पात) से ऊँचे-ऊँचे पर्वत शिखर और बड़े-बड़े वृक्ष भी क्षत-विक्षत होकर नष्ट हो जाते हैं, उसी प्रकार क्रांति की हुंकार (वज्रपात के समान) से पूंजीपतियों के वैभव, धन-संपत्ति और सत्ता का विनाश हो जाता है। ये 'शत-शत वीर' उन गर्वीले लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो क्रांति के सामने टिक नहीं पाते और पराजित होकर मिट्टी में मिल जाते हैं, अर्थात उनका शोषणकारी अस्तित्व समाप्त हो जाता है।
प्रश्न 3
'विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते' पंक्ति में 'विप्लव-रव' से तात्पर्य क्रांति के शोर या उद्घोष से है। कवि का कहना है कि क्रांति के आगमन पर गरीब और सामान्य वर्ग (जिन्हें यहाँ 'छोटे' कहा गया है) ही शोभा पाते हैं या लाभान्वित होते हैं। ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि छोटे लोगों के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं होता; वे केवल क्रांति से लाभ ही प्राप्त कर सकते हैं। इसके विपरीत, धनी और पूंजीपति वर्ग अपने विनाश की आशंका से भयभीत हो उठता है। जैसे भयंकर आँधी-तूफान में बड़े वृक्ष उखड़ जाते हैं, पर छोटे पौधे अपनी जड़ों को मजबूती से पकड़े रहते हैं, वैसे ही क्रांति के समय निम्न वर्ग सुरक्षित रहता है और लाभान्वित होता है।
प्रश्न 4
कविता में बादलों के आगमन से प्रकृति में होने वाले कई महत्वपूर्ण परिवर्तनों को रेखांकित किया गया है, जो इस प्रकार हैं:
- ठंडी और ताज़गी भरी हवा (समीर) बहने लगती है।
- बादल गरजने लगते हैं, जो एक नाटकीय वातावरण बनाते हैं।
- मूसलाधार वर्षा होती है, जो धरती की प्यास बुझाती है।
- बिजली चमकने लगती है, जो बादलों की शक्ति का प्रतीक है।
- गर्मी से परेशान प्राणी बादलों को देखकर प्रसन्न हो जाते हैं और मौसम सुहावना हो जाता है।
- छोटे-छोटे पौधे खिल उठते हैं और प्रकृति में नवजीवन का संचार होता है।
प्रश्न 5.1
इस व्याख्या में कवि बादल को संबोधित करते हुए कहता है कि हे क्रांति दूत रूपी बादल! तुम आकाश में ऐसे मंडराते रहते हो जैसे पवन रूपी सागर पर कोई नौका तैर रही हो। तुम्हारी उपस्थिति पूंजीपतियों के अस्थिर सुख पर दुख की छाया के समान है, क्योंकि वे तुम्हारे आगमन से अपनी संपत्ति और वैभव के विनाश की आशंका से भयभीत हैं। कवि ने बादलों को विप्लवकारी योद्धा, उनके विशाल रूप को रण-नौका तथा उनके गर्जन-तर्जन को रणभेरी के रूप में चित्रित किया है। कवि आगे कहते हैं कि हे बादल! तुम्हारी गर्जना से धरती के गर्भ में सोए हुए अंकुर (जो शोषित और निष्क्रिय वर्ग का प्रतीक हैं) भी सजग हो जाते हैं और शोषण के विरुद्ध संघर्ष के लिए तैयार हो जाते हैं। यह 'निर्दय विप्लव की प्लावित माया' अर्थात क्रांति का जल-प्रलय, संसार के जले हुए हृदय पर छा जाती है, जो शोषकों के लिए विनाशकारी है।
प्रश्न 5.2
कवि इन पंक्तियों के माध्यम से पूंजीपतियों के ऊँचे-ऊँचे भवनों (अट्टालिकाओं) पर व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि ये केवल ईंट-पत्थर के भवन नहीं हैं, बल्कि ये गरीबों और शोषितों को आतंकित करने वाले भय के भवन हैं। इनमें रहने वाले लोग महान नहीं, बल्कि भयभीत और शोषक हैं। कवि आगे कहते हैं कि जल का विनाशकारी प्रलय (जल-विप्लव-प्लावन) सदा कीचड़ (पंक) पर ही होता है, अर्थात बाढ़ कीचड़ को ही डुबोती है। इसका तात्पर्य यह है कि क्रांति की ज्वाला में केवल धनी और शोषक वर्ग ही जलते हैं और नष्ट होते हैं, क्योंकि गरीबों या निम्न वर्ग के पास खोने के लिए कुछ नहीं होता। क्रांति का प्रतिनिधित्व हमेशा निम्न वर्ग ही करता है, इसलिए जल-प्रलय की तरह क्रांति का प्रभाव भी उन्हीं पर पड़ता है जो शोषक हैं।
प्रश्न 6
कविता में प्रकृति का मानवीकरण अत्यंत प्रभावशाली ढंग से किया गया है। मुझे प्रकृति का वह मानवीय रूप सबसे अधिक पसंद आया जहाँ बादलों को गर्जन कर क्रांति लाने वाले के रूप में चित्रित किया गया है। जिस प्रकार बादलों की गर्जना और मूसलाधार वर्षा से बड़े-बड़े पर्वत और वृक्ष भी भयभीत हो जाते हैं और उन्हें उखड़कर गिर जाने का डर सताता है, उसी प्रकार क्रांति की हुंकार से पूंजीपति वर्ग भी घबरा उठता है। उन्हें अपनी संपत्ति, सत्ता और वैभव के छिन जाने का भय होता है। कवि की यह कल्पना कि बादल क्रांति के दूत बनकर आते हैं और शोषकों को भयभीत करते हैं, अत्यंत सशक्त और प्रेरणादायक है। यह रूप प्रकृति की शक्ति और परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाता है, जो समाज में न्याय लाने का प्रतीक है।
Common mistakes
- क्रांति के संदर्भ में 'दुख की छाया' का गलत अर्थ लगाना।
- प्रकृति के मानवीकरण को केवल शाब्दिक अर्थ में लेना।
- कविता की पंक्तियों के गहरे सामाजिक-राजनीतिक अर्थ को न समझना।
- बादलों के आगमन से होने वाले परिवर्तनों को केवल भौतिक स्तर पर देखना।
Revision tips
- कविता की प्रत्येक पंक्ति को ध्यान से पढ़ें और उसके छिपे अर्थ को समझने का प्रयास करें।
- क्रांति के प्रतीक के रूप में बादलों और प्रकृति के अन्य तत्वों के मानवीकरण पर विशेष ध्यान दें।
- पूंजीपतियों और सामान्य वर्ग के प्रति कवि के दृष्टिकोण का विश्लेषण करें।
- महत्वपूर्ण पंक्तियों की व्याख्या को याद करें और अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. 'अस्थिर सुख पर दुख की छाया' पंक्ति में दुख की छाया किसे कहा गया है?
Explanation: इस पंक्ति में दुख की छाया से तात्पर्य क्रांति या विनाश की आशंका से है, जिससे पूंजीपति वर्ग भयभीत रहता है।
Q2. 'अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर' पंक्ति में किसकी ओर संकेत किया गया है?
Explanation: यह पंक्ति क्रांति के वज्रपात से घायल और पराजित होने वाले क्रांति-विरोधी गर्वीले वीरों की ओर संकेत करती है।
Q3. कविता में 'विप्लव-रव' से क्या तात्पर्य है?
Explanation: 'विप्लव-रव' से तात्पर्य क्रांति के आगमन के शोर या उद्घोष से है, जो समाज में परिवर्तन लाता है।
Q4. कविता के अनुसार, जल-विप्लव-प्लावन सदा किसे डुबोता है?
Explanation: कवि के अनुसार, जल-विप्लव (बाढ़) सदा कीचड़ को ही डुबोता है, जो निम्न वर्ग का प्रतीक है, जबकि धनवानों को क्रांति से भय होता है।
Q5. प्रकृति का मानवीकरण करते हुए, कवि ने बादलों के किस रूप को क्रांति लाने वाले के रूप में चित्रित किया है?
Explanation: कवि बादलों के गर्जन को क्रांति की हुंकार के रूप में देखता है, जो पूंजीपतियों में भय उत्पन्न करता है।
Frequently asked questions
कक्षा 12 हिंदी आरोह पाठ 7 में सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता का मुख्य विषय क्या है?
कविता का मुख्य विषय क्रांति का आगमन और उसका समाज पर पड़ने वाला प्रभाव है, जिसमें पूंजीपतियों के अस्थिर सुख और सामान्य वर्ग की आशाओं का चित्रण है। बादलों को क्रांति के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
'अस्थिर सुख पर दुख की छाया' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि पूंजीपतियों का सुख-वैभव अस्थिर है और उस पर क्रांति या विनाश की आशंका की छाया मंडरा रही है, जो उनके सुख को छीन सकती है।
कविता में प्रकृति का मानवीकरण कैसे किया गया है?
कवि ने बादलों के गर्जन को क्रांति की हुंकार के रूप में चित्रित किया है, जो पूंजीपतियों को भयभीत करता है। इसी प्रकार, प्रकृति के अन्य तत्वों को भी मानवीय भावनाओं और क्रियाओं से जोड़ा गया है।
यह NCERT समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?
ये समाधान छात्रों को कविता की पंक्तियों का गहन अर्थ समझने, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करने में मदद करते हैं।
'विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते' पंक्ति का क्या भाव है?
इस पंक्ति का भाव है कि क्रांति का शोर या प्रभाव छोटे और सामान्य वर्ग के लिए अधिक लाभकारी होता है, क्योंकि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता और वे परिवर्तन से लाभान्वित होते हैं।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.