कक्षा 12 हिंदी आरोह पाठ 3: कुंवर नारायण NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 के हिंदी आरोह पुस्तक के पाठ 3, 'कुंवर नारायण' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें कविताओं के केंद्रीय भावों, जैसे कि 'सब घर एक कर देना', 'उड़ने' और 'खिलने' का कविता से संबंध, कविता और बच्चों के बीच समानताएं, 'बिना मुरझाए महकने' का अर्थ, और 'भाषा को सहूलियत' से बरतने के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई है। समाधान यह भी स्पष्ट करते हैं कि कैसे भाषा के अत्यधिक अलंकरण के कारण 'सीधी बात भी टेढ़ी हो सकती है'। अंत में, यह पाठ बात और भाषा से जुड़े मुहावरों के प्रयोग और मिलान पर भी प्रकाश डालता है। ये समाधान छात्रों को कविता के गहन अर्थों को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectआरोह
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter3. कुंवर नारायण

Chapter summary

कक्षा 12 हिंदी आरोह के पाठ 3 के ये NCERT समाधान कवि कुंवर नारायण की कविताओं के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करते हैं। इनमें कविता के विस्तार, कल्पना की उड़ान, बच्चों की सहजता और कविता की शाश्वतता जैसे विषयों पर गहन विश्लेषण शामिल है। समाधान भाषा के प्रयोग की सरलता और प्रभावशीलता पर भी जोर देते हैं, यह समझाते हुए कि कैसे शब्दों का सही चुनाव 'सीधी बात' को भी स्पष्ट या जटिल बना सकता है। पाठ में दिए गए मुहावरों का मिलान और प्रयोग छात्रों को भाषा की बारीकियों को समझने में सहायता करता है।

Learning outcomes

  • कविता के व्यापक अर्थ को समझना, जिसमें 'सब घर एक कर देना' शामिल है।
  • कविता में 'उड़ने' और 'खिलने' की प्रतीकात्मकता का विश्लेषण करना।
  • कविता और बच्चों के बीच समानताएं स्थापित करना।
  • कविता की स्थायित्व और 'बिना मुरझाए महकने' के भाव को समझना।
  • भाषा के सहज और सटीक प्रयोग के महत्व को पहचानना।
  • भाषा के अत्यधिक प्रयोग से 'सीधी बात' के टेढ़ी होने की प्रक्रिया को समझना।
  • बात और भाषा से संबंधित मुहावरों का अर्थ और प्रयोग सीखना।

Topics covered

Paper topics

  • कविता का भावार्थ
  • बच्चों और कविता की समानता
  • कल्पना की उड़ान
  • फूल का खिलना और कविता का महकना
  • भाषा का सहज प्रयोग
  • बात और भाषा का संबंध
  • सीधी बात का टेढ़ी होना
  • मुहावरों का प्रयोग
  • बिंब और मुहावरों का मिलान
  • कुंवर नारायण की कविताएँ

Important topics

  • सब घर एक कर देने का माने
  • कविता और बच्चे का संबंध
  • भाषा को सहूलियत से बरतना
  • सीधी बात का टेढ़ी हो जाना
  • बिना मुरझाए महकने का अर्थ

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

इस कविता के बहाने बताएँ कि 'सब घर एक कर देने के माने' क्या है?
Solution: 'सब घर एक कर देने के माने' का आशय है कि जिस प्रकार बच्चे खेलते समय अपनी सीमाओं, अपने-परायों के भेद को भूल जाते हैं और एक-दूसरे के घरों में बिना किसी रोक-टोक के आते-जाते रहते हैं, उसी प्रकार कविता का क्षेत्र भी बहुत व्यापक होता है। कविता को किसी विशेष वर्ग, सीमा या बंधन में नहीं बाँधा जा सकता। कवि को भी अपने-पराये का भेद भुलाकर, लोक कल्याण की भावना से प्रेरित होकर कविता रचनी चाहिए, ताकि वह सभी के दिलों को छू सके।

प्रश्न 2

'उड़ने' और 'खिलने' का कविता से क्या संबंध बनता है?
Solution: कविता में 'उड़ने' का संबंध कवि की कल्पना की उड़ान से है, जो किसी भी सीमा में बँधी नहीं होती और बहुत ऊँचाई तक जा सकती है, जैसा कि कहा गया है - 'जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि'। यह पक्षी की उड़ान के समान है जो ऊँचाई मापती है। इसी प्रकार, 'खिलने' का संबंध कविता के प्रभाव से है। जैसे फूल खिलकर अपनी सुगंध और सौंदर्य से वातावरण को आनंदित करता है और नवजीवन देता है, वैसे ही कविता भी सदैव ताज़ी और खिली हुई रहकर पाठकों को भावों और विचारों का आनंद प्रदान करती है तथा उनमें नई स्फूर्ति और ऊर्जा का संचार करती है।

प्रश्न 3

कविता और बच्चे को समानांतर रखने के क्या कारण हो सकते हैं?
Solution: कविता और बच्चे को समानांतर रखने के कई कारण हैं। दोनों ही अपने स्वभाव से चंचल और खेलते हुए प्रतीत होते हैं। खेल-खेल में बच्चे अपनी सीमाओं और अपने-परायों के भेद को भूल जाते हैं। इसी तरह, कविता भी अपनी सहजता में ऐसी बात कह जाती है जो पाठक को गहराई से प्रभावित करती है, और कभी-कभी तो वह इतनी चंचल होती है कि उसे समझना मुश्किल हो जाता है, ठीक वैसे ही जैसे एक शरारती बच्चा हाथ से फिसल जाता है। दोनों ही अपनी सहजता और खेल-खेल में कही गई बातों से आनंदित करते हैं।

प्रश्न 4

कविता के संदर्भ में 'बिना मुरझाए महकने के माने' क्या होते हैं?
Solution: 'बिना मुरझाए महकने के माने' कविता की शाश्वतता और उसके चिरस्थायी प्रभाव से जुड़ा है। फूल कुछ समय बाद मुरझा जाते हैं और अपनी सुंदरता खो देते हैं, लेकिन एक अच्छी कविता कालजयी होती है। उसका मूल्य और प्रभाव समय के साथ कम नहीं होता। जब भी उसे पढ़ा जाता है, वह पाठकों को उसी प्रकार आनंद और ताजगी देती है, जैसे वह पहली बार लिखी गई थी। सूरदास और तुलसीदास जैसे कवियों की रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक और आनंददायक हैं, जितनी वे सदियों पहले थीं।

प्रश्न 5

'भाषा को सहूलियत' से बरतने से क्या अभिप्राय है?
Solution: 'भाषा को सहूलियत से बरतने' का अर्थ है भाषा का प्रयोग अत्यंत सरलता, सहजता और सटीकता के साथ करना। इसका मतलब है कि कवि या लेखक को अपनी बात कहने के लिए ऐसे शब्दों का चयन करना चाहिए जो सीधे श्रोता या पाठक के मन तक पहुँचें और भाव के अनुसार सबसे उपयुक्त हों। जो व्यक्ति अपनी बात को कहने के लिए सही और सरल भाषा का प्रयोग करता है, वही अपनी बात का सच्चा धनी माना जाता है।

प्रश्न 6

बात और भाषा परस्पर जुड़े होते हैं, किंतु कभी-कभी भाषा के चक्कर में 'सीधी बात भी टेढ़ी हो जाती है' कैसे?
Solution: बात (कथ्य) और भाषा (अभिव्यक्ति का माध्यम) एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं। हालाँकि, कभी-कभी लेखक या कवि अपनी बात को अधिक प्रभावशाली या कलात्मक बनाने के प्रयास में भाषा को अत्यधिक अलंकृत कर देते हैं या ऐसे शब्दों का चयन करते हैं जो सामान्य पाठक के लिए समझना कठिन हो। इस प्रक्रिया में, वे अपनी मूल बात को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने के बजाय शब्दों के जाल में उलझ जाते हैं। परिणामस्वरूप, जो बात सीधी और सरल तरीके से कही जा सकती थी, वह भाषा की जटिलता के कारण टेढ़ी या अस्पष्ट हो जाती है, जिससे श्रोता या पाठक भ्रमित हो जाते हैं।

प्रश्न 7

बात के कथ्य के लिए नीचे दी गई विशेषताओं का उचित बिंबों/मुहावरों से मिलान करें।

बिंब / मुहावरा | विशेषता

बात की चूड़ी मर जाना | कथ्य और भाषा का सही सामंजस्य बनना

बात के पेंच खोलना | बात का पकड़ में न आना

बात का शरारती बच्चे की तरह खेलना | बात का प्रभावहीन हो जाना

पेंच को कील की तरह ठोंक देना | बात में कसावट का न होना

बात का बन जाना | बात को सहज और स्पष्ट करना

Solution: यहाँ बात के कथ्य की विशेषताओं का उचित बिंबों/मुहावरों से मिलान दिया गया है:

बिंब / मुहावरा | विशेषता

बात की चूड़ी मर जाना | बात का प्रभावहीन हो जाना

बात के पेंच खोलना | बात को सहज और स्पष्ट करना

बात का शरारती बच्चे की तरह खेलना | बात का पकड़ में न आना

पेंच को कील की तरह ठोंक देना | बात में कसावट का होना

बात का बन जाना | कथ्य और भाषा का सही सामंजस्य बनना

प्रश्न 8

बात से जुड़े कई मुहावरे प्रचलित हैं। कुछ मुहावरों का प्रयोग करते हुए लिखें।
Solution: 'बात' से जुड़े कुछ प्रचलित मुहावरे और उनके प्रयोग इस प्रकार हैं:
  1. बात काटना: बीच में ही किसी की बात को रोक देना।

    उदाहरण: जब मैं अपनी बात कह रहा था, उसने बीच में ही मेरी बात काट दी।

  2. बात बढ़ाना: किसी छोटे से मामले को अनावश्यक रूप से गंभीर बना देना।

    उदाहरण: छोटी सी बात को लेकर आपस में बात बढ़ाना ठीक नहीं है।

  3. बात पक्की होना: किसी निर्णय पर पहुँचना या रिश्ता तय होना।

    उदाहरण: आखिरकार दोनों परिवारों की उपस्थिति में उनकी शादी की बात पक्की हो गई।

  4. बात बिगड़ना: किसी स्थिति का खराब हो जाना या अनबन हो जाना।

    उदाहरण: जरा सी कहा-सुनी में हमारी सारी बात बिगड़ गई।

  5. बात रखना: किसी की कही बात का मान रखना या वचन पूरा करना।

    उदाहरण: उसने मेरी बात रखी और समय पर काम पूरा कर दिया।

Common mistakes

  • कविता के प्रतीकों और बिंबों के गहरे अर्थ को सतही तौर पर समझना।
  • भाषा के अलंकरण और उसकी सहजता के बीच के अंतर को न समझ पाना।
  • मुहावरों के शाब्दिक अर्थ पर अटक जाना, उनके लाक्षणिक प्रयोग को न समझना।
  • कविता और बच्चों के बीच की समानताओं को केवल बाहरी तौर पर देखना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को कविता के मूल भाव से जोड़कर पढ़ें।
  • भाषा के प्रयोग से संबंधित प्रश्नों पर विशेष ध्यान दें, जैसे 'सहूलियत' और 'टेढ़ी बात'।
  • दिए गए मुहावरों और बिंबों के अर्थ को याद करें और वाक्यों में प्रयोग का अभ्यास करें।
  • कविता और बच्चों के बीच की समानताओं को अपने शब्दों में व्यक्त करने का प्रयास करें।

Practice MCQs

Q1. कविता के संदर्भ में 'सब घर एक कर देने' का क्या अर्थ है?

Q2. कवि की उड़ान की तुलना किससे की गई है?

Q3. फूल के खिलने और कविता के 'महकने' में क्या समानता है?

Q4. कविता और बच्चे को समानांतर रखने का मुख्य कारण क्या है?

Q5. 'भाषा को सहूलियत से बरतने' का क्या अर्थ है?

Q6. भाषा के चक्कर में 'सीधी बात भी टेढ़ी' क्यों हो जाती है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 हिंदी आरोह पाठ 3 के NCERT समाधान किस कवि पर केंद्रित हैं?

ये समाधान कवि कुंवर नारायण की कविताओं पर केंद्रित हैं, जो पाठ 3 में शामिल हैं।

इन समाधानों में कविता के किन मुख्य भावों को समझाया गया है?

इनमें 'सब घर एक कर देना', 'उड़ने' और 'खिलने' का कविता से संबंध, कविता और बच्चों की समानता, 'बिना मुरझाए महकने' का अर्थ, और भाषा के सहज प्रयोग जैसे भावों को समझाया गया है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में सहायक हैं?

हाँ, ये समाधान कविता के गहन अर्थों को समझने, भाषा की बारीकियों को पहचानने और मुहावरों के प्रयोग को सीखने में मदद करके परीक्षा की तैयारी को बेहतर बनाते हैं।

'भाषा को सहूलियत से बरतने' का क्या तात्पर्य है?

इसका तात्पर्य है कि भाषा का प्रयोग सीधा, सरल और सटीक होना चाहिए, जो भावों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करे।

भाषा के चक्कर में 'सीधी बात भी टेढ़ी' कैसे हो जाती है?

जब लेखक या कवि अपनी बात को अधिक अलंकृत या जटिल बनाने के प्रयास में शब्दों के जाल में उलझ जाते हैं, तो मूल और सीधी बात भी अस्पष्ट या टेढ़ी हो जाती है।

पाठ में दिए गए मुहावरों का क्या महत्व है?

पाठ में दिए गए मुहावरे 'बात' से जुड़े हैं और उनके प्रयोग से छात्रों को भाषा की अभिव्यक्ति क्षमता और लाक्षणिक अर्थों को समझने में मदद मिलती है।

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