कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: भारतीय राजनीति - नए बदलाव NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 के लिए स्वतंत्र भारत में राजनीति - II पुस्तक के अध्याय 9, 'भारतीय राजनीति: नए बदलाव' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें 1989 के बाद भारतीय राजनीति में आए प्रमुख बदलावों, जैसे कि गठबंधन सरकारों का उदय, मंडल मुद्दे का प्रभाव, आर्थिक सुधारों का असर और राष्ट्रवाद तथा धर्मनिरपेक्षता पर बहस जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधान छात्रों को इन जटिल राजनीतिक घटनाओं को समझने, विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बदलते समीकरणों का विश्लेषण करने और विचारधारा-आधारित गठबंधनों की प्रकृति पर विचार करने में मदद करते हैं। यह विस्तृत व्याख्या परीक्षा की तैयारी और भारतीय राजनीतिक परिदृश्य की गहरी समझ के लिए एक मूल्यवान संसाधन है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | स्वतंत्र भारत में राजनीति - II |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 9. भारतीय राजनीति - नये बदलाव |
Chapter summary
अध्याय 9 'भारतीय राजनीति: नए बदलाव' के ये NCERT समाधान 1989 के बाद भारतीय राजनीति में हुए महत्वपूर्ण परिवर्तनों का विश्लेषण करते हैं। इसमें कांग्रेस की प्रमुखता में कमी, गठबंधन सरकारों का युग, मंडल आयोग की सिफारिशों का प्रभाव, आर्थिक उदारीकरण की नीतियां और अयोध्या मुद्दे जैसे प्रमुख राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की गई है। समाधान छात्रों को इन घटनाओं के कारणों, परिणामों और भारतीय राजनीति पर उनके प्रभाव को समझने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- 1989 के बाद भारतीय राजनीति में हुए प्रमुख बदलावों को समझना।
- गठबंधन की राजनीति के उदय और उसके कारणों का विश्लेषण करना।
- मंडल मुद्दे और आर्थिक सुधारों के राजनीतिक प्रभाव को पहचानना।
- राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता से संबंधित बहसों को समझना।
- राजनीतिक दलों के बीच बदलते गठबंधनों और विचारधाराओं का मूल्यांकन करना।
Topics covered
Paper topics
- 1989 के बाद भारतीय राजनीति
- गठबंधन सरकारों का उदय
- कांग्रेस की प्रमुखता में कमी
- मंडल आयोग और पिछड़ा वर्ग
- आर्थिक सुधार और नई आर्थिक नीति
- भाजपा का उदय और हिंदुत्व की राजनीति
- बाबरी मस्जिद विध्वंस
- राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता
- क्षेत्रीय दलों की भूमिका
- राजनीतिक दलों के बीच बदलते समीकरण
- विचारधारा और अवसरवादिता
Important topics
- गठबंधन की राजनीति का नया दौर
- मंडल मुद्दे का प्रभाव
- 1990 के बाद की आर्थिक नीतियां
- बाबरी मस्जिद विध्वंस और उसके परिणाम
- विचारधारा बनाम अवसरवादिता
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
अखबार की कतरनों को कालानुक्रमिक क्रम में इस प्रकार व्यवस्थित किया जा सकता है:
- (ग) इंदिरा गाँधी की हत्या: यह घटना 1984 में हुई थी।
- (क) जनता दल का गठन: जनता दल का गठन 1988 में हुआ था।
- (ख) बाबरी मस्जिद का विध्वंस: यह घटना दिसंबर 1992 में हुई थी।
- (घ) राजग (NDA) सरकार का गठन: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार पहली बार 1998 में बनी।
- (च) गोधरा की दुर्घटना और उसके परिणाम: गोधरा की घटना फरवरी 2002 में हुई, जिसके बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे हुए।
- (ङ) संप्रग (UPA) सरकार का गठन: संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की सरकार पहली बार 2004 में बनी।
इस प्रकार, घटनाओं का सही कालानुक्रम है: इंदिरा गाँधी की हत्या (1984), जनता दल का गठन (1988), बाबरी मस्जिद का विध्वंस (1992), राजग सरकार का गठन (1998), गोधरा की दुर्घटना (2002), और संप्रग सरकार का गठन (2004)।
प्रश्न 2
कॉलम अ:
- (क) सर्वानुमति की राजनीति
- (ख) जाति आधारित दल
- (ग) पर्सनल लॉ और लैंगिक न्याय
- (घ) क्षेत्रीय पार्टियों की बढ़ती ताकत
कॉलम ब:
- (i) शाहबानो मामला
- (ii) अन्य पिछड़ा वर्ग का उभार
- (iii) आर्थिक नीतियों पर सहमति
- (iv) गठबंधन सरकार
निम्नलिखित का सही मेल इस प्रकार है:
- (क) सर्वानुमति की राजनीति का मेल (iii) आर्थिक नीतियों पर सहमति से है। 1990 के दशक के बाद विभिन्न दलों ने आर्थिक सुधारों को स्वीकार किया, जिससे एक प्रकार की सर्वानुमति बनी।
- (ख) जाति आधारित दल का मेल (ii) अन्य पिछड़ा वर्ग का उभार से है। मंडल आयोग की सिफारिशों के बाद पिछड़े वर्गों की राजनीति का उभार हुआ और जाति आधारित दलों का महत्व बढ़ा।
- (ग) पर्सनल लॉ और लैंगिक न्याय का मेल (i) शाहबानो मामला से है। शाहबानो मामला व्यक्तिगत कानूनों और लैंगिक न्याय से संबंधित एक महत्वपूर्ण न्यायिक और राजनीतिक घटना थी।
- (घ) क्षेत्रीय पार्टियों की बढ़ती ताकत का मेल (iv) गठबंधन सरकार से है। क्षेत्रीय पार्टियों के बढ़ते प्रभाव ने राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन सरकारों के गठन को आवश्यक बना दिया।
प्रश्न 3
1989 के बाद की अवधि में भारतीय राजनीति के मुख्य मुद्दे और उनसे राजनीतिक दलों के आपसी जुड़ाव के रूप निम्नलिखित रहे हैं:
- कांग्रेस की प्रमुखता में कमी और अस्थिरता: 1989 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी। सरकारों का बनना और गिरना जारी रहा, जिसके कारण 1991 में मध्यावधि चुनाव हुए। कांग्रेस की घटती प्रमुखता ने राष्ट्रीय दलों के बीच आपसी जुड़ाव को बढ़ावा दिया, जिससे विभिन्न मोर्चे और गठबंधन बने, हालांकि कांग्रेस द्वारा समर्थन वापस लेने या दलों में एकता के अभाव के कारण ये अक्सर अस्थिर रहे।
- मंडल मुद्दे का उदय: मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने से देश की राजनीति में पिछड़े वर्गों के आरक्षण का मुद्दा प्रमुख हो गया। इस मुद्दे ने वोटों की राजनीति को जन्म दिया और अधिकांश राजनीतिक दलों को पिछड़े वर्गों के आरक्षण के पक्ष में या विरोध में अपना रुख स्पष्ट करना पड़ा, जिससे दलों के बीच इस मुद्दे पर जुड़ाव या ध्रुवीकरण हुआ।
- आर्थिक नीतियों में बदलाव: 1990 के बाद से भारत ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नई आर्थिक नीतियों को अपनाया। इन सुधारों के कारण देश के कई दक्षिणपंथी, राष्ट्रवादी और क्षेत्रीय दलों के बीच वैचारिक निकटता बढ़ी और वे परस्पर जुड़ने लगे। इस संदर्भ में, कुछ दल गैर-कांग्रेसी गठबंधनों के समर्थक बने, जबकि अन्य गैर-भाजपा गठबंधनों के।
- अयोध्या मुद्दा और राष्ट्रवाद: दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस की घटना ने भारतीय राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता पर बहस को तेज कर दिया। इस घटना का संबंध भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उदय और हिंदुत्व की राजनीति से था, जिसने देश की राजनीतिक विचारधाराओं को प्रभावित किया और दलों के बीच नए समीकरण बनाए।
इन मुद्दों के कारण राजनीतिक दलों के बीच आपसी जुड़ाव के रूप में अवसरवादिता, विचारधारा-आधारित गठबंधन (कभी-कभी), और सत्ता के लिए विभिन्न समूहों का एक साथ आना प्रमुख रहा।
प्रश्न 4
इस कथन के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं कि गठबंधन की राजनीति के नए दौर में राजनीतिक दल विचारधारा को आधार मानकर गठजोड़ नहीं करते हैं:
- ऐतिहासिक उदाहरण (जनता पार्टी, 1977): 1977 में बनी जनता पार्टी, जिसमें कांग्रेस विरोधी लगभग सभी दल (जैसे भारतीय जनसंघ, कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी, भारतीय क्रांति दल, तेलगू देशम, समाजवादी पार्टी, अकाली दल आदि) शामिल थे, एक ही विचारधारा वाले दल नहीं थे। उनका मुख्य उद्देश्य कांग्रेस को सत्ता से हटाना था।
- राष्ट्रीय मोर्चा और कांग्रेस का समर्थन (1989-91): जनता दल के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय मोर्चा सरकार को वामपंथी दलों और भाजपा जैसे वैचारिक रूप से भिन्न दलों का समर्थन प्राप्त था। बाद में, वी.पी. सिंह के प्रधानमंत्री पद से हटने पर, चंद्रशेखर की सरकार को कांग्रेस ने समर्थन दिया, जो कभी इंदिरा गांधी और आपातकाल के कट्टर विरोधी थे। यह दिखाता है कि सत्ता के लिए विचारधारा गौण हो जाती है।
- कांग्रेस का अल्पमत सरकार को समर्थन (1991-96): नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार अल्पमत में होने के बावजूद इसलिए जारी रही क्योंकि अन्य दलों ने 'सांप्रदायिक शक्तियों' को सत्ता में आने से रोकने के लिए बाहर से समर्थन दिया। यह समर्थन भी विचारधारा से अधिक राजनीतिक समीकरणों पर आधारित था।
- राजग (NDA) सरकार का कार्यकाल (1998-2004): अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार को अकाली दल, तृणमूल कांग्रेस, बीजू पटनायक की पार्टी, समता पार्टी, जनता दल आदि जैसे विभिन्न दलों का समर्थन प्राप्त था, जिनकी अपनी अलग-अलग विचारधाराएं थीं। जम्मू-कश्मीर के फारूख अब्दुल्ला जैसे नेता भी वाजपेयी सरकार के समर्थक रहे।
- अवसरवादिता और सत्ता का महत्व: संक्षेप में, राजनीति में कोई स्थायी शत्रु या मित्र नहीं होता। उत्तर प्रदेश में बसपा और भाजपा का मिलकर सरकार बनाना, या महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा का गठबंधन, या राजस्थान में भाजपा का निर्दलीय और छोटे दलों के सहयोग से सरकार चलाना, यह दर्शाता है कि सत्ता प्राप्ति के लिए दल अक्सर अपनी विचारधाराओं से समझौता कर लेते हैं। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि अवसरवादिता गठबंधन राजनीति में एक प्रमुख कारक है।
ये तर्क स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि वर्तमान गठबंधन राजनीति में विचारधारा की तुलना में सत्ता में भागीदारी और राजनीतिक अवसर अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
Common mistakes
- गठबंधन सरकारों के गठन में विचारधारा की भूमिका को कम आंकना।
- मंडल आयोग और आर्थिक सुधारों के दीर्घकालिक प्रभावों को नजरअंदाज करना।
- राजनीतिक घटनाओं के कालक्रम को गलत समझना।
- विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच जटिल संबंधों को सरलता से लेना।
Revision tips
- प्रत्येक घटना के कालक्रम को स्पष्ट रूप से समझें।
- गठबंधन सरकारों के गठन के पीछे के राजनीतिक और वैचारिक कारणों पर ध्यान दें।
- मंडल मुद्दे और आर्थिक सुधारों के प्रभाव को विभिन्न दलों के संदर्भ में विश्लेषित करें।
- राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता से संबंधित बहसों के मुख्य तर्कों को नोट करें।
Practice MCQs
Q1. 1989 के बाद भारतीय राजनीति में किस प्रकार की सरकारों का प्रभुत्व बढ़ा?
Explanation: 1989 के बाद किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण गठबंधन सरकारों का युग शुरू हुआ।
Q2. मंडल आयोग की सिफारिशों का भारतीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
Explanation: मंडल आयोग की सिफारिशों ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया, जिससे भारतीय राजनीति में जातिगत समीकरणों का महत्व बढ़ा।
Q3. 1990 के दशक के बाद अपनाई गई आर्थिक नीतियों का राजनीतिक दलों के बीच जुड़ाव पर क्या असर हुआ?
Explanation: नई आर्थिक नीतियों के कारण विभिन्न दक्षिणपंथी, राष्ट्रवादी और क्षेत्रीय दलों के बीच नए प्रकार के गठबंधन और जुड़ाव सामने आए।
Q4. बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना का भारतीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
Explanation: अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद भारतीय राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता पर बहसें तेज हो गईं, जिसका सीधा संबंध भाजपा के उदय और हिंदुत्व की राजनीति से था।
Q5. गठबंधन की राजनीति के नए दौर में राजनीतिक दल गठजोड़ करते समय किसे प्राथमिकता देते हैं?
Explanation: गठबंधन की राजनीति में अक्सर विचारधारा से अधिक अवसरवादिता और सत्ता में भागीदारी को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे स्थायी शत्रु या मित्र जैसी कोई अवधारणा नहीं रह जाती।
Frequently asked questions
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 9 का मुख्य विषय क्या है?
अध्याय 9 'भारतीय राजनीति: नए बदलाव' 1989 के बाद भारतीय राजनीति में आए प्रमुख परिवर्तनों, जैसे गठबंधन सरकारों के उदय, मंडल मुद्दे, आर्थिक सुधारों और राष्ट्रवाद-धर्मनिरपेक्षता से संबंधित बहसों पर केंद्रित है।
1989 के बाद भारतीय राजनीति में गठबंधन सरकारों का महत्व क्यों बढ़ा?
1989 के आम चुनाव के बाद किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिससे विभिन्न दलों को मिलकर सरकारें बनानी पड़ीं। इस प्रकार गठबंधन की राजनीति का युग शुरू हुआ।
मंडल आयोग की सिफारिशों का भारतीय राजनीति पर क्या असर हुआ?
मंडल आयोग की सिफारिशों ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया, जिसने भारतीय राजनीति में जातिगत समीकरणों और पिछड़े वर्गों की भूमिका को महत्वपूर्ण बना दिया।
क्या गठबंधन की राजनीति में विचारधारा महत्वपूर्ण है?
अध्याय के अनुसार, गठबंधन की राजनीति के नए दौर में अक्सर दल विचारधारा को आधार मानने के बजाय सत्ता प्राप्ति और अवसरवादिता को अधिक महत्व देते हैं।
ये NCERT समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?
ये समाधान अध्याय के मुख्य विषयों की विस्तृत व्याख्या प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता मिलती है।
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