CBSE Class 12 Hindi Aroh NCERT Solutions Chapter 2: Patang

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This comprehensive set of NCERT Solutions for CBSE Class 12 Hindi Aroh, Chapter 2, titled 'Patang' by Alok Dhanwa, delves into the vibrant imagery and themes of childhood, freedom, and the transition of seasons. The solutions meticulously explain the poet's depiction of nature's transformation after the monsoon, the symbolic significance of the kite, and the innocent yet fearless spirit of children. It breaks down complex poetic devices like 'bimb' (imagery) and explores the deep connection between children and the ephemeral beauty of kites. These solutions are designed to help students grasp the nuances of the poem, understand the poet's intent, and prepare effectively for their examinations by providing clear, step-by-step explanations.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectआरोह
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. आलोक धन्वा

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh, Chapter 2, 'Patang' by Alok Dhanwa, offers an in-depth analysis of the poem. It focuses on understanding the poet's portrayal of the post-monsoon season, the symbolic representation of kites as childhood dreams and freedom, and the inherent bravery of children. The solutions clarify various poetic devices, particularly visual and auditory imagery, and explain the relationship between children and the delicate, fleeting nature of kites. This resource aids students in comprehending the poem's deeper meanings and appreciating its artistic expression.

Learning outcomes

  • Understand the poet's depiction of seasonal changes after monsoon.
  • Analyze the symbolism of the kite in representing childhood dreams and freedom.
  • Identify and explain different types of imagery (bimb) used in the poem.
  • Explore the relationship between children's innocence and their fearless nature.
  • Interpret the significance of specific phrases and metaphors used by the poet.

Topics covered

Paper topics

  • Seasonal changes after monsoon
  • Symbolism of the kite
  • Childhood innocence and fearlessness
  • Poetic imagery (Bimb)
  • Auditory imagery
  • Visual imagery
  • Tactile imagery
  • Metaphor and Simile
  • Themes of freedom and dreams
  • Nature's connection with human emotions

Important topics

  • Symbolism of the kite
  • Analysis of poetic imagery (Bimb)
  • Children's relationship with nature
  • Themes of freedom and dreams
  • Interpretation of key phrases

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

'सबसे तेज़ बौछारें गयीं, भादो गया' के बाद प्रकृति में जो परिवर्तन कवि ने दिखाया है, उसका वर्णन अपने शब्दों में करें।
Solution: कवि आलोक धन्वा 'पतंग' कविता में बताते हैं कि भादो मास की घनघोर बारिश समाप्त हो जाने के बाद प्रकृति में एक सुखद परिवर्तन आता है। सबसे तेज बौछारें थम जाती हैं और भादो का महीना बीत जाता है। इसके बाद शरद ऋतु का आगमन होता है। इस ऋतु में खरगोश की लाल आँखों के समान चमकीली धूप निकल आती है, जिससे चारों ओर एक उज्ज्वल चमक फैल जाती है। आकाश साफ और निर्मल हो जाता है, और हवाओं में एक मनमोहक सुगंधित महक घुल जाती है। इस प्रकार, प्रकृति में एक उत्साहपूर्ण और उमंग भरा वातावरण बन जाता है, जो पतंग उड़ाने के लिए उपयुक्त होता है।

प्रश्न 2

सोचकर बताएँ कि पतंग के लिए 'सबसे हलकी और रंगीन चीज़', 'सबसे पतला कागज़', 'सबसे पतली कमानी' जैसे विशेषणों का प्रयोग क्यों किया है?
Solution: कवि ने पतंग के लिए 'सबसे हलकी और रंगीन चीज़', 'सबसे पतला कागज़', 'सबसे पतली कमानी' जैसे विशेषणों का प्रयोग कई उद्देश्यों से किया है। पहला, इन विशेषणों के माध्यम से कवि पतंग के साकार और नाजुक रूप को पाठक के मन में स्पष्ट रूप से चित्रित करना चाहते हैं। दूसरा, ये विशेषण पाठक के मन में पतंग के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करते हैं, क्योंकि विशेष और आकर्षक वस्तुएँ स्वाभाविक रूप से ध्यान आकर्षित करती हैं। तीसरा, यह पतंग की उड़ान के लिए आवश्यक उसकी हल्की और नाजुक बनावट को भी उजागर करता है, जो बच्चों के सपनों और उनकी उड़ान के प्रतीक के रूप में कार्य करती है।

प्रश्न 3

बिंब स्पष्ट करें:

सबसे तेज़ बौछारें गयीं भादो गया

सवेरा हुआ

खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा

शरद आया पुलों को पार करते हुए

अपनी नयी चमकीली साइकिल तेज़ चलाते हुए

घंटी बजाते हुए ज़ोर ज़ोर से

चमकीले इशारों से बुलाते हुए और

आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए

कि पतंग ऊपर उठ सके।

Solution: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने विभिन्न प्रकार के बिंबों का प्रयोग किया है, जो पाठक को एक सजीव अनुभव प्रदान करते हैं:
  • 'सबसे तेज़ बौछारें गयीं' - यह गतिशील दृश्य बिंब है, जो बारिश की तीव्रता और उसके समाप्त होने की क्रिया को दर्शाता है।
  • 'भादो गया' - यह भी एक दृश्य बिंब है, जो समय के बीतने का बोध कराता है।
  • 'सवेरा हुआ' - यह एक स्थिर दृश्य बिंब है, जो दिन के आरंभ का चित्रण करता है।
  • 'खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा' - यह एक उपमा युक्त दृश्य बिंब है, जो सवेरे की लालिमा को खरगोश की आँखों से तुलना करके अत्यंत स्पष्ट और सजीव बनाता है।
  • 'शरद आया पुलों को पार करते हुए' - यह गतिशील दृश्य बिंब है, जो शरद ऋतु के आगमन की गति को दर्शाता है।
  • 'अपनी नयी चमकीली साइकिल तेज़ चलाते हुए' - यह भी एक गतिशील दृश्य बिंब है, जो शरद के आगमन की चंचलता और नवीनता को चित्रित करता है।
  • 'घंटी बजाते हुए ज़ोर ज़ोर से' - यह श्रव्य बिंब है, जो घंटी की आवाज को सुनकर पाठक के कानों में ध्वनि का अनुभव कराता है।
  • 'चमकीले इशारों से बुलाते हुए' - यह गतिशील दृश्य बिंब है, जो शरद के आगमन के आकर्षक और आमंत्रण भरे संकेतों को दर्शाता है।
  • 'आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए' - यह स्पर्श बिंब है, जो आकाश की कोमलता का अनुभव कराता है, जिससे पतंग आसानी से उड़ सके।
  • 'पतंग ऊपर उठ सके' - यह एक स्थिर दृश्य बिंब है, जो पतंग के उड़ने की अंतिम क्रिया और उसके लिए आवश्यक वातावरण का बोध कराता है।

प्रश्न 4

जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास। कपास के बारे में सोचें कि कपास से बच्चों का क्या संबंध बन सकता है।
Solution: कविता में 'कपास' का उल्लेख बच्चों के कोमल, मुलायम और हल्के स्वभाव को दर्शाने के लिए किया गया है। बच्चों के पैर कपास की तरह ही अत्यंत कोमल, नाजुक और हल्के होते हैं। इसी कोमलता और हल्केपन के कारण वे पूरे दिन उछल-कूद करते रहते हैं और उन्हें दौड़ने-भागने में कोई कठिनाई नहीं होती। जब वे पतंग उड़ाने की धुन में इतने मगन हो जाते हैं कि छत के किनारों पर दौड़ते रहते हैं, तब भी उनके कपास जैसे कोमल तलवे उन्हें जमीन की कठोरता का एहसास नहीं होने देते। इस प्रकार, कपास बच्चों की कोमलता, निर्दोषता और चंचलता का प्रतीक है।

प्रश्न 5

पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं। बच्चों का उड़ान से कैसा संबंध बनता है?
Solution: 'पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं' - इस पंक्ति के माध्यम से कवि बच्चों और पतंगों के बीच गहरे संबंध को दर्शाते हैं। जब बच्चे पतंग उड़ाते हैं, तो वे केवल पतंग को ही नहीं उड़ाते, बल्कि वे स्वयं भी उस पतंग के साथ उड़ने का अनुभव करते हैं। उनका मन उत्साह, उमंग और कल्पनाओं में खो जाता है, मानो वे स्वयं पतंग बनकर ऊँची उड़ान भर रहे हों। वे छतों पर डोलते हुए, हवा में लहराते हुए, किसी भी खतरे से बेखबर होकर अपने सपनों को पंख लगा देते हैं। यह उड़ान शारीरिक रूप से छतों पर दौड़ने और मानसिक रूप से कल्पनाओं की ऊँचाइयों को छूने, दोनों का प्रतीक है।

प्रश्न 6 (क)

निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़ कर प्रश्नों का उत्तर दीजिए।

छतों को भी नरम बनाते हुए

दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए

प्रश्न: दिशाओं को मृदंग की तरह बजाने का क्या तात्पर्य है?

Solution: 'दिशाओं को मृदंग की तरह बजाने' का तात्पर्य बच्चों के अत्यधिक उत्साह, उमंग और कोलाहल से है। जब बच्चे पतंग उड़ाते हैं, तो वे खुशी से चिल्लाते हैं, दौड़ते हैं और खेलते हैं। उनकी यह चंचलता और शोर इतना अधिक होता है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो वे चारों दिशाओं में मृदंग (एक प्रकार का वाद्य यंत्र जो तेज ध्वनि उत्पन्न करता है) बजा रहे हों। यह पंक्ति बच्चों की जीवंतता, ऊर्जा और उनके द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले आनंदमय वातावरण का चित्रण करती है।

प्रश्न 6 (ख)

निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़ कर प्रश्नों का उत्तर दीजिए।

अगर वे कभी गिरते हैं छतों के खतरनाक किनारों से और बच जाते हैं तब तो और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं।

प्रश्न: बच्चों के गिरने और फिर भी निडर होने का क्या आशय है?

Solution: इस पंक्ति का आशय बच्चों की अदम्य साहस और जीवन के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण से है। बच्चे पतंग उड़ाते समय अक्सर छतों के खतरनाक किनारों पर दौड़ते हैं और कभी-कभी गिर भी जाते हैं। लेकिन, यदि वे गिरने के बाद भी बच जाते हैं, तो वे डरने या सहमने के बजाय और भी अधिक निडर और साहसी बन जाते हैं। वे इस अनुभव से सीखते हैं और भविष्य में और भी अधिक आत्मविश्वास के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित होते हैं। 'सुनहले सूरज के सामने आना' उनके नए उत्साह और जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण का प्रतीक है।

Common mistakes

  • Misinterpreting the symbolism of the kite.
  • Difficulty in identifying and explaining different types of imagery.
  • Overlooking the connection between nature's changes and children's emotions.
  • Failing to grasp the deeper meaning behind phrases like 'दिशाओं को मृदंग की तरह बजाना'.

Revision tips

  • Read the poem multiple times to feel the rhythm and imagery.
  • Focus on understanding the symbolism of the kite and its connection to childhood.
  • Pay close attention to the explanations of different types of 'bimb' (imagery).
  • Practice rewriting the answers in your own words to ensure comprehension.
  • Discuss the poem's themes with classmates to gain different perspectives.

Practice MCQs

Q1. भादो मास के बाद प्रकृति में कैसा परिवर्तन आता है, जैसा कि कविता में वर्णित है?

Q2. कवि ने पतंग के लिए 'सबसे पतला कागज़' जैसे विशेषणों का प्रयोग क्यों किया है?

Q3. कविता में 'खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा' किस बिंब का उदाहरण है?

Q4. बच्चों के पैर कपास की तरह नरम और हल्के क्यों कहे गए हैं?

Q5. 'दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए' पंक्ति का क्या अर्थ है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 12 के हिंदी आरोह (पाठ 2: पतंग) के लिए हैं।

कविता 'पतंग' में कवि आलोक धन्वा क्या दर्शाना चाहते हैं?

कवि बच्चों की उड़ान, उनके उत्साह, प्रकृति के बदलते रूप और बचपन की कोमलता व निडरता को दर्शाना चाहते हैं।

कविता में 'बिंब' का क्या महत्व है?

बिंब कविता में दृश्य, श्रव्य, स्पर्श आदि इंद्रिय-अनुभवों को जीवंत करते हैं, जिससे पाठक कविता के भावों को गहराई से महसूस कर पाता है।

बच्चों के गिरने और फिर निडर होने का क्या तात्पर्य है?

यह बच्चों की शारीरिक और मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है। वे गिरने के बाद भी डरते नहीं, बल्कि और अधिक साहसी होकर अपने सपनों की ओर बढ़ते हैं।

ये समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान कविता की गहरी समझ, महत्वपूर्ण विषयों की पहचान और प्रश्नों के विस्तृत उत्तर लिखने का तरीका प्रदान करके परीक्षा की तैयारी में सहायता करते हैं।

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