कक्षा 12 भौतिकी NCERT समाधान: अध्याय 9 - किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

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यह पृष्ठ कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 9, 'किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें अवतल और उत्तल दर्पणों से संबंधित प्रश्नों को हल किया गया है, जिसमें प्रतिबिम्ब बनने की स्थिति, प्रकृति और आकार का विश्लेषण शामिल है। साथ ही, अपवर्तन के सिद्धांतों का उपयोग करके जल और अन्य द्रवों के अपवर्तनांक की गणना और सूक्ष्मदर्शी द्वारा मापी गई आभासी गहराई से संबंधित समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत किया गया है। स्नेल के नियम का उपयोग करके विभिन्न माध्यमों में प्रकाश के अपवर्तन कोणों की गणना भी समझाई गई है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने और अभ्यास करने में मदद करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectभौतिकी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter9. किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

Chapter summary

अध्याय 9, 'किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र' के ये NCERT समाधान, दर्पण सूत्र, आवर्धन और अपवर्तन के नियमों पर केंद्रित हैं। इसमें अवतल और उत्तल दर्पणों द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण, विभिन्न माध्यमों में अपवर्तनांक की गणना, और सूक्ष्मदर्शी के उपयोग से संबंधित अभ्यास प्रश्न शामिल हैं। समाधानों में प्रत्येक चरण को स्पष्ट किया गया है, जिससे छात्रों को इन प्रकाशिकी सिद्धांतों को समझने में सहायता मिलती है।

Learning outcomes

  • अवतल और उत्तल दर्पणों के लिए दर्पण सूत्र और आवर्धन सूत्र का उपयोग करके प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति और आकार ज्ञात करना।
  • अपवर्तन के नियमों और स्नेल के नियम का उपयोग करके विभिन्न माध्यमों के अपवर्तनांक की गणना करना।
  • आभासी गहराई और वास्तविक गहराई के बीच संबंध को समझना और अपवर्तनांक ज्ञात करने के लिए इसका उपयोग करना।
  • प्रकाशिक यंत्रों में प्रकाश के व्यवहार का विश्लेषण करना।

Topics covered

Paper topics

  • अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण
  • उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण
  • दर्पण सूत्र
  • दर्पण का आवर्धन
  • अपवर्तन का नियम
  • स्नेल का नियम
  • अपवर्तनांक
  • आभासी गहराई
  • वास्तविक गहराई
  • प्रकाशिक यंत्र

Important topics

  • दर्पण सूत्र और आवर्धन
  • अवतल और उत्तल दर्पणों के अनुप्रयोग
  • स्नेल का नियम और अपवर्तनांक की गणना
  • आभासी और वास्तविक गहराई का अंतर

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

2.5 cm साइज़ की कोई छोटी मोमबत्ती 36 cm वक्रता त्रिज्या के किसी अवतल दर्पण से 27 cm दूरी पर रखी है। दर्पण से किसी परदे को कितनी दूरी पर रखा जाए कि उसका सुस्पष्ट प्रतिबिम्ब परदे पर बने। प्रतिबिम्ब की प्रकृति और साइज़ का वर्णन कीजिए। यदि मोमबत्ती को दर्पण की ओर ले जाएँ, तो परदे को किस ओर हटाना पड़ेगा?
Solution:

दिया गया है:

मोमबत्ती का साइज़ (वस्तु की ऊँचाई), \(O = 2.5\) सेमी।

अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या, \(|r| = 36\) सेमी।

अतः, अवतल दर्पण की फोकस दूरी, \(|f| = \frac{|r|}{2} = \frac{36}{2} = 18\) सेमी।

चिह्न परिपाटी के अनुसार, अवतल दर्पण के लिए फोकस दूरी ऋणात्मक होती है, इसलिए \(f = -18\) सेमी।

मोमबत्ती की दर्पण से दूरी (वस्तु की दूरी), \(u = -27\) सेमी (क्योंकि यह दर्पण के सामने रखी है)।

दर्पण सूत्र का उपयोग करके प्रतिबिम्ब की दूरी (v) ज्ञात करते हैं:

\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}

\frac{1}{v} = \frac{1}{f} - \frac{1}{u} = \frac{1}{-18} - \frac{1}{(-27)}

\frac{1}{v} = \frac{-1}{18} + \frac{1}{27} = \frac{-3 + 2}{54} = \frac{-1}{54}

\therefore v = -54\text{ सेमी}

चूंकि v ऋणात्मक है, प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने 54 सेमी की दूरी पर बनेगा। अतः, सुस्पष्ट प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए परदे को दर्पण से 54 सेमी की दूरी पर रखना होगा।

प्रतिबिम्ब का साइज़ (ऊँचाई) ज्ञात करने के लिए आवर्धन सूत्र का उपयोग करते हैं:

\nI = -\left(\frac{v}{u}\right) \times O

\nI = -\left(\frac{-54\text{ सेमी}}{-27\text{ सेमी}}\right) \times 2.5\text{ सेमी}

\nI = -(2) \times 2.5\text{ सेमी} = -5.0\text{ सेमी}

प्रतिबिम्ब की ऊँचाई ऋणात्मक है, जिसका अर्थ है कि प्रतिबिम्ब उल्टा है। इसका साइज़ 5.0 सेमी है। अतः, प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा और 5.0 सेमी ऊँचा है।

मोमबत्ती को दर्पण की ओर ले जाने पर:

जब मोमबत्ती को दर्पण के पास (27 सेमी से 18 सेमी की ओर) ले जाया जाता है, तो प्रतिबिम्ब दर्पण से दूर (54 सेमी से अनंत की ओर) खिसकता है। इसलिए, परदे को दर्पण से दूर हटाना पड़ेगा। यदि मोमबत्ती को फोकस दूरी (18 सेमी) से कम दूरी पर रखा जाता है, तो प्रतिबिम्ब आभासी और दर्पण के पीछे बनेगा, जिसे परदे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 2

4.5 cm साइज़ की कोई सुई 15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से 12 cm दूर रखी है। प्रतिबिम्ब की स्थिति तथा आवर्धन लिखिए। क्या होता है जब सुई को दर्पण से दूर ले जाते हैं? वर्णन कीजिए।
Solution:

दिया गया है:

सुई का साइज़ (वस्तु की ऊँचाई), \(O = 4.5\) सेमी।

उत्तल दर्पण की फोकस दूरी, \(f = +15\) सेमी (उत्तल दर्पण के लिए फोकस दूरी धनात्मक होती है)।

सुई की दर्पण से दूरी (वस्तु की दूरी), \(u = -12\) सेमी (वस्तु हमेशा दर्पण के सामने रखी जाती है)।

दर्पण सूत्र का उपयोग करके प्रतिबिम्ब की दूरी (v) ज्ञात करते हैं:

\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}

\frac{1}{v} = \frac{1}{f} - \frac{1}{u} = \frac{1}{15} - \frac{1}{(-12)}

\frac{1}{v} = \frac{1}{15} + \frac{1}{12} = \frac{4 + 5}{60} = \frac{9}{60} = \frac{3}{20}

\therefore v = \frac{20}{3}\text{ सेमी} \approx 6.67\text{ सेमी}

चूंकि v धनात्मक है, प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे 6.67 सेमी की दूरी पर बनेगा।

आवर्धन (m) ज्ञात करते हैं:

\nm = -\left(\frac{v}{u}\right)

\nm = -\left(\frac{20/3\text{ सेमी}}{-12\text{ सेमी}}\right) = -\left(\frac{20}{3 \times -12}\right) = -\left(\frac{20}{-36}\right) = \frac{20}{36} = \frac{5}{9} \approx 0.56

आवर्धन धनात्मक है, जिसका अर्थ है कि प्रतिबिम्ब सीधा है। इसका मान 1 से कम है, जिसका अर्थ है कि प्रतिबिम्ब वस्तु से छोटा है।

प्रतिबिम्ब का साइज़ (ऊँचाई) ज्ञात करते हैं:

\nI = m \times O = \frac{5}{9} \times 4.5\text{ सेमी} = \frac{5}{9} \times \frac{9}{2}\text{ सेमी} = \frac{5}{2}\text{ सेमी} = 2.5\text{ सेमी}

अतः, प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे 6.67 सेमी की दूरी पर, सीधा, आभासी और 2.5 सेमी ऊँचा बनेगा।

जब सुई को दर्पण से दूर ले जाते हैं:

जब सुई को उत्तल दर्पण से दूर ले जाया जाता है (अर्थात, u का ऋणात्मक मान बढ़ता है), तो प्रतिबिम्ब दर्पण के करीब (v का धनात्मक मान घटता है) और फोकस की ओर खिसकता है। साथ ही, प्रतिबिम्ब का आकार भी घटता जाता है।

प्रश्न 3

कोई टैंक 12.5 cm ऊँचाई तक जल से भरा है। किसी सूक्ष्मदर्शी द्वारा बीकर की तली पर पड़ी किसी सुई की आभासी गहराई 9.4 cm मापी जाती है। जल का अपवर्तनांक क्या है? बीकर में उसी ऊँचाई तक जल के स्थान पर किसी 1.63 अपवर्तनांक के अन्य द्रव से प्रतिस्थापन करने पर सुई को पुनः फोकसित करने के लिए सूक्ष्मदर्शी को कितना ऊपर/नीचे ले जाना होगा?
Solution:

दिया गया है:

जल की वास्तविक गहराई, \(h = 12.5\) सेमी।

जल में सुई की आभासी गहराई, \(h' = 9.4\) सेमी।

अपवर्तन के कारण आभासी गहराई का सूत्र है:

\text{अपवर्तनांक } (n) = \frac{\text{वास्तविक गहराई}}{\text{आभासी गहराई}} = \frac{h}{h'}

जल का अपवर्तनांक ज्ञात करने के लिए, हम दिए गए मानों को सूत्र में रखते हैं:

\nn_{\text{जल}} = \frac{12.5\text{ सेमी}}{9.4\text{ सेमी}} \approx 1.3297 \approx 1.33

अतः, जल का अपवर्तनांक लगभग 1.33 है।

अब, बीकर में जल के स्थान पर 1.63 अपवर्तनांक वाले अन्य द्रव को भरा जाता है।

द्रव का अपवर्तनांक, \(n_{\text{द्रव}} = 1.63\)।

वास्तविक गहराई वही रहती है, \(h = 12.5\) सेमी।

इस द्रव में सुई की नई आभासी गहराई (\(h''\)) ज्ञात करते हैं:

\nn_{\text{द्रव}} = \frac{h}{h''}

\nh'' = \frac{h}{n_{\text{द्रव}}} = \frac{12.5\text{ सेमी}}{1.63} \approx 7.6687\text{ सेमी} \approx 7.7\text{ सेमी}

पहले सूक्ष्मदर्शी 9.4 सेमी की आभासी गहराई पर फोकसित था। अब नई आभासी गहराई 7.7 सेमी है। इसका मतलब है कि सुई अब सतह के करीब दिखाई देगी। सुई को पुनः फोकसित करने के लिए, सूक्ष्मदर्शी को ऊपर ले जाना होगा।

सूक्ष्मदर्शी को ऊपर ले जाने की दूरी = पुरानी आभासी गहराई - नई आभासी गहराई

\text{विस्थापन} = h' - h'' = 9.4\text{ सेमी} - 7.7\text{ सेमी} = 1.7\text{ सेमी}

अतः, सुई को पुनः फोकसित करने के लिए सूक्ष्मदर्शी को 1.7 सेमी ऊपर ले जाना होगा।

प्रश्न 4

चित्र 9.1 (a) तथा (b) में किसी आपतित किरण का अपवर्तन दर्शाया गया है जो वायु में क्रमशः काँच-वायु तथा जल-वायु अन्तरापृष्ठ के अभिलम्ब से 60° का कोण बनाती है। उस आपतित किरण का अपवर्तन कोण ज्ञात कीजिए, जो जल में जल-काँच अन्तरापृष्ठ के अभिलम्ब से 45° का कोण बनाती है [चित्र 9.1(c)]।

चित्र 9.1 (a)

चित्र 9.1 (b)

चित्र 9.1 (c)

चित्र 9.1

Solution:

हम स्नेल के नियम का उपयोग करेंगे, जो कहता है कि दो माध्यमों के बीच अन्तरापृष्ठ पर आपतन कोण की ज्या (sine) और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात दूसरे माध्यम के पहले माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक के बराबर होता है। गणितीय रूप से,

\frac{\sin i}{\sin r} = {^1n_2}

, जहाँ \(i\) आपतन कोण है और \(r\) अपवर्तन कोण है।

चित्र 9.1 (a) से:

यह काँच-वायु अन्तरापृष्ठ को दर्शाता है। आपतन कोण \(i = 60^\circ\) (वायु से काँच में)।

अपवर्तन कोण \(r = 35^\circ\) (काँच से वायु में)।

स्नेल के नियम से, वायु के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक (\(a n_g\)) है:

a n_g = \frac{\sin i}{\sin r} = \frac{\sin 60^\circ}{\sin 35^\circ}

\na n_g = \frac{0.8660}{0.5736} \approx 1.51

चित्र 9.1 (b) से:

यह जल-वायु अन्तरापृष्ठ को दर्शाता है। आपतन कोण \(i = 60^\circ\) (वायु से जल में)।

अपवर्तन कोण \(r = 41^\circ\) (जल से वायु में)।

स्नेल के नियम से, वायु के सापेक्ष जल का अपवर्तनांक (\(a n_w\)) है:

a n_w = \frac{\sin i}{\sin r} = \frac{\sin 60^\circ}{\sin 41^\circ}

\na n_w = \frac{0.8660}{0.6561} \approx 1.32

चित्र 9.1 (c) के लिए:

हमें जल-काँच अन्तरापृष्ठ पर अपवर्तन कोण ज्ञात करना है। यहाँ आपतित किरण जल से काँच में जा रही है।

आपतन कोण \(i = 45^\circ\) (जल से काँच में)।

हमें जल के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक (\(w n_g\)) ज्ञात करना होगा।

हम जानते हैं कि

w n_g = \frac{a n_g}{a n_w}

\nw n_g = \frac{1.51}{1.32} \approx 1.144

अब, स्नेल के नियम का उपयोग करके जल-काँच अन्तरापृष्ठ पर अपवर्तन कोण (\(r\)) ज्ञात करते हैं:

w n_g = \frac{\sin i}{\sin r}

1.144 = \frac{\sin 45^\circ}{\sin r}

\sin r = \frac{\sin 45^\circ}{1.144} = \frac{0.7071}{1.144}

\sin r \approx 0.6181

\nr = \sin^{-1}(0.6181) \approx 38.18^\circ

अतः, जल में जल-काँच अन्तरापृष्ठ पर अपवर्तन कोण लगभग \(38.2^\circ\) होगा।

Common mistakes

  • चिह्न परिपाटी (sign convention) को सही ढंग से लागू न करना, विशेषकर फोकस दूरी और वस्तु दूरी के लिए।
  • दर्पण सूत्र और अपवर्तन सूत्रों को गलत तरीके से लिखना या लागू करना।
  • आवर्धन की गणना में ऋणात्मक चिह्न के महत्व को न समझना, जो प्रतिबिम्ब की प्रकृति (सीधा या उल्टा) को दर्शाता है।
  • दशमलव स्थानों या इकाइयों की गणना में त्रुटियाँ करना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के लिए उपयोग किए गए सूत्र को स्पष्ट रूप से लिखें और चिह्नों की परिपाटी का ध्यान रखें।
  • प्रतिबिम्ब की प्रकृति (वास्तविक/आभासी, सीधा/उल्टा) और आकार में परिवर्तन को समझने के लिए वस्तु की स्थिति बदलने के प्रभाव का विश्लेषण करें।
  • अपवर्तन से संबंधित प्रश्नों में स्नेल के नियम के अनुप्रयोग को समझें और विभिन्न माध्यमों के अपवर्तनांक की गणना का अभ्यास करें।
  • सूक्ष्मदर्शी से संबंधित प्रश्नों में वास्तविक और आभासी गहराई के बीच संबंध को याद रखें।

Practice MCQs

Q1. एक अवतल दर्पण के लिए, यदि वस्तु की दूरी फोकस दूरी से दोगुनी हो, तो प्रतिबिम्ब कहाँ बनेगा?

Q2. उत्तल दर्पण द्वारा बनने वाला प्रतिबिम्ब हमेशा कैसा होता है?

Q3. जल का अपवर्तनांक लगभग कितना होता है?

Q4. स्नेल के नियम के अनुसार, आपतन कोण की ज्या (sine) और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात क्या होता है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 9 में कौन से मुख्य प्रकाशिक यंत्रों का अध्ययन किया जाता है?

अध्याय 9 मुख्य रूप से दर्पणों (अवतल और उत्तल) पर केंद्रित है, जो प्रकाशिक यंत्रों के मूल सिद्धांत हैं। इसमें सूक्ष्मदर्शी जैसे उपकरणों के संदर्भ में अपवर्तन का भी अध्ययन किया जाता है।

दर्पण सूत्र क्या है और इसका उपयोग क्यों किया जाता है?

दर्पण सूत्र \(\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}\) है, जो दर्पण की फोकस दूरी (f), वस्तु की दूरी (u), और प्रतिबिम्ब की दूरी (v) के बीच संबंध बताता है। इसका उपयोग किसी दिए गए दर्पण के लिए प्रतिबिम्ब की स्थिति ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

आवर्धन (magnification) क्या दर्शाता है?

आवर्धन (m) प्रतिबिम्ब के आकार और वस्तु के आकार का अनुपात है (\(m = \frac{I}{O}\)) और यह प्रतिबिम्ब की दूरी और वस्तु की दूरी के अनुपात से भी संबंधित है (\(m = -\frac{v}{u}\))। यह बताता है कि प्रतिबिम्ब वस्तु से कितना बड़ा या छोटा है और सीधा है या उल्टा।

अपवर्तनांक (refractive index) का क्या अर्थ है?

अपवर्तनांक किसी माध्यम का वह गुण है जो बताता है कि प्रकाश उस माध्यम में कितनी तेजी से यात्रा करता है। यह निर्वात में प्रकाश की गति और उस माध्यम में प्रकाश की गति का अनुपात होता है। उच्च अपवर्तनांक का मतलब है कि प्रकाश धीमा चलता है।

इन NCERT समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे करें?

इन समाधानों का उपयोग करके, आप प्रत्येक प्रश्न के हल को चरण-दर-चरण समझ सकते हैं, महत्वपूर्ण सूत्रों और अवधारणाओं को याद कर सकते हैं, और सामान्य गलतियों से बच सकते हैं। अभ्यास के लिए यह एक उत्कृष्ट संसाधन है।

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