कक्षा 12 हिंदी आरोह पाठ 8 तुलसीदास NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 हिंदी आरोह पुस्तक के पाठ 8, 'तुलसीदास' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें कवितावली और सवैयों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जो छात्रों को तुलसीदास के युग की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं, उनकी भक्ति भावना और स्वाभिमानी व्यक्तित्व को समझने में मदद करते हैं। समाधानों में आर्थिक विषमता, पेट की आग को बुझाने में ईश्वर भक्ति की भूमिका, जाति-पाति के विरोध और व्यक्तिगत स्वाभिमान जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई है। यह सामग्री छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त समझ प्रदान करती है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectआरोह
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter8. तुलसीदास

Chapter summary

कक्षा 12 हिंदी आरोह के पाठ 8 में तुलसीदास की रचनाओं पर आधारित प्रश्नोत्तर दिए गए हैं। ये समाधान छात्रों को तुलसीदास के समय की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों, जैसे बेरोजगारी और गरीबी, को समझने में सहायता करते हैं। साथ ही, यह पाठ पेट की आग को शांत करने में ईश्वर भक्ति की भूमिका और तुलसी के स्वाभिमानी, जाति-पाति विरोधी विचारों को भी स्पष्ट करता है। यह खंड छात्रों को कविता की व्याख्या करने और उसके गहरे अर्थों को समझने में मदद करता है।

Learning outcomes

  • तुलसीदास के युग की आर्थिक विषमताओं को पहचानना।
  • ईश्वर भक्ति और भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के बीच संबंध को समझना।
  • तुलसीदास के स्वाभिमानी व्यक्तित्व और सामाजिक रूढ़ियों के प्रति उनके विचारों का विश्लेषण करना।
  • कवितावली और सवैयों के भावार्थ और व्याख्या को स्पष्ट करना।
  • सामाजिक न्याय और व्यक्तिगत गरिमा के महत्व को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • तुलसीदास के युग की आर्थिक विषमता
  • बेरोजगारी और भूखमरी
  • पेट की आग और ईश्वर भक्ति
  • निष्काम कर्म और ईश्वर कृपा
  • जाति-पाति का खंडन
  • स्वाभिमानी भक्त हृदय
  • राम का लक्ष्मण के प्रति विलाप
  • बंधु-वियोग की मार्मिकता
  • संसार की चिंताओं से मुक्ति
  • भक्ति की गहनता
  • सामाजिक रूढ़ियों का विरोध
  • व्यक्तिगत गरिमा

Important topics

  • तुलसीदास के युग की आर्थिक विषमता का चित्रण
  • पेट की आग शमन में ईश्वर भक्ति की भूमिका
  • जाति-पाति के विरोध में तुलसी का स्वाभिमानी पक्ष
  • राम के विलाप से लक्ष्मण के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति
  • तुलसी के जीवन दर्शन (माँगि कै खैबो...)

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

कवितावली में उद्दृत छदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।
Solution: कवितावली में संकलित छंदों का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि तुलसीदास को अपने समय में व्याप्त गंभीर आर्थिक विषमताओं का गहन ज्ञान था। उन्होंने अपने युग के समाज का अत्यंत सजीव और यथार्थवादी चित्रण प्रस्तुत किया है, जो आज भी प्रासंगिक प्रतीत होता है। उन्होंने अपनी रचनाओं में बताया है कि उनके काल में लोग व्यापक बेरोजगारी और भुखमरी की समस्या से त्रस्त थे। मजदूर, किसान, सेवक, भिखारी जैसे सभी वर्ग के लोग दुखी थे। गरीबी की चरम सीमा ऐसी थी कि लोग अपनी संतानों को बेचने तक को विवश थे। चारों ओर निराशा और लाचारी का वातावरण छाया हुआ था।

प्रश्न 2

पेट की आग का शमन ईश्वर (राम) भक्ति का मेघ ही कर सकता है - तुलसी का यह काव्य-सत्य क्या इस समय का भी युग-सत्य है? तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
Solution: तुलसीदास का यह कथन कि 'पेट की आग का शमन ईश्वर (राम) भक्ति रूपी मेघ ही कर सकता है', आज के युग में भी प्रासंगिक है। तुलसी के अनुसार, मनुष्य का जन्म, उसके कर्म और कर्मों का फल ईश्वर के अधीन है। पेट की आग को बुझाने के लिए किए गए परिश्रम के साथ-साथ ईश्वर की कृपा का होना भी आवश्यक है। केवल निष्ठा और पुरुषार्थ से ही नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा से ही व्यक्ति की भौतिक आवश्यकताएँ पूरी हो सकती हैं। इसलिए, फल प्राप्ति के लिए कर्म और ईश्वर कृपा के बीच संतुलन आवश्यक है, जो आज के युग में भी सत्य है।

प्रश्न 3

तुलसी ने यह कहने की ज़रूरत क्यों समझी?

धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ / काहू की बेटी सों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ। इस सवैया में काहू के बेटा सों बेटी न ब्याहब कहते तो सामाजिक अर्थ में क्या परिवर्तन आता?

Solution: तुलसीदास ने यह कहने की आवश्यकता इसलिए महसूस की क्योंकि वे समाज में व्याप्त जाति-पाति के भेद और सामाजिक बंधनों से ऊपर उठकर अपनी भक्ति को व्यक्त करना चाहते थे। यदि वे कहते कि 'काहू के बेटा सों बेटी न ब्याहब' (अर्थात अपनी बेटी का विवाह किसी के बेटे से नहीं करेंगे), तो इसके सामाजिक अर्थ में कई परिवर्तन आते:
  1. विवाह के उपरांत बेटी को अपने पति की जाति अपनानी पड़ती है, जिससे पितृ-जाति से उसका संबंध बदल जाता है। इस प्रकार, अपनी बेटी का विवाह न करने का निर्णय सामाजिक व्यवस्था को चुनौती देता।
  2. यदि तुलसी अपनी बेटी का विवाह ही न करने का निर्णय लेते, तो समाज इसे एक अनुचित कार्य मानता और उन पर सामाजिक दबाव बनता।
  3. यदि वे किसी अन्य जाति में अपनी बेटी का विवाह करते, तो इससे समाज में जातिगत संघर्ष या सामाजिक तनाव बढ़ने की संभावना थी।
अतः, 'काहू की बेटी सों बेटा न ब्याहब' कहकर तुलसीदास ने सामाजिक बंधनों को स्वीकार न करने और अपनी स्वतंत्रता को बनाए रखने का संकेत दिया।

प्रश्न 4

धूत कहौ... वाले छंद में ऊपर से सरल व निरीह दिखलाई पड़ने वाले तुलसी की भीतरी असलियत एक स्वाभिमानी भक्त हृदय की है। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?
Solution: हम इस कथन से पूर्णतः सहमत हैं कि 'धूत कहौ...' छंद में ऊपर से सरल और निरीह दिखने वाले तुलसीदास का भीतरी स्वरूप एक स्वाभिमानी भक्त हृदय का है। इस छंद में उनकी भक्ति की गहराई और सघनता स्पष्ट झलकती है, जिससे उनके भक्त हृदय में एक अद्वितीय आत्मविश्वास उत्पन्न होता है। यह आत्मविश्वास उन्हें समाज में व्याप्त जाति-पाति के भेदभाव और अन्य दुराग्रहों का तिरस्कार करने का साहस प्रदान करता है। तुलसीदास स्पष्ट रूप से कहते हैं कि उन्हें इस बात की चिंता नहीं है कि संसार के लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। वे श्री राम में अपनी एकनिष्ठ भक्ति और समर्पण भाव रखते हुए समाज की दूषित रीति-रिवाजों का विरोध करते हैं और अपने आत्मसम्मान को सर्वोपरि मानते हैं।

प्रश्न 5.1

व्याख्या करें -

मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।

जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पितु बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।

Solution: लक्ष्मण के मूर्छित हो जाने पर श्रीराम अत्यंत व्याकुल होकर विलाप करते हुए कहते हैं कि हे मेरे प्रिय भाई लक्ष्मण! तुम मुझे कभी भी दुखी नहीं देख सकते थे। तुम्हारा स्वभाव सदा से ही मेरे प्रति अत्यंत कोमल रहा है। मेरे हित के लिए तुमने अपने माता-पिता को भी त्याग दिया और वन में घोर जाड़ा, प्रचंड गर्मी और तेज़ हवाओं को भी सहन किया। परंतु अब वह तुम्हारा प्रेम कहाँ चला गया? मेरे इस व्याकुलतापूर्ण वचनों को सुनकर तुम उठते क्यों नहीं हो? यदि मुझे पहले से यह ज्ञात होता कि वन में मुझे अपने प्रिय भाई से बिछड़ना पड़ेगा, तो मैं अपने पिता के वचनों (जिन्हें मानना मेरा परम कर्तव्य था) का पालन कभी न करता और न ही तुम्हें अपने साथ लेकर वन आता।

प्रश्न 5.2

व्याख्या करें -

जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।

अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।

Solution: मूर्छित पड़े लक्ष्मण को अपनी गोद में लिए हुए श्रीराम विलाप करते हुए कहते हैं कि हे भाई! तुम्हारे बिना मेरी दशा अत्यंत दयनीय हो गई है। मेरी यह स्थिति वैसी ही है जैसे पंखों के बिना कोई पक्षी अत्यंत दीन-हीन हो जाता है, मणि के बिना सर्प का जीवन व्यर्थ हो जाता है, या सूँड़ के बिना एक श्रेष्ठ हाथी की शक्ति समाप्त हो जाती है। ठीक इसी प्रकार, तुम्हारे बिना यदि यह जड़ (अज्ञानी) दैव मुझे किसी प्रकार जीवित रखता है, तो मेरा जीवन भी ऐसा ही अत्यंत दयनीय और निरर्थक हो जाएगा।

प्रश्न 5.3

व्याख्या करें -

माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ।।

Solution: इस पंक्ति के माध्यम से तुलसीदास यह व्यक्त करते हैं कि उन्हें समाज द्वारा की जाने वाली निंदा या ताने-उलाहनों से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। वे किसी भी प्रकार से किसी पर आश्रित नहीं हैं। वे अपना दिन श्री राम का नाम स्मरण करते हुए बिताते हैं, भीख माँगकर जीवन यापन करते हैं और मस्जिद में सो जाते हैं। इस प्रकार, वे सांसारिक मोह-माया और लोगों की परवाह से पूरी तरह मुक्त हैं और केवल ईश्वर भक्ति में लीन हैं।

प्रश्न 5.4

व्याख्या करें -

ऊँचे नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।

Solution: तुलसीदास जी इस पंक्ति के माध्यम से समाज की उस दयनीय स्थिति का वर्णन करते हैं जहाँ लोग केवल अपने पेट की आग को शांत करने के लिए किसी भी प्रकार के कर्म (चाहे वे ऊँचे हों या नीचे, धर्म के हों या अधर्म के) करने को तैयार रहते हैं। वे इतने लाचार और मजबूर हो जाते हैं कि अपनी संतानों (बेटा-बेटी) को बेचने तक को विवश हो जाते हैं। यह उस समय की घोर गरीबी और आर्थिक विषमता को दर्शाता है, जहाँ मनुष्य अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अपने सबसे पवित्र रिश्तों को भी दाँव पर लगा देता है।

Common mistakes

  • आर्थिक विषमता के चित्रण को केवल व्यक्तिगत अनुभव मानना।
  • ईश्वर भक्ति की भूमिका को केवल आध्यात्मिक मानना, भौतिक आवश्यकताओं से अलग करके देखना।
  • तुलसीदास के स्वाभिमान को अहंकार समझना।
  • व्याख्या करते समय मूल भाव से भटक जाना।

Revision tips

  • प्रत्येक छंद के मूल भाव को समझने के लिए उसे छोटे-छोटे वाक्यों में तोड़ें।
  • तुलसीदास के समय की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को वर्तमान से जोड़कर देखें।
  • स्वाभिमानी भक्त हृदय के गुणों को पहचानें और उदाहरणों से समझें।
  • व्याख्या वाले प्रश्नों के उत्तर लिखते समय मूल पाठ के शब्दों का प्रयोग करें।

Practice MCQs

Q1. कवितावली में वर्णित छंदों के अनुसार, तुलसीदास के समय में लोग किस प्रमुख समस्या से परेशान थे?

Q2. तुलसीदास के अनुसार, 'पेट की आग' का शमन कौन कर सकता है?

Q3. 'धूत कहौ, अवधूत कहौ...' सवैया में तुलसीदास किस सामाजिक बुराई का खंडन करते हैं?

Q4. राम के विलाप के अनुसार, लक्ष्मण के बिना उनका जीवन कैसा हो जाएगा?

Q5. तुलसीदास 'माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो' कहकर क्या व्यक्त करते हैं?

Frequently asked questions

कक्षा 12 हिंदी आरोह पाठ 8 में किन प्रमुख कवियों की रचनाओं का अध्ययन किया गया है?

कक्षा 12 हिंदी आरोह के पाठ 8 में महाकवि तुलसीदास की रचनाओं का अध्ययन किया गया है।

तुलसीदास के समय की आर्थिक स्थिति के बारे में पाठ क्या बताता है?

पाठ बताता है कि तुलसीदास के युग में बेरोजगारी और भूखमरी जैसी आर्थिक विषमताएँ व्याप्त थीं, जिससे लोग अत्यंत परेशान थे।

तुलसीदास के अनुसार, जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं (जैसे पेट की आग) की पूर्ति कैसे संभव है?

तुलसीदास के अनुसार, पेट की आग का शमन ईश्वर (राम) भक्ति के माध्यम से संभव है, जिसमें निष्ठा और पुरुषार्थ का संतुलन आवश्यक है।

सवैया 'धूत कहौ...' में तुलसीदास किस सामाजिक मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त करते हैं?

इस सवैया में तुलसीदास जाति-पाति के भेद और सामाजिक रूढ़ियों का खंडन करते हुए अपने स्वाभिमानी भक्त हृदय का परिचय देते हैं।

राम के विलाप से लक्ष्मण के प्रति उनके किस भाव का पता चलता है?

राम के विलाप से लक्ष्मण के प्रति उनके गहरे प्रेम, वियोग की असहनीयता और लक्ष्मण के महत्व का पता चलता है।

ये NCERT समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को पाठ के कठिन अंशों को समझने, व्याख्या करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करते हैं, जिससे उनकी तैयारी बेहतर होती है।

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