कक्षा 12 भौतिकी NCERT समाधान: अध्याय 8 - वैधुत चुंबकीय तरंग

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यह पृष्ठ कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 'वैद्युत चुंबकीय तरंग' के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें संधारित्रों से संबंधित प्रश्नों को हल किया गया है, जिसमें चालन धारा, विस्थापन धारा, प्लेटों के बीच विभवान्तर परिवर्तन की दर और चुंबकीय क्षेत्र का आयाम ज्ञात करना शामिल है। समाधानों में संधारित्र की धारिता की गणना, किरचॉफ के नियम की प्रयोज्यता और विद्युत चुम्बकीय तरंगों के गुणों पर जोर दिया गया है। यह सामग्री छात्रों को इन महत्वपूर्ण अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करती है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectभौतिकी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter8. वैधुत चुंबकीय तरंग

Chapter summary

कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 8 'वैद्युत चुंबकीय तरंग' के लिए NCERT समाधानों का यह संग्रह संधारित्रों के व्यवहार और विद्युत चुम्बकीय तरंगों के निर्माण पर केंद्रित है। इसमें चालन धारा, विस्थापन धारा, और प्लेटों के बीच विभवान्तर परिवर्तन की दर जैसी गणनाएँ शामिल हैं। समाधान यह भी स्पष्ट करते हैं कि किरचॉफ का नियम संधारित्रों पर कैसे लागू होता है और विस्थापन धारा चालन धारा के बराबर क्यों होती है।

Learning outcomes

  • संधारित्र की धारिता की गणना करना सीखें।
  • चालन धारा और विस्थापन धारा के बीच संबंध को समझें।
  • प्लेटों के बीच विभवान्तर परिवर्तन की दर की गणना करें।
  • किरचॉफ के नियमों की प्रयोज्यता का विश्लेषण करें।
  • विद्युत चुम्बकीय तरंगों से संबंधित परिमाणों का परिकलन करें।

Topics covered

Paper topics

  • संधारित्र की धारिता
  • चालन धारा
  • विस्थापन धारा
  • विभवान्तर परिवर्तन की दर
  • किरचॉफ का प्रथम नियम
  • विद्युत चुम्बकीय तरंगें
  • समांतर प्लेट संधारित्र
  • आवेशकारी धारा
  • चुंबकीय क्षेत्र का आयाम
  • RMS मान

Important topics

  • चालन धारा और विस्थापन धारा की समानता
  • संधारित्र की धारिता की गणना
  • विभवान्तर परिवर्तन की दर का परिकलन
  • किरचॉफ के नियम का अनुप्रयोग
  • विद्युत चुम्बकीय तरंगों के गुण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

चित्र में एक संघारित्र दर्शाया गया है जो 12 cm त्रिज्या की दो वृत्ताकार प्लेटों को 5.0 cm की दूरी पर रखकर बनाया गया है। संघारित्र को एक बाह्य स्रोत (जो चित्र में नहीं दर्शाया गया है) द्वारा आवेशित किया जा रहा है। आवेशकारी धारा नियत है और इसका मान 0.15 A है।
  1. धारिता एवं प्लेटों के बीच विभवान्तर परिवर्तन की दर का परिकलन कीजिए।
  2. प्लेटों के बीच विस्थापन धारा ज्ञात कीजिए।
  3. क्या किरचॉफ का प्रथम नियम संघारित्र की प्रत्येक प्लेट पर लागू होता है? स्पष्ट कीजिए।
Solution:

दिए गए मान हैं:

  • प्लेट की त्रिज्या, r = 12 \text{ cm} = 12 \times 10^{-2} \text{ m}
  • दो वृत्तीय प्लेटों के बीच की दूरी, d = 5 \text{ cm} = 5 \times 10^{-2} \text{ m}
  • आवेशकारी धारा, I = 0.15 \text{ A}

1. धारिता (C) एवं विभवान्तर परिवर्तन की दर (dV/dt) का परिकलन:

एक समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता का सूत्र है:

C = \frac{\varepsilon_0 A}{d}

जहाँ A प्लेटों का क्षेत्रफल है। वृत्ताकार प्लेटों के लिए, A = \pi r^2

इसलिए, धारिता की गणना इस प्रकार की जाती है:

C = \frac{8.854 \times 10^{-12} \times 3.14 \times (12 \times 10^{-2})^2}{5 \times 10^{-2}}

C = \frac{8.854 \times 3.14 \times 144 \times 10^{-12-4+2}}{5}

C = \frac{3619.1 \times 10^{-14}}{5} \approx 723.8 \times 10^{-14} \text{ F}

C \approx 7.24 \times 10^{-12} \text{ F} = 7.24 \text{ pF}

संधारित्र की प्लेटों पर आवेश q = CV होता है। आवेश के परिवर्तन की दर \frac{dq}{dt} = C \cdot \frac{dV}{dt} होती है।

चूंकि आवेशकारी धारा I = \frac{dq}{dt} है, इसलिए:

I = C \cdot \frac{dV}{dt}

अतः, विभवान्तर परिवर्तन की दर है:

\frac{dV}{dt} = \frac{I}{C} = \frac{0.15}{7.24 \times 10^{-12}} \approx 0.0207 \times 10^{12} \text{ V/s}

\frac{dV}{dt} \approx 2.07 \times 10^{10} \text{ V/s}

इस प्रकार, धारिता लगभग 7.24 \text{ pF} है और विभवान्तर परिवर्तन की दर लगभग 2.07 \times 10^{10} \text{ V/s} है।

2. प्लेटों के बीच विस्थापन धारा:

किसी संधारित्र में, विस्थापन धारा (I_d) चालन धारा (I_c) के बराबर होती है, जब तक कि कोई रिसाव न हो। इसलिए, प्लेटों के बीच विस्थापन धारा आवेशकारी धारा के बराबर होगी।

I_d = I = 0.15 \text{ A}

3. किरचॉफ के प्रथम नियम की प्रयोज्यता:

हाँ, किरचॉफ का प्रथम नियम संधारित्र की प्रत्येक प्लेट पर लागू होता है। यद्यपि प्लेटों के बीच कोई चालन धारा नहीं बहती है, लेकिन समय के साथ बदलते विद्युत फ्लक्स के कारण एक विस्थापन धारा उत्पन्न होती है। किरचॉफ का प्रथम नियम कुल धारा (चालन धारा + विस्थापन धारा) के योग पर आधारित है, और इस प्रकार यह संधारित्र परिपथों के लिए भी मान्य है।

प्रश्न 2

एक समांतर प्लेट संधारित्र (चित्र में) R = 6.0 \, \text{cm} त्रिज्या की दो वृत्ताकार प्लेटों से बना है और इसकी धारिता C = 100 \text{ pF} है। संघारित्र को 230 V, 300 rad/s की (कोणीय) आवृत्ति के किसी स्रोत से जोड़ा गया है।
  1. चालन धारा का rms मान क्या है?
  2. क्या चालन धारा विस्थापन धारा के बराबर है?
  3. प्लेटों के बीच, अक्ष से 3.0\,\mathrm{cm} की दूरी पर स्थित बिन्दु पर B का आयाम ज्ञात कीजिए।
Solution:

दिए गए मान हैं:

  • प्लेटों की त्रिज्या, R = 6 \text{ cm} = 6 \times 10^{-2} \text{ m}
  • संधारित्र की धारिता, C = 100 \text{ pF} = 100 \times 10^{-12} \text{ F} = 10^{-10} \text{ F}
  • संधारित्र का वोल्टेज (rms), V_{\text{rms}} = 230 \text{ V}
  • कोणीय आवृत्ति, \omega = 300 \text{ rad/s}

1. चालन धारा का rms मान:

संधारित्र के लिए प्रतिघात (reactance) X_C की गणना निम्न सूत्र से की जाती है:

X_C = \frac{1}{\omega C}

X_C = \frac{1}{300 \times 10^{-10}} = \frac{10^{10}}{300} \,\Omega

धारा का rms मान I_{\text{rms}} ओम के नियम से प्राप्त होता है:

I_{\text{rms}} = \frac{V_{\text{rms}}}{X_C}

I_{\text{rms}} = \frac{230}{\frac{10^{10}}{300}} = \frac{230 \times 300}{10^{10}} = \frac{69000}{10^{10}}

I_{\text{rms}} = 69 \times 10^{-7} \text{ A} = 6.9 \times 10^{-6} \text{ A}

अतः, चालन धारा का rms मान 6.9 \,\mu\text{A} है।

2. चालन धारा और विस्थापन धारा की तुलना:

हाँ, चालन धारा विस्थापन धारा के बराबर होती है। विस्थापन धारा की परिभाषा के अनुसार:

I_d = \varepsilon_0 \frac{d\phi_E}{dt}

जहाँ \phi_E = EA विद्युत फ्लक्स है। यदि E समय के साथ बदलता है, तो I_d शून्य नहीं होगा।

एक समांतर प्लेट संधारित्र के लिए, प्लेटों पर आवेश Q और विद्युत क्षेत्र E = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} = \frac{Q}{\varepsilon_0 A} होता है।

इसलिए, विस्थापन धारा:

I_d = \varepsilon_0 A \frac{dE}{dt} = \varepsilon_0 A \frac{d}{dt} \left( \frac{Q}{\varepsilon_0 A} \right) = \varepsilon_0 A \cdot \frac{1}{\varepsilon_0 A} \cdot \frac{dQ}{dt} = \frac{dQ}{dt}

चूंकि I = \frac{dQ}{dt} चालन धारा है, इसलिए I_d = I

3. बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र (B) का आयाम ज्ञात करना:

यह प्रश्न प्लेटों के बीच चुंबकीय क्षेत्र के आयाम की गणना करने के लिए कहता है। हालांकि प्रश्न में सीधे तौर पर सूत्र नहीं दिया गया है, हम जानते हैं कि संधारित्र की प्लेटों के बीच विस्थापन धारा एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। एक समान्तर प्लेट संधारित्र के अंदर, अक्ष से r दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र का आयाम (यदि r < R) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है:

B = \frac{\mu_0 I_d}{2 \pi R^2} r

जहाँ I_d विस्थापन धारा है, R प्लेट की त्रिज्या है, और r अक्ष से दूरी है।

दिए गए मानों के अनुसार:

  • I_d = I_{\text{rms}} = 6.9 \times 10^{-6} \text{ A} (यह मानते हुए कि चालन धारा और विस्थापन धारा का rms मान समान है)
  • R = 6 \text{ cm} = 6 \times 10^{-2} \text{ m}
  • r = 3.0 \text{ cm} = 3.0 \times 10^{-2} \text{ m}
  • \mu_0 = 4 \pi \times 10^{-7} \text{ T m/A}

मानों को सूत्र में रखने पर:

B = \frac{(4 \pi \times 10^{-7}) \times (6.9 \times 10^{-6})}{2 \pi (6 \times 10^{-2})^2} \times (3.0 \times 10^{-2})

B = \frac{2 \times 10^{-7} \times 6.9 \times 10^{-6}}{(36 \times 10^{-4})} \times (3.0 \times 10^{-2})

B = \frac{13.8 \times 10^{-13}}{36 \times 10^{-4}} \times (3.0 \times 10^{-2})

B = 0.383 \times 10^{-9} \times (3.0 \times 10^{-2})

B = 1.15 \times 10^{-11} \text{ T}

अतः, अक्ष से 3.0 \,\mathrm{cm} की दूरी पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का आयाम 1.15 \times 10^{-11} \text{ T} है।

Common mistakes

  • चालन धारा और विस्थापन धारा के बीच अंतर करने में भ्रमित होना।
  • संधारित्र की धारिता की गणना में इकाइयों (जैसे pF, m) को गलत तरीके से संभालना।
  • किरचॉफ के नियमों को संधारित्र परिपथों पर लागू करते समय त्रुटियाँ करना।
  • विद्युत चुम्बकीय तरंगों से संबंधित सूत्रों का गलत अनुप्रयोग।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के समाधान में दिए गए सूत्रों को ध्यान से समझें।
  • संधारित्रों से संबंधित गणनाओं का अभ्यास करें, विशेषकर धारिता और धारा के लिए।
  • चालन धारा और विस्थापन धारा के बीच समानता और अंतर को स्पष्ट करें।
  • किरचॉफ के नियमों के अनुप्रयोग की सीमाओं को समझें।

Practice MCQs

Q1. एक समांतर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के बीच विस्थापन धारा का मान किसके बराबर होता है?

Q2. यदि किसी संधारित्र को आवेशित किया जा रहा है, तो प्लेटों के बीच विभवान्तर परिवर्तन की दर किस पर निर्भर करती है?

Q3. किरचॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम) संधारित्र की प्लेटों पर क्यों लागू होता है?

Q4. एक संधारित्र की धारिता (C) और प्लेटों के बीच विभवान्तर (V) के लिए, आवेश (q) का परिवर्तन दर (dq/dt) किसके बराबर है?

Frequently asked questions

वैद्युत चुंबकीय तरंग अध्याय में संधारित्र से संबंधित मुख्य अवधारणाएँ क्या हैं?

इस अध्याय में संधारित्रों की धारिता की गणना, आवेशकारी धारा के कारण प्लेटों के बीच विभवान्तर परिवर्तन की दर, चालन धारा और विस्थापन धारा के बीच संबंध, और किरचॉफ के नियम का अनुप्रयोग जैसी अवधारणाएँ शामिल हैं।

चालन धारा और विस्थापन धारा में क्या अंतर है?

चालन धारा मुक्त इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह के कारण होती है, जबकि विस्थापन धारा समय के साथ बदलते विद्युत फ्लक्स के कारण उत्पन्न होती है। विद्युत चुम्बकीय तरंगों के निर्माण में दोनों महत्वपूर्ण हैं।

क्या किरचॉफ का प्रथम नियम संधारित्र की प्लेटों पर लागू होता है?

हाँ, किरचॉफ का प्रथम नियम संधारित्र की प्रत्येक प्लेट पर लागू होता है क्योंकि विस्थापन धारा को चालन धारा के बराबर माना जाता है, जिससे परिपथ में कुल धारा का योग शून्य बना रहता है।

ये NCERT समाधान कक्षा 12 के छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत, चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों को हल करने का आत्मविश्वास मिलता है।

विस्थापन धारा की गणना का क्या महत्व है?

विस्थापन धारा मैक्सवेल के समीकरणों को पूर्ण करती है और यह दर्शाती है कि समय के साथ बदलता हुआ विद्युत क्षेत्र एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न कर सकता है, जो विद्युत चुम्बकीय तरंगों के अस्तित्व का आधार है।

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